मानव लैंगिक रूप से जनन करने वाला और सजीवप्रजक (viviparous) प्राणी है। हम एक विकसित भ्रूण को जन्म देते हैं, अंडे नहीं देते।
मानव जनन की प्रमुख घटनाओं का क्रम:
- युग्मकजनन (Gametogenesis): शुक्राणु और अंडाणु का निर्माण
- वीर्यसेचन (Insemination): शुक्राणुओं का मादा जनन मार्ग में स्थानांतरण
- निषेचन (Fertilisation): नर और मादा युग्मकों का संलयन → युग्मनज
- अंतरोपण (Implantation): ब्लास्टोसिस्ट का गर्भाशय की दीवार से जुड़ना
- गर्भाधान (Gestation): भ्रूणीय विकास (9 महीने)
- प्रसव (Parturition): शिशु का जन्म
नर प्रजनन तंत्र

A. प्राथमिक लिंग अंग: वृषण (Testes)
स्थान: उदर गुहा के बाहर वृषण कोष (scrotum) में
- तापमान: शरीर से 2-2.5°C कम (शुक्राणुजनन के लिए आवश्यक)
संरचना:
- आकार: 4-5 सेमी लंबे, 2-3 सेमी चौड़े, 2.5 सेमी मोटे
- वृषण पालिकाएँ: प्रत्येक वृषण में ~250 पालिकाएँ
- शुक्रजनक नलिकाएँ: प्रत्येक पालिका में 1-3 अति-कुंडलित नलिकाएँ
कोशिकाएँ:
- नर जनन कोशिकाएँ (Male germ cells): शुक्राणु बनाती हैं
- सर्टोली कोशिकाएँ (Sertoli cells): पोषण और सहारा देती हैं
- अंतराकाशीय कोशिकाएँ (Leydig cells): टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बनाती हैं
B. नर सहायक नलिकाएँ (Male accessory ducts)
- रेटे वृषण (Rete testis): वृषण के पीछे नलिकाओं का जाल
- वासा एफरेंशिया (Vasa efferentia): रेटे वृषण से अधिवृषण तक की नलिकाएँ
- अधिवृषण (Epididymis): वृषण के पश्च सतह पर कुंडलित संरचना
- शुक्राणुओं का अस्थायी भंडारण और परिपक्वता
- शुक्रवाहक (Vas deferens): अधिवृषण से स्खलन वाहिनी तक
- स्खलन वाहिनी (Ejaculatory duct): शुक्रवाहक और शुक्राशय की वाहिनियों का मिलन
C. सहायक ग्रंथियाँ (Accessory glands)
- शुक्राशय (Seminal vesicles):
- एक जोड़ी ग्रंथियाँ
- शुक्राशय द्रव का स्राव (कुल वीर्य का 60-70%)
- फ्रुक्टोज, प्रोस्टाग्लैंडिन्स और प्रोटीन
- प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate gland):
- एकल ग्रंथि
- क्षारीय द्रव का स्राव
- शुक्राणुओं की सुरक्षा और गतिशीलता में सहायक
- काऊपर ग्रंथियाँ (Bulbourethral glands):
- श्लेष्मीय द्रव
- लिंग नालिका को चिकनाई प्रदान करना
D. बाह्य जननांग
लिंग (Penis):
- लिंग नालिका (Urethra): शुक्राणु और मूत्र दोनों का मार्ग
- शिस्नमुंड (Glans penis): लिंग का अंतिम भाग, चमड़ी से ढका हुआ
मादा प्रजनन तंत्र

