1️⃣ DIET का पूरा नाम
DIET = District Institute of Education and Training
(जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान)
2️⃣ DIET की स्थापना कब और क्यों?
🔹 स्थापना वर्ष
👉 1987–88
🔹 स्थापना का आधार
👉 राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 1986
📌 NEP-1986 में यह स्पष्ट किया गया कि
प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जिला स्तर पर एक सशक्त शैक्षिक संस्था आवश्यक है।
इसी उद्देश्य से DIET की स्थापना की गई।
3️⃣ DIET की स्थापना का मुख्य उद्देश्य
DIET की स्थापना का मूल उद्देश्य था —
- प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार
- शिक्षक प्रशिक्षण को व्यवस्थित और व्यावहारिक बनाना
- शैक्षिक योजनाओं का जिला स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन
- स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा का विकास
4️⃣ DIET की आवश्यकता क्यों पड़ी? (Background)
DIET की स्थापना से पहले —
- शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाएँ केंद्रीकृत थीं
- ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रशिक्षण की सीधी पहुँच नहीं थी
- प्रशिक्षण में स्थानीय समस्याओं की अनदेखी होती थी
📌 इसलिए सरकार ने सोचा —
“शिक्षा की जड़ें यदि मजबूत करनी हैं, तो प्रशिक्षण को जिले तक लाना होगा।”
5️⃣ DIET की स्थापना का स्तर
- DIET की स्थापना जिला स्तर (District Level) पर की गई
- प्रत्येक जिले में एक DIET स्थापित करने की योजना
📌 Exam Line
👉 DIET प्राथमिक शिक्षा का जिला स्तरीय अकादमिक केंद्र है।
6️⃣ DIET की स्थापना के प्रमुख उद्देश्य (Point-wise)
- प्राथमिक शिक्षकों का पूर्व-सेवा प्रशिक्षण (Pre-Service Training)
- कार्यरत शिक्षकों का सेवा-कालीन प्रशिक्षण (In-Service Training)
- शैक्षिक योजनाओं का शैक्षणिक समर्थन
- शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में नवाचार
- स्थानीय स्तर पर शैक्षिक अनुसंधान
- शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाना
- सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा (UPE) को सशक्त बनाना
7️⃣ DIET की स्थापना से जुड़े प्रमुख तथ्य (Exam Facts)
✔ स्थापना: 1987–88
✔ आधार: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986
✔ स्तर: जिला स्तर
✔ लक्ष्य समूह:
- प्राथमिक शिक्षक
- उच्च प्राथमिक शिक्षक
- शिक्षा अधिकारी
✔ प्रकृति: शैक्षिक एवं प्रशिक्षण संस्था
8️⃣ DIET और प्राथमिक शिक्षा का संबंध
DIET को कहा जाता है —
“प्राथमिक शिक्षा की रीढ़”
क्योंकि —
- वही शिक्षक तैयार करता है
- वही शिक्षण गुणवत्ता सुधारता है
- वही नीतियों को जमीनी स्तर तक पहुँचाता है
9️⃣ DIET की स्थापना का शैक्षिक महत्व
- शिक्षक-केंद्रित शिक्षा से छात्र-केंद्रित शिक्षा की ओर बदलाव
- ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों तक प्रशिक्षण की पहुँच
- स्थानीय समस्याओं पर आधारित समाधान
- सतत शिक्षक विकास (Continuous Professional Development)
