(वस्तुनिष्ठ प्रश्न) — 2×6 = 12 अंक
प्रश्न 1. इब्राहीम गादी कौन था?
(अ) राजा (ब) सैनिक (स) सेनापति (द) जनरल
उत्तर: (स) सेनापति
संकेत: वह मराठों का सेनापति था, जिसने पानीपत के युद्ध (1761) में भाग लिया।
प्रश्न 2. इनमें से प्रवासी चिड़िया है —
(अ) मैना (ब) कोयल (स) पीलक (द) कबुतर
उत्तर: (स) पीलक
संकेत: पीलक (Palaearctic migrant) प्रवासी पक्षी है, जो साइबेरिया से भारत आती है।
प्रश्न 3. अब्राहम लिंकन कौन थे?
(अ) व्यापारी (ब) किसान (स) राष्ट्रपति (द) लेखक
उत्तर: (स) राष्ट्रपति
संकेत: वे अमेरिका के राष्ट्रपति थे और दास प्रथा के विरोधी थे।
प्रश्न 4. ‘जो मैं नहीं बन सका’ पाठ के लेखक हैं —
(अ) श्री वृन्दावन लाल शर्मा (ब) डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी (स) डॉ. जीवन यदु (द) श्री सत्यनारायण लाल
उत्तर: (ब) डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी
संकेत: यह पाठ एक व्यंग्य रचना है, जिसमें लेखक ने अपनी बचपन की इच्छाओं का वर्णन किया है।
प्रश्न 5. अचल के साथ क्या दुर्घटना हुई?
(अ) वह बेहोश हो गया (ब) वह परीक्षा में फेल हो गया (स) उसका पैर कट गया (द) वह बीमार हो गया
उत्तर: (स) उसका पैर कट गया
संकेत: ‘साहस के पैर’ पाठ में अचल रेल दुर्घटना में अपना एक पैर गँवा देता है।
प्रश्न 6. छत्तीसगढ़ की गंगा किसे कहते हैं?
(अ) शिवनाथ नदी (ब) गंगा नदी (स) यमुना नदी (द) महानदी
उत्तर: (द) महानदी
संकेत: महानदी को छत्तीसगढ़ की गंगा कहा जाता है, क्योंकि यह राज्य की जीवनरेखा है।
(अति लघुउत्तरीय प्रश्न) — 4×5 = 20 अंक
प्रश्न 7. पर्यायवाची शब्द लिखो —
(1) बंदी — कैदी, गिरफ्तार, बंदी
(2) इच्छा — चाह, अभिलाषा, कामना, वांछा
(3) अजीब — विचित्र, अनोखा, अनूठा, अद्भुत
(4) संकल्प — निश्चय, प्रण, इरादा, दृढ़निश्चय
प्रश्न 8. संधि विच्छेद कर प्रकार बताओ —
(1) गिरीश = गिरि + ईश → दीर्घ संधि (इ + ई = ई)
(2) मनोहर = मनः + हर → विसर्ग संधि (ः + ह = ो)
(3) सदाचारी = सत् + आचारी → व्यंजन संधि (त् + आ = दा)
(4) नमस्कार = नमः + कार → विसर्ग संधि (ः + क = स्)
प्रश्न 9. विलोम शब्द लिखो —
(1) घृणा × प्रेम / स्नेह
(2) प्यार × घृणा / नफरत
(3) नुकसान × लाभ / फायदा
(4) अपशकुन × शुभशकुन / सुशकुन
प्रश्न 10. समानार्थी शब्द लिखो —
(1) भाव — विचार, भावना, अर्थ, मनोभाव
(2) परिश्रम — मेहनत, श्रम, उद्यम, कर्म
(3) सदा — सदैव, नित्य, हमेशा, सर्वदा
(4) गिरि — पर्वत, पहाड़, शैल, अचल
प्रश्न 11. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द लिखो —
(1) जो अधिक बोलता है — वाचाल
(2) जो पढ़ा-लिखा न हो — निरक्षर / अनपढ़
(3) जो ईश्वर को मानता हो — आस्तिक
(4) जिसमें जानने की इच्छा हो — जिज्ञासु
(लघु उत्तरीय प्रश्न) — 6×3 = 18 अंक
प्रश्न 12. ‘नई उषा’ पाठ नवयुवकों को क्या संदेश दे रहा है?