A. प्राथमिक लिंग अंग: अंडाशय (Ovaries)
स्थान: उदर गुहा में, गर्भाशय के दोनों ओर संरचना:
- आकार: बादाम के आकार की (~3 सेमी लंबी)
- प्रत्येक अंडाशय: मादा भ्रूण में दो लाख प्राथमिक अंडाणु
B. मादा सहायक नलिकाएँ
- डिम्बवाहिनियाँ (Fallopian tubes/oviducts):
- लंबाई: 10-12 सेमी
- भाग: a. अंगी (Infundibulum): अंडाशय की ओर फ़नल जैसा भाग b. एम्पुला (Ampulla): मध्य का चौड़ा भाग (निषेचन की जगह) c. इस्थमस (Isthmus): गर्भाशय की ओर संकरा भाग
- गर्भाशय (Uterus):
- आकार: नाशपाती के आकार का
- भाग: a. फंडस (Fundus): ऊपरी भाग b. शरीर (Body): मध्य भाग c. गर्भाशय ग्रीवा (Cervix): निचला संकरा भाग
- गर्भाशय की दीवार की परतें:
- बाह्य: पेरीमीट्रियम
- मध्य: मायोमीट्रियम (पेशीय)
- आंतरिक: एंडोमीट्रियम (श्लेष्म स्तर)
- योनि (Vagina):
- नलिकाकार पेशीय संरचना
- गर्भाशय ग्रीवा को बाह्य जननांगों से जोड़ती है
- मासिक धर्म रक्त और शिशु के जन्म का मार्ग
C. बाह्य जननांग (Vulva)
- ऊष्ठोच्च (Mons pubis): वसायुक्त ऊतक
- लघु भगोष्ठ (Labia minora): आंतरिक त्वचा पट्टियाँ
- गुरु भगोष्ठ (Labia majora): बाहरी त्वचा पट्टियाँ
- भगशेफ (Clitoris): संवेदनशील अंग
D. स्तन ग्रंथियाँ (Mammary glands)
- दुग्ध स्राव के लिए संशोधित स्वेद ग्रंथियाँ
- दुग्ध उत्पन्न करने वाली कोशिकाएँ: एल्वियोली
- दुग्ध नलिकाएँ: एल्वियोली से स्तनाग्र तक
युग्मकजनन (Gametogenesis)
A. शुक्राणुजनन (Spermatogenesis)

परिभाषा: नर जनन कोशिकाओं से शुक्राणुओं का निर्माण
स्थान: शुक्रजनक नलिकाओं में आयु: यौवनावस्था (12-14 वर्ष) से शुरू होता है
प्रक्रिया:
| चरण | कोशिका | गुणसूत्र संख्या | प्रक्रिया |
|---|---|---|---|
| 1 | स्पर्मेटोगोनिया (वर्धी कोशिकाएँ) | 2n (46) | सूत्री विभाजन द्वारा संख्या बढ़ाना |
| 2 | प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट | 2n (46) | अर्धसूत्री विभाजन-I का शुरुआत |
| 3 | द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट | n (23) | अर्धसूत्री विभाजन-I पूरा |
| 4 | स्पर्मेटिड | n (23) | अर्धसूत्री विभाजन-II पूरा |
| 5 | शुक्राणु | n (23) | शुक्राणुजनन प्रक्रिया |
शुक्राणुजनन प्रक्रिया (Spermiogenesis):
- स्पर्मेटिड का परिपक्व शुक्राणु में परिवर्तन
- शुक्राणु की संरचना:
- शीर्ष (Head): एक्रोसोम (एंजाइम) + नाभिक
- मध्य खंड (Mid-piece): माइटोकॉण्ड्रिया (ऊर्जा)
- पुच्छ (Tail): गति के लिए
शुक्राणु मोचन (Spermiation): शुक्राणुओं का नलिकाओं से मुक्त होना समय: 64-74 दिन
B. अंडाणुजनन (Oogenesis)

परिभाषा: मादा जनन कोशिकाओं से परिपक्व अंडाणु का निर्माण
स्थान: अंडाशय में समय: भ्रूणीय अवस्था से शुरू होती है
प्रक्रिया:
| चरण | कोशिका | गुणसूत्र संख्या | समय |
|---|---|---|---|
| 1 | ओोगोनिया (2 मिलियन) | 2n | भ्रूणीय अवस्था |
| 2 | प्राथमिक ओसाइट | 2n | भ्रूणीय अवस्था |
| 3 | द्वितीयक ओसाइट + प्रथम ध्रुवीय पिण्ड | n | यौवनावस्था |
| 4 | अंडाणु + द्वितीय ध्रुवीय पिण्ड | n | निषेचन के बाद |
विशेषताएँ:
- भ्रूणीय अवस्था में शुरू होती है
- ओोगोनिया → प्रोफेज-I में रुक जाते हैं
- केवल 300-400 अंडाणु यौवनावस्था तक जीवित रहते हैं
- प्रति मासिक चक्र में केवल एक अंडाणु परिपक्व होता है
मासिक चक्र (Menstrual Cycle)

