भाषा और विचार का संबंध मनोविज्ञान एवं शिक्षाशास्त्र का एक मूलभूत प्रश्न है – क्या विचार के बिना भाषा संभव है? क्या भाषा विचार को निर्धारित करती है, या विचार भाषा को? CTET में इस अध्याय से भाषा विकास के चरण, भाषा अर्जन के सिद्धांत, द्विभाषिकता, एवं कक्षा में भाषा की भूमिका से प्रश्न पूछे जाते हैं।
भाग 1: भाषा की परिभाषा एवं विशेषताएँ
भाषा क्या है?
भाषा प्रतीकों (symbols) की एक व्यवस्थित प्रणाली है, जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचारों, भावनाओं एवं अनुभवों को दूसरों तक संप्रेषित (communicate) करता है।
प्रमुख परिभाषाएँ
विचारक
परिभाषा
सपिर (Sapir)
“भाषा मनुष्य की विचारों, भावनाओं और इच्छाओं को स्वेच्छिक प्रतीकों द्वारा अभिव्यक्त करने की एक विशुद्ध मानवीय एवं अर्जित विधि है।”
ब्लूमफील्ड (Bloomfield)
“भाषा एक ऐसी प्रणाली है जिसमें वाक्-अंगों द्वारा उत्पन्न ध्वनियाँ संकेतों का कार्य करती हैं।”
चॉम्स्की (Chomsky)
“भाषा वाक्यों की एक अनंत संख्या उत्पन्न करने की क्षमता है – यह सृजनात्मक (creative) होती है।”
भाषा की मुख्य विशेषताएँ
प्रतीकात्मक (Symbolic) – शब्द वस्तुओं/विचारों के प्रतीक होते हैं (जैसे ‘कुर्सी’ शब्द वास्तविक कुर्सी का प्रतीक)।
व्यवस्थित (Systematic) – व्याकरण के नियमों द्वारा संचालित (शब्दों को व्यवस्थित क्रम में रखना)।
अर्जित (Learned) – भाषा जन्मजात नहीं, समाज में रहकर सीखी जाती है (हालाँकि इसकी क्षमता सहज होती है – चॉम्स्की)।
सृजनात्मक (Creative) – सीमित शब्दों एवं नियमों से अनंत नए वाक्य बनाए जा सकते हैं।
सांस्कृतिक हस्तांतरण का माध्यम – संस्कृति, परंपरा, ज्ञान एक पीढ़ी से दूसरी तक भाषा से ही पहुँचता है।
गतिशील एवं परिवर्तनशील – समय के साथ भाषा बदलती है (नए शब्द जुड़ते हैं, पुराने लुप्त होते हैं)।
भाग 2: भाषा एवं विचार के बीच संबंध
यह मनोविज्ञान का एक प्राचीन एवं चर्चित प्रश्न है – क्या बिना भाषा के विचार संभव है? तीन प्रमुख दृष्टिकोण:
मूल बात: विचार भाषा से पहले आता है। बच्चा पहले संज्ञानात्मक रूप से दुनिया को समझता है (स्कीमा, आत्मसातीकरण), फिर भाषा उस समझ को अभिव्यक्त करने का एक साधन बनती है।
उदाहरण: 2 वर्ष का बच्चा “मम्मी, पानी” कहता है – उसके पास संज्ञानात्मक अवधारणा (पानी और माँ) पहले है, शब्द बाद में आते हैं।
पियाजे के अनुसार: पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (2-7 वर्ष) में बच्चा अहंकेन्द्रित भाषा (egocentric speech) बोलता है – वह अपने विचारों को ज़ोर से बोलता है, श्रोता की आवश्यकता नहीं। यह भाषा विचार का अनुसरण करती है, विचार को निर्देशित नहीं।
मूल बात: भाषा एवं विचार परस्पर प्रभाव डालते हैं, अलग-अलग विकसित होते हैं फिर विलीन हो जाते हैं। भाषा केवल विचार को अभिव्यक्त नहीं करती, बल्कि उसे आकार भी देती है।
वायगोत्स्की के तीन चरण:
पूर्व-भाषिक विचार (Pre-linguistic thought) – शिशु सोचता है, लेकिन कोई भाषा नहीं (इन्द्रियाँ, स्मृति, क्रियाएँ)।
पूर्व-बौद्धिक भाषा (Pre-intellectual speech) – बच्चा शब्द बोलता है (मामा, पापा) किंतु कोई वास्तविक विचार संलग्न नहीं।
आंतरिक भाषा (Inner speech) – लगभग 7 वर्ष में भाषा और विचार विलीन होकर आंतरिक भाषा बन जाती है – यही वह है जिससे हम चुपचाप सोचते हैं।
वायगोत्स्की का अहंकेन्द्रित भाषा पर दृष्टिकोण (पियाजे से भिन्न): अहंकेन्द्रित भाषा अहंकेंद्रित नहीं है; यह सामाजिक भाषा से आंतरिक भाषा का संक्रमण चरण है। बच्चा ज़ोर से बोलता है स्वयं को निर्देश देने के लिए (self-regulation)।
तुलना: पियाजे बनाम वायगोत्स्की (भाषा-विचार पर)
पहलू
पियाजे
वायगोत्स्की
भाषा और विचार का संबंध
विचार → भाषा (विचार पहले विकसित होता है)
भाषा ↔ विचार (अंतःक्रिया, विलय)
अहंकेन्द्रित भाषा
अपरिपक्वता का लक्षण; गायब हो जाती है
आंतरिक भाषा का संक्रमण चरण; उपयोगी
भाषा का कार्य
अभिव्यक्ति एवं सामाजिक संपर्क
सोच को आकार देना, स्व-नियमन
शिक्षा में भूमिका
बच्चे के विकासात्मक चरण के अनुसार भाषा का उपयोग
समीपस्थ विकास क्षेत्र (ZPD) में वयस्क/साथी के साथ भाषिक अंतःक्रिया से सीखना
भाग 3: भाषा अर्जन के सिद्धांत (Theories of Language Acquisition)
सिद्धांत
प्रतिपादक
मूल बात
शिक्षा में महत्व
अनुबन्धन सिद्धांत (Behaviourist)
बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner)
भाषा अनुकरण (imitation), पुरस्कार-दण्ड (reinforcement) द्वारा सीखी जाती है। बच्चे वयस्कों की नकल करते हैं, सही उच्चारण पर प्रशंसा मिलती है।
भाषा शिक्षण में ड्रिल, दोहराव, सही उत्तर पर प्रशंसा का उपयोग।
सहजवादी सिद्धांत (Nativist)
नोम चॉम्स्की (Noam Chomsky)
भाषा अर्जन की क्षमता जन्मजात होती है। मस्तिष्क में भाषा अर्जन यंत्र (LAD – Language Acquisition Device) नामक संरचना होती है। बच्चे सार्वभौमिक व्याकरण (Universal Grammar) के आधार पर सीमित भाषिक उद्दीपन से अनंत वाक्य बना लेते हैं।
सभी बच्चे स्वाभाविक रूप से भाषा सीख लेते हैं; शिक्षक का कार्य प्रोत्साहन एवं समृद्ध वातावरण देना।
संज्ञानात्मक सिद्धांत (Cognitive)
पियाजे
भाषा संज्ञानात्मक विकास पर निर्भर। बच्चा पहले अवधारणाएँ (जैसे स्थान, काल, कारण) समझता है, फिर उन्हें भाषा में व्यक्त करता है।
भाषा से पहले ठोस अनुभव (वस्तुएँ, क्रियाएँ) देने चाहिए।