यह पाठ एक निबंध है जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकगीत, लोकगाथा, लोकनाट्य और लोकनृत्य परंपराओं तथा प्रसिद्ध कलाकारों का परिचय कराता है।
पाठ योजना: छत्तीसगढ़ की लोककलाएँ (कक्षा – 10वीं)
शिक्षण उद्देश्य:
- छात्र छत्तीसगढ़ की लोककलाओं की विविधता और विशिष्टताओं से परिचित हो सकें।
- छात्र लोकगीतों (ददरिया, सुवा, गौरा), लोकगाथाओं (पंडवानी) और लोकनाट्यों (नाचा) के सामाजिक व सांस्कृतिक महत्व को समझ सकें।
- छात्र लोकनृत्यों (पंथी, राउत नाचा, करमा) की विशेषताओं और उनसे जुड़े कलाकारों की पहचान कर सकें।
- छात्र पाठ में प्रयुक्त श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्दों (कला-काला, पवन-पावन) का अंतर समझ सकें।
Day 1: परिचय, लेखक परिचय और लोकगीत
- प्रवेश (5 मिनट): कक्षा में छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक नक्शे या लोकनृत्य (पंथी, करमा) की तस्वीरें दिखाएं। पूछें: “आपके घर या गाँव में शादी, त्योहार या फसल कटाई पर कौन से गीत गाए जाते हैं? उन गीतों का क्या महत्व है?” विद्यार्थियों से चर्चा करें।
- लेखक परिचय (10 मिनट): दानेश्वर शर्मा का परिचय दें। बताएं कि वे लोक साहित्य के अधिकारी विद्वान, हिंदी-छत्तीसगढ़ी के यशस्वी कवि और भिलाई इस्पात संयंत्र के पूर्व प्रबंधक हैं। उनकी प्रमुख कृतियाँ (छत्तीसगढ़ के लोक गीत, तपत कुसू भई तपत कुसू, लोक दर्शन) बताएं।
- सस्वर वाचन (5 मिनट): शिक्षक पाठ का पहला भाग (पृष्ठ 95-96) पढ़ें।
- व्याख्या (20 मिनट):
- लोक कला का महत्व: “लोक मानस ने धरती को माता और अपने को उसका बेटा माना है।” लोककला जीवन का दर्पण है।
- छत्तीसगढ़ की पहचान: छत्तीसगढ़ साहित्य, संगीत और कला की समृद्ध भूमि है। यहाँ के प्राचीन स्थलों (तुरतुरिया – वाल्मीकि आश्रम, आदि शंकराचार्य के गुरु गोविंद पाद स्वामी) का उल्लेख।
- प्रमुख लोक गीत:
- ददरिया: “ददरिया भृंगार गीत है… संध्या के बेला तरोई फूल रे” – लोक जीवन में श्रृंगार और प्रेम के गीत।
- सुवा (गीत): “सुगा” (तोता) और “सुगिया” नामक गीत। गोंड जाति की महिलाओं द्वारा गाया जाने वाला पारंपरिक गीत।
- गौरा (गीत): दीपावली के समय कार्तिक अमावस्या की रात को गौरी (पार्वती) की पूजा में गाया जाने वाला गीत।
- जैवारा: नवरात्रि में गेहूँ के अंकुरों (जैवारा) के माध्यम से शक्ति की आराधना।
- शब्दार्थ: प्रामाणिक, आभास, लयबद्ध, आषाढ़, पगिया, मुरैठा।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 3 लिखिए: “छत्तीसगढ़ी लोक गीत को अन्य भारतीय लोक गीतों से अधिक विशिष्ट क्यों माना जाता है?”
Day 2: लोकगाथाएँ, पंडवानी और देवार
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछले दिन के गृहकार्य की जांच करें और ददरिया/सुवा गीत की विशेषताएँ पूछें।
- व्याख्या (25 मिनट):
- लोक-गाथा क्या है? बड़ी कहानियाँ जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती हैं। (ढोला-मारू, सोन सागर, भरथरी, आल्हा, पंडवानी, चंदैनी)।
- पंडवानी का वर्णन: महाभारत की कथा का लोक गायन। झाड़ूराम देवांगन को पंडवानी का शिखर पुरुष कहा जाता है। प्रसिद्ध गायिकाएँ – श्रीमती तीजन बाई (जिन्हें पद्मभूषण मिला) और उर्मिला शास्त्री।
- कपालिक शैली: पंडवानी की कापालिक शैली की चर्चा (जैसा पाठ में है)।
- देवार गीत: देवार एक घुमंतू जाति है। केवल ‘रूजू’ (एकतारा) बजाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देने वाले इस जाति के कलाकारों का वर्णन।
- प्रश्न-उत्तर अभ्यास (10 मिनट): पाठ से प्रश्न 5 लिखिए: “पदमभूषण तीजनबाई को पंडवानी की ‘कापालिक शैली’ की गायिका कहा जाता है। इस शैली का आशय स्पष्ट करते हुए पंडवानी की अन्य शैलियों का उल्लेख कीजिए।”
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 4 लिखिए: “छत्तीसगढ़ी के प्रमुख लोक गीत गायकों के नाम लिखिए।”
Day 3: लोक नाट्य (नाचा, गम्मत) और लोक नृत्य (पंथी, राउत नाचा)
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछले दिन की चर्चा का सारांश।
- व्याख्या (25 मिनट):
- लोक नाट्य – नाचा: “नाचा” शब्द का अर्थ है नाचना। “लोक नाट्य का कलेवर, व्यंग्य का तेवर” – गम्मत में हास्य-व्यंग्य का होना। प्रसिद्ध कलाकार – मदन लाल वर्मा (मदनलाल वर्मा को ‘भिखारीदास’ कहा जाता था) और लालू राम (नवाब तनवीर के निर्देशन में ‘चरणदास चोर’ नाटक)।
- चंदैनी लोक नाट्य: लोरिक और चंदा की प्रणय गाथा। रामाधार साहू इसके प्रमुख कलाकार।
- लोक नृत्य – पंथी: सतनामी संप्रदाय के भक्तों द्वारा गुरु घासीदास की महिमा में किया जाने वाला भाव-प्रवण नृत्य। इसमें माँदर और झाँझ का वाद्य होता है। देवदास की ‘पंथी पाटी’ प्रसिद्ध है।
- राउत नाचा: मवेशी चराने वाली राउत जाति का नृत्य जो दीपावली के समय होता है। इसमें कुल देवता की पूजा के बाद काछन (लाठी) चलाना।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 6 लिखिए: “किन-किन लोक कलाओं को लोक नृत्य की श्रेणी में रखा जा सकता है?”
