कविता का कमाल – कक्षा 4 हिंदी (Kavita Ka Kamal Class 4 Hindi)
पाठ का सारांश
यह एक रोचक लोककथा है, जो सृजनात्मकता, बुद्धि और संयोग की शक्ति को दर्शाती है। मदन नाम का एक गरीब लड़का अपनी माँ के कहने पर पैसे कमाने के लिए घर से निकलता है। रास्ते में वह कुत्ता, भैंस, चिड़िया, साँप आदि को देखकर तुकबंदी वाली कविता बनाता है। वह राजदरबार में कवि-सम्मेलन में भाग लेता है। उसी रात राजा अपने महल के छज्जे पर खड़े होकर उसी कविता को दोहराते हैं। संयोग से कुछ चोर (जिनमें धन्नू शाह भी है) राजा का खजाना लूटने आए होते हैं। राजा की कविता सुनकर चोर डर जाते हैं और धन्नू शाह राजा के पैरों पड़कर माफ़ी माँगता है। इस प्रकार मदन की कविता राजा का खजाना बचा लेती है। राजा मदन को पुरस्कृत करता है। यह कहानी सिखाती है कि हर काम में कला/प्रतिभा काम आ सकती है और अनपेक्षित तरीके से भी सफलता मिल सकती है। यह सकारात्मक सोच और भाग्य का भी संदेश देती है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- कहानी को सही उच्चारण, भाव और गति के साथ पढ़ पाएँगे
- रचनात्मकता, कविता और बुद्धि के महत्व को समझ पाएँगे
- मुहावरों (“मन में लड्डू फूटना”, “मुँह ताकना”) का अर्थ समझकर प्रयोग कर पाएँगे
- विराम चिह्नों (। , ? !) का सही प्रयोग कर पाएँगे
- कहानी के क्रम (sequencing) को समझ पाएँगे
- ध्वन्यात्मक शब्दों (खुदुर-खुदुर, सुरुर-सुरुर, ताक-झाँक) की पहचान कर पाएँगे
- कल्पना से कविता को आगे बढ़ा पाएँगे
- मीडिया-लेखन (साक्षात्कार) का अनुभव कर पाएँगे
- कागज की पुतलियाँ / अभिनय के माध्यम से कहानी प्रस्तुत कर पाएँगे
- पहेली (“बंदर और खजूर का पेड़”) हल कर पाएँगे
दिन 1 – कहानी का परिचय एवं वाचन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “क्या आपको कहानी सुनना-सुनाना पसंद है? क्या आपने कभी कोई कविता बनाई है?”
- प्रश्न: “अगर आपके पास पैसे कमाने का कोई ज़रिया न हो, तो आप क्या करेंगे?”
- प्रश्न: “क्या आपको लगता है कि कविता भी किसी के काम आ सकती है?”
- प्रश्न: “आप ‘कविता का कमाल’ शीर्षक से क्या समझते हैं?”
- पृष्ठ 142-143 का चित्र दिखाएँ – मदन, माँ, कुत्ता, भैंस, चिड़िया, साँप, राजमहल।
- परिचय: “आज हम एक बहुत ही मज़ेदार और प्रेरणादायक कहानी पढ़ेंगे – ‘कविता का कमाल’, जिसमें एक गरीब लड़के की कविता राजा का खजाना बचा लेती है!”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- कहानी का सस्वर वाचन – शिक्षक पृष्ठ 142-146 तक की कहानी को रोचक, विभिन्न पात्रों की आवाज़ों में (मदन – सहज, कुत्ता-भैंस-चिड़िया-साँप की ध्वनियाँ, राजा – गंभीर, धन्नू शाह – डरा हुआ) पढ़कर सुनाएँ।
- सामूहिक वाचन – विद्यार्थी बारी-बारी से अनुच्छेद पढ़ें (अलग-अलग भागों में)।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- लोककथा = जन-जन में प्रचलित कहानी (Folk tale)
- रोजगार = काम/आजीविका (Employment)
- ढिंढोरा = नगाड़ा/ढोल बजाकर सूचना देना (Proclamation)
- कवि-सम्मेलन = कवियों की सभा (Poetry meet)
- राजदरबार = राजा का दरबार (Royal court)
- खजाना = धन-संपत्ति रखने का स्थान (Treasury)
- सेंध लगाना = दीवार में छेद करना (Break in)
- अशर्फ़ी = सोने का सिक्का (Gold coin)
- विचित्र = अजीब/अनोखा (Strange/Unique)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “कहानी के मुख्य पात्र कौन हैं?” (मदन, मदन की माँ, राजा, धन्नू शाह)
- गृहकार्य: कहानी को एक बार और पढ़ें और बताएँ – “मदन ने कविता की कौन-सी पंक्तियाँ बनाईं?”
दिन 2 – कहानी की गहन समझ एवं चर्चा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – कहानी का सामूहिक वाचन।
- “मदन ने कविता की कितनी पंक्तियाँ बनाईं?” (8 पंक्तियाँ)
- कविता की पंक्तियाँ सुनाएँ:
- “खुदुर-खुदुर का खोदत है?”
- “सुरुर-सुरुर का पीबत है?”
- “ताक-झाँक का खोजत है?”
- “हम जानत का ढूँढत है!”
- “सरक-सरक कहाँ भागत है?”
