शतरंज में मात – कक्षा 4 हिंदी (Shatranj Mein Maat Class 4 Hindi)
पाठ का सारांश
यह पाठ विजयनगर साम्राज्य के महान राजा कृष्णदेव राय और उनके दरबार के विदूषक एवं परामर्शदाता तेनालीरामन की चतुराई की प्रसिद्ध कहानी है। यह एक नाटक (एकांकी) के रूप में है, जिसमें तीन दृश्य हैं।
- पहला दृश्य: दरबारी तेनालीरामन से ईर्ष्या करते हैं और राजा को बताते हैं कि तेनाली शतरंज में माहिर है। राजा तेनाली को शतरंज खेलने के लिए बाध्य करते हैं।
- दूसरा दृश्य: शतरंज खेलते समय तेनाली जानबूझकर गलत चालें चलते हैं। राजा क्रोधित होते हैं और तेनाली के सिर मुँडवाने की सजा देते हैं।
- तीसरा दृश्य: तेनाली अपनी बुद्धि से बच निकलते हैं। वे कहते हैं – “मैंने अपने बालों पर पाँच हजार अशर्फ़ियाँ उधार ली हैं, जब तक ऋण न चुकाऊँ, मुंडन नहीं करा सकता।” राजा वह राशि देने का आदेश देते हैं। फिर तेनाली कहते हैं – “आप मेरे माता-पिता हैं; मुंडन तो माता-पिता के स्वर्ग सिधारने पर होता है – यदि मेरा मुंडन हुआ तो आपको विपत्ति आएगी।” राजा सजा वापस ले लेते हैं और तेनाली की बुद्धि की प्रशंसा करते हैं।
यह नाटक बुद्धि और चतुराई की शक्ति, दूसरों की ईर्ष्या और विनम्रता का संदेश देता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- नाटक को सही उच्चारण, भाव, आवाज़ और पात्र-निर्वहन के साथ पढ़/अभिनय पाएँगे
- तेनालीरामन की चतुराई और बुद्धिमत्ता को समझ पाएँगे
- नाटक (एकांकी) के प्रारूप, संवाद और दृश्यों को समझ पाएँगे
- लिंग (पुल्लिंग/स्त्रीलिंग) की अवधारणा को समझ पाएँगे
- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया में अंतर कर पाएँगे
- उपसर्गों (प्रति, सु, भर, आ) से बने शब्दों को पहचान पाएँगे
- मनोभावों (प्रसन्न, चकित, शांत, दुखी) को संवादों में व्यक्त कर पाएँगे
- शतरंज के मोहरों की चाल के बारे में जान पाएँगे
- खेलों और उनके स्थानीय नामों के बारे में जान पाएँगे
- तेनालीरामन के अन्य किस्सों के बारे में जान पाएँगे
दिन 1 – नाटक का परिचय एवं वाचन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “क्या आपने कभी नाटक देखा है? नाटक में क्या होता है?” (पात्र, संवाद, मंच, अभिनय)
- प्रश्न: “आपको कौन-से खेल खेलना पसंद है? क्या आपने शतरंज खेला है?”
- प्रश्न: “क्या आपको पता है कि शतरंज का आविष्कार भारत में हुआ था?”
