प्रकृति की गोद में – कक्षा 4 EVS Unit 2: हमारे परिवेश में जीवन (Prakriti Ki God Mein Class 4 EVS)
पाठ का सारांश
यह अध्याय बताता है कि प्रकृति और संस्कृति किस प्रकार गहराई से जुड़ी हुई हैं। रीना और अमित अपने गाँव जाते हैं, जो सौर ऊर्जा से चलने वाला पहला गाँव बन रहा है। वे पलाश (जंगल की ज्वाला) के फूल, पारंपरिक घर, गोंड कला, प्राकृतिक रंग, अनाज संग्रहण की पारंपरिक विधियाँ (मिट्टी के बर्तन, बाँस की टोकरियाँ, नीम की पत्तियाँ), जेणु कुरुबा जनजाति (शहद निकालने वाले, जो मधुमक्खियों से क्षमा माँगते हैं), प्राथमिक उपचार (नीम का तेल, तुलसी, अजवाइन), पारंपरिक नृत्य, पवित्र उपवन और विभिन्न त्योहारों (वट पूर्णिमा, हरि जिरोती, काजीरंगा हाथी उत्सव, पोला, छेरछेरा) के बारे में जानते हैं। यह अध्याय बच्चों को प्राकृतिक संसाधनों, परंपराओं, प्रकृति-पूजा, औषधीय पौधों और संधारणीय जीवन के महत्व से परिचित कराता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- प्रकृति और संस्कृति के बीच संबंध को समझ पाएँगे
- पलाश (जंगल की ज्वाला) के बारे में जान पाएँगे
- गोंड कला और प्राकृतिक रंगों के बारे में जान पाएँगे
- अनाज संग्रहण की पारंपरिक विधियों (मिट्टी के बर्तन, बाँस की टोकरियाँ, नीम की पत्तियाँ) के बारे में जान पाएँगे
- जेणु कुरुबा जनजाति और शहद निकालने की परंपरा के बारे में जान पाएँगे
- औषधीय पौधों (तुलसी, नीम, अजवाइन) और प्राथमिक उपचार के बारे में जान पाएँगे
- प्राकृतिक रंग बनाने की विधि सीख पाएँगे
- त्योहारों (वट पूर्णिमा, पोला, छेरछेरा, आदि) और प्रकृति-पूजा की परंपराओं को जान पाएँगे
- प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के तरीकों को समझ पाएँगे
- औषधीय उद्यान की रूपरेखा बना पाएँगे
दिन 1 – पाठ का परिचय, पलाश, पारंपरिक घर एवं गोंड कला
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “क्या आपने कभी गाँव की यात्रा की है? गाँव के घर शहर के घरों से कैसे अलग होते हैं?”
- प्रश्न: “क्या आपको पता है कि रंग प्राकृतिक चीज़ों से भी बनाए जा सकते हैं?”
- प्रश्न: “आपके क्षेत्र में कौन-से फूल खिलते हैं? क्या आपने कभी पलाश के फूल देखे हैं?”
- पृष्ठ 75-77 के चित्र दिखाएँ – पलाश के फूल, पारंपरिक घर, दीवार चित्रकारी।
- परिचय: “आज हम ‘प्रकृति की गोद में’ पाठ पढ़ेंगे, जिसमें हम सीखेंगे कि प्रकृति हमें कैसे भोजन, रंग, दवा और संस्कृति से जोड़ती है।”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का वाचन (पृष्ठ 75-77):
- शिक्षक रीना और अमित की गाँव यात्रा की कहानी पढ़कर सुनाएँ।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- सौर ऊर्जा = सूर्य के प्रकाश से बिजली बनाना (Solar Energy)
- पलाश = एक पेड़ जिसके फूल लाल-नारंगी होते हैं, “जंगल की ज्वाला” (Butea monosperma)
- गोंड कला = दीवारों पर प्राकृतिक रंगों से बनाई जाने वाली चित्रकला (Gond art)
- प्राकृतिक रंग = फूलों, पत्तियों, छाल, जड़ों से बने रंग
- गतिविधि – फूलों के नाम (पृष्ठ 76):
- विद्यार्थी अपने क्षेत्र में पाए जाने वाले 5 रंग-बिरंगे फूलों के नाम लिखें:
- गेंदा, गुलाब, चमेली, कमल, सूरजमुखी, पलाश, आम्रपाली? (कोई भी)
- स्थानीय नाम – पलाश को गुजरात में “केसुदा” कहते हैं।
- विद्यार्थी अपनी पसंद के फूल का चित्र बनाएँ और रंग भरें।
- विद्यार्थी अपने क्षेत्र में पाए जाने वाले 5 रंग-बिरंगे फूलों के नाम लिखें:
- गतिविधि – प्राकृतिक रंग बनाना (पृष्ठ 78):
- विधि: (शिक्षक प्रदर्शन करें)
- चरण 1: फूल, पत्तियाँ, छाल, जड़ें (चुकंदर, गुड़हल, गेंदा) एकत्र करें।
- चरण 2: 1-2 लीटर पानी में 30 मिनट से 1 घंटा तक उबालें (बड़े की सहायता से)।
- चरण 3: छान लें – प्राकृतिक रंग तैयार!
