पृथ्वी की गतियाँ (Motions of the Earth) – Every Facts in Detail
पृथ्वी निरंतर गतिशील है। पृथ्वी की ये गतियाँ दिन–रात, वर्ष, ऋतु परिवर्तन, तापमान, तथा जलवायु को प्रभावित करती हैं। पृथ्वी की गतियों को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है—
- घूर्णन (Rotation)
- परिक्रमण (Revolution)
🌍 1. घूर्णन (Rotation)
🔹 परिभाषा
- पृथ्वी का अपने अक्ष (Axis) पर घूमना घूर्णन कहलाता है।
🔹 पृथ्वी का अक्ष (Axis)
- पृथ्वी का अक्ष एक काल्पनिक रेखा (Imaginary Line) है।
- यह उत्तर ध्रुव (North Pole) और दक्षिण ध्रुव (South Pole) को जोड़ती है।
- पृथ्वी का अक्ष अपने कक्षीय समतल (Orbital Plane) से लगभग 66½° (या 23½° झुका हुआ) होता है।
🔹 घूर्णन की अवधि
- पृथ्वी अपने अक्ष पर एक पूरा चक्कर:
- लगभग 24 घंटे में लगाती है।
🔹 घूर्णन के प्रभाव
- दिन और रात का बनना
- पृथ्वी का जो भाग सूर्य की ओर होता है वहाँ दिन होता है।
- जो भाग सूर्य से दूर होता है वहाँ रात होती है।
- तापमान में अंतर
- दिन में तापमान अधिक
- रात में तापमान कम
- दैनिक जीवन की क्रियाएँ
- समय की गणना
- जैविक घड़ी (Biological Clock)

🌗 प्रदीप्ति वृत्त (Circle of Illumination)
- ग्लोब पर वह काल्पनिक वृत्त जो:
- दिन और रात को अलग करता है
- इसे प्रदीप्ति वृत्त कहते हैं।
- यह पृथ्वी के घूर्णन के साथ-साथ निरंतर बदलता रहता है।
☀️ 2. परिक्रमण (Revolution)
🔹 परिभाषा
- पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर एक निश्चित कक्षा (Orbit) में घूमना परिक्रमण कहलाता है।
🔹 कक्षीय समतल (Orbital Plane)
- सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की कक्षा जिस समतल में होती है, उसे कक्षीय समतल कहते हैं।
🔹 परिक्रमण की अवधि
- पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर:
- 365 दिन और 6 घंटे में पूरा करती है।
- इसी समय को एक वर्ष (One Year) कहा जाता है।
📅 लीप वर्ष (Leap Year)
- पृथ्वी के परिक्रमण में हर वर्ष के:
- 6 घंटे अतिरिक्त रह जाते हैं।
- ये 6 घंटे:
- 4 वर्षों में 24 घंटे (1 दिन) हो जाते हैं।
- यह अतिरिक्त दिन:
- फरवरी महीने में जोड़ा जाता है।
- इसलिए:
- हर चौथा वर्ष 366 दिनों का होता है।
- फरवरी 29 दिन की होती है।
- ऐसे वर्ष को लीप वर्ष (Leap Year) कहते हैं।
🌦️ ऋतु परिवर्तन (Change of Seasons)
ऋतुओं में परिवर्तन परिक्रमण और पृथ्वी के अक्ष के झुकाव के कारण होता है।
ऋतु परिवर्तन के मुख्य कारण:
- पृथ्वी का अक्ष 23½° झुका होना
- सूर्य के चारों ओर पृथ्वी का परिक्रमण
- सूर्य की किरणों का सीधा या तिरछा पड़ना

🌞 21 जून – उत्तर अयनांत (Summer Solstice)
🔹 स्थिति
- उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका होता है।
- सूर्य की किरणें कर्क रेखा (23½° उत्तर) पर सीधी पड़ती हैं।
🔹 प्रभाव
- उत्तरी गोलार्ध में:
- सबसे लंबा दिन
- सबसे छोटी रात
- ग्रीष्म ऋतु (Summer Season)
- पृथ्वी की इस अवस्था को:
- उत्तर अयनांत कहते हैं।
❄️ 22 दिसंबर – दक्षिण अयनांत (Winter Solstice)
🔹 स्थिति
- दक्षिणी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका होता है।
- सूर्य की किरणें मकर रेखा (23½° दक्षिण) पर सीधी पड़ती हैं।
🔹 प्रभाव
- उत्तरी गोलार्ध में:
- सबसे छोटी दिन
- सबसे लंबी रात
- शीत ऋतु (Winter Season)
- दक्षिणी गोलार्ध में:
- ग्रीष्म ऋतु
- पृथ्वी की इस अवस्था को:
- दक्षिण अयनांत कहा जाता है।
📌 महत्वपूर्ण तथ्य
- इसी कारण ऑस्ट्रेलिया में:
- ग्रीष्म ऋतु में क्रिसमस मनाया जाता है।

⚖️ 21 मार्च और 23 सितंबर – विषुव (Equinox)
🔹 स्थिति
- सूर्य की किरणें विषुवत् वृत्त (Equator) पर सीधी पड़ती हैं।
- कोई भी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका नहीं होता।
🔹 प्रभाव
- पूरी पृथ्वी पर:
- दिन और रात बराबर होते हैं।
- इसे विषुव (Equinox) कहा जाता है।
🔹 प्रकार
- 21 मार्च → वसंत विषुव (Spring Equinox)
- 23 सितंबर → शरद विषुव (Autumn Equinox)
🧠 परीक्षा उपयोगी एक-पंक्ति तथ्य (One-Liners)
- घूर्णन → दिन–रात
- परिक्रमण → वर्ष व ऋतु
- पृथ्वी का अक्ष झुकाव → 23½°
- 21 जून → उत्तर अयनांत
- 22 दिसंबर → दक्षिण अयनांत
- 21 मार्च / 23 सितंबर → विषुव
- लीप वर्ष → 366 दिन
- फरवरी 29 दिन → लीप वर्ष
🌏 निष्कर्ष
पृथ्वी की गतियाँ—
- पृथ्वी पर समय, ऋतु, जलवायु और जीवन को नियंत्रित करती हैं।
- घूर्णन के बिना:
- दिन–रात संभव नहीं।
- परिक्रमण और अक्षीय झुकाव के बिना:
- ऋतुओं का अस्तित्व नहीं।
- इसलिए पृथ्वी की गतियाँ भूगोल की आधारशिला हैं।
