चित्रकार मोर (कहानी) कक्षा 5 हिन्दी

चित्रकार मोर (कहानी) कक्षा 5 हिन्दी - TEACHER'S KNOWLEDGE & STUDENT'S GROWTH

चित्रकार मोर (कहानी) कक्षा 5 हिन्दी

बहुत पहले की बात है। तब सारे के सारे पक्षी सफेद रंग के होते थे। सारे संसार की रंगीनी देखकर उनका मन भी ललचाता था। वे सोचते थे काश हम पक्षी भी फूल पत्ती और रंगीन बादल जैसे रंग-बिरंगे हो जाएँ तो कितना अच्छा हो।

सब पक्षियों ने एक सभा बुलाई और विचार किया। सोचा, चलकर भगवान ब्रह्मा जी से रंग माँगा जाए। सारे पक्षी एकत्र होकर ब्रह्मा जी के पास पहुँचे। ब्रह्मा जी ने पक्षियों की माँग सुनी। उन्हें पक्षियों की माँग सही लगी। बेचारे सब-के-सब पक्षी सफेद हैं। उन्हें रंग मिल जाएँ तो वे भी संसार की रंगीनी में शामिल हो जाएँगे।

आए हुए सब पक्षियों को ब्रह्मा जी ने ध्यान से देखा। उनमें से उन्हें एक पक्षी चुनना था और उसको रंग-रोगन लगाने का अपना यह महत्वपूर्ण काम सौंपना था। आखिर उन्होंने वह पक्षी खोज ही लिया। लंबी पूँछ और ऊँची गरदनवाले पक्षी मोर को उन्होंने अपने इस काम के लिए सर्वथा उपयुक्त समझा।

ब्रह्मा जी ने अपने पास के सब प्रकार के रंग मोर को दे दिए और उसे पक्षियों को रँगने का काम सौंप दिया। मोर अपने भाग्य पर बहुत खुश हुआ। खुश होने के साथ-साथ वह अपने काम के प्रति अत्यंत सजग रहा।

मोर ने सारे जंगल में ढिंढोरा पिटवा दिया कि सब पक्षी अपनी पसंद का रंग लगवाने केलिए मेरे पास आ जाएँ।

थोड़ी ही देर में सब-के-सब पक्षी मोर के आगे कतार बाँधकर खड़े हो गए। मोर ने रंगों की पिटारी खोल दी और एक-एक करके पक्षियों को रँगना प्रारंभ किया। जिस पक्षी को जो रंग पसंद था, मोर ने उसे वही रंग लगाया।

तोते ने पहले तो चोंच में लाल रंग लगवाया, फिर सारे शरीर को हरा रँगवा लिया। उसे

कच्चे आम का रंग बहुत पसंद था। नीलकंठ ने अपने गले को नीले रंग में रँगवाया। बतख को अपना सफेद रंग बहुत पसंद था । फिर भी उसने थोड़ा-सा नारंगी रंग अपनी चोंच और पैरों में लगवा लिया।

इसी प्रकार एक-एक करके सारे पक्षी आते-जाते रहे, मोर उनको मनचाहा रंग लगाता गया ।

मोर दूसरे पक्षियों को तो रँगता जा रहा था लेकिन उनको रँगने से पहले रंग की परख करने के लिए वह अपने शरीर पर भी थोड़ा-सा रंग लगा लिया करता था।

धीरे-धीरे एक-एक करके सब पक्षी अपना शरीर रँगवाकर चले गए। किसी ने थोड़ा-सा रंग लगवाया तो किसी ने बहुत सारा । किसी ने एक रंग तो किसी ने कई रंग लगवाए। जिस पक्षी को जो रंग पसंद आया, उसने वही रंग लगवाया। कुछ पक्षी ऐसे भी थे जिन्हें अपना सफेद रंग ही प्यारा था; इसलिए उन्होंने कहीं पैर में, चोंच में या पीठ में थोड़ा-सा रंग लगवाकर ही संतोष कर लिया।

