1. बल (Force)
बल वह बाह्य कारक है जो किसी वस्तु की स्थिर अवस्था या गतिमान अवस्था में परिवर्तन करता है या करने का प्रयास करता है।
बल के प्रकार:
- धक्का (Push)
- खिंचाव (Pull)
बल के प्रभाव:
- स्थिर वस्तु को गतिमान करना
- गतिमान वस्तु को रोकना
- वस्तु की चाल बढ़ाना/घटाना
- वस्तु की दिशा बदलना
- वस्तु की आकृति बदलना
SI मात्रक: न्यूटन (N)
2. जड़त्व (Inertia)
किसी वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपनी स्थिर अवस्था या एकसमान गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती है, जड़त्व कहलाता है।
गैलीलियो का विचार:
- यदि घर्षण बल शून्य हो जाए, तो गतिमान वस्तु सदैव गतिमान रहेगी और स्थिर वस्तु सदैव स्थिर रहेगी।
जड़त्व के उदाहरण:
- चलती बस के अचानक रुकने पर यात्री आगे झुक जाता है।
- बस के अचानक चलने पर यात्री पीछे झुक जाता है।
- कंबल को डंडे से पीटने पर धूल के कण अलग हो जाते हैं।
- पेड़ की शाखा हिलाने पर फल नीचे गिर जाते हैं।
3. जड़त्व एवं द्रव्यमान (Inertia and Mass)
किसी वस्तु का द्रव्यमान उसके जड़त्व का माप होता है।
- अधिक द्रव्यमान → अधिक जड़त्व
- कम द्रव्यमान → कम जड़त्व
उदाहरण:
- खाली बोतल को धक्का देना आसान, भरी बोतल को कठिन।
- एक व्यक्ति की साइकिल रोकना आसान, दो व्यक्तियों की कठिन।
SI मात्रक: किलोग्राम (kg)
4. संतुलित एवं असंतुलित बल (Balanced and Unbalanced Force)
संतुलित बल
जब किसी वस्तु पर लगने वाले बल परिमाण में समान एवं दिशा में विपरीत हों, तो वे संतुलित बल कहलाते हैं।
- कुल बल (Net Force) = 0
- वस्तु की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता।
असंतुलित बल
जब वस्तु पर लगने वाले बलों का कुल बल शून्य न हो, तो वे असंतुलित बल कहलाते हैं।
- वस्तु की अवस्था में परिवर्तन होता है।
- कुल बल = बड़ा बल − छोटा बल
5. न्यूटन का प्रथम गति नियम
(First Law of Motion)
“प्रत्येक वस्तु अपनी स्थिर अवस्था या एकसमान गति की अवस्था में तब तक बनी रहती है जब तक कि कोई असंतुलित बाह्य बल उस पर कार्य न करे।”
- इसे जड़त्व का नियम भी कहते हैं।
- बल की आवश्यकता नहीं, बल्कि असंतुलित बल की आवश्यकता होती है।
उदाहरण:
- चलती ट्रेन में ऊपर कूदने पर वापस उसी स्थान पर गिरना।
- धूल झाड़ने पर कंबल से धूल अलग होना।
6. रैखिक संवेग (Linear Momentum)
किसी वस्तु के द्रव्यमान एवं वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं।
p=m×v
जहाँ:
- p = संवेग
- m = द्रव्यमान
- v = वेग
- यह सदिश राशि है।
- दिशा = वेग की दिशा
- SI मात्रक: kg m/s
उदाहरण:
- क्रिकेट बॉल की तुलना में टेनिस बॉल का संवेग कम।
- तेज़ गति से चलती ट्रक का संवेग अधिक।
7. न्यूटन का द्वितीय गति नियम
(Second Law of Motion)
“किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर लगने वाले असंतुलित बल के अनुक्रमानुपाती होती है।”
F∝ΔtΔpF=ΔtΔp=tm(v−u)F=ma
जहाँ:
- F = बल
- m = द्रव्यमान
- a = त्वरण
- u = प्रारंभिक वेग
- v = अंतिम वेग
- t = समय
बल का SI मात्रक
1 N=1 kg×1 m/s2
1 न्यूटन बल: वह बल जो 1 kg द्रव्यमान की वस्तु में 1 m/s² का त्वरण उत्पन्न करे।
उदाहरण:
- क्रिकेटर गेंद को पकड़ते समय हाथ पीछे करता है — समय बढ़ने से बल कम लगता है।
- घास के ढेर पर कूदने पर कम चोट लगती है।
8. न्यूटन का तृतीय गति नियम
(Third Law of Motion)
“प्रत्येक क्रिया के बराबर एवं विपरीत प्रतिक्रिया होती है।”
F1=−F2
- क्रिया एवं प्रतिक्रिया दो भिन्न वस्तुओं पर कार्य करते हैं।
- दोनों बल परिमाण में समान, दिशा में विपरीत।
- कुल बल शून्य नहीं होता क्योंकि वे भिन्न वस्तुओं पर लगते हैं।
उदाहरण:
- चलना — पैर ज़मीन को पीछे धकेलता है, ज़मीन आगे धकेलती है।
- बंदूक से गोली चलाना — बंदूक पीछे हटती है (Recoil)।
- रॉकेट का प्रक्षेपण — गैसें नीचे, रॉकेट ऊपर।
- नाव से कूदना — नाव पीछे चली जाती है।
9. संवेग संरक्षण का नियम
(Law of Conservation of Momentum)
“बाह्य असंतुलित बल की अनुपस्थिति में दो वस्तुओं का कुल संवेग संरक्षित रहता है।”
अर्थात्:m1u1+m2u2=m1v1+m2v2
जहाँ:
- m₁, m₂ = द्रव्यमान
- u₁, u₂ = प्रारंभिक वेग
- v₁, v₂ = अंतिम वेग
व्युत्पत्ति (संघट्ट के लिए)
न्यूटन के तृतीय नियम से:FAB=−FBAtmB(vB−uB)=−tmA(vA−uA)mBvB−mBuB=−mAvA+mAuAmAvA+mBvB=mAuA+mBuB
अर्थ: संघट्ट से पहले का कुल संवेग = संघट्ट के बाद का कुल संवेग।
उदाहरण:
- बंदूक से गोली चलाने पर बंदूक का पीछे हटना।
- गुब्बारे से हवा निकलने पर गुब्बारे का आगे बढ़ना।
- रॉकेट का प्रक्षेपण।