- उपयोग: कपड़े (रुमाल/तौलिया) को रातभर भिगोकर रखें, सुबह निचोड़कर सुखाएँ।
- विधि: (शिक्षक प्रदर्शन करें)
- गतिविधि – घर का प्रतिरूप (मॉडल) (पृष्ठ 78):
- विद्यार्थी मिट्टी, लकड़ी की डंडी, सूखी घास, पत्तियाँ आदि का उपयोग करके एक पारंपरिक घर का मॉडल बनाएँ।
- इसे अपनी रुचि की किसी कला शैली (गोंड कला) से सजाएँ।
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “पलाश को ‘जंगल की ज्वाला’ क्यों कहा जाता है?” (इसके लाल-नारंगी फूल पूरे जंगल को आग की तरह दिखाते हैं)
- गृहकार्य: “प्राकृतिक रंग बनाने के लिए आप किन-किन चीज़ों का उपयोग कर सकते हैं?” – 3-4 चीज़ें लिखें।
दिन 2 – अनाज संग्रहण, जेणु कुरुबा, औषधीय पौधे एवं प्राथमिक उपचार
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “पलाश क्या है? गोंड कला क्या है?”
- प्रश्न: “क्या आप जानते हैं कि पुराने ज़माने में अनाज कैसे सुरक्षित रखा जाता था?”
- प्रश्न: “आपके घर में चोट/बीमारी पर क्या उपाय किए जाते हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- अनाज संग्रहण – पारंपरिक विधियाँ (पृष्ठ 79-80):
- मिट्टी के बर्तन – अंदर नीम की पत्तियाँ बिछाई जाती हैं (कीटों से बचाव)
- बाँस की टोकरियाँ – बाहर गोबर की परत (अनाज सुरक्षित)
- तुमड़ी – उत्तराखंड में सूखी लौकी के छिलकों से बनी (अनाज भंडारण)
- गतिविधि – तालिका पूर्ति (पृष्ठ 80):नामकिस राज्य में प्रचलित हैपात्र का विवरणतुमड़ीउत्तराखंडगोल/अंडाकार, सूखी लौकी के छिलकों सेमिट्टी के बर्तनछत्तीसगढ़/गाँवनीम की पत्तियाँ डालकर अनाज सुरक्षितबाँस की टोकरियाँपूर्वोत्तर/गाँवगोबर की परत लगाकर
- जेणु कुरुबा जनजाति (पृष्ठ 80):
- स्थान: कर्नाटक
- अर्थ: ‘जेणु’ = शहद
- परंपरा: शहद निकालते समय मधुमक्खियों से क्षमा-याचना के लिए गीत गाते हैं।
- चर्चा: “यह परंपरा प्रकृति के प्रति क्या संदेश देती है?” (प्रकृति का सम्मान)
- औषधीय पौधे और प्राथमिक उपचार (पृष्ठ 81):
- नीम का तेल – मच्छर भगाने के लिए
- तुलसी (पत्तियाँ) – सर्दी-खाँसी, रोग प्रतिरोधक क्षमता
- अजवाइन – पेट दर्द, पाचन
- गतिविधि – तालिका पूर्ति (पृष्ठ 81):पौधे का नामपौधे का भागउपयोगतुलसीपत्तियाँसर्दी-खाँसी, रोग प्रतिरोधकअजवाइनबीजपेट दर्द, पाचननीमपत्तियाँ/तेलमच्छर भगाना, त्वचा रोगहल्दीजड़घाव भरना, एंटीसेप्टिकआँवलाफलविटामिन सी, रोग प्रतिरोधक
- चर्चा (पृष्ठ 81):
- (क) “प्राथमिक उपचार पेटी (First Aid Box) में कौन-कौन सी वस्तुएँ रखनी चाहिए?” (पट्टी, रुई, एंटीसेप्टिक क्रीम, बैंड-एड, कैंची, नीम का तेल, तुलसी की पत्तियाँ)