A. अवधि: 28 दिन (20-35 दिन)
B. चरण:
1. मासिक चरण (Menstrual Phase):
- दिन: 1-5
- घटनाएँ:
- गर्भाशय की एंडोमीट्रियल परत का विघटन
- 50-100 मिली रक्त और ऊतकों का बाहर निकलना
- यदि निषेचन नहीं हुआ
2. पुटकीय चरण (Follicular Phase):
- दिन: 1-13
- घटनाएँ:
- FSH का उच्च स्तर
- 6-12 प्राथमिक पुटकों का विकास
- ग्रैफियन पुटक का परिपक्व होना
- एस्ट्रोजन का बढ़ना → एंडोमीट्रियम का मोटा होना
3. अंडोत्सर्गी चरण (Ovulatory Phase):
- दिन: 14वाँ दिन
- घटनाएँ:
- LH का उच्चतम स्तर (LH सर्ज)
- ग्रैफियन पुटक का विदारण
- द्वितीयक ओसाइट का मुक्त होना
4. ल्यूटियल चरण (Luteal Phase):
- दिन: 15-28
- घटनाएँ:
- अवशिष्ट पुटक → कॉर्पस ल्यूटियम में बदलता है
- प्रोजेस्टेरोन का स्राव
- गर्भाशय का तैयार होना (निषेचन के लिए)
निषेचन और अंतरोपण

A. निषेचन (Fertilization)
स्थान: डिम्बवाहिनी का एम्पुला भाग समय: अंडोत्सर्ग के 24 घंटे के भीतर
प्रक्रिया:
- शुक्राणु और अंडाणु का संपर्क
- एक्रोसोम से एंजाइमों का स्राव → अंडाणु की कोरोना रेडियेटा को तोड़ना
- शुक्राणु और अंडाणु कोशिका झिल्लियों का संलयन
- युग्मनज (जाइगोट) का निर्माण
लिंग निर्धारण:
- Y गुणसूत्र वाले शुक्राणु: लड़का (XY)
- X गुणसूत्र वाले शुक्राणु: लड़की (XX)
B. भ्रूण विकास के चरण
- युग्मनज (Zygote): पहला चरण
- ब्लास्टोमीयर (Blastomere): विभाजित कोशिकाएँ
- मोरुला (Morula): 16 कोशिकाओं का समूह (रसभरी जैसा)
- ब्लास्टोसिस्ट (Blastocyst): कोशिकाओं से घिरा हुआ गुहा
C. अंतरोपण (Implantation)
समय: निषेचन के 6-7 दिन बाद स्थान: गर्भाशय की दीवार पर
प्रक्रिया:
- ब्लास्टोसिस्ट की बाहरी कोशिकाएँ → ट्रोफोब्लास्ट में बदलती हैं
- ट्रोफोब्लास्ट → गर्भाशय की दीवार में प्रवेश करते हैं
- भ्रूण और माता के बीच संबंध स्थापित होता है
गर्भावस्था और भ्रूणीय विकास

A. गर्भावस्था एवं प्लेसेंटा
प्लेसेंटा (Placenta):
- भ्रूण और माता के बीच का संबंध अंग
- कार्य:
- गैसों का विनिमय (O₂ और CO₂)
- पोषक तत्वों का स्थानांतरण
- अपशिष्ट उत्पादों का निष्कासन
- हार्मोन्स का स्राव
प्लेसेंटल हार्मोन्स:
- hCG (ह्यूमन कोरियोनिक गोनेडोट्रोपिन): सबसे पहला हार्मोन
- इस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन: गर्भावस्था बनाए रखना
- ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजन (hPL): दुग्ध उत्पादन के लिए
B. गर्भावस्था के त्रैमास
प्रथम त्रैमासिक (1-12 सप्ताह):
- सभी प्रमुख अंग प्रणालियों का निर्माण
- भ्रूण का नामकरण: भ्रूण → फीटस (8वें सप्ताह के बाद)
द्वितीय त्रैमासिक (13-28 सप्ताह):
- अंगों का परिपक्व होना
- माता को फीटस की गति महसूस होती है
तृतीय त्रैमासिक (29-40 सप्ताह):
- शरीर का वजन बढ़ना
- प्रसव के लिए तैयारी
प्रसव और दुग्धपान