- प्रश्न: “तेनालीरामन के बारे में आप क्या जानते हैं?” (विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबारी, बहुत बुद्धिमान)
- पृष्ठ 154 का चित्र दिखाएँ – राजा कृष्णदेव राय, तेनालीरामन, दरबारी।
- परिचय: “आज हम ‘शतरंज में मात’ नाटक पढ़ेंगे, जिसमें तेनालीरामन अपनी बुद्धि से राजा को भी मात दे देते हैं!”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- नाटक का सस्वर वाचन – शिक्षक पृष्ठ 154-163 तक के नाटक को विभिन्न पात्रों की आवाज़ों में (राजा – गंभीर, तेनाली – हास्य/चतुर, दरबारी – चिढ़े/ईर्ष्यालु, नाई – सीधा) पढ़कर सुनाएँ।
- सामूहिक वाचन – विद्यार्थी तीन दृश्यों को बारी-बारी से पढ़ें (शिक्षक निर्देशन करें)।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या (पृष्ठ 163 के अनुसार):
- तेनालीरामन = विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के दरबारी, बुद्धिमान और विनोदी
- विदूषक = हास्य-व्यंग्य करने वाला (Jester)
- परामर्शदाता = सलाहकार (Advisor)
- कुशाग्र बुद्धि = बहुत तेज़ दिमाग (Sharp intellect)
- ईर्ष्या = दूसरे की उन्नति देखकर जलना (Jealousy)
- चाल = शतरंज में मोहरा चलना (Move in chess)
- दाँव = चाल/तरकीब (Strategy)
- मात = शतरंज में राजा को घेरना/हराना (Checkmate)
- मुंडन = बाल उतरवाना (Head shave)
- अशर्फ़ी = सोने का सिक्का (Gold coin)
- दीर्घायु = लंबी आयु (Long life)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “नाटक के मुख्य पात्र कौन हैं?” (राजा कृष्णदेव राय, तेनालीरामन, दरबारी, नाई)
- गृहकार्य: नाटक के तीनों दृश्यों को एक बार और पढ़ें।
दिन 2 – नाटक की गहन समझ एवं चर्चा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – नाटक का सामूहिक वाचन (संक्षिप्त)।
- “तीनों दृश्यों में क्या-क्या हुआ?” – बच्चे सारांश बताएँ।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 164):
- (क) “आपको यह नाटक कैसा लगा और क्यों?” (बहुत अच्छा, मज़ेदार, बुद्धिमानी से भरा)
- (ख) “आपने तेनालीरामन की तरह और किसके बुद्धिमानी के किस्से सुने हैं?” (बीरबल, एकबीर, गोपाल भांड – कोई एक किस्सा सुनाएँ)
- (ग) “क्या आपने कभी किसी कठिन परिस्थिति को संभाला है?” (अपने अनुभव साझा करें)
- (घ) “यदि तेनालीरामन शतरंज का खेल जानते तो नाटक का अंत क्या होता?” (शायद वे राजा को हरा देते और कोई सजा नहीं होती या खेल में उनकी प्रशंसा होती)
- ‘सोचिए और लिखिए’ (पृष्ठ 164):
- (क) “सभी दरबारी तेनालीरामन से ईर्ष्या क्यों करते थे?” (क्योंकि राजा उन्हें बहुत पसंद करते थे, उनकी प्रशंसा करते थे और उन्हें विशेष स्थान देते थे)
- (ख) “दरबारियों ने राजा से तेनालीरामन के बारे में क्या कहा?” (उन्होंने कहा कि तेनाली शतरंज में माहिर हैं, बड़े-बड़ों को मात दी है)
- (ग) “शतरंज खेलते समय राजा को तेनालीरामन पर क्रोध क्यों आ रहा था?” (क्योंकि तेनाली जानबूझकर गलत चालें चल रहे थे, राजा को लगा कि वे उनका अपमान कर रहे हैं)
- (घ) “तेनालीरामन ने मुंडन से बचने के लिए क्या चाल चली?” (पहली चाल – बालों पर उधार ली गई पाँच हजार अशर्फ़ियों का बहाना; दूसरी चाल – राजा को माता-पिता बताकर यह कहना कि मुंडन से राजा को विपत्ति आएगी)