- (ख) “यदि किसी को चोट लग जाए तो प्राथमिक उपचार देना क्यों आवश्यक है?” (संक्रमण से बचने, दर्द कम करने के लिए)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “जेणु कुरुबा जनजाति प्रकृति का सम्मान कैसे करती है?” (मधुमक्खियों से क्षमा माँगकर शहद निकालती है)
- गृहकार्य: “अपने घर में उपयोग होने वाले किन्हीं तीन औषधीय पौधों के नाम और उनके उपयोग लिखें।”
दिन 3 – त्योहार, परंपराएँ, प्रकृति-पूजा एवं सौर ऊर्जा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “औषधीय पौधों के नाम बताएँ।”
- प्रश्न: “आप कौन-कौन से त्योहार मनाते हैं? क्या उनका प्रकृति से कोई संबंध है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- सौर ऊर्जा से चलने वाला गाँव (पृष्ठ 75-82):
- “गाँव सौर ऊर्जा से चलने वाला पहला गाँव बन रहा है।”
- चर्चा: “सौर ऊर्जा क्या है? इसके क्या लाभ हैं?” (सूर्य से बिजली, नवीकरणीय, पर्यावरण-अनुकूल)
- सौर पैनल – घरों की छतों पर लगे होते हैं, बिजली बनाते हैं।
- प्रश्न: “यदि दो दिन तक प्रकाश न हो तो जीवन में क्या परिवर्तन आएँगे?” (अंधेरा, काम बंद, मुश्किल)
- पारंपरिक नृत्य और गीत (पृष्ठ 82-83):
- “प्रकृति से जुड़े गीत और नृत्य” – विद्यार्थी अपने क्षेत्र के पारंपरिक नृत्यों के बारे में बताएँ।
- गतिविधि: “अपने क्षेत्र के पारंपरिक नृत्य और गीतों का पता लगाइए और विद्यालय के वार्षिक दिवस पर प्रस्तुत करें।”
- ‘पवित्र उपवन’ (Sacred Groves) (पृष्ठ 83):
- “वन के छोटे-छोटे भाग जिन्हें समुदाय द्वारा संरक्षित किया जाता है।”
- “यहाँ पेड़ और वन्यजीव सुरक्षित रहते हैं, लोग पूजा करते हैं और प्रकृति का उत्सव मनाते हैं।”
- चर्चा: “हमारे क्षेत्र में क्या ऐसे स्थान हैं?”
- त्योहार और प्रकृति (पृष्ठ 84):
- तालिका पूर्ति:त्योहार का नामसंबंधित पौधा/जंतुगतिविधिवट पूर्णिमावट (बरगद) वृक्षपूजाहरि जिरोतीफल देने वाला वृक्षवृक्षारोपणकाजीरंगा हाथी उत्सवहाथीजागरूकता अभियानपोलाबैलपूजा/खेलछेरछेराधान (फसल)पूजा
- अन्य – विद्यार्थी अपने क्षेत्र के त्योहार भी जोड़ें।
- प्रकृति की देखभाल के तरीके (पृष्ठ 84-85):
- कागज व्यर्थ न करें
- प्लास्टिक का उपयोग न करें
- पक्षियों के लिए खाना-पानी रखें
- वृक्ष लगाएँ
- स्वच्छता अभियान आयोजित करें
- ‘आइए विचार करें’ (पृष्ठ 85):
- (क) “हम प्रकृति से क्या-क्या प्राप्त करते हैं?” (भोजन, वस्त्र, दवा, रंग, लकड़ी, ऑक्सीजन)
- (ख) “प्राकृतिक संसाधनों के अधिक उपयोग से क्या समस्याएँ होती हैं?”
- पानी – कमी, सूखा
- मिट्टी – बंजर भूमि
- समुद्री उत्पाद – अत्यधिक मछली पकड़ना
- लकड़ी – जंगलों की कटाई
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “हम प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा कैसे कर सकते हैं?”
