पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) : सम्पूर्ण तथ्यात्मक अध्ययन
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1️⃣ पारिस्थितिकी तंत्र क्या है?
विविध प्रकार के वातावरण में भिन्न-भिन्न प्रकार के जीव पाए जाते हैं।
👉 सभी जीव अपने चारों ओर के वातावरण से प्रभावित होते हैं और उसी वातावरण के साथ
👉 एक विशिष्ट तंत्र का निर्माण करते हैं, जिसे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) कहते हैं।
जीवों और उनके वातावरण के बीच के पारस्परिक संबंधों के अध्ययन को
👉 पारिस्थितिकी (Ecology) कहा जाता है।
2️⃣ पारिस्थितिकी तंत्र की परिभाषा
“जीवों (पौधे, जंतु, सूक्ष्म जीव) तथा उनके भौतिक वातावरण (मिट्टी, जल, वायु, ताप, प्रकाश) के बीच पारस्परिक क्रियाओं से बना तंत्र पारिस्थितिकी तंत्र कहलाता है।”

3️⃣ पारिस्थितिकी तंत्र के घटक
पारिस्थितिकी तंत्र को दो प्रमुख घटकों में विभाजित किया जाता है—
1. जैविक / जीवीय घटक (Biotic Components)
2. अजैविक / अजीवीय घटक (Abiotic Components)
🌱 1. जैविक या जीवीय घटक (Biotic Components)
वे सभी जीवित तत्व जो पारिस्थितिकी तंत्र का भाग होते हैं,
👉 जैविक घटक कहलाते हैं।
इन्हें दो मुख्य भागों में बाँटा जाता है—
(i) स्वपोषित घटक (Autotrophs / Producers)
वे जीव जो
- अकार्बनिक पदार्थों (जल, CO₂, खनिज) से
- सूर्य की ऊर्जा की सहायता से
- प्रकाश संश्लेषण द्वारा
👉 स्वयं अपना भोजन बनाते हैं, स्वपोषित कहलाते हैं।
विशेषताएँ:
- ऊर्जा का मूल स्रोत
- खाद्य शृंखला का प्रथम स्तर
- अन्य सभी जीव इन्हीं पर निर्भर
उदाहरण:
- हरे पौधे
- शैवाल
- कुछ जीवाणु
👉 इन्हें उत्पादक (Producers) भी कहते हैं।
(ii) परपोषित घटक (Heterotrophs)
वे जीव जो
👉 स्वयं भोजन नहीं बना सकते और
👉 स्वपोषित जीवों द्वारा निर्मित भोजन पर निर्भर रहते हैं,
परपोषित कहलाते हैं।
कार्यात्मक दृष्टि से इन्हें तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है—
(a) उत्पादक (Producers)
- प्राथमिक उत्पादक → हरे पौधे
- गौण उत्पादक → वे जीव जो पौधों से भोजन लेकर
प्रोटीन, वसा आदि का निर्माण करते हैं (मनुष्य, पशु)
(b) उपभोक्ता (Consumers)
उपभोक्ता वे जीव हैं जो
👉 दूसरे जीवों को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं।

उपभोक्ताओं के प्रकार:
1️⃣ प्राथमिक उपभोक्ता (Primary Consumers)
- शाकाहारी जीव
- हरी पत्तियाँ, घास खाते हैं
उदाहरण:
गाय, बकरी, हिरण, मनुष्य
2️⃣ द्वितीय / गौण उपभोक्ता (Secondary Consumers)
- मांसाहारी जीव
- शाकाहारी जीवों को खाते हैं
उदाहरण:
शेर, चीता, मेंढक, मनुष्य
3️⃣ तृतीय उपभोक्ता (Tertiary Consumers)
- उच्च श्रेणी के मांसाहारी
- द्वितीय उपभोक्ताओं को खाते हैं
उदाहरण:
साँप → मेंढक को खाता है
मोर → साँप को खाता है

(c) अपघटक (Decomposers)
वे जीव जो
👉 मरे हुए पौधों और जंतुओं को
👉 सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदल देते हैं।
मुख्य अपघटक:
- जीवाणु (Bacteria)
- कवक (Fungi)
भूमिका:
- पोषक तत्वों का पुनः चक्रण
- मृदा की उर्वरता बनाए रखना
- वातावरण को स्वच्छ रखना
🌍 2. अजैविक या अजीवीय घटक (Abiotic Components)
वे सभी निर्जीव तत्व जो जीवों के जीवन को प्रभावित करते हैं,
👉 अजैविक घटक कहलाते हैं।
इन्हें तीन भागों में बाँटा जाता है—
(i) जलवायु तत्व (Climatic Factors)
- सूर्य का प्रकाश
- तापक्रम
- वर्षा
- आर्द्रता
- वायु
👉 ये सभी जीवों की वृद्धि, वितरण और जीवन-चक्र को प्रभावित करते हैं।
(ii) कार्बनिक पदार्थ (Organic Matter)
- प्रोटीन
- कार्बोहाइड्रेट
- वसा
- ह्यूमस
👉 ये जीवों के शरीर निर्माण एवं ऊर्जा का स्रोत हैं।
(iii) अकार्बनिक पदार्थ (Inorganic Matter)
- कैल्शियम
- कार्बन
- हाइड्रोजन
- ऑक्सीजन
- नाइट्रोजन
- सल्फर
👉 ये तत्व पोषक चक्र (Nutrient Cycle) में भाग लेते हैं।
4️⃣ पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार
- स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र
(वन, घासस्थल, मरुस्थल) - जलीय पारिस्थितिकी तंत्र
(तालाब, नदी, झील, समुद्र)
5️⃣ पारिस्थितिकी तंत्र का महत्त्व
- ऊर्जा प्रवाह को बनाए रखना
- खाद्य शृंखला का संतुलन
- जैव विविधता का संरक्षण
- पर्यावरणीय संतुलन
- मानव जीवन का आधार
📌 निष्कर्ष
पारिस्थितिकी तंत्र
👉 जीवों और वातावरण के बीच सामंजस्य का जीवंत उदाहरण है।
यदि किसी एक घटक में असंतुलन हो जाए, तो
👉 पूरा तंत्र प्रभावित हो जाता है।
इसलिए
🌱 प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
🌍 पर्यावरण संतुलन के लिए अनिवार्य है।
