निर्भरता एक-दूसरे पर – कक्षा 3 EVS Unit 2: जीवन आस-पास (Nirbharta Ek-Doosre Par Class 3 EVS)
पाठ का सारांश
यह अध्याय बच्चों को प्रकृति में पारस्परिक निर्भरता (Interdependence) की अवधारणा से परिचित कराता है। शंभु और उसके पिता की कहानी के माध्यम से बच्चे सीखते हैं कि पशु-पक्षी और पेड़-पौधे एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं – बंदर आम खाकर गुठली फेंकता है, जिससे नया पौधा उगता है। पेड़-पौधे हमें फल, सब्जियाँ, दवाइयाँ, वस्त्र (रेशे), लकड़ी देते हैं। पाठ में आम का पेड़, पशु-पक्षियों का अवलोकन, चींटियों की गतिविधि, ‘मैं कौन हूँ’ खेल और अपने मित्र पेड़ से मिलना जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। यह अध्याय बच्चों में प्रकृति के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और मनुष्यों की पारस्परिक निर्भरता को समझ पाएँगे
- पेड़-पौधों से मिलने वाली वस्तुओं (फल, सब्जियाँ, दवाइयाँ, रेशे, लकड़ी) को पहचान पाएँगे
- पशु-पक्षी पेड़-पौधों के प्रसार में कैसे सहायता करते हैं – यह समझ पाएँगे
- घर में आने वाले पशु-पक्षियों के बारे में बात कर पाएँगे
- चींटियों के खान-पान की आदतों का अवलोकन कर पाएँगे
- पेड़ को मित्र मानकर उससे बात करने की कल्पना कर पाएँगे
- प्रकृति की देखभाल के तरीकों को समझ पाएँगे
- पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों की देखभाल करने का महत्व समझ पाएँगे
दिन 1 – पाठ का परिचय, शंभु की कहानी एवं निर्भरता
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “क्या आपको आम खाना पसंद है? क्या आपने कभी आम की गुठली बोई है?”
- प्रश्न: “क्या आपको पता है कि पशु-पक्षी पेड़-पौधों को फैलाने में कैसे मदद करते हैं?”
- प्रश्न: “पेड़-पौधे हमें क्या-क्या देते हैं?”
- प्रश्न: “क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी और पेड़-पौधे एक-दूसरे पर निर्भर हैं?”
- पृष्ठ 93-95 के चित्र दिखाएँ – आम का पेड़, बंदर, गिलहरी, पक्षी, शंभु।
- परिचय: “आज हम ‘निर्भरता एक-दूसरे पर’ पाठ पढ़ेंगे, जिसमें हम जानेंगे कि पशु-पक्षी, पेड़-पौधे और हम सब एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं।”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का वाचन – शंभु की कहानी (पृष्ठ 93-95):
- शिक्षक पाठ को रोचक, आत्मीय स्वर में पढ़कर सुनाएँ।
- विद्यार्थी बारी-बारी से पैराग्राफ पढ़ें।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- निर्भरता – एक-दूसरे पर आश्रित होना (Dependence)
- गुठली – फल का बीज (Seed)
- पौधा – पेड़ का छोटा रूप
- रेशे (Fibres) – कपड़े बनाने के लिए
- औषधियाँ (Medicines) – दवाइयाँ
- चर्चा (पृष्ठ 93-94):
- “शंभु ने क्या देखा?” (बंदर आम खाकर गुठली फेंक रहा था)
- “पिता ने क्या कहा?” (“इस गुठली से एक नया पौधा उगेगा”)
- “इस तरह पशु-पक्षी और पौधे एक-दूसरे की सहायता कैसे करते हैं?” (पशु-पक्षी फल खाते हैं, बीज फैलाते हैं, नए पौधे उगते हैं)
- “पेड़-पौधों से हमें क्या-क्या मिलता है?” (फल, सब्जियाँ, दवाइयाँ, रेशे, लकड़ी)
- गतिविधि (पृष्ठ 95):
- विद्यार्थी पेड़-पौधों से मिलने वाली वस्तुओं की सूची बनाएँ:
- फल – आम, केला, सेब, अमरूद, संतरा
- सब्जियाँ – टमाटर, आलू, बैंगन, भिंडी, पालक
- दवाइयाँ – नीम, तुलसी, हल्दी, अदरक, आँवला
- रेशे – कपास (कपड़ा), जूट (बोरी), सन
- लकड़ी – फर्नीचर, घर, दरवाज़े, खिलौने
- विद्यार्थी पेड़-पौधों से मिलने वाली वस्तुओं की सूची बनाएँ:
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 91-92):
- (क) “क्या चित्र में मौजूद कोई भी पक्षी, पशु, कीट और पौधे आपके साथ आपके घर में रहते हैं?”