इधर मोर के पास सारे रंग समाप्त हो चुके थे। रंग समाप्त हो गए हैं, यह देखकर मोर बहुत उदास हो गया। सोचने लगा, “मैं स्वयं क्या बिना रंग का रह जाऊँगा? दूसरों को रँगने के लिए मैंने इतनी मेहनत की, किंतु स्वयं मेरे अपने लिए कोई रंग नहीं बचा। “

इतने में शान्त, गंभीर और चतुर पक्षी, उल्लू वहाँ आया। मोर को उदास देखकर वह बोला

“ओ चितेरे! उदास क्यों है? सब पक्षियों को रँग दिया, अब उदासी क्यों भला?” मोर बोला -” उल्लू भाई! मैं भी कैसा अभागा हूँ। सबको रंग बाँटता रहा, लेकिन मेरे पास अपने लिए तो कोई रंग ही नहीं बचा।”

मोर की बात सुनकर गंभीर स्वभाववाला उल्लू पहले तो खूब हँसा, फिर बोला, “जरा अपना शरीर तो देख, अपने पंखों को देख, फिर उदास होना । “

उल्लू की बात सुनकर मोर ने अपने शरीर को देखा तो खुशी से झूम उठा। उसका शरीर तो उल्लू रंग-बिरंगा, ढेर सारे रंगों की फुलवारी बन गया था।

उसे ध्यान आया- “दूसरे पक्षियों को रँगने से पहले, परखने के लिए, मैं रंग अपने शरीर पर ही तो लगा रहा था। बस, वे सारे रंग मेरे अपने हो गए।”

वह बहुत खुश हुआ। अभी वह अपनी खुशी पूरी तरह से प्रकट भी नहीं कर पाया था कि आसमान पर काले-काले बादल छा गए। देखते-ही-देखते वर्षा होने लगी ।

सारे पक्षी अपना रंग बचाने के लिए वृक्षों, लताओं, घोंसलों में जा छिपे। बेचारा मोर इतना भारी-भरकम शरीर लेकर कहाँ जाता? उसे लगा कि अब तो पानी की बूँदें उसके सारे रंग धो डालेंगी और वह पहले जैसा बेरंग और श्वेत हो जाएगा। किन्तु ब्रह्मा जी ने जो रंग दिए थे, वे क्या इतने कच्चे थे कि वर्षा के पानी से धुल जाते? वे तो पक्के हो चुके थे।

मोर ने देखा पानी की बूँदों का तो उसके शरीर पर, उसके रंगीन पंखों पर कोई असर ही नहीं हो रहा था। बस, फिर क्या था ? खुशी के मारे उसने सारे पंख फैला लिए और वह नाचने लगा। तब से लेकर आज तक मोर जब भी बादलों को देखता है, तब अपने शरीर के सुंदर रंगों को देखकर पंख फैलाकर नाचने लगता है।

अभ्यास के प्रश्न

प्रश्नः1 सारे संसार को रंगीन देखकर पक्षी क्या सोचते थे ?

उत्तर- सारे संसार को रंगीन देखकर पक्षी सोचते थे कि काश हम भी फूलों, पत्तियों और रंगीन बादलों के समान रंग-बिरंगे होते तो कितना अच्छा होता।

प्रश्न 2. पक्षियों ने रंग पाने के लिए क्या प्रयास किया?

उत्तर-पक्षियों ने रंग पाने के लिए एक सभा बुलाई और सोचा, चलकर भगवान ब्रह्माजी से रंग मांगा जाए।

प्रश्न 3. मोर रंग-बिरंगा कैसे हो गया ?

उत्तर- सभी पक्षियों को रंगने के पहले रंग की परख करने के लिए मोर थोड़ा सा रंग अपने शरीर पर लगा लिया करता था। इस प्रकार मोर रंग बिरंगा हो गया।

प्रश्न 4. ब्रह्माजी ने रंग-रोगन के लिए मोर को ही क्यों चुना?

उत्तर- ब्रह्माजी ने रंग-रोगन के लिए मोर को ही इसलिए चुना, क्योंकि उसकी पूँछ लम्बी और ऊँची गर्दन थी। वह हमेशा अपने काम के प्रति सजग रहता था।

प्रश्न 5. मोर की बात सुनकर उल्लू क्यों हँस पड़ा था?

