1. गति का परिचय
हमारे दैनिक जीवन में अनेक गतियाँ देखते हैं — चलना, दौड़ना, वाहनों का चलना, पक्षियों का उड़ना, पेड़ से फल का गिरना आदि।
गति (Motion): जब किसी वस्तु की स्थिति समय के साथ किसी संदर्भ बिंदु (Reference Point) के सापेक्ष बदलती है, तो उसे गति कहते हैं।
संदर्भ बिंदु: वह बिंदु जिसके सापेक्ष वस्तु की स्थिति में परिवर्तन देखा जाता है।
उदाहरण:
- चलती ट्रेन में बैठे यात्री के लिए अन्य यात्री स्थिर लगते हैं, परंतु बाहर खड़े व्यक्ति के लिए वे गतिमान हैं।
- सड़क किनारे खड़े व्यक्ति के लिए पेड़ स्थिर हैं, परंतु बस में बैठे व्यक्ति के लिए वे गतिमान प्रतीत होते हैं।
2. दूरी एवं विस्थापन (Distance and Displacement)
दूरी (Distance)
वस्तु द्वारा तय किए गए पथ की कुल लंबाई को दूरी कहते हैं।
- यह अदिश राशि (Scalar Quantity) है — केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं।
- SI मात्रक: मीटर (m)
- दूरी सदैव धनात्मक होती है।
- यह पथ पर निर्भर करती है।
विस्थापन (Displacement)
वस्तु की प्रारंभिक एवं अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम दूरी को विस्थापन कहते हैं।
- यह सदिश राशि (Vector Quantity) है — परिमाण एवं दिशा दोनों होते हैं।
- SI मात्रक: मीटर (m)
- विस्थापन शून्य, धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है।
- यह पथ पर निर्भर नहीं करता।
दूरी और विस्थापन में अंतर
| गुण | दूरी | विस्थापन |
|---|---|---|
| परिभाषा | पथ की कुल लंबाई | प्रारंभिक एवं अंतिम स्थिति के बीच न्यूनतम दूरी |
| प्रकार | अदिश | सदिश |
| परिमाण | सदैव धनात्मक | धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य |
| पथ पर निर्भरता | निर्भर | निर्भर नहीं |
| मात्रक | मीटर | मीटर |
उदाहरण:
- यदि कोई वस्तु O से A (50 km) तक जाए और वापस O पर आ जाए:
- दूरी = 50 + 50 = 100 km
- विस्थापन = 0 km
- यदि कोई व्यक्ति 3 m पूर्व, 8 m उत्तर, 3 m पश्चिम चले:
- दूरी = 3 + 8 + 3 = 14 m
- विस्थापन = 8 m (उत्तर दिशा में)
3. चाल (Speed)
वस्तु द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी को चाल कहते हैं।
चाल=कुल समयकुल तय दूरी
- यह अदिश राशि है।
- SI मात्रक: m/s (मीटर/सेकंड)
- अन्य मात्रक: km/h
- औसत चाल: कुल दूरी / कुल समय
एकांक परिवर्तन
1 km/h=3600 s1000 m=185 m/s1 m/s=518 km/h=3.6 km/h
एकसमान एवं असमान चाल
| प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| एकसमान चाल | समान समय में समान दूरी | स्थिर गति से चलती बस |
| असमान चाल | समान समय में असमान दूरी | शहर में चलती बस |
4. वेग (Velocity)
वस्तु द्वारा इकाई समय में किसी निश्चित दिशा में तय किया गया विस्थापन वेग कहलाता है।
वेग=समयविस्थापन
- यह सदिश राशि है।
- SI मात्रक: m/s
- वेग की दिशा विस्थापन की दिशा में होती है।
- औसत वेग: कुल विस्थापन / कुल समय
चाल और वेग में अंतर
| गुण | चाल | वेग |
|---|---|---|
| परिभाषा | इकाई समय में दूरी | इकाई समय में विस्थापन |
| प्रकार | अदिश | सदिश |
| दिशा | नहीं | हाँ |
| ऋणात्मक | नहीं | हो सकता है |
उदाहरण: यदि कार A से B तक 40 km/h से जाए और 60 km/h से वापस आए:
- औसत चाल = 48 km/h
- औसत वेग = 0 (क्योंकि विस्थापन शून्य है)
5. गति के ग्राफ (Graphs of Motion)
दूरी-समय ग्राफ (Distance-Time Graph)
- x-अक्ष: समय
- y-अक्ष: दूरी
- ढाल (Slope): चाल को दर्शाता है
| ग्राफ | अर्थ |
|---|---|
| सरल रेखा (मूल बिंदु से) | एकसमान चाल |
| x-अक्ष के समांतर रेखा | वस्तु स्थिर है |
| वक्र रेखा | असमान चाल |
ढाल = (s₂ − s₁) / (t₂ − t₁)
वेग-समय ग्राफ (Velocity-Time Graph)
- ढाल: त्वरण को दर्शाता है
- वक्र के नीचे का क्षेत्रफल: विस्थापन को दर्शाता है
| ग्राफ | अर्थ |
|---|---|
| x-अक्ष के समांतर रेखा | एकसमान वेग (त्वरण = 0) |
| सरल ढलवाँ रेखा | एकसमान त्वरण |
| वक्र रेखा | असमान त्वरण |
6. त्वरण (Acceleration)
वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं।
त्वरण=समयवेग में परिवर्तनa=tv−u
जहाँ:
- u = प्रारंभिक वेग
- v = अंतिम वेग
- t = समय
- यह सदिश राशि है।
- SI मात्रक: m/s²
- यदि त्वरण वेग की दिशा में हो → धनात्मक
- यदि त्वरण वेग के विपरीत हो → ऋणात्मक (मंदन/Deceleration)
एकसमान त्वरण: जब वेग में परिवर्तन की दर स्थिर हो।
7. गति के समीकरण (Equations of Motion)
एकसमान त्वरण के लिए:
प्रथम समीकरण (वेग-समय संबंध)
v=u+at
द्वितीय समीकरण (स्थिति-समय संबंध)
s=ut+21at2
तृतीय समीकरण (वेग-स्थिति संबंध)
v2−u2=2as
जहाँ:
- u = प्रारंभिक वेग
- v = अंतिम वेग
- a = त्वरण
- t = समय
- s = विस्थापन
ग्राफीय विधि से व्युत्पत्ति
प्रथम समीकरण:
वेग-समय ग्राफ में ढाल = त्वरणa=tv−u⇒v=u+at
द्वितीय समीकरण:
ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापनs=ut+21at2
तृतीय समीकरण:s=2(u+v)×t
t = (v − u)/a रखने पर:v2−u2=2as
8. एकसमान वृत्तीय गति (Uniform Circular Motion)
जब कोई वस्तु वृत्तीय पथ पर एकसमान चाल से चलती है, तो उसकी गति एकसमान वृत्तीय गति कहलाती है।
विशेषताएँ:
- चाल स्थिर रहती है।
- वेग की दिशा प्रत्येक बिंदु पर बदलती है (स्पर्श रेखा के अनुदिश)।
- वेग सदैव बदलता रहता है → त्वरण उत्पन्न होता है।
- त्वरण सदैव केंद्र की ओर होता है (अभिकेंद्रीय त्वरण)।
उदाहरण:
- पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर घूमना
- चंद्रमा का पृथ्वी के चारों ओर घूमना
- घड़ी की सुइयों की गति
- पंखे के ब्लेड की गति
सूत्र:v=t2πr
जहाँ:
- r = वृत्त की त्रिज्या
- t = एक चक्कर में लगा समय
