प्रकृति की पाठशाला – कक्षा 4 EVS Unit 2: हमारे परिवेश में जीवन (Prakriti Ki Pathshala Class 4 EVS)
पाठ का सारांश
यह अध्याय बच्चों को प्रकृति की अद्भुत दुनिया से परिचित कराता है। विद्यार्थी आभा दीदी (प्रकृति वैज्ञानिक) के साथ मध्य प्रदेश के पचमढ़ी के संरक्षित वन क्षेत्र में भ्रमण पर जाते हैं। वे विभिन्न जंतुओं (हाथी, गौर, गिलहरी, बंदर, खरगोश, हिरण, बाघ, मोर, धनेश पक्षी, बाज, उल्लू, आदि) और पौधों को देखते हैं। वे पदचिह्नों (footprints) का अवलोकन करके अनुमान लगाते हैं कि कौन-से जंतु वहाँ आए थे। पाठ में पक्षियों की चोंच, पंजे और खान-पान की विविधता के बारे में बताया गया है – बाज की नुकीली चोंच, शकरखोरा (सनबर्ड) की लंबी चोंच, गौरैया की छोटी-कठोर चोंच। पत्तियों की रचना (शिराएँ), ‘जीवन-जाल’ खेल (जीवों की परस्पर निर्भरता) और कागज़ का कछुआ बनाने जैसी गतिविधियाँ भी शामिल हैं। यह अध्याय बच्चों में प्रकृति-प्रेम, अवलोकन क्षमता और पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- जंगल, वन्यजीव, प्रकृति के बारे में जान पाएँगे
- विभिन्न जंतुओं (हाथी, गौर, गिलहरी, बंदर, खरगोश, हिरण, बाघ, मोर, धनेश, बाज, उल्लू) को पहचान पाएँगे
- पक्षियों की चोंच, पंजे और खान-पान के बीच संबंध को समझ पाएँगे
- पदचिह्नों (footprints) को पहचान पाएँगे
- पत्तियों की शिराओं (venation) और रगड़-प्रिंट (leaf rubbing) गतिविधि कर पाएँगे
- ‘जीवन-जाल’ खेल के माध्यम से जीवों की परस्पर निर्भरता को समझ पाएँगे
- सुरक्षा नियमों (जंगल में) का पालन करने का महत्व समझ पाएँगे
- भारत के राजकीय पशु, पक्षी, पौधे के बारे में जान पाएँगे
दिन 1 – पाठ का परिचय, भ्रमण एवं वन्यजीव
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “क्या आपने कभी जंगल देखा है? जंगल में कौन-कौन से जानवर रहते हैं?”
- प्रश्न: “क्या आप पेड़-पौधों और जानवरों के बारे में जानना पसंद करते हैं?”
- प्रश्न: “जंगल में जाते समय हमें किन नियमों का पालन करना चाहिए?”
