1. परमाणु की कहानी (Story of the Atom)
प्राचीन विचार
| विचारक | योगदान |
|---|---|
| महर्षि कणाद (500 ई.पू.) | पदार्थ को विभाजित करते जाने पर अंततः अविभाज्य कण मिलेंगे — इन्हें परमाणु कहा। |
| ल्यूसिपस एवं डेमोक्रिटस (यूनान) | अविभाज्य कणों को Atom कहा (जिसका अर्थ है — जिसे काटा न जा सके)। |
| एपिक्यूरस (306 ई.पू.) | सभी वस्तुएँ परमाणुओं से बनी हैं। |
| लुक्रेटियस | ‘Nature of Things’ कविता में परमाणुओं का उल्लेख। |
डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (1808)
जॉन डाल्टन ने निम्नलिखित प्रस्ताव रखे:
- सभी पदार्थ परमाणुओं से बने हैं।
- परमाणु अविभाज्य, अत्यंत सूक्ष्म कण हैं — जिन्हें न बनाया जा सकता है और न नष्ट किया जा सकता है।
- एक ही तत्व के परमाणु द्रव्यमान एवं रासायनिक गुणों में समान होते हैं।
- भिन्न तत्वों के परमाणुओं के द्रव्यमान एवं रासायनिक गुण भिन्न होते हैं।
- परमाणु छोटे पूर्ण संख्याओं के अनुपात में मिलकर यौगिक बनाते हैं।
- किसी यौगिक में परमाणुओं की सापेक्ष संख्या एवं प्रकार निश्चित होते हैं।
2. गुणित अनुपात का नियम
(Law of Multiple Proportions)
जब दो तत्व एक से अधिक यौगिक बनाते हैं, तो एक तत्व के निश्चित द्रव्यमान से संयोग करने वाले दूसरे तत्व के द्रव्यमान सरल पूर्ण संख्या अनुपात में होते हैं।
उदाहरण:
| यौगिक | कार्बन | ऑक्सीजन |
|---|---|---|
| कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) | 3 g | 4 g |
| कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) | 3 g | 8 g |
ऑक्सीजन का अनुपात = 4 : 8 = 1 : 2 (सरल पूर्ण संख्या अनुपात)
3. परमाणु अविभाज्य है या नहीं?
डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के बाद अनेक प्रयोग किए गए जिन्होंने परमाणु की संरचना को नई दिशा दी।
कैथोड किरणें (Cathode Rays)
गोल्डस्टीन (1850–1930):
निम्न दाब पर गैस भरी काँच की नली में उच्च वोल्टता लगाने पर कैथोड से चमकीली किरणें निकलती हैं — इन्हें कैथोड किरणें कहा।
शस्टर:
कैथोड किरणें धनात्मक प्लेट (एनोड) की ओर मुड़ जाती हैं — इससे सिद्ध हुआ कि ये ऋणात्मक आवेशित कणों से बनी हैं।
जे.जे. थॉमसन (1856–1940):
इन ऋणात्मक कणों का द्रव्यमान एवं आवेश ज्ञात किया। इन्हें इलेक्ट्रॉन नाम दिया।
- इलेक्ट्रॉन सभी परमाणुओं का अवपरमाणुक कण है।
- थॉमसन को 1906 में नोबेल पुरस्कार मिला।
4. थॉमसन का परमाणु मॉडल
(Plum Pudding Model)
थॉमसन ने प्लम पुडिंग मॉडल प्रस्तुत किया:
- परमाणु में धनात्मक आवेश का गोलाकार बादल होता है।
- इसमें ऋणात्मक आवेशित इलेक्ट्रॉन धँसे रहते हैं।
- धनात्मक एवं ऋणात्मक आवेश बराबर होने से परमाणु विद्युत उदासीन होता है।
उदाहरण: तरबूज — लाल भाग = धनात्मक बादल, काले बीज = इलेक्ट्रॉन।
5. रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग
प्रयोग
ई. रदरफोर्ड एवं उनके छात्र गाइगर और मार्सडेन ने सोने की पतली पन्नी (100 nm) पर उच्च ऊर्जा अल्फा कणों (धनात्मक आवेशित, हीलियम परमाणु के द्रव्यमान के बराबर) की बमबारी की।
अवलोकन
- अधिकांश अल्फा कण सीधे निकल गए — परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त है।
- कुछ कण विक्षेपित हुए — धनात्मक आवेश अत्यंत छोटे आयतन में केंद्रित है।
- 20,000 में केवल 1 कण 180° पर वापस आया — परमाणु का द्रव्यमान अत्यंत सूक्ष्म केंद्र में केंद्रित है।
निष्कर्ष
- परमाणु के केंद्र में नाभिक (Nucleus) होता है।
- नाभिक में धनात्मक आवेश एवं अधिकांश द्रव्यमान केंद्रित होता है।