- (ख) “क्या आप और आपका परिवार इनका ध्यान रखते हैं?”
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “पशु-पक्षी पेड़-पौधों को फैलाने में कैसे मदद करते हैं?” (फल खाते हैं, बीज फैलाते हैं)
- गृहकार्य: “अपने घर में पेड़-पौधों से मिलने वाली पाँच चीज़ों के नाम लिखें।”
दिन 2 – घर में आने वाले पशु-पक्षी, अवलोकन एवं चर्चा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “पेड़-पौधों से हमें क्या-क्या मिलता है?”
- प्रश्न: “क्या आपके घर में कोई पशु-पक्षी आते हैं? वे क्यों आते हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का वाचन – पशु-पक्षी और कीट (पृष्ठ 91-95):
- शिक्षक पाठ पढ़ें।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- कोटर – पेड़ के तने में बना छेद/घर (Hollow)
- घोंसला – पक्षियों का घर (Nest)
- कृमि (Worm) – छोटे कीड़े
- परागण (Pollination) – फूलों से पराग का स्थानांतरण
- ‘पता लगाइए’ (पृष्ठ 91):
- विद्यार्थी उन पशु-पक्षियों/कीटों के नाम लिखें जो चित्रों में नहीं हैं:पशु/पक्षी/कीट का नामवह स्थान, जहाँ आपने देखागौरैयापेड़/घर की छत परकबूतरखिड़की/बालकनी परगिलहरीपेड़ परचींटीज़मीन/दीवार परमकड़ीकोने में जाला बनाती
- चर्चा (पृष्ठ 92):
- “कौन-कौन से पशु-पक्षी और कीट हैं जो बिना बुलाए आपके घर में चले आते हैं?” (चींटी, मक्खी, मच्छर, छिपकली, कौआ, गौरैया)
- “आपको क्या लगता है कि वे आपके घर में क्यों आते हैं?” (भोजन, आश्रय, पानी, गर्मी/सर्दी से बचाव)
- “आप उनमें से किसको पसंद करते हैं? क्यों?”
- “यदि आप उन्हें पसंद नहीं करते, तो आप क्या करते हैं?” (उन्हें भगाते हैं, उनका ध्यान नहीं रखते)
- ध्यान दें: जानवरों को तब तक नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए जब तक वे हमसे खतरा महसूस न करें – डर और आत्मरक्षा के कारण वे हमें नुकसान पहुँचा सकते हैं।
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 92):
- “अपने परिवार में बड़ों से बातचीत करें – जब वे छोटे थे, तो उन्होंने कौन-से पौधों और जानवरों को अपने घर में रखा था?”
- विद्यार्थी जानकारी साझा करें (कक्षा में चर्चा)।
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “हमें पशु-पक्षियों को क्यों नहीं मारना चाहिए?” (वे प्रकृति का हिस्सा हैं, हमें दयालु होना चाहिए)
- गृहकार्य: “अपने घर में आने वाले किन्हीं तीन पशु-पक्षियों के नाम लिखें और बताएँ कि वे क्यों आते हैं।”
दिन 3 – पशु-पक्षी विवरण, चींटियों का अवलोकन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “घर में आने वाले पशु-पक्षियों के नाम बताएँ।”
- प्रश्न: “क्या आपने कभी चींटियों को खाना ले जाते देखा है? वे क्या खाना पसंद करती हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- गतिविधि – ‘लिखिए’ (पृष्ठ 96):
- विद्यार्थी किसी पशु या पक्षी का अवलोकन करें और विवरण लिखें:
- नाम : ________
- पहली बार कब/कहाँ देखा? : ________
- अकेला/समूह में? : ________
- चलने/उड़ने का तरीका : ________
- आवाज़ : ________
- क्या करता है? (खाना, सोना, बात करना, झगड़ना) : ________
- कोई रोचक बात : ________
- विद्यार्थी किसी पशु या पक्षी का अवलोकन करें और विवरण लिखें:
- गतिविधि 2 – हमेशा व्यस्त चतुर चींटियाँ (पृष्ठ 97):
- सामग्री: मीठा (चीनी/गुड़), तला हुआ (पापड़), उबला/पका (ब्रेड, इडली, चावल, चपाती)
- विधि: तीनों खाद्य पदार्थों को खुले स्थान पर 1 फुट की दूरी पर रखें।
- अनुमान लगाएँ:
- “इन्हें खाने कौन आएगा?” (चींटियाँ)
- “उनका पसंदीदा भोजन क्या होगा?”