A. प्रसव (Parturition)
परिभाषा: गर्भावस्था का समापन और शिशु का जन्म
प्रक्रिया:
- फीटल प्लेसेंटल हार्मोन्स → माता के एंडोमीट्रियम से ऑक्सीटोसिन का स्राव
- गर्भाशय का संकुचन (प्रसव पीड़ा)
- शिशु का जन्म मार्ग से निकलना
- प्लेसेंटा का निकलना
B. दुग्धपान (Lactation)
दुग्ध उत्पादन (Lactogenesis):
- कोलोस्ट्रम (Colostrum): पहले 2-3 दिनों का पीला गाढ़ा दूध
- प्रतिरक्षा कारकों से भरपूर
- वास्तविक दुग्ध (Mature milk): 3-4 दिनों के बाद
हार्मोन्स:
- प्रोलेक्टिन: दूध का उत्पादन
- ऑक्सीटोसिन: दूध का स्राव
महत्वपूर्ण तालिकाएँ
तालिका 1: शुक्राणुजनन और अंडाणुजनन का तुलनात्मक अध्ययन
| विशेषता | शुक्राणुजनन | अंडाणुजनन |
|---|---|---|
| स्थान | वृषण | अंडाशय |
| आरंभ समय | यौवनावस्था | भ्रूणीय अवस्था |
| पूर्णता समय | 64-74 दिन | कई वर्ष |
| उत्पाद | 4 क्रियाशील शुक्राणु | 1 क्रियाशील अंडाणु |
| निरंतरता | जीवन भर | प्रति चक्र 1 अंडाणु |
| हार्मोन प्रभाव | टेस्टोस्टेरोन | एस्ट्रोजन, FSH, LH |
तालिका 2: मासिक चक्र के हार्मोन्स
| चरण | मुख्य हार्मोन्स | प्रभाव |
|---|---|---|
| पुटकीय | FSH ↑, एस्ट्रोजन ↑ | पुटकों का विकास |
| अंडोत्सर्गी | LH सर्ज | अंडोत्सर्ग |
| ल्यूटियल | प्रोजेस्टेरोन ↑ | गर्भाशय की तैयारी |
NCERT प्रश्नों के उत्तर
1. शुक्राणुजनन की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर: शुक्राणुजनन शुक्रजनक नलिकाओं में होने वाली प्रक्रिया है जिसमें स्पर्मेटोगोनिया (2n) से चार शुक्राणु (n) बनते हैं। इसकी चार मुख्य अवस्थाएँ हैं:
- गुणन अवस्था: स्पर्मेटोगोनिया का सूत्री विभाजन द्वारा बढ़ना
- वृद्धि अवस्था: स्पर्मेटोगोनिया → प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट
- परिपक्वन अवस्था: अर्धसूत्री विभाजन → क्रमशः द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट और स्पर्मेटिड
- रूपांतरण अवस्था: स्पर्मेटिड का शुक्राणुजनन द्वारा परिपक्व शुक्राणु में बदलना
2. मासिक चक्र के विभिन्न चरणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: मासिक चक्र के चार मुख्य चरण हैं:
- मासिक चरण (दिन 1-5): एंडोमीट्रियल परत का निर्मोचन यदि निषेचन नहीं हुआ
- पुटकीय चरण (दिन 6-13): FSH के प्रभाव से पुटकों का विकास, एस्ट्रोजन का बढ़ना
- अंडोत्सर्गी चरण (दिन 14): LH सर्ज के कारण अंडोत्सर्ग
- ल्यूटियल चरण (दिन 15-28): कॉर्पस ल्यूटियम का निर्माण, प्रोजेस्टेरोन का स्राव
पढ़ने की रणनीति
A. NCERT को ध्यान से पढ़ें:
- सभी परिभाषाओं को समझें
- सभी चित्रों का अभ्यास करें
- पिछले पृष्ठ के सारांश को पढ़ें
B. महत्वपूर्ण बिंदुओं को याद करें:
- सभी हार्मोन्स और उनके कार्य
- संरचनाओं के आकार और स्थान
- प्रक्रियाओं के समय और चरण
C. अभ्यास:
- प्रतिदिन 1-2 प्रश्नों का अभ्यास करें
- मॉक टेस्ट दें
- पिछले वर्ष के प्रश्न पत्र हल करें
नोट: ये नोट्स CBSE कक्षा 12 जीव विज्ञान पाठ्यक्रम 2026-27 के अध्याय 2 “मानव जनन” के लिए तैयार किए गए हैं। सभी जानकारी NCERT पाठ्यपुस्तक और विशेषज्ञ स्रोतों के आधार पर है।