- नाभिक की त्रिज्या परमाणु की त्रिज्या से 10⁵ गुना छोटी होती है।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कक्षाओं (Orbits) में घूमते हैं।
रदरफोर्ड को 1908 में नोबेल पुरस्कार मिला। इन्हें नाभिकीय रसायन का जनक कहा जाता है।
6. बोर-बरी योजना (Bohr-Bury Scheme)
नील्स बोर एवं बरी ने इलेक्ट्रॉनों के वितरण का नियम प्रस्तुत किया:
नियम
- किसी कक्षा में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 2n²
- K (n=1) → 2
- L (n=2) → 8
- M (n=3) → 18
- N (n=4) → 32
- बाह्यतम कक्षा में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन (यदि K बाह्यतम हो तो 2)।
- इलेक्ट्रॉन क्रमबद्ध रूप से भरे जाते हैं — पहले भीतरी कक्षाएँ, फिर बाहरी।
- उपांतिम कक्षा में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन तभी प्रवेश करते हैं जब अंतिम कक्षा में 2 इलेक्ट्रॉन आ जाएँ।
उदाहरण: कैल्शियम (20) → 2, 8, 8, 2 (न कि 2, 8, 9, 1)
इलेक्ट्रॉन वितरण (प्रथम 18 तत्व)
| तत्व | प्रतीक | इलेक्ट्रॉन विन्यास |
|---|---|---|
| हाइड्रोजन | H | 1 |
| हीलियम | He | 2 |
| लिथियम | Li | 2, 1 |
| बेरिलियम | Be | 2, 2 |
| बोरॉन | B | 2, 3 |
| कार्बन | C | 2, 4 |
| नाइट्रोजन | N | 2, 5 |
| ऑक्सीजन | O | 2, 6 |
| फ्लोरीन | F | 2, 7 |
| नियॉन | Ne | 2, 8 |
| सोडियम | Na | 2, 8, 1 |
| मैग्नीशियम | Mg | 2, 8, 2 |
| एल्युमिनियम | Al | 2, 8, 3 |
| सिलिकॉन | Si | 2, 8, 4 |
| फॉस्फोरस | P | 2, 8, 5 |
| सल्फर | S | 2, 8, 6 |
| क्लोरीन | Cl | 2, 8, 7 |
| आर्गन | Ar | 2, 8, 8 |
7. अवपरमाणुक कण (Subatomic Particles)
| कण | आवेश | खोजकर्ता | वर्ष |
|---|---|---|---|
| इलेक्ट्रॉन | ऋणात्मक (−) | जे.जे. थॉमसन | 1897 |
| प्रोटॉन | धनात्मक (+) | गोल्डस्टीन (कैनाल किरणें) | 1886 |
| न्यूट्रॉन | उदासीन (0) | जे. चैडविक | 1932 |
- नाभिक = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन (न्यूक्लियॉन)
- उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या = इलेक्ट्रॉनों की संख्या
8. परमाणु क्रमांक एवं द्रव्यमान संख्या
परमाणु क्रमांक (Z)
परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या = परमाणु क्रमांक
द्रव्यमान संख्या (A)
नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन + न्यूट्रॉन की कुल संख्या = द्रव्यमान संख्या
न्यूट्रॉनों की संख्या = A − Z
संकेतन
ZAX
उदाहरण:1123Na
- प्रोटॉन = 11
- इलेक्ट्रॉन = 11
- न्यूट्रॉन = 23 − 11 = 12
9. समस्थानिक (Isotopes)
जिन परमाणुओं का परमाणु क्रमांक समान हो परंतु द्रव्यमान संख्या भिन्न हो, उन्हें समस्थानिक कहते हैं।
उदाहरण:
| समस्थानिक | प्रोटॉन | न्यूट्रॉन |
|---|---|---|
| क्लोरीन-35 | 17 | 18 |
| क्लोरीन-37 | 17 | 20 |
| कार्बन-12 | 6 | 6 |
| कार्बन-14 | 6 | 8 |
उपयोग:
- कोबाल्ट का समस्थानिक — कैंसर उपचार
- आयोडीन का समस्थानिक — घेंघा उपचार
- यूरेनियम का समस्थानिक — नाभिकीय रिएक्टर में ईंधन
10. समभारिक (Isobars)
जिन परमाणुओं की द्रव्यमान संख्या समान हो परंतु परमाणु क्रमांक भिन्न हो, उन्हें समभारिक कहते हैं।
उदाहरण:614Cऔर714N
दोनों की द्रव्यमान संख्या 14 है, परंतु परमाणु क्रमांक 6 और 7 भिन्न हैं।
11. सापेक्ष परमाणु द्रव्यमान (Relative Atomic Mass)
- डाल्टन ने हाइड्रोजन को मानक माना (द्रव्यमान = 1)।
- वर्तमान में कार्बन-12 को मानक माना जाता है।
- क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान:
100(75×35)+(25×37)=35.5 u
कारण: क्लोरीन प्रकृति में Cl-35 (75%) और Cl-37 (25%) के रूप में पाई जाती है।