- परिचय: “आज हम ‘प्रकृति की पाठशाला’ पाठ पढ़ेंगे, जिसमें हम विद्यार्थियों के साथ पचमढ़ी (मध्य प्रदेश) के जंगल में भ्रमण पर जाएँगे और वहाँ की अद्भुत प्रकृति को देखेंगे।”
- मानचित्र: विद्यार्थियों को मध्य प्रदेश को भारत के मानचित्र पर ढूँढ़ने को कहें।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का वाचन (पृष्ठ 53-57):
- शिक्षक पचमढ़ी भ्रमण की कहानी पढ़कर सुनाएँ।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- प्रकृति वैज्ञानिक (Naturalist) = प्रकृति का अध्ययन करने वाला व्यक्ति
- संरक्षित वन (Protected forest) = जहाँ पेड़-पशुओं को सुरक्षा दी जाती है
- गौर = एक प्रकार का जंगली भैंसा (Gaur)
- धनेश पक्षी (Hornbill) = माथे पर सींग जैसी संरचना वाला पक्षी
- पदचिह्न (Footprint) = जानवरों के पैरों के निशान
- सुरक्षा नियम (पृष्ठ 55):
- विद्यार्थी नियम पढ़ें और चर्चा करें:
- नए स्थान पर सावधान रहें
- पशुओं को परेशान न करें
- पशुओं को खाना न खिलाएँ
- वृक्षों और फूलों को क्षति न पहुँचाएँ
- पालतू पशु, बंदूक या शस्त्र न लाएँ
- पॉलीथीन की थैलियाँ न लाएँ
- सार्वजनिक संपत्ति को हानि न पहुँचाएँ
- जंगल में कचरा न फेंकें
- चर्चा: “इन नियमों का पालन करना क्यों आवश्यक है?” (जंगल और जानवरों की सुरक्षा के लिए)
- विद्यार्थी नियम पढ़ें और चर्चा करें:
- गतिविधि – जंतुओं की पहचान (पृष्ठ 57):
- विद्यार्थी चित्र में दिख रहे जंतुओं को पहचानें:
- हाथी, हिरण, बाघ, गिलहरी, बंदर, मोर, गौरैया, तोता, बाज, उल्लू, साँप
- वर्गीकरण:
- भूमि पर रहने वाले – हाथी, हिरण, बाघ, गिलहरी, बंदर, साँप, गौर
- आकाश में उड़ने वाले – मोर, गौरैया, तोता, बाज, उल्लू
- विद्यार्थी चित्र में दिख रहे जंतुओं को पहचानें:
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “जंगल में जाते समय हमें किन नियमों का पालन करना चाहिए?” (कोई तीन)
- गृहकार्य: “अपने क्षेत्र में पाए जाने वाले 5 पशु-पक्षियों के नाम लिखें और उनकी एक विशेषता बताएँ।”
दिन 2 – जंतुओं की विशेषताएँ, पदचिह्न, पक्षियों की चोंच
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “जंगल के सुरक्षा नियम क्या थे?”
- प्रश्न: “क्या आप जानते हैं कि जानवरों के पैरों के निशान से उनके बारे में पता चलता है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- जंतुओं की विशेषताएँ (पृष्ठ 58-59):
- तालिका पूर्ति:जंतु का नामविशेषताहाथीलंबी सूँड (खाना-पानी लेने के लिए)गौरैयाछोटी और कठोर चोंच (बीज तोड़ने के लिए)मालाबार गिलहरीलाल रंग की बड़ी गिलहरी (पचमढ़ी में पाई जाती है)चश्मेदार बंदरआँखों के चारों ओर सफेद घेरे (त्रिपुरा का राज्य पशु)
- क्या आप जानते हैं? – चश्मेदार बंदर त्रिपुरा का राज्य पशु है।
- पदचिह्न – अनुमान (पृष्ठ 60-61):
- विद्यार्थी पदचिह्नों को देखकर अनुमान लगाएँ कि कौन-से जंतु तालाब पर पानी पीने आए होंगे:
