1. परमाणु के तीन मूलभूत कण (Sub-atomic Particles)
परमाणु स्वयं तीन अति-सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है:
- प्रोटॉन (p+): यह परमाणु के केंद्र (नाभिक) में होता है और इस पर धनात्मक (+) आवेश होता है।
- न्यूट्रॉन (n0): यह भी नाभिक में होता है, लेकिन इस पर कोई आवेश नहीं (उदासीन) होता।
- इलेक्ट्रॉन (e–): यह नाभिक के चारों ओर निश्चित कक्षाओं में चक्कर लगाता है और इस पर ऋणात्मक (-) आवेश होता है।

2. नाभिक (Nucleus)
परमाणु के केंद्र को ‘नाभिक’ कहते हैं।
- इसकी खोज रदरफोर्ड ने की थी।
- परमाणु का लगभग पूरा द्रव्यमान (वजन) इसी नाभिक में होता है।
- नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन एक साथ रहते हैं, जिन्हें सम्मिलित रूप से ‘न्यूक्लियॉन’ कहा जाता है।
3. कक्षाएँ या कोश (Orbits or Shells)
इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर मनमर्जी से नहीं घूमते, बल्कि निश्चित रास्तों पर घूमते हैं जिन्हें कोश (Shells) कहते हैं। इन्हें K, L, M, N नाम से जाना जाता है।
- अधिकतम इलेक्ट्रॉन क्षमता: किसी भी कक्षा में अधिकतम कितने इलेक्ट्रॉन होंगे, यह सूत्र 2n2 से तय होता है (जहाँ n कक्षा की संख्या है)।
- K (पहली कक्षा): 2(1)2 = 2 इलेक्ट्रॉन
- L (दूसरी कक्षा): 2(2)2 = 8 इलेक्ट्रॉन
4. परमाणु उदासीन क्यों होता है?
परमाणु पर समग्र रूप से कोई आवेश नहीं होता (वह न्यूट्रल होता है)। इसका कारण यह है कि:
परमाणु में प्रोटॉन की संख्या (धनात्मक) = इलेक्ट्रॉन की संख्या (ऋणात्मक)
चूँकि दोनों के आवेश बराबर और विपरीत होते हैं, वे एक-दूसरे को संतुलित कर देते हैं।
5. परमाणु मॉडल का विकास (इतिहास)
परमाणु की बनावट को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने अलग-अलग समय पर मॉडल दिए:
- थॉमसन का मॉडल: इसे ‘प्लम पुडिंग’ मॉडल कहते हैं (जैसे तरबूज में बीज)। उन्होंने बताया कि परमाणु एक धनावेशित गोला है जिसमें इलेक्ट्रॉन धंसे होते हैं।
- रदरफोर्ड का मॉडल: उन्होंने बताया कि परमाणु का अधिकांश भाग खाली है और केंद्र में एक ठोस नाभिक है।
- नील्स बोहर का मॉडल: इन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा स्तरों (कक्षाओं) में घूमते हैं और ऊर्जा खोते नहीं हैं।
6. परमाणु से जुड़ी दो मुख्य संख्याएँ
- परमाणु क्रमांक (Z): प्रोटॉनों की संख्या। यही तत्व की पहचान है।
- द्रव्यमान संख्या (A): प्रोटॉन + न्यूट्रॉन की संख्या।
उदाहरण (सोडियम – Na):
इलेक्ट्रॉन विन्यास = 2, 8, 1
परमाणु क्रमांक = 11 (इसमें 11 प्रोटॉन हैं)




