विविधता में एकता या ‘एक में अनेक’ (NCERT – कक्षा 6) – नोट्स
1. विविधता में एकता की अवधारणा
- अर्थ: ‘विविधता में एकता’ का अर्थ है कि भारत में कई अलग-अलग संस्कृतियाँ, भाषाएँ, धर्म और परंपराएँ होने के बावजूद, ये सभी अंतर एक साथ मिलकर एक मजबूत और एकजुट राष्ट्र का निर्माण करते हैं।
- उदाहरण: भारत में लोग दीवाली, ईद और क्रिसमस जैसे विभिन्न त्योहारों को शांतिपूर्वक एक साथ मनाते हैं।
- उद्धरण (जवाहरलाल नेहरू): भारत के प्रथम प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता से पहले भारत की यात्रा के बाद कहा था कि उन्हें हर जगह अलग-अलग संस्कृतियाँ मिलीं, लेकिन वे सभी भारत की एकता को दर्शाती हैं।
2. भारत की विविधता के उल्लेखनीय पक्ष
भारत की विविधता मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में दिखाई देती है:
| क्षेत्र | विवरण | एकता का पहलू | विविधता का पहलू |
| भोजन | एक समान सामग्री (अनाज, मसाले, सब्जियाँ) का उपयोग। | समान सामग्री का आधार। | अनगिनत प्रकार के व्यंजन (संयोजन)। |
| वस्त्र/परिधान | बिना सिला हुआ कपड़े का टुकड़ा (जैसे साड़ी)। | मूल वस्त्र की अवधारणा (बिना सिला कपड़ा)। | बुनने/पहनने के अनगिनत तरीके (क्षेत्र और समुदाय के अनुसार)। |
| त्योहार | मकर संक्रांति (फसल कटाई की शुरुआत का प्रतीक)। | एक ही समय (जनवरी) में मनाया जाना। | भारत के अधिकांश भागों में अलग-अलग नामों से मनाना (नाम और अनुष्ठान भिन्न)। |
| साहित्य | पंचतंत्र की कहानियाँ (मूल संस्कृत पाठ 2200 वर्ष पुराना)। | कहानियों का मूल संदेश। | 50 से अधिक भाषाओं में 200 से अधिक रूपांतरण उपलब्ध। |
3. साड़ी का उदाहरण (विविधता और एकता)
- एकता: मूल विचार बिना सिले कपड़े के टुकड़े का है, जिसका इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता (लगभग 5,000 ईसा पूर्व) से जुड़ा है।
- विविधता: विभिन्न राज्यों में साड़ियों की अलग-अलग विशेषताएँ और गुणवत्ता होती है (जैसे वाराणसी की बनारसी, तमिलनाडु की कांचीपुरम, गुजरात की पटोला, महाराष्ट्र की पैठणी)।
- साड़ी के उपयोग:
- परिधान के रूप में।
- शिशु को पेड़ से बाँधने के लिए।
- अनाज रखने या मछली पकड़ने के लिए।
- गठरी, चादर, पर्दा या रस्सी के रूप में।
4. विविधता में एकता को बनाए रखने के तरीके
एक मजबूत राष्ट्र बनाने के लिए हम निम्नलिखित तरीकों से एकता को बनाए रखते हैं:
- संविधान का पालन: प्रत्येक नागरिक संविधान में दिए गए अधिकारों और कर्तव्यों का पालन करता है।
- कानून का शासन: कोई भी कानून से ऊपर नहीं है; सभी गतिविधियाँ कानून के अनुरूप होती हैं।
- भेदभाव का अभाव: जाति, रंग, लिंग या जन्म के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
- राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान: राष्ट्रीय झंडा, राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय चिह्नों का सम्मान करना।
- सहिष्णुता: धर्म, खान-पान, रीति-रिवाजों, त्योहारों और भाषा के आधार पर भेदभाव न करना।
- स्वतंत्र मीडिया: एकता बनाने में स्वतंत्र मीडिया एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
5. राष्ट्रगान और रामायण-महाभारत का महत्व
- राष्ट्रगान (जन-गण-मन):
- विविधता: इसमें भारत के विभिन्न भागों (पहाड़ों, नदियों) और विभिन्न संस्कृतियों के लोगों का उल्लेख है।
- एकता: यह इस बात पर जोर देता है कि हम सभी एक राष्ट्र के रूप में एकजुट हैं, जो हमारे मतभेदों के बावजूद हमें देश के प्रति प्रेम और सम्मान में एक साथ लाता है।
- महाकाव्यों का महत्व:
- रामायण और महाभारत जैसी कहानियाँ नैतिकता और शिक्षा देती हैं, जो लोगों को कर्तव्य, निष्ठा और साहस जैसे मूल्यों की शिक्षा देती हैं।
- इन कहानियों का ज्ञान साक्षरता से परे है, क्योंकि जो लोग पढ़ नहीं सकते, वे भी इन्हें याद रखते हैं और साझा करते हैं।