- हिरण, बाघ, खरगोश, चूहा, गिलहरी, साँप (आदि)
- गतिविधि: विद्यार्थी किसी जंतु के पदचिह्न का चित्र बनाएँ।
- विद्यार्थी पदचिह्नों को देखकर अनुमान लगाएँ कि कौन-से जंतु तालाब पर पानी पीने आए होंगे:
- पक्षियों की विशेषताएँ (पृष्ठ 61-64):
- धनेश पक्षी (Hornbill) – माथे से सींग जैसी संरचना निकलती है
- मोर – रंग-बिरंगा, नृत्य करता है
- उल्लू – तेज़ दृष्टि (रात में देख सकता है)
- गतिविधि – पक्षियों के नाम (पृष्ठ 62):
- विद्यार्थी चित्रों में दिखाए गए पक्षियों के नाम लिखें:
- मोर, उल्लू, धनेश, बाज, तोता, कौआ, गौरैया, कबूतर, कोयल, आदि।
- विद्यार्थी चित्रों में दिखाए गए पक्षियों के नाम लिखें:
- खाद्य-साधन गतिविधि (पृष्ठ 63):
- विद्यार्थी अलग-अलग खाद्य पदार्थों (अनाज, बेरी, फल, गिरियाँ) को चम्मच/टूथपिक/चॉपस्टिक से उठाने का प्रयास करें।
- तालिका पूर्ति:खाद्य पदार्थउपयुक्त साधनअनाजचिमटी/चम्मचबेरी (सरस फल)चम्मच/टूथपिकगिरियाँ (नट)चॉपस्टिक/चिमटीफलों के टुकड़ेचम्मच
- चर्चा (पृष्ठ 63-64):
- बाज – नुकीली, मुझी हुई चोंच और नुकीले पंजे (शिकार पकड़ने के लिए)
- शकरखोरा (सनबर्ड) – लंबी चोंच (फूलों से मकरंद पीने के लिए)
- गौरैया – छोटी, कठोर चोंच (बीज तोड़ने के लिए)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “पक्षी की चोंच देखकर हम उसके भोजन के बारे में कैसे अनुमान लगा सकते हैं?”
- गृहकार्य: “किसी एक पक्षी का चित्र बनाएँ और उसकी चोंच, पंजे और खान-पान के बारे में लिखें।”
दिन 3 – पत्तियाँ, प्रकृति अवलोकन एवं ‘जीवन-जाल’ खेल
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “पक्षियों की चोंच और खान-पान के बीच क्या संबंध है?”
- प्रश्न: “क्या आपने कभी पत्तियों पर बनी रेखाओं (शिराओं) को ध्यान से देखा है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पत्तियों का अवलोकन (पृष्ठ 68-70):
- विद्यार्थी विभिन्न पत्तियों का अवलोकन करें और तालिका भरें:पत्ती का चित्र/नामरंगआकारबनावटअन्य अवलोकननीबूहराअंडाकारचिकनीतीखी गंधनीमहरालंबा-नुकीलाखुरदरीकड़वीपीपलहराहृदयाकारचिकनीलंबी डंठलबरगदहराबड़ा-गोलखुरदरीमोटी शिराएँ
- शिराएँ (Venation):
- जालिका शिराविन्यास – शिराएँ जाल की तरह (जैसे – नीम, पीपल)
- समानांतर शिराविन्यास – शिराएँ समानांतर (जैसे – केला, गेहूँ, मक्का)
- गतिविधि – पत्ती का रगड़-प्रिंट (Leaf Rubbing) (पृष्ठ 70):
- विद्यार्थी एक पत्ती लें (खुरदरी शिराओं वाली सतह ऊपर की ओर)।
- उसे कागज़ पर रखें, ऊपर से सादा कागज़ रखें और मोमरंग (क्रेयॉन) से रगड़ें।
- पत्ती की आकृति और शिराएँ कागज़ पर उभर कर आती हैं।
- विद्यार्थी अलग-अलग पत्तियों से प्रयोग करें और देखें कि प्रत्येक पत्ती का अपना अनोखा पैटर्न है।
- पक्षी दैनंदिनी (Bird Diary) (पृष्ठ 65):
- विद्यार्थी किसी पेड़ के पास जाएँ (या कल्पना करें) और एक पक्षी का अवलोकन करें:
- नाम : ________
- रूप-रंग : सिर का रंग, पीठ का रंग, पंखों के रंग, गले का रंग
- चोंच का आकार : ________
- पैरों का रंग : ________
- रोचक तथ्य : ________
- विद्यार्थी किसी पेड़ के पास जाएँ (या कल्पना करें) और एक पक्षी का अवलोकन करें:
- ‘जीवन-जाल’ खेल (पृष्ठ 70-72):
- उद्देश्य: समझना कि प्रकृति में सब कुछ एक-दूसरे से जुड़ा है।
- विधि:
- प्रत्येक विद्यार्थी को एक कार्ड मिलता है (पेड़, पक्षी, मछली, नदी, सूर्य, मिट्टी, आदि)।
- एक विद्यार्थी धागे का गोला पकड़ता है और अपने संबंध (जैसे – पेड़ → पक्षी को भोजन देता है) के अनुसार धागा दूसरे को देता है।
- जैसे-जैसे और संबंध बनते हैं, जाल बढ़ता जाता है।
- यदि कोई एक हिस्सा (जैसे – पेड़/बाघ) हट जाए तो जाल कमजोर हो जाता है या गिर जाता है।
- निष्कर्ष: “प्रकृति में सब कुछ आपस में जुड़ा है। एक की कमी से पूरा संतुलन बिगड़ सकता है।”
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “‘जीवन-जाल’ खेल से आपने क्या सीखा?” (सब आपस में जुड़े हैं)
- गृहकार्य: “अपने घर के आस-पास पाई जाने वाली किसी एक पत्ती का रगड़-प्रिंट बनाएँ और उस पौधे का नाम लिखें।”
दिन 4 – छोटे जंतु (कीट), वर्ग पहेली, भूमिका-निर्वहन एवं चुनौती
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “पत्तियों पर शिराएँ कितने प्रकार की होती हैं?” (जालिका, समानांतर)
- प्रश्न: “आपके घर और आस-पास कौन-कौन से कीट (छोटे जंतु) पाए जाते हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- छोटे जंतु – कीट (पृष्ठ 67):
- टिड्डा (Grasshopper) – तीन जोड़ी पैर, एक जोड़ी एंटीना (संवेदन के लिए)
- कीटों के लक्षण:
- तीन जोड़ी (6) पैर
- एक जोड़ी एंटीना
- दो जोड़ी पंख (कुछ में)
- कीटों के नाम:
- चींटी, मधुमक्खी, मक्खी, भौंरा, टिड्डा, तितली, भृंग (बीटल), मकड़ी (हालाँकि मकड़ी कीट नहीं है – 8 पैर)
- विद्यार्थी चित्रों में दिखाए गए कीटों के नाम लिखें (पृष्ठ 67):
- (क) चींटी (ख) मधुमक्खी (ग) तितली (घ) टिड्डा (ङ) मकड़ी (च) भृंग (छ) प्रार्थना-कीट (मेंटिस)
- पत्तियों से पेड़ की पहचान (पृष्ठ 68):
- विद्यार्थी नीचे दिखाई गई पत्तियों के आधार पर पेड़-पौधों की पहचान करें:
- (क) नीम (ख) पीपल (ग) बरगद (घ) आम (ङ) केला (च) गुलमोहर (छ) तुलसी
- विद्यार्थी नीचे दिखाई गई पत्तियों के आधार पर पेड़-पौधों की पहचान करें:
- वर्ग पहेली (पृष्ठ 73):
- विद्यार्थी वर्ग पहेली में वन-संपदा (जंगल से जुड़े शब्द) खोजें:
- बाघ, चीता, तितली, मोर, साँप, बंदर, गिलहरी, गौरैया, हिरण, बाज, हाथी, बरगद, आम, नीम आदि।
- विद्यार्थी वर्ग पहेली में वन-संपदा (जंगल से जुड़े शब्द) खोजें:
- भूमिका-निर्वहन (Role Play) (पृष्ठ 74):
- विद्यार्थी कक्षा में जंगल का दृश्य बनाएँ।
- कुछ विद्यार्थी पेड़, कुछ जंतु, कुछ आगंतुक (पर्यटक) की भूमिका निभाएँ।