उत्तर- मोर का पूरा शरीर रंग-बिरंगा हो चुका था इसलिए उल्लू मोर की बात सुनकर हँस पड़ा।

प्रश्न 6. मोर के शरीर पर लगा रंग वर्षा के पानी से धुल जाता तो क्या होता ?

उत्तर- मोर के शरीर पर लगा रंग वर्षा के पानी से धुल जाता तो मोर सफेद रंग का होता।

प्रश्न 7. मोर अन्य पक्षियों को रंग लगाते समय अपने शरीर पर रंग लगाकर न देखता तो क्या होता ?

उत्तर- यदि मोर अन्य पक्षियों को रंग लगाते समय अपने शरीर पर रंग लगाकर न देखता तो वह सफेद रंग का होता।

प्रश्न 8 . पर्यावरण संरक्षण में पक्षियों का महत्वपूर्ण योगदान है ?

उत्तर- पर्यावरण संरक्षण में पक्षियों का योगदान

जल संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता:
कुछ पक्षी जल स्रोतों के पास रहकर उनकी रक्षा करते हैं और उनके मल-मूत्र से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।

बीज फैलाव (Seed Dispersal):
पक्षी फलों और अनाज को खाते हैं और उनके बीजों को विभिन्न स्थानों पर गिराते हैं। इससे नए पौधों और जंगलों का विकास होता है।

परागण (Pollination):
कई पक्षी फूलों का रस (Nectar) चूसते हैं और परागकण (Pollen) को एक फूल से दूसरे फूल तक ले जाते हैं, जिससे पौधों में फल और बीज उत्पन्न होते हैं।

कीट नियंत्रण (Pest Control):
गौरैया, कोयल, मैना, उल्लू और कठफोड़वा जैसे पक्षी कीड़े-मकोड़े खाते हैं। इससे फसलों की रक्षा होती है और रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग कम करना पड़ता है।

मृत पशुओं की सफाई (Scavenging):
गिद्ध जैसे पक्षी मृत पशुओं का मांस खाकर वातावरण को स्वच्छ रखते हैं और बीमारियाँ फैलने से रोकते हैं।

जैव विविधता का संरक्षण (Biodiversity Conservation):
पक्षियों की उपस्थिति एक स्वस्थ पर्यावरण का संकेत है। वे अन्य जीवों की खाद्य श्रृंखला (Food Chain) का हिस्सा बनकर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं।

भाषा तत्व और व्याकरण

प्रश्न 1. नीचे लिखे मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग करो-

(अ) मन ललचाना =लालच आना। वाक्य- गरम-गरम जलेबी देखकर मेरा मन ललचा गया।

(ब) विंढोरा पिटवाना = खबर फैलाना। वाक्य- मोर ने रंग लगवाने के लिए सारे जंगल में हिंदो पिटवा दिया।

(स) खुशी से झूम उठना= अधिक प्रसन्न होना।। वाक्य-मोर काले बादल देखकर खुशी से झूम उठा।

प्रश्न 2. कुछ शब्दों का प्रयोग कभी-कभी दो बार भी होता है। जैसे क्या-क्या, साथ-साथ, कौन-कौन, एक-एक, कब-कब, काले-काले आदि। इन शब्दों का अपने वाक्यों में प्रयोग करो।

(1) क्या- क्या = तुम बाजार से क्या-क्या सामान लाये।

(2) साथ-साथ = नदी के किनारे कछुआ और खरगोश साथ-साथ रहते थे।

(3) कौन-कौन=जंगल में कौन-कौन से जानवर रहते थे ?

(4) एक-एक= मोर ने एक-एक करके पक्षियों को रंगना शुरू किया।

(5) कब-कब=पंद्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी का त्योहार कब-कब आता है।

(6) काले-काले = मोर काले-काले बादल देखकर नाच उठा।

प्रश्न 3. बेर का दो अर्थों में प्रयोग करो-

बेर = समय

वाक्य – वह तीन बेर खाना खाती है।

बेर = एक फल

वाक्य – मेरे घर बेर का एक पेड़ है

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