- “क्या सभी चींटियाँ दिखने में एक जैसी होंगी?”
- “खाने की किस वस्तु के पास वे सबसे पहले जाएँगी?”
- “कुल कितनी चींटियाँ खाने के लिए आएँगी?”
- अवलोकन:
- “चींटियाँ किस खाद्य पदार्थ के पास सबसे पहले गईं?” (मीठे के पास – चीनी/गुड़)
- “वे खाने की वस्तुओं का क्या कर रही हैं?” (टुकड़े करना, उठाना, अपने घर ले जाना)
- गतिविधि – ‘अपने मित्र पेड़ से मिलना’ (पृष्ठ 97):
- विद्यार्थियों को बताएँ – “जब कभी आप उदास, परेशान या गुस्सा हों, तो आप अपने मित्र पेड़ के पास जा सकते हैं और उसे बता सकते हैं कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं।”
- चर्चा: “क्या आपको लगता है कि पेड़ से बात करने से मन शांत होता है?” (हाँ – प्रकृति से जुड़ाव, मन को शांति मिलती है)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “चींटियों को कौन-सा खाना सबसे ज्यादा पसंद आया?” (मीठा – चीनी/गुड़)
- गृहकार्य: “अपने घर के आस-पास चींटियों को देखें – वे क्या खा रही हैं? कहाँ जा रही हैं?” – अवलोकन लिखें।
दिन 4 – रचनात्मक गतिविधि, खेल एवं चित्र
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “चींटियों ने क्या-क्या खाया?”
- प्रश्न: “क्या आप किसी पशु, पक्षी, कीट या पेड़ की तरह अभिनय कर सकते हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- गतिविधि 3 – ‘मैं कौन हूँ?’ (पृष्ठ 98):
- विधि: विद्यार्थी दो-दो के जोड़े में बैठें।
- एक विद्यार्थी किसी पशु, पक्षी, कीट या पेड़ का नाम सोचे और अपने साथी के कान में धीमे से कहे।
- दूसरा विद्यार्थी उस पशु/पक्षी/पेड़ की तरह अभिनय करे (हाव-भाव, आवाज़)।
- बाकी विद्यार्थी अनुमान लगाएँ कि किसका अभिनय किया जा रहा है।
- उदाहरण:
- “मेंढक” – कूदना, टर्र-टर्र करना
- “पीपल का पेड़” – हाथ फैलाना, शाखाएँ बनाना
- “हाथी” – सूँड हिलाना, भारी कदम
- “तितली” – उड़ने का अभिनय
- विधि: विद्यार्थी दो-दो के जोड़े में बैठें।
- ‘आइए, मंथन करें!’ – लिखिए (पृष्ठ 99):
- (क) “मुझे ________ देखना बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि ________।”
- (ख) “________ से मिलकर मुझे बहुत हँसी आती है, क्योंकि ________।”
- (ग) “मेरे मित्र को ________ पसंद है, क्योंकि ________।”
- (घ) “मैं ________ का ध्यान रखना चाहूँगा/चाहूँगी, क्योंकि ________।”
- (ङ) “आपने ऊपर जिन पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों और कीटों की सूची बनाई है, उनमें से कौन आपको सबसे प्रिय है?” (कारण सहित)