उत्तर:
‘नई उषा’ कविता नवयुवकों को जागने, आगे बढ़ने और देश-निर्माण में पहल करने का संदेश देती है। कवि कहता है कि अज्ञान, अशिक्षा, अन्याय, आलस्य और संकीर्णता की रात बीत चुकी है। अब नई उषा का प्रकाश फैल रहा है। युवाओं को चाहिए कि वे परिश्रम से धरा को उर्वर बनाएँ, प्रेम, ज्ञान, सत्य, सहानुभूति और मानवीय मूल्यों का प्रसार करें तथा एक स्वस्थ, स्वावलंबी और संवेदनशील समाज का निर्माण करें। यह कविता नवयुवकों में आत्मविश्वास, कर्तव्यबोध और राष्ट्रप्रेम की भावना जगाती है।
प्रश्न 13. ‘जो मैं नहीं बन सका’ पाठ में लेखक की क्या बनने की इच्छा थी?
उत्तर:
इस पाठ में लेखक डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी ने अपनी बचपन की कई इच्छाओं का वर्णन किया है। वे बनना चाहते थे —
- पेंटर — फिल्म का बोर्ड बनाने वाला
- सिनेमाघर का गेटकीपर — तीनों शो में फिल्म देखने के लिए
- हेडमास्टर — रौबदार धंधा लगता था
- घंटी बजाने वाला चपरासी — बीड़ी पीने की छूट के लिए
- पहलवान — अन्याय करने वालों की चटनी बनाने के लिए
- जादूगर — जादू के खेल देखकर प्रभावित हुए
अंत में वे डॉक्टर और लेखक बने, पर बचपन में ये दोनों पेशे उनकी इच्छा में नहीं थे।
प्रश्न 14. ‘दीदी की डायरी’ पाठ में संजू पूरे दिन उदास क्यों थी?
उत्तर:
‘दीदी की डायरी’ पाठ के अनुसार दीदी का पूरा दिन उदासी में बीता था। इसका कारण यह था कि उसकी सहेली नीलू अब पढ़ने नहीं जाएगी। नीलू का विवाह तय हो गया था और उसे एक महीने बाद गाँव छोड़ना था। नीलू को पढ़ने का बहुत मन था, पर घरवाले उसकी बात नहीं सुन रहे थे। लड़कियों की शिक्षा और उनकी विवशता को देखकर दीदी/संजू उदास हो गई थी। उसे लगा कि लड़कियों को पढ़ने का पूरा अवसर नहीं मिलता, जबकि दुनिया भर की लड़कियाँ क्या-क्या करतब दिखा रही हैं।
(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न) — 10×3 = 30 अंक
प्रश्न 15. निम्न पद्यांश का सप्रसंग व्याख्या करो —
खिले कमल अरुण, तरुण प्रभात मुस्कुरा रहा,
गगन विकास का नवीन, साज है सजा रहा।
उठो, चलो, बढ़ो, समीर शंख है बजा रहा।
भविष्य सामने खड़ा प्रशस्त पथ बना रहा।
सप्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश ‘छत्तीसगढ़ भारती कक्षा-8’ में संकलित कविता ‘नई उषा’ से उद्धृत है। इसके कवि श्री सत्यनारायण लाल हैं। यह कविता स्वतंत्रता के बाद देश के नवयुवकों को संबोधित है।
व्याख्या:
कवि कहता है कि नई उषा का प्रकाश फैल रहा है। लाल कमल खिल उठे हैं, युवा प्रभात मुस्कुरा रहा है। आकाश विकास के नए साज से सज रहा है। हवा शंख बजा रही है, भविष्य सामने खड़ा है और प्रशस्त पथ बन रहा है। अतः हे नवयुवकों! उठो, चलो, आगे बढ़ो। यह संदेश है कि अब आलस्य और गुलामी की रात बीत चुकी है। देश की प्रगति, विकास, शिक्षा, ज्ञान, प्रेम और मानवीय मूल्यों के निर्माण में युवाओं को पहल करनी है।
विशेष:
इसमें उत्साह, आह्वान और प्रकृति-चित्रण है। ‘नई उषा’ नए युग/स्वतंत्रता का प्रतीक है। भाषा सरल, प्रवाहमयी और ओजस्वी है।
प्रश्न 16. ‘एक नई शुरुआत’ में सुधीर के व्यवहार और व्यक्तित्व में कैसे परिवर्तन आया?