- गृहकार्य: “अपने क्षेत्र में प्रकृति से जुड़े किसी त्योहार के बारे में पता करें और लिखें।”
दिन 4 – रचनात्मक गतिविधि, औषधीय उद्यान एवं पोस्टर
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “प्रकृति से जुड़े त्योहारों के नाम बताएँ।”
- प्रश्न: “क्या आप एक औषधीय उद्यान बनाना चाहेंगे? उसमें क्या-क्या लगाएँगे?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- औषधीय उद्यान की रूपरेखा (पृष्ठ 86):
- विद्यार्थी अपनी कल्पना से एक औषधीय उद्यान बनाएँ।
- औषधीय पौधे: तुलसी, नीम, अजवाइन, हल्दी, आँवला, पुदीना, एलोवेरा, गिलोय
- विद्यार्थी स्थान पर चित्र बनाएँ और पौधों के नाम लिखें।
- गतिविधि – पर्यावरण संरक्षण पोस्टर:
- विद्यार्थी “प्रकृति की रक्षा करें” विषय पर एक पोस्टर बनाएँ।
- नारे: “पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ”, “प्रकृति माँ है”, “प्लास्टिक हटाओ, प्रकृति बचाओ”
- पोस्टर कक्षा में प्रदर्शित करें।
- गतिविधि – प्रकृति से जुड़ी परंपराएँ (पृष्ठ 84):
- विद्यार्थी अपने बड़ों से पूछें और नीचे दी गई तालिका भरें:त्योहार का नामसंबंधित पौधा/जंतुगतिविधिवट पूर्णिमावट (बरगद)पूजामकर संक्रांतितिल, गुड़दान, पतंगपोंगलधान/गन्नाफसल उत्सव(अन्य)……
- प्रश्न-उत्तर अभ्यास (पृष्ठ 86):
- (क) “हम प्रकृति से क्या प्राप्त करते हैं?” (भोजन, वस्त्र, दवा, रंग, लकड़ी)
- (ख) “प्राकृतिक संसाधनों के अधिक उपयोग से क्या समस्या होती है?” (कमी, प्रदूषण, पर्यावरण असंतुलन)
- (ग) “हम प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा कैसे कर सकते हैं?” (पेड़ लगाना, प्लास्टिक न उपयोग करना, जल बचाना, सफाई रखना)
- चर्चा (पृष्ठ 85):
- “घर पर, विद्यालय में, उद्यानों में और आस-पास के क्षेत्र में प्रकृति की रक्षा के लिए आप क्या कर सकते हैं?”
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के पोस्टर और औषधीय उद्यान की रूपरेखा की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: “अपने घर या स्कूल में एक छोटा सा औषधीय उद्यान बनाने की योजना बनाएँ।”
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पाठ का सामूहिक वाचन (मुख्य बिंदु)।
- विद्यार्थियों ने जो औषधीय उद्यान और पोस्टर बनाए, उन्हें प्रदर्शित करें।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- पलाश को क्या कहते हैं? (जंगल की ज्वाला)
- गोंड कला क्या है? (प्राकृतिक रंगों से दीवार चित्रकारी)
- शहद निकालने वाली जनजाति का नाम क्या है? (जेणु कुरुबा)
- ‘जेणु’ का क्या अर्थ है? (शहद)
- तुलसी का क्या उपयोग है? (सर्दी-खाँसी में)
- सौर ऊर्जा क्या है? (सूर्य से बिजली)
- पवित्र उपवन क्या होता है? (संरक्षित वन भाग)
- पोला त्योहार किससे जुड़ा है? (बैल से)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘प्रकृति की गोद में’ पाठ में आपको कौन-कौन से पारंपरिक घर/भंडारण विधियाँ देखने को मिलीं? (कोई तीन)
- (ख) प्रकृति से जुड़े किन्हीं चार त्योहारों के नाम लिखिए और उनके बारे में बताइए।
- (ग) ‘जेणु कुरुबा’ जनजाति प्रकृति का सम्मान कैसे करती है?