- (ङ) “घर में खेले जाने वाले खेलों में आपको कौन-सा सबसे अच्छा लगता है?” (शतरंज, कैरम, लूडो, ताश, पासा – विद्यार्थी बताएँ कि वह कैसे खेला जाता है)
- ‘किसने, किससे कहा?’ (पृष्ठ 164):
- (क) “शतरंज? क्या तेनालीरामन शतरंज के शौकीन हैं?” – राजा ने, दरबारी से
- (ख) “और यह है मेरा दाँव।” – तेनालीरामन ने, राजा से
- (ग) “अरे, इतने महान आदमी का मुंडन!” – नाई ने, राजा से (अपने मन में)
- (घ) “हाँ महाराज, बड़े-बड़ों को मात दी है तेनाली ने।” – दरबारी ने, राजा से
- (ङ) “उठो, उठो! तुम्हें कोई दंड नहीं मिल रहा है।” – राजा ने, नाई से
समापन (5 मिनट)
- “तेनालीरामन ने किस गुण का उपयोग किया?” (बुद्धि/चतुराई)
- गृहकार्य: पृष्ठ 165 – ‘भाषा की बात’ (विशेषण) – मटके से उपयुक्त विशेषण चुनकर रिक्त स्थान भरें:
- बुद्धिमान (राजा)
- चतुर (तेनाली)
- मूर्ख (दरबारी? नहीं, ‘ईर्ष्यालु’ या ‘धूर्त’)
- (शिक्षक मार्गदर्शन करें)
दिन 3 – अभ्यास एवं भाषा कौशल (व्याकरण)
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- नाटक का सामूहिक वाचन (सभी मिलकर)।
- पिछले दिन के गृहकार्य (विशेषण) की चर्चा।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- समानार्थी शब्द (मिलान) (पृष्ठ 165):
- महाराज ↔ राजा
- दरबारी ↔ राज-सेवक
- क्रोधित ↔ गुस्सा
- चतुर ↔ बुद्धिमान
- विदूषक ↔ हास्य-कलाकार
- विशेषण चुनकर रिक्त स्थान भरें (पृष्ठ 165):
- (क) राजा कृष्णदेव राय बुद्धिमान राजा थे।
- (ख) तेनालीरामन बहुत चतुर थे।
- (ग) दरबारी तेनाली से ईर्ष्यालु थे।
- (घ) नाई निर्दोष था।
- मनोभाव – संवाद लेखन (पृष्ठ 165):
- विद्यार्थी निम्नलिखित मनोभावों को संवाद के रूप में लिखें:
- प्रसन्न – “मेरी खोई हुई पुस्तक मिल गई है!”
- चकित – “क्या! तुमने यह कैसे किया?”
- शांत – “कोई बात नहीं, सब ठीक हो जाएगा।”
- दुखी – “आज मेरा मन बहुत उदास है।”
- विद्यार्थी निम्नलिखित मनोभावों को संवाद के रूप में लिखें:
- उपसर्ग – नए शब्द (पृष्ठ 166):
- शिक्षक उपसर्ग समझाएँ:
- प्रति (विपरीत/बदले में) – प्रतिदिन, प्रतिकार, प्रतिध्वनि
- सु (अच्छा) – सुगंध, सुंदर, सुख
- भर (पूरा) – भरपूर, भरपेट
- आ (समीप/तरफ) – आगमन, आजीवन
- विद्यार्थी तालिका पूरी करें:उपसर्गमूल शब्दनया शब्दअर्थप्रतिदिनप्रतिदिनरोज़सुगंधसुगंधअच्छी महकभरपेटभरपेटपेट भरकरआजीवनआजीवनजीवन भर
- शिक्षक उपसर्ग समझाएँ:
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभ्यास कार्यों की जाँच।
- गृहकार्य: पृष्ठ 166 – “पाठ से आगे” – शतरंज के मोहरों की चाल के बारे में पता करें (राजा, मंत्री, हाथी, ऊँट, घोड़ा, प्यादा)।
दिन 4 – रचनात्मक गतिविधि, शतरंज एवं विस्तार
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (शतरंज मोहरों की चाल) पर चर्चा:
- राजा – एक घर/एक कदम (सभी दिशाओं में)
- मंत्री – सबसे ताकतवर (किसी भी दिशा में कितने भी घर)
- हाथी – सीधा (खड़ा/आड़ा, कितने भी घर)
- ऊँट – तिरछा (कितने भी घर)
- घोड़ा – ‘एल’ (L) आकार में
- प्यादा – एक-एक घर आगे, पहली चाल में दो घर
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- शतरंज की भूल-भुलैया (पृष्ठ 168):