- गतिविधि – चित्र बनाएँ (पृष्ठ 100):
- विद्यार्थी उन पशुओं, पक्षियों और कीटों के नाम लिखें और चित्र बनाएँ जिनके:
- (क) दो पैर होते हैं – मनुष्य, चिड़िया, मुर्गी, कबूतर
- (ख) चार पैर होते हैं – कुत्ता, बिल्ली, गाय, हाथी, शेर
- (ग) छह पैर होते हैं – चींटी, मक्खी, तितली, टिड्डा, मधुमक्खी
- (घ) आठ पैर होते हैं – मकड़ी
- विद्यार्थी उन पशुओं, पक्षियों और कीटों के नाम लिखें और चित्र बनाएँ जिनके:
- चर्चा (पृष्ठ 99):
- (क) “हम पेड़-पौधों तथा पशु-पक्षियों पर किस तरह निर्भर हैं?” (भोजन, ऑक्सीजन, दवा, कपड़ा, घर)
- (ख) “हमें अपने परिवेश में मौजूद पेड़-पौधों व पशु-पक्षियों की देखभाल किस प्रकार से करनी चाहिए?” (पानी देना, कचरा न फेंकना, पेड़ लगाना, पशुओं को तंग न करना)
- (ग) “पेड़-पौधे और पशु-पक्षी हम पर किस तरह निर्भर हैं?” (हम पेड़ लगाते हैं, पानी देते हैं, पशुओं को खाना देते हैं, उनकी रक्षा करते हैं)
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभिनय और चित्रों की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: “अपने मित्र पेड़ के पास जाएँ और उसे बताएँ कि आप उससे क्या सीखना चाहते हैं – कल कक्षा में सुनाएँ।”
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पाठ का सामूहिक वाचन (मुख्य बिंदु)।
- विद्यार्थियों ने अपने मित्र पेड़ से क्या सीखा – 2-3 विद्यार्थी सुनाएँ।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- पशु-पक्षी पेड़-पौधों को फैलाने में कैसे मदद करते हैं?
- पेड़-पौधों से हमें क्या-क्या मिलता है? (कोई तीन)
- चींटियों को कौन-सा खाना सबसे ज्यादा पसंद है? (मीठा)
- क्या पशु-पक्षी और मनुष्य एक-दूसरे पर निर्भर हैं? (हाँ)
- हमें पशु-पक्षियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए? (दयालु, तंग न करें)
- दो पैर वाले जीवों के दो नाम बताएँ।
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘निर्भरता एक-दूसरे पर’ पाठ में शंभु ने क्या देखा और पिता ने क्या बताया?
- (ख) पेड़-पौधों से मिलने वाली पाँच वस्तुओं के नाम लिखिए।
- (ग) पशु-पक्षी और पेड़-पौधे एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं? (कोई दो बातें)
- (घ) चींटियाँ किस प्रकार के भोजन को सबसे पहले खाती हैं? (मीठा)
- (ङ) हम पेड़-पौधों की देखभाल कैसे कर सकते हैं? (कोई तीन तरीके)
- समूह चर्चा:
- “क्या आपको लगता है कि पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य एक-दूसरे पर निर्भर हैं? क्यों?”