- जंतुओं और पौधों की रक्षा पर ध्यान केंद्रित करें।
- चुनौती (पृष्ठ 73):
- “अपने परिवार या मित्रों के साथ निकट के किसी उद्यान भ्रमण की योजना बनाइए। उस भ्रमण में गाइड (मार्गदर्शक) बनने के लिए तैयारी करें।”
- विद्यार्थी कुछ पौधों और जंतुओं की पहचान करें और उनके गुणों/रोचक तथ्यों का अध्ययन करें।
- कागज़ का कछुआ (पृष्ठ 74):
- विद्यार्थी पुराने समाचार पत्र या प्रयुक्त कागज़ का उपयोग करके कागज़ का कछुआ बनाएँ (शिक्षक मार्गदर्शन करें)।
- पता लगाइए (पृष्ठ 74):
- “अपने राज्य के राजकीय पशु, पक्षी और पौधे का नाम लिखिए।”
- छत्तीसगढ़ – राजकीय पशु: जंगली भैंसा (गौर), राजकीय पक्षी: हरियल (पारवा), राजकीय वृक्ष: साल (विद्यार्थी अपने राज्य के अनुसार लिखें)
- “अपने राज्य के राजकीय पशु, पक्षी और पौधे का नाम लिखिए।”
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “कीटों की क्या विशेषताएँ हैं?” (तीन जोड़ी पैर, एंटीना)
- गृहकार्य: “अपने राज्य के राजकीय पशु, पक्षी और पौधे का चित्र बनाएँ।”
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पाठ का सामूहिक वाचन (मुख्य बिंदु)।
- विद्यार्थियों ने जो ‘कागज़ का कछुआ’ बनाया, उसे प्रदर्शित करें।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- पचमढ़ी किस राज्य में है? (मध्य प्रदेश)
- आभा दीदी कौन हैं? (प्रकृति वैज्ञानिक)
- गौर क्या है? (जंगली भैंसा)
- धनेश पक्षी को ऐसा क्यों कहते हैं? (माथे पर सींग जैसी संरचना)
- पक्षियों की चोंच और खान-पान में क्या संबंध है?
- पत्तियों पर शिराएँ कितने प्रकार की होती हैं? (दो – जालिका, समानांतर)
- ‘जीवन-जाल’ खेल से आपने क्या सीखा?
- कीटों के कितने पैर होते हैं? (6)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) जंगल में जाते समय किन्हीं चार सुरक्षा नियमों के नाम लिखिए।
- (ख) ‘प्रकृति की पाठशाला’ पाठ में आपको कौन-से जंतु देखने को मिले? (कोई पाँच)
- (ग) ‘गौरैया’ और ‘बाज’ की चोंच में क्या अंतर है?
- (घ) पत्तियों पर शिराएँ क्या होती हैं? दो प्रकार बताइए।
- (ङ) किन्हीं चार कीटों के नाम लिखिए।
- (च) ‘जीवन-जाल’ खेल का क्या उद्देश्य है? (सब आपस में जुड़े हैं)
- गतिविधि – प्रकृति प्रश्नोत्तरी:
- “मैं कौन हूँ?” – शिक्षक किसी जंतु/पौधे के बारे में बताएँ, विद्यार्थी नाम बताएँ:
- “मेरी चोंच लंबी है, मैं फूलों का रस पीता हूँ।” → शकरखोरा (सनबर्ड)
- “मेरे पैरों के निशान से मेरा पता चलता है।” → हिरण/बाघ
- “मेरी पत्तियों पर जाल जैसी शिराएँ हैं।” → नीम/पीपल
- “मैं कौन हूँ?” – शिक्षक किसी जंतु/पौधे के बारे में बताएँ, विद्यार्थी नाम बताएँ:
- समूह चर्चा:
- “हम प्रकृति की रक्षा कैसे कर सकते हैं?” (पेड़ लगाना, कचरा न फैलाना, पशु-पक्षियों को परेशान न करना)
- “क्या आपको प्रकृति वैज्ञानिक बनना अच्छा लगेगा? क्यों?”