- विद्यार्थी संज्ञा (नाम वाले शब्द) को एक-दूसरे से मिलाते हुए मंत्री को राजा तक पहुँचाएँ।
- नियम: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया को आपस में नहीं मिलाना है।
- संज्ञा: राजा, मंत्री, हाथी, घोड़ा, प्यादा, दरबार, सभा
- सर्वनाम: मैं, तुम, वह, हम, आप
- विशेषण: अच्छा, बड़ा, चतुर, बुद्धिमान
- क्रिया: चलना, खेलना, बोलना, देखना
- (शिक्षक बोर्ड पर शब्दों का जाल बनाकर मार्गदर्शन करें)
- खेलों के नाम – चित्र मिलान (पृष्ठ 167):
- विद्यार्थी चित्रों को खेलों के नाम से मिलाएँ:
- शतरंज – बिसात/मोहरें
- कैरम – गोटियाँ और स्ट्राइकर
- लूडो – पासा और चार रंगों के मोहरे
- पासा/पगड़िया – पासा
- विद्यार्थी स्थानीय भाषा में खेलों के नाम भी लिखें (बहुभाषिकता)।
- विद्यार्थी चित्रों को खेलों के नाम से मिलाएँ:
- अभिनय/रोल-प्ले (नाटक का मंचन):
- विद्यार्थियों को तीन दृश्यों में बाँटें।
- पात्र निर्धारित करें – राजा, तेनालीरामन, दरबारी (4-5), नाई।
- प्रत्येक समूह अपने दृश्य का अभिनय करें (संवाद, हाव-भाव, आवाज़ के साथ)।
- शिक्षक निर्देशक की भूमिका में सहायता करें।
- तेनालीरामन के अन्य किस्से (पृष्ठ 168):
- विद्यार्थी पुस्तकालय/अन्य स्रोतों से तेनालीरामन के किस्से पढ़ें और कक्षा में सुनाएँ।
- “तेनालीरामन के किस्से” नाम से मित्र-मंडली की बैठक आयोजित करें।
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभिनय और भूल-भुलैया समाधान की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: “तेनालीरामन का कोई एक किस्सा” पढ़ें और उसका सारांश 5-6 वाक्यों में लिखें।
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- नाटक का सामूहिक वाचन (सब मिलकर, विभिन्न आवाज़ों में)।
- विद्यार्थियों ने जो तेनालीरामन के किस्से पढ़े, उन्हें 2-3 विद्यार्थी सुनाएँ।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- तेनालीरामन किस राजा के दरबार में थे? (राजा कृष्णदेव राय)
- राजा ने तेनाली को क्यों सजा दी? (अपमान/जानबूझकर हारने के लिए)
- राजा की सजा क्या थी? (सिर मुँडवाना)
- तेनाली ने पहली चाल क्या चली? (बालों पर 5000 अशर्फ़ियाँ उधार)
- तेनाली ने दूसरी चाल क्या चली? (राजा को माता-पिता बताकर मुंडन से रोका)
- नाटक का अंत कैसे हुआ? (राजा ने सजा वापस ली और तेनाली की प्रशंसा की)
- ‘कुशाग्र बुद्धि’ का क्या अर्थ है? (बहुत तेज़ दिमाग)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘शतरंज में मात’ नाटक के तीन दृश्यों में से किसी एक दृश्य का सारांश लिखिए।
- (ख) तेनालीरामन ने मुंडन से बचने के लिए क्या-क्या कहा? (दो बहाने)
- (ग) ‘ईर्ष्या’ शब्द का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए। (अर्थ – दूसरे की उन्नति देखकर जलना; वाक्य – “दरबारी तेनाली से ईर्ष्या करते थे।”)
- (घ) ‘सु’ उपसर्ग से बना एक शब्द लिखिए और उसका वाक्य में प्रयोग कीजिए। (सुगंध – “फूलों की सुगंध बहुत अच्छी थी।”)
- (ङ) शतरंज के किन्हीं चार मोहरों के नाम लिखिए। (राजा, मंत्री, हाथी, ऊँट, घोड़ा, प्यादा – कोई चार)
- समूह चर्चा:
- “क्या आपको तेनालीरामन की चतुराई पसंद आई? क्यों?”