- “यदि पेड़-पौधे न हों तो क्या होगा?” (पशु-पक्षियों को भोजन/घर न मिले, ऑक्सीजन न मिले, मनुष्यों को भोजन न मिले)
- गतिविधि (पृष्ठ 100):
- विद्यार्थी पैरों की संख्या के आधार पर जीवों के चित्र बनाएँ और रंग भरें (पुनरावृत्ति)।
- ‘क्या आप जानते हैं?’ – एक सच्ची कहानी (पृष्ठ 101):
- स्थान: तमिलनाडु – वल्पराई
- पक्षी: प्रे वाग्टेला (वालट्टी कुरुवी)
- विशेषता: सर्दियों में पहाड़ों से आते हैं; बच्चे और शिक्षक उनके स्वागत में पोस्टर लगाते हैं, मिठाई बाँटते हैं, उत्सव मनाते हैं।
- चर्चा: “इस कहानी से आपने क्या सीखा?” (पक्षियों का स्वागत करना, प्रकृति से प्रेम)
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘निर्भरता एक-दूसरे पर’ पाठ ने हमें सिखाया कि पशु-पक्षी, पेड़-पौधे और मनुष्य सब एक-दूसरे पर निर्भर हैं। पशु-पक्षी फल खाकर बीज फैलाते हैं, जिससे नए पेड़-पौधे उगते हैं। पेड़-पौधे हमें फल, सब्जियाँ, दवाइयाँ, रेशे, लकड़ी और ऑक्सीजन देते हैं। चींटियाँ भोजन इकट्ठा करती हैं और प्रकृति के संतुलन में मदद करती हैं। हमें पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों की देखभाल करनी चाहिए – उन्हें पानी देना, कचरा न फैलाना, पेड़ लगाना, और पशुओं को तंग न करना। ‘प्रकृति में सब आपस में जुड़ा है – हमें इस संतुलन को बनाए रखना चाहिए!’ “
- अगले पाठ (Unit 3) ‘पानी है अनमोल’ का संक्षिप्त परिचय – “अब हम सीखेंगे कि पानी कितना अनमोल है, बारिश कैसे होती है, और हमें पानी क्यों बचाना चाहिए।”
शिक्षण सहायक सामग्री
- आम का पेड़, बंदर, पशु-पक्षियों के चित्र
- पेड़-पौधों से मिलने वाली वस्तुओं (फल, सब्जियाँ, लकड़ी, दवा) के चित्र
- चीनी/गुड़, पापड़, ब्रेड (चींटी गतिविधि के लिए)
- पशु-पक्षियों के कार्ड (‘मैं कौन हूँ’ खेल के लिए)
- रंग, कागज़, पेंसिल (चित्रकला के लिए)
- वल्पराई (तमिलनाडु) और प्रे वाग्टेला पक्षियों के चित्र
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और मनुष्यों की पारस्परिक निर्भरता की समझ | मौखिक/लिखित प्रश्न |
| 2 | पेड़-पौधों से मिलने वाली वस्तुओं (फल, सब्जियाँ, दवाइयाँ, रेशे, लकड़ी) की पहचान | मौखिक/लिखित |
| 3 | चींटियों के खान-पान की आदतों का अवलोकन | गतिविधि/अवलोकन |
| 4 | पशु-पक्षियों के प्रति दयालुता और संवेदनशीलता की समझ | समूह चर्चा |
| 5 | पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों की देखभाल के तरीकों की समझ | मौखिक/लिखित |
| 6 | रचनात्मक अभिव्यक्ति (अभिनय, चित्रकला) | कला/समूह गतिविधि |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘आम’, ‘गुठली’, ‘पेड़’, ‘पशु’, ‘पक्षी’, ‘चींटी’ को क्या कहते हैं। निर्भरता – बच्चों को समझाएँ कि “हम सब एक-दूसरे पर निर्भर हैं – पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और हम सब मिलकर एक संतुलन बनाते हैं।” चींटी गतिविधि – बच्चों को अवलोकन और अनुमान का अनुभव दें – वे पहले अनुमान लगाएँ, फिर देखें, फिर निष्कर्ष निकालें। ‘मैं कौन हूँ’ खेल – बच्चों को अभिनय और अभिव्यक्ति का अवसर देता है – यह सीखने को मज़ेदार बनाता है। पेड़ से मित्रता – बच्चों को प्रकृति से भावनात्मक जुड़ाव का अनुभव कराएँ – पेड़ से बात करने से मन शांत होता है, यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है। वल्पराई की कहानी – बच्चों को पक्षी-प्रेम और पर्यावरण जागरूकता का अनुभव कराएँ – कैसे लोग पक्षियों का स्वागत करते हैं और उनके आगमन का उत्सव मनाते हैं। “प्रकृति में सब आपस में जुड़ा है – हमें इस संतुलन को बनाए रखना चाहिए!” – इस संदेश को बार-बार दोहराएँ। पशुओं के प्रति दया – बच्चों को सिखाएँ कि पशु-पक्षियों को मारना या तंग करना गलत है – उन्हें भी प्यार और सुरक्षा चाहिए। प्रकृति संरक्षण – बच्चों को पेड़ लगाने, पानी बचाने और कचरा कम करने के लिए प्रोत्साहित करें।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
