ऊर्जा के परंपरागत एवं गैर-परंपरागत स्रोत
(Conventional and Non-Conventional Sources of Energy)
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🔶 ऊर्जा क्या है?
ऊर्जा वह क्षमता है जिससे कार्य किया जाता है, ऊष्मा व प्रकाश प्राप्त होता है और मशीनें चलती हैं। मानव सभ्यता का विकास ऊर्जा के निरंतर उपयोग से ही संभव हुआ है।
ऊर्जा के स्रोतों को दो भागों में बाँटा जाता है—
1️⃣ परंपरागत स्रोत (Conventional Sources)
2️⃣ गैर-परंपरागत स्रोत (Non-Conventional Sources)
1️⃣ परंपरागत ऊर्जा स्रोत (Conventional Sources)

वे स्रोत जो लंबे समय से उपयोग में हैं और जिनका भंडार सीमित है, परंपरागत ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं।
मुख्य परंपरागत स्रोत:
- ईंधन (Firewood)
- जीवाश्मी ईंधन (Fossil Fuels)
- जल विद्युत (Hydropower)
🔥 (क) ईंधन – लकड़ी (Firewood)
- खाना पकाने और ऊष्मा प्राप्त करने का सबसे पुराना साधन
- भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में 50% से अधिक ऊर्जा लकड़ी से प्राप्त
- हानियाँ:
- वनों की कटाई
- धुआँ → वायु प्रदूषण
- स्वास्थ्य समस्याएँ
⛏️ (ख) जीवाश्मी ईंधन (Fossil Fuels)
लाखों वर्षों में दबे हुए पौधों और जीवों के अवशेषों से बने ईंधन।
विशेषताएँ:
- सीमित संसाधन
- समाप्त होने वाले (Non-renewable)
- अधिक प्रदूषण
प्रकार:
- कोयला
- पेट्रोलियम
- प्राकृतिक गैस
i️⃣ कोयला (Coal)
- तापीय विद्युत (Thermal Power) का मुख्य स्रोत
- लाखों वर्ष पूर्व दलदली क्षेत्रों में दबे फर्न से बना
- Buried Sunshine (अंतर्हित धूप) कहा जाता है
उपयोग:
- बिजली उत्पादन
- इस्पात उद्योग
- ईंधन
भारत के प्रमुख क्षेत्र:
- रानीगंज (पश्चिम बंगाल)
- झरिया, धनबाद, बोकारो (झारखंड)
ii️⃣ पेट्रोलियम (Petroleum)
- गाढ़ा, काला तरल
- शैलों की परतों के बीच पाया जाता है
- तटीय एवं अपतटीय क्षेत्रों में ड्रिलिंग
परिष्करण से प्राप्त उत्पाद:
- पेट्रोल
- डीज़ल
- केरोसिन
- मोम
- प्लास्टिक
- स्नेहक
👉 पेट्रोलियम को काला सोना (Black Gold) कहते हैं।
भारत के प्रमुख क्षेत्र:
- डिग्बोई (असम)
- बॉम्बे हाई
- कृष्णा-गोदावरी बेसिन
iii️⃣ प्राकृतिक गैस (Natural Gas)
- पेट्रोलियम के साथ पाई जाती है
- सबसे स्वच्छ जीवाश्मी ईंधन
CNG (Compressed Natural Gas):
- पर्यावरण-अनुकूल
- पेट्रोल/डीज़ल से कम प्रदूषण
- वाहनों में प्रयोग
💧 (ग) जल विद्युत (Hydropower)
- बाँधों में संग्रहित जल से विद्युत उत्पादन
- ऊँचाई से गिरता जल → टरबाइन → जेनरेटर
विशेषताएँ:
- नवीकरणीय
- प्रदूषण-मुक्त
- बाढ़ नियंत्रण एवं सिंचाई में सहायक
भारत की प्रमुख परियोजनाएँ:
- भाखड़ा-नंगल
- गांधी सागर
- नागार्जुन सागर
- दामोदर घाटी परियोजना
👉 विश्व की लगभग ¼ ऊर्जा जल विद्युत से प्राप्त होती है।
2️⃣ गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत
(Non-Conventional / Renewable Sources)
वे ऊर्जा स्रोत जो
✔ नवीकरणीय हैं
✔ प्रदूषण कम करते हैं
✔ भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए अनिवार्य हैं
☀️ (क) सौर ऊर्जा (Solar Energy)
- सूर्य से प्राप्त ऊर्जा
- सौर सेल → सौर पैनल → विद्युत
उपयोग:
- सौर कुकर
- सौर तापक
- सोलर ड्रायर
- स्ट्रीट लाइट
- ट्रैफिक सिग्नल
विशेष लाभ:
- असीमित
- प्रदूषण-मुक्त
- उष्णकटिबंधीय देशों के लिए अत्यंत उपयोगी
🌬️ (ख) पवन ऊर्जा (Wind Energy)
- तेज़ व निरंतर हवाएँ → पवन चक्की → विद्युत

पवन फार्म स्थित:
- तटीय क्षेत्र
- पर्वतीय दर्रे
विशेषताएँ:
- स्वच्छ ऊर्जा
- ईंधन की आवश्यकता नहीं
- कम रख-रखाव
⚛️ (ग) परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy)
- यूरेनियम एवं थोरियम के नाभिकीय विखंडन से प्राप्त
- अत्यधिक ऊर्जा उत्पादन
भारत में परमाणु केंद्र:
- कलपक्कम (तमिलनाडु)
- तारापुर (महाराष्ट्र)
- राणा प्रताप सागर (राजस्थान)
- नरोरा (उत्तर प्रदेश)
- कैगा (कर्नाटक)
विशेष तथ्य:
- केरल की मोनाजाइट बालू में थोरियम प्रचुर मात्रा में
🌋 (घ) भूतापीय ऊर्जा (Geothermal Energy)
- पृथ्वी के अंदर की ताप ऊर्जा
- गर्म जल के झरनों से प्राप्त
उपयोग:
- विद्युत उत्पादन
- खाना पकाना
- स्नान एवं ऊष्मा
भारत में क्षेत्र:
- मणिकरण (हिमाचल प्रदेश)
- पूगा घाटी (लद्दाख)
🌊 (ङ) ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy)
- समुद्र में ज्वार-भाटा से उत्पन्न
- संकरे मुहानों पर बाँध बनाकर उपयोग

भारत में:
- कच्छ की खाड़ी
लाभ:
- विश्वसनीय
- दीर्घकालीन
- प्रदूषण-मुक्त
🔋 (च) बायोगैस (Biogas)
- जैविक अपशिष्ट का अपघटन
- मिथेन + CO₂ का मिश्रण
कच्चा माल:
- गोबर
- रसोई अपशिष्ट
- मृत पौधे-जीव

लाभ:
- स्वच्छ ईंधन
- विद्युत उत्पादन
- जैव खाद (Organic Manure) प्राप्त
📊 परंपरागत बनाम गैर-परंपरागत (संक्षेप तुलना)
| आधार | परंपरागत | गैर-परंपरागत |
|---|---|---|
| उपलब्धता | सीमित | असीमित |
| प्रदूषण | अधिक | बहुत कम |
| नवीकरणीय | नहीं | हाँ |
| भविष्य | अस्थिर | स्थायी |
📌 निष्कर्ष
भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए
👉 गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों का विकास और उपयोग अनिवार्य है।
परंपरागत स्रोतों का संयमित उपयोग और
नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार ही सतत विकास की कुंजी है।
