(वस्तुनिष्ठ प्रश्न) सही विकल्प (✓) लगाइए
प्रश्न 1. ‘चिड़िया का गीत’ कविता के अनुसार, चिड़िया को संसार बहुत बड़ा लगा जब —
(स) उसने आसमान में उड़कर पंख पसारे। ✓
प्रश्न 2. ‘बगीचे का घोंघा’ पाठ में घोंघे को बगीचे के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुँचने में कितने दिन लगते थे?
(ब) दो दिन ✓
प्रश्न 3. ‘नीम’ कविता के अनुसार, नीम का वृक्ष किस प्रकार हमें सिखाता है?
(ब) कड़वे तन में मन को मीठा रखना ✓
प्रश्न 4. ‘हमारा आहार’ कविता में गर्मी के मौसम में किन वस्तुओं का सेवन करने की सलाह दी गई है?
(अ) खरबूज, तरबूज, ककड़ी, खीरा ✓
प्रश्न 5. ‘हमारा आहार’ कविता के अनुसार, हमें खाकर कब पछताना पड़ता है?
(ब) जब हम पेट से ज्यादा खाते हैं। ✓
(लघु उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 6. ‘चिड़िया का गीत’ कविता के आधार पर बताइए कि चिड़िया को यह संसार कब-कब छोटा लगा?
उत्तर – चिड़िया को यह संसार तीन बार छोटा लगा —
- जब वह अंडे के भीतर थी, तब उसे लगा कि बस इतना-सा ही संसार है।
- जब उसका घोंसला सूखे तिनकों से बना, तब भी उसे यही लगा कि संसार इतना-सा ही है।
- जब वह पेड़ की हरी-भरी शाखों पर निकली, तब भी उसे लगा कि संसार बस इतना-सा ही है।
प्रश्न 7. ‘बगीचे का घोंघा’ कहानी के आधार पर बताइए कि घोंघा बगीचे से बाहर क्यों जाना चाहता था?
उत्तर – घोंघा बगीचे से बाहर इसलिए जाना चाहता था क्योंकि वह जानना चाहता था कि बगीचे के बाहर क्या है। बाहर की दुनिया कैसी होगी, यह देखने की उत्सुकता उसे बाहर खींच रही थी। उसकी माँ ने उसे बाहर न जाने की सलाह दी थी, परंतु घोंघे ने सोचा कि वह बाहर जाकर देखेगा कि दुनिया कैसी है।
प्रश्न 8. ‘नीम’ कविता के अनुसार, नीम के वृक्ष की किन्हीं तीन विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर – नीम के वृक्ष की तीन विशेषताएँ —
- नीम का वृक्ष लहराता-बलखाता रहता है और दिनभर हँसता-गाता रहता है।
- नीम डॉक्टर नहीं है, फिर भी अनेक रोगों को भगाता है।
- नीम प्रदूषित वायु को शुद्ध बनाता है।
- नीम कड़वे तन में भी मन को मीठा रखना सिखाता है।
- नीम किसी से कुछ नहीं लेता, परंतु सबको बहुत कुछ देता है।
प्रश्न 9. ‘हमारा आहार’ कविता के आधार पर बताइए कि हमें अपने भोजन में सलाद क्यों शामिल करना चाहिए?
उत्तर – सलाद में कच्ची सब्जियाँ जैसे गाजर, मूली, टमाटर, खीरा, प्याज आदि होती हैं। इनमें विटामिन, खनिज और रेशे प्रचुर मात्रा में होते हैं। सलाद खाने से पाचन क्रिया ठीक रहती है, शरीर को ताजगी मिलती है और हम स्वस्थ रहते हैं। यह शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति देता है।
प्रश्न 10. विलोम शब्द लिखो —
| शब्द | विलोम |
|---|---|
| (1) सुख | दुःख |
| (2) पास | दूर |
| (3) ताजा | बासी |
(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 11. ‘बगीचे का घोंघा’ कहानी के आधार पर बताइए कि घोंघे ने बगीचे के भीतर और बाहर क्या-क्या देखा? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर –
बगीचे के भीतर —
- घोंघे ने अपना सारा जीवन बगीचे में बिताया था।
- वह बगीचे का कोना-कोना पहचान गया था।
- उसने बगीचे में फूल, पौधे और छोटे-छोटे पेड़ देखे थे।
- उसने बगीचे की दीवार में एक छेद देखा था।
बगीचे के बाहर —
- घोंघे ने बाहर निकलकर एक बहुत बड़ा, लंबा और चौड़ा मैदान देखा।
- उसने एक सूखा पत्ता गिरते हुए देखा।
- उसने एक बड़ा-सा पत्थर देखा, जो उसे पहाड़ जैसा लगा।
- उसने लाल चींटों को अपने लंबे-पतले पाँवों से इधर-उधर आते-जाते देखा।
- उसने एक गिलहरी को फुदक-फुदककर पेड़ पर चढ़ते देखा।
- उसने एक गेंद को लुढ़कते और एक कुत्ते को उसके पीछे भागते देखा।
- उसने एक बहुत लंबा खजूर का पेड़ और एक बड़ का विशाल पेड़ देखा।
प्रश्न 12. ‘हमारा आहार’ कविता के आधार पर बताइए कि स्वस्थ रहने के लिए हमें कैसा आहार लेना चाहिए? कोई चार बातें लिखिए।
उत्तर – स्वस्थ रहने के लिए हमें निम्नलिखित आहार लेना चाहिए —
- हमें चावल, दाल और सब्जी खानी चाहिए जिससे तन में चुस्ती-फुर्ती आए।
- हमें दूध, दही, फल-फूलों का सेवन करना चाहिए और बगीचे लगाने चाहिए।
- गर्मी के मौसम में खरबूज, तरबूज, ककड़ी, खीरा खाना चाहिए जो गर्मी की पीड़ा हरते हैं।
- हमें मूली, टमाटर, गाजर, पालक आदि हरी सब्जियाँ खानी चाहिए।
- भूँजा-सत्तू नियमित खाना चाहिए और ताजा खाना हरदम खाना चाहिए।
- पानी का खूब व्यवहार करना चाहिए और भोजन में सलाद शामिल करना चाहिए।
- पेट से ज्यादा नहीं खाना चाहिए, नहीं तो पछताना पड़ता है।
(कोई चार बातें लिखें)
प्रश्न 13. ‘नीम’ कविता के आधार पर बताइए कि नीम का वृक्ष हमें क्या-क्या सिखाता है?