- “हमें किन परिस्थितियों में बुद्धि का उपयोग करना चाहिए?”
- “ईर्ष्या करना अच्छा है या बुरा?” (बुरा – इससे दूसरों को नुकसान पहुँचता है)
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘शतरंज में मात’ नाटक हमें सिखाता है कि बुद्धि और चतुराई से बड़ी से बड़ी विपत्ति भी टाली जा सकती है। तेनालीरामन ने अपनी कुशाग्र बुद्धि से राजा की सजा को टाला और अपनी विनम्रता से राजा का मन भी जीत लिया। यह नाटक हमें ईर्ष्या के दुष्परिणाम भी बताता है – दरबारी तेनाली को नीचा दिखाना चाहते थे, पर तेनाली की बुद्धि ने उन्हें फिर से मात दे दी। ‘बुद्धि बलवान’ – यही इस नाटक का मुख्य संदेश है।”
- अगले पाठ (Unit 5) ‘हमारा आदित्य’ का संक्षिप्त परिचय – “अब हम एक विज्ञान-कथा पढ़ेंगे, जिसमें सूर्य के बारे में और भारत के अंतरिक्ष यान ‘आदित्य-एल 1’ के बारे में जानेंगे।”
शिक्षण सहायक सामग्री
- नाटक का चार्ट (तीन दृश्यों के संवादों के साथ)
- पात्रों के चित्र (राजा कृष्णदेव राय, तेनालीरामन, दरबारी, नाई)
- शतरंज की बिसात और मोहरों का चित्र/वास्तविक सेट (यदि संभव हो)
- उपसर्ग कार्ड (प्रति, सु, भर, आ)
- विशेषण/मनोभाव कार्ड
- शब्दार्थ कार्ड (विदूषक, परामर्शदाता, कुशाग्र बुद्धि, मुंडन, अशर्फ़ी, दीर्घायु)
- रंग, कागज़, पेंसिल
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | नाटक का सस्वर, भावपूर्ण एवं पात्र-निर्वहन सहित वाचन | अवलोकन/मौखिक प्रस्तुति |
| 2 | नाटक की समझ (पात्र, घटनाएँ, तेनाली की चतुराई) | मौखिक/लिखित प्रश्न |
| 3 | लिंग, संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण/क्रिया की पहचान | भूल-भुलैया/लिखित |
| 4 | उपसर्गों (प्रति, सु, भर, आ) से बने शब्दों की पहचान एवं प्रयोग | लिखित अभ्यास |
| 5 | मनोभावों को संवादों में व्यक्त करना | लिखित अभ्यास |
| 6 | शतरंज के मोहरों एवं अन्य खेलों की जानकारी | मौखिक/चित्र मिलान |
| 7 | रचनात्मक अभिव्यक्ति (अभिनय, किस्सा-लेखन) | समूह गतिविधि/लिखित |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘शतरंज’, ‘राजा’, ‘मंत्री’, ‘बुद्धि’ को क्या कहते हैं। नाटक का मंचन बच्चों को आत्मविश्वास, संवाद-कौशल और अभिनय का अवसर देता है – यदि संभव हो तो पूरे नाटक का मंचन कराएँ। शतरंज की बिसात – यदि संभव हो तो कक्षा में शतरंज दिखाएँ या खेलें ताकि बच्चों को मोहरों की चाल समझ में आए। तेनालीरामन के किस्से – बच्चों को इन किस्सों को पढ़ने और सुनाने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि उनकी पठन-रुचि बढ़े और बुद्धिमानी की कहानियों से प्रेरणा मिले। ईर्ष्या के दुष्परिणाम पर चर्चा अवश्य करें – बच्चों को सिखाएँ कि दूसरों की सफलता पर खुश होना चाहिए, ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
