बढ़ती जनसंख्या की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए केवल पारंपरिक खेती पर्याप्त नहीं है, इसके लिए जैविक सिद्धांतों और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग अनिवार्य है।
1. पशुपालन (Animal Husbandry)
पशुओं के प्रजनन और उनकी देखभाल की कृषि पद्धति को पशुपालन कहते हैं।
- डेयरी फार्म प्रबंधन: दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए अच्छी नस्लों का चयन और पशुओं के आहार व स्वास्थ्य पर ध्यान देना।
- कुक्कुट (Poultry) फार्म प्रबंधन: मांस और अंडों के लिए मुर्गियों व अन्य पक्षियों का पालन।
- मधुमक्खी पालन (Apiculture): शहद और मोम के उत्पादन के लिए मधुमक्खियों का पालन। सबसे सामान्य प्रजाति ‘एपिस इंडिका’ है। यह फसलों के परागण (Pollination) में भी सहायक होती हैं।
2. पादप प्रजनन (Plant Breeding)
इच्छित गुणों वाली नई किस्मों को तैयार करने के लिए पौधों की प्रजातियों का हेरफेर करना पादप प्रजनन कहलाता है।
- मुख्य चरण:
- विभिन्नताओं का संग्रहण।
- जनकों का मूल्यांकन और चयन।
- चयनित जनकों के बीच संकरण (Hybridization)।
- श्रेष्ठ पुनर्संयोजकों का चयन और परीक्षण।
- उपयोग: रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना (जैसे- गेहूं की ‘हिमगिरि’ किस्म) और कीट प्रतिरोधक क्षमता विकसित करना।
3. जैव सुदृढ़ीकरण (Biofortification)
विटामिन, खनिज, प्रोटीन और स्वस्थ वसा के उच्च स्तर वाली फसलों का प्रजनन करना ताकि जन स्वास्थ्य में सुधार हो सके।
- उदाहरण: विटामिन-A से भरपूर गाजर और कद्दू, तथा आयरन और कैल्शियम से भरपूर पालक।
4. एकल कोशिका प्रोटीन (Single Cell Protein – SCP)
बढ़ती जनसंख्या के लिए प्रोटीन का एक वैकल्पिक स्रोत। सूक्ष्मजीवों (जैसे- स्पाइरुलीना) का बड़े पैमाने पर संवर्धन करके उनसे प्रोटीन प्राप्त करना।
- लाभ: यह कम स्थान में अधिक उत्पादन देता है और प्रदूषण को कम करने में सहायक है (क्योंकि यह अपशिष्ट पदार्थों पर उगाया जा सकता है)।
5. ऊतक संवर्धन (Tissue Culture)
जब किसी पौधे के किसी भाग (Explant) से प्रयोगशाला में कृत्रिम पोषक माध्यम और रोगाणुरहित स्थितियों में एक पूरा पौधा तैयार किया जाता है, तो इसे ऊतक संवर्धन कहते हैं।
- टोटीपोटेंसी (Totipotency): कोशिका की वह क्षमता जिससे वह एक पूर्ण पौधा बना सकती है।
- सूक्ष्म प्रवर्धन (Micropropagation): इस विधि द्वारा बहुत कम समय में हजारों पौधे तैयार किए जा सकते हैं। ये पौधे मूल पौधे के समान होते हैं, जिन्हें सोमाक्लोन कहा जाता है।

6. पशु प्रजनन की तकनीकें
- अंतःप्रजनन (Inbreeding): एक ही नस्ल के करीबी संबंधित पशुओं के बीच संकरण। इससे ‘अंतःप्रजनन अवसादन’ (Inbreeding Depression) हो सकता है।
- MOET (Multiple Ovulation Embryo Transfer): यह पशुओं में सुधार की एक विधि है। इसमें गाय को हार्मोन दिए जाते हैं जिससे वह एक समय में कई अंडे उत्पन्न करती है। निषेचन के बाद भ्रूणों को सरोगेट माताओं में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