उत्तर – नीम का वृक्ष हमें निम्नलिखित बातें सिखाता है —
- कड़वे तन में मन को मीठा रखना — नीम का स्वाद कड़वा है, फिर भी वह सबको औषधि देता है। इसी प्रकार हमें कठिन परिस्थितियों में भी मन को मीठा रखना चाहिए।
- देना ही जीवन है — नीम किसी से कुछ नहीं लेता, परंतु सबको छाया, फल, औषधि और शुद्ध वायु देता है। हमें भी बिना स्वार्थ के दूसरों की सहायता करनी चाहिए।
- प्रसन्न रहना — नीम दिनभर हँसता-गाता रहता है। हमें भी सदैव प्रसन्न रहना चाहिए।
- सहनशीलता — नीम हवा चलने पर झूम-झूमकर सबका मन बहलाता है। हमें भी जीवन में लचीलापन अपनाना चाहिए।
- परोपकार — नीम अनेक रोगों को भगाता है और प्रदूषित वायु को शुद्ध करता है। हमें भी समाज के लिए उपयोगी बनना चाहिए।
प्रश्न 14. अपने पाठ्यपुस्तक की किसी एक कविता की चार पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर – (किसी एक कविता की चार पंक्तियाँ लिखें)
उदाहरण — ‘चिड़िया का गीत’
सबसे पहले मेरे घर का
अंडे जैसा था आकार
तब मैं यही समझती थी
बस इतना-सा ही है संसार।
या — ‘नीम’
लहराता-बलखाता नीम,
दिनभर हँसता-गाता नीम
चिड़िया, कौआ, तोता सबसे,
अपना नेह जताता नीम
या — ‘हिमालय’
खड़ा हिमालय बता रहा है,
डरो न आँधी पानी में।
खड़े रहो तुम अपने पथ पर,
सब कठिनाई-तूफानों में।
प्रश्न 15. किसी एक विषय पर निबंध लिखो —
(1) स्वतंत्रता दिवस (2) गणतंत्र दिवस (3) महात्मा गाँधी
उत्तर –
(1) स्वतंत्रता दिवस
हमारा देश भारत 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था। इसलिए हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह हमारे देश के लिए बहुत गौरव का दिन है।
इस दिन प्रधानमंत्री जी लाल किले पर तिरंगा फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं। विद्यालयों में भी ध्वजारोहण किया जाता है। बच्चे मिठाइयाँ बाँटते हैं और देशभक्ति के गीत गाते हैं।
इस दिन हम उन वीरों को याद करते हैं जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। हमें उनके बलिदान से प्रेरणा लेकर देश की सेवा करनी चाहिए।
(2) गणतंत्र दिवस
हमारा देश भारत 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र बना था। इस दिन हमारा संविधान लागू हुआ था। इसलिए हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।
इस दिन दिल्ली में भव्य परेड होती है। राष्ट्रपति जी झंडा फहराते हैं। विभिन्न राज्यों की झाँकियाँ निकाली जाती हैं। स्कूलों में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
यह दिन हमें हमारे संविधान और लोकतंत्र की याद दिलाता है। हमें अपने देश के प्रति कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
(3) महात्मा गाँधी
महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था। उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ कहा जाता है।
गाँधी जी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आजादी दिलाई। उन्होंने छुआछूत के विरुद्ध आवाज उठाई। उन्होंने स्वदेशी का प्रचार किया।
गाँधी जी का जीवन सादा था। वे खादी के कपड़े पहनते थे। उनके विचार आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं। हमें उनके आदर्शों पर चलना चाहिए।