- (घ) प्राथमिक उपचार पेटी (First Aid Box) में कौन-कौन सी वस्तुएँ रखनी चाहिए? (कोई तीन)
- (ङ) प्राकृतिक रंग किन-किन चीज़ों से बनाए जा सकते हैं? (कोई तीन)
- (च) आप प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा के लिए क्या-क्या कर सकते हैं? (कोई तीन)
- समूह चर्चा:
- “हमारे देश में प्रकृति-पूजा की परंपरा क्यों है?” (प्रकृति का सम्मान, आभार, संरक्षण)
- “क्या आपको लगता है कि हमें अपनी परंपराओं को बनाए रखना चाहिए? क्यों?” (हाँ – संस्कृति, पर्यावरण, पहचान)
- गतिविधि – कविता/नारा:
- विद्यार्थी “प्रकृति” पर एक छोटी कविता या नारा लिखें।
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘प्रकृति की गोद में’ पाठ ने हमें सिखाया कि प्रकृति और संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हैं। पलाश के फूल, गोंड कला, मिट्टी के बर्तन, बाँस की टोकरियाँ, जेणु कुरुबा की परंपरा, नीम-तुलसी-अजवाइन जैसी औषधियाँ, सौर ऊर्जा, पवित्र उपवन और त्योहार – ये सब हमें बताते हैं कि प्रकृति हमें भोजन, रंग, दवा, सुरक्षा और आनंद देती है। हमारा कर्तव्य है कि हम प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करें, प्रकृति-पूजा की परंपराओं को बनाए रखें और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (संपूर्ण विश्व एक परिवार) की भावना के साथ प्रकृति का सम्मान करें। प्रकृति ही हमारी सच्ची माँ है। “
- अगले पाठ ‘सेहत की थाली’ का संक्षिप्त परिचय – “अब हम सीखेंगे कि स्वस्थ रहने के लिए हमें कैसा भोजन खाना चाहिए, क्या है संतुलित आहार और क्यों खाना ज़रूरी है।”
शिक्षण सहायक सामग्री
- पलाश, गोंड कला, पारंपरिक घरों, मिट्टी के बर्तनों, बाँस की टोकरियों के चित्र
- औषधीय पौधों (तुलसी, नीम, अजवाइन, हल्दी, आँवला) के नमूने/चित्र
- प्राकृतिक रंग बनाने के लिए सामग्री – चुकंदर, गुड़हल, गेंदा, हल्दी, पानी, बर्तन
- सौर ऊर्जा, सौर पैनलों के चित्र
- त्योहारों से संबंधित चित्र (वट पूर्णिमा, पोला, छेरछेरा)
- प्राथमिक उपचार पेटी (वास्तविक या चित्र)
- रंग, कागज़, पेंसिल (पोस्टर, औषधीय उद्यान के लिए)
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | पलाश, गोंड कला, प्राकृतिक रंगों की समझ | मौखिक/लिखित |
| 2 | अनाज संग्रहण की पारंपरिक विधियों की समझ | मौखिक/लिखित |
| 3 | जेणु कुरुबा जनजाति एवं प्रकृति-सम्मान की समझ | मौखिक/लिखित |
| 4 | औषधीय पौधों (तुलसी, नीम, अजवाइन) एवं प्राथमिक उपचार की समझ | मौखिक/लिखित |
| 5 | प्रकृति से जुड़े त्योहारों एवं परंपराओं की पहचान | तालिका/मौखिक |
| 6 | सौर ऊर्जा एवं पवित्र उपवन की समझ | मौखिक/लिखित |
| 7 | रचनात्मक अभिव्यक्ति (औषधीय उद्यान, पोस्टर, प्राकृतिक रंग) | कला/गतिविधि |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘पलाश’, ‘गोंड कला’, ‘तुलसी’, ‘नीम’, ‘पोला’, ‘छेरछेरा’ को क्या कहते हैं। छत्तीसगढ़ का संदर्भ – पोला (बैल पूजा) और छेरछेरा (फसल उत्सव) – बच्चों को स्थानीय परंपराओं से जोड़ें। प्राकृतिक रंग की गतिविधि – बच्चों को प्राकृतिक वस्तुओं से रंग बनाने का व्यावहारिक अनुभव दें (यदि संभव हो तो कक्षा में करवाएँ)। जेणु कुरुबा – बच्चों को आदिवासी संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान का महत्व समझाएँ। सौर ऊर्जा – बच्चों को नवीकरणीय ऊर्जा से परिचित कराएँ और पर्यावरण-अनुकूल जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करें। प्राथमिक उपचार – बच्चों को जीवन-रक्षक कौशल सिखाएँ – छोटी-छोटी चोट/बीमारी में क्या करना चाहिए। पवित्र उपवन – बच्चों को बताएँ कि प्राचीन समय से ही भारत में प्रकृति-संरक्षण की परंपरा रही है। औषधीय उद्यान – बच्चों को पौधों के औषधीय गुणों से परिचित कराएँ और उन्हें अपने घर/स्कूल में औषधीय पौधे लगाने के लिए प्रेरित करें।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