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘प्रकृति की पाठशाला’ पाठ ने हमें जंगल, वन्यजीव, पक्षियों की चोंच, पत्तियों की शिराएँ, पदचिह्न, कीट और जीवन-जाल के बारे में सिखाया। हमने सीखा कि प्रकृति में सब कुछ आपस में जुड़ा है – पेड़, पशु, पक्षी, कीट, मिट्टी, पानी, सूर्य – सब एक-दूसरे पर निर्भर हैं। ‘संपूर्ण विश्व एक परिवार है’ – हमें प्रकृति का सम्मान करना चाहिए, उसकी रक्षा करनी चाहिए और जंगल में जाते समय सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए। प्रकृति ही हमारी सबसे बड़ी पाठशाला है। “
- अगले पाठ ‘प्रकृति की गोद में’ का संक्षिप्त परिचय – “अब हम सीखेंगे कि प्रकृति हमें भोजन, रंग, दवाइयाँ और बहुत कुछ कैसे देती है, और कैसे हम प्रकृति से जुड़ी परंपराओं को समझ सकते हैं।”
शिक्षण सहायक सामग्री
- पचमढ़ी (मध्य प्रदेश) के जंगल, जंतुओं, पक्षियों के चित्र/वीडियो
- विभिन्न पत्तियों के नमूने (नीम, पीपल, बरगद, आम, केला, तुलसी)
- क्रेयॉन (मोमरंग), सादा कागज़ (पत्ती रगड़-प्रिंट के लिए)
- जंतुओं के पदचिह्नों के चित्र
- ‘जीवन-जाल’ खेल के लिए कार्ड (पेड़, पशु, पक्षी, सूर्य, मिट्टी, पानी, आदि)
- पुराने समाचार पत्र (कागज़ का कछुआ बनाने के लिए)
- रंग, कागज़, पेंसिल
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | वन्यजीवों, पक्षियों, कीटों की पहचान | मौखिक/चित्र-पहचान |
| 2 | जंगल-सुरक्षा नियमों की समझ | मौखिक/लिखित |
| 3 | पक्षियों की चोंच-खान-पान के बीच संबंध की समझ | मौखिक/लिखित |
| 4 | पत्तियों की शिराओं (जालिका/समानांतर) की पहचान | मौखिक/गतिविधि |
| 5 | ‘जीवन-जाल’ – जीवों की परस्पर निर्भरता की समझ | खेल-आधारित/मौखिक |
| 6 | पदचिह्नों एवं राजकीय पशु/पक्षी/पौधे की पहचान | मौखिक/लिखित |
| 7 | रचनात्मक अभिव्यक्ति (पत्ती रगड़-प्रिंट, कागज़ का कछुआ, भूमिका-निर्वहन) | कला/गतिविधि |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘जंगल’, ‘हिरण’, ‘गिलहरी’, ‘पत्ती’ को क्या कहते हैं। पचमढ़ी – बताएँ कि यह मध्य प्रदेश का एक सुंदर पर्वतीय स्थान है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। भारत के राजकीय पशु/पक्षी/वृक्ष – राष्ट्रीय स्तर पर – बाघ (राजकीय पशु), मोर (राजकीय पक्षी), बरगद (राजकीय वृक्ष) – की भी चर्चा करें। ‘जीवन-जाल’ खेल – बच्चों को पर्यावरण संतुलन (ecological balance) की अवधारणा समझाने का बहुत प्रभावी तरीका है। पत्ती रगड़-प्रिंट – बच्चों को पत्तियों की रचना को बारीकी से देखने का अवसर देता है। प्रकृति-प्रेम – बच्चों को सिखाएँ कि प्रकृति हमारी सबसे बड़ी शिक्षक है – हमें उसका सम्मान करना चाहिए और उसकी रक्षा करनी चाहिए। सुरक्षा नियम – जंगल/चिड़ियाघर/प्रकृति भ्रमण पर जाते समय इन नियमों का पालन करना जीवन-रक्षक हो सकता है।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