उत्तर:
‘एक नई शुरुआत’ कहानी में सुधीर पहले एक शरारती, अक्खड़, गुस्सैल और बिगड़ा हुआ लड़का था। वह गलत संगत में पड़ गया था। एक बार उसे पूरे स्कूल के सामने सजा दी गई, जिससे वह और विद्रोही हो गया। सब उससे दूर रहने लगे।
श्रीकांत कक्षा का मॉनीटर बना। सुधीर उसे परेशान करता था, पर श्रीकांत ने उसकी शिकायत नहीं की। वार्षिकोत्सव के नाटक में श्रीकांत ने सुधीर को ‘शक्ति सिंह’ की भूमिका दिलवाई। इससे सुधीर को जिम्मेदारी और आत्मविश्वास मिला। फिर श्रीकांत ने उसे लड़कियों को घर छोड़ने, पैसे जमा करने और जन्मदिन मनाने जैसे कामों में शामिल किया। धीरे-धीरे सुधीर का व्यवहार बदलने लगा। उसकी अक्खड़ता में सौम्यता आ गई, गाली-गलौज और झगड़े कम हो गए। वह जिम्मेदार, सहयोगी और कृतज्ञ बन गया। अंत में उसे कक्षा का मॉनीटर बनाया गया। इस प्रकार स्नेह, विश्वास और जिम्मेदारी ने सुधीर के जीवन में नई शुरुआत की।
प्रश्न 17. पचराही तीर भोरमदेव है, ओकर ऊपर निबंध लिखव।
उत्तर:
भोरमदेव मंदिर (पचराही के निकट)
भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित है। यह पचराही नामक प्राचीन पुरातात्विक स्थल के निकट है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध धार्मिक तथा ऐतिहासिक स्थल है। इसे ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ भी कहा जाता है।
भोरमदेव मंदिर का निर्माण लगभग 11वीं शताब्दी में कलचुरी शासकों द्वारा कराया गया था। यह मंदिर नागर शैली में बना है। मंदिर की दीवारों पर सुंदर मूर्तियाँ, अप्सराएँ, पशु-पक्षी और मिथुन मूर्तियाँ उत्कीर्ण हैं। मंदिर के गर्भगृह, मंडप और अंतराल में प्राचीन स्थापत्य कला की झलक मिलती है।
पचराही क्षेत्र भी पुरातात्विक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। यहाँ 2007 से खुदाई हो रही है। खुदाई में प्रागैतिहासिक काल से मुगल काल तक के अवशेष मिले हैं। यहाँ जलीय जीवाश्म, पाषाण युग के औजार, सोमवंशी, कलचुरी और फणिनागवंशी काल के सिक्के, मंदिर, मूर्तियाँ, मिट्टी के खिलौने, लोहे-तांबे के औजार और आभूषण प्राप्त हुए हैं। जैन मूर्तियाँ भी यहाँ मिली हैं।
भोरमदेव और पचराही छत्तीसगढ़ की प्राचीन कला, संस्कृति और इतिहास के गौरव हैं। ये स्थल शोधकर्ताओं, पर्यटकों और इतिहास-प्रेमियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता है।