Day 4: गेंडी, करमा और भाषा अध्ययन
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): नाचा और पंथी की विशेषताएँ पूछें।
- व्याख्या (20 मिनट):
- गेंडी नृत्य: हिरयाली (सावन) पर्व में महिलाओं द्वारा गेंडी (एक प्रकार का नारियल और बाँस से बना खिलौना) बनाकर किया जाने वाला नृत्य।
- आदिवासी नृत्य (करमा): छत्तीसगढ़ के लोक कला का महासागर। गोंड, मुरिया, भतरा आदि जनजातियों के नृत्य। “करमा” नृत्य में लोग कर्मा देवता की पूजा करते हैं और हाथ पकड़कर गोल घूमते हैं।
- भाषा कार्य (15 मिनट): पाठ्यपुस्तक के “भाषा के बारे में” खंड का अभ्यास कराएं।
- श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द (Homophones): कला (कौशल) और काला (रंग), किला (दुर्ग) और किला (बंद), पवन (हवा) और पावन (पवित्र), विधा (कला) और विद्या (ज्ञान), पंथी (पथ का) और पंछी (पक्षी), गौरी (पार्वती) और गोरी (सफेद) – इनके अर्थ लिखकर वाक्य बनवाएं।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 2 और 7 लिखिए: “शक्ति की आराधना ‘जैवारा’ का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।” और “आदिवासी अंचलों में प्रसिद्ध नृत्य कौन-कौन से हैं?”
Day 5: योग्यता विस्तार, प्रायोजना कार्य और मूल्यांकन
- अभ्यास कार्य (15 मिनट): पाठ्यपुस्तक के “पाठ से आगे” के प्रश्नों का सामूहिक अभ्यास करें।
- प्रश्न 3: आशु कवित्व से आप क्या समझते हैं? (गम्मत में “जोकबंद” में होने वाली आशु कविता का उल्लेख)।
- प्रश्न 4: “सुअा (गीत) नृत्य के समय टोकनी में भरे धान के ऊपर सुआ रखने का क्या अर्थ है?” (टोकनी धान की समृद्धि का प्रतीक है और सुगा उस समृद्धि की रक्षा करता है)।
- प्रायोजना कार्य (20 मिनट):
- छात्रों को समूह में बाँटकर “छत्तीसगढ़ के छत्तीस किलों” की सूची बनाने को कहें और उन्हें नक्शे में दिखाएं।
- छात्रों से अपने अंचल के प्रचलित लोकगीत या लोकनृत्य के बारे में लिखवाएं और उसे कक्षा में प्रस्तुत करने को कहें।
- शिक्षक छात्रों को बताएं कि “हबीब तनवीर” के समूह ने छत्तीसगढ़ी लोक कला को वैश्विक मंच पर कैसे स्थापित किया (जैसे – ‘चरणदास चोर’ नाटक)।
- मूल्यांकन (10 मिनट): लोकगीत, लोकगाथा, लोकनाट्य और लोकनृत्य की परिभाषा और प्रत्येक का एक-एक उदाहरण लिखने के लिए कहें। साथ ही, पाठ में वर्णित किसी एक कलाकार (तीजन बाई, देवदास, रामाधार साहू) का योगदान लिखने को कहें।
- गृहकार्य: अपने अंचल के किसी लोक कलाकार से मिलकर उसकी कला (गायन/नृत्य) के बारे में जानकारी एकत्र कीजिए और अगली कक्षा में सुनाइए।
(नोट: यह पाठ योजना पाठ्यपुस्तक की सामग्री और अभ्यास प्रश्नों के आधार पर तैयार की गई है। कक्षा की गति के अनुसार आप इसमें आवश्यक बदलाव कर सकते हैं।)

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
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