- “जानत हो हम देखत हैं।”
- “हमसे न बच सकत है।”
- “धन्नू शाह, भाई धन्नू शाह!”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 147):
- (क) “क्या आपको कथा-कहानी सुनना-सुनाना पसंद है? क्यों?” (हाँ, मनोरंजन, ज्ञान, प्रेरणा)
- (ख) “इस लोककथा का सबसे रोचक हिस्सा कौन-सा है?” (जब राजा कविता बोल रहे थे और चोर डर गए – संयोग)
- (ग) “राजा का खजाना मदन की कविता के कारण बचा या राजा के कारण?” (मदन की कविता के कारण, क्योंकि राजा उसी कविता को दोहरा रहे थे)
- (घ) “राजदरबार में मदन की कविता सुनकर सुनने वाले एक-दूसरे का मुँह क्यों ताकने लगे?” (क्योंकि कविता विचित्र थी – उन्हें उसका अर्थ समझ नहीं आया, पर वे मूर्ख नहीं दिखना चाहते थे)
- (ङ) “आप इस कहानी को कोई और शीर्षक देना चाहें तो क्या देंगे?” (जैसे – “मदन की कविता”, “कविता का चमत्कार”, “बुद्धि बलवान”)
- ‘कविता की बात’ (पृष्ठ 147):
- (क) “सुरुर-सुरुर का ________ है?” → (ग) पीबत – “सुरुर-सुरुर का पीबत है?”
- (ख) “________ का खोदत है?” → (घ) खुदुर-खुदुर – “खुदुर-खुदुर का खोदत है?”
- (ग) “‘आप कौन हैं, साहब?’ उत्तर मिला –” → (ख) धन्नू शाह
- ‘मिलान’ (पृष्ठ 148):
- विद्यार्थी कविता की पंक्तियों को सही क्रम में लगाएँ:
- खुदुर-खुदुर का खोदत है?
- सुरुर-सुरुर का पीबत है?
- ताक-झाँक का खोजत है?
- हम जानत का ढूँढत है!
- सरक-सरक कहाँ भागत है?
- जानत हो हम देखत हैं।
- हमसे न बच सकत है।
- धन्नू शाह, भाई धन्नू शाह!
- विद्यार्थी कविता की पंक्तियों को सही क्रम में लगाएँ:
- ‘सोचिए और लिखिए’ (पृष्ठ 149):
- (क) “मदन की माँ ने ऐसा क्यों कहा – ‘अब मैं तुझे बिठाकर नहीं खिला सकती’?” (क्योंकि वे बहुत गरीब थे और मदन को पैसे कमाने की ज़रूरत थी)
- (ख) “धन्नू शाह ने मदन को राजमहल का रास्ता बताते हुए ऐसा क्यों कहा – ‘मुझे नहीं तो और किसे मालूम होगा?'” (क्योंकि वह चोर था और राजमहल के बारे में सब जानता था)
- (ग) “मदन की कविता को विचित्र क्यों कहा गया है?” (क्योंकि उसमें स्थानीय/अनोखी बोली का प्रयोग था – ‘खोदत’, ‘पीबत’, ‘जानत’ – जो मानक हिंदी से अलग था)
- (घ) “राजा को मदन की कविता पहेली जैसी लगी – आपको कैसी लगी?” (बहुत अच्छी, मज़ेदार, अनोखी)
- ‘समझ और अनुभव’ (पृष्ठ 149):
- (क) “‘सुरुर-सुरुर’ का प्रयोग पीने के साथ क्यों किया गया?” (पानी पीने की ध्वनि)
- (ख) “सौ अशर्फ़ियाँ – एक सोने का सिक्का”
- (ग) “‘सरक-सरक’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ?” (साँप के रेंगने के लिए – रेंगने की ध्वनि)
- (घ) “धन्नू शाह ने ऐसा क्यों सोचा?” (क्योंकि राजा ने उसका नाम लेकर कविता कही – “धन्नू शाह, भाई धन्नू शाह!”)
समापन (5 मिनट)
- “कहानी का मुख्य संदेश क्या है?” (कला/प्रतिभा किसी भी समय काम आ सकती है)
- गृहकार्य: “राजा के खजाने में क्या-क्या होता होगा?” – 3-4 वाक्य लिखें (पृष्ठ 149)।
दिन 3 – अभ्यास एवं भाषा कौशल (व्याकरण)
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- कहानी का सामूहिक वाचन (सब मिलकर)।
- पिछले दिन के गृहकार्य (खजाने में क्या?) साझा करें – 3-4 विद्यार्थी पढ़ें।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘अनुमान और कल्पना’ (पृष्ठ 149-150):
- (क) “यदि मदन रोज़गार की खोज में न निकलता तो क्या होता?” (शायद राजा का खजाना लूटा जाता, मदन गरीब रहता)
- (ख) “राजमहल कैसा होता होगा?” (बहुत बड़ा, सुंदर, सजा हुआ, ऊँची-ऊँची दीवारें, सोने-चाँदी की सजावट)
- (ग) “राजा के खजाने में क्या-क्या होता होगा?” (सोना, चाँदी, रत्न, मोहरें, हीरे-जवाहरात, कपड़े, बहुमूल्य वस्तुएँ)
- (घ) “राजा ने मदन को विदा करते समय क्या-क्या उपहार दिए होंगे?” (सोने-चाँदी की अशर्फ़ियाँ, कपड़े, रत्न)
- (ङ) “राजा ने मदन को मिले धन को कहाँ खर्च करना चाहिए?” – तालिका भरें:क्रमखर्च करने हेतु सुझावआपकी राय1.माँ के लिए कपड़े खरीदनासही है, माँ की सेवा2.कुछ रुपये बैंक में जमा करनासही है, भविष्य के लिए3.कुछ रुपये गरीबों को दान करनाअच्छा काम4.कुछ पैसों से किताबें खरीदनाज्ञान के लिए5.घर की मरम्मत करानाआवश्यक
- ‘मीडिया और आप’ – साक्षात्कार (पृष्ठ 151):
- विद्यार्थी स्वयं को मदन मानकर मीडिया के प्रश्नों के उत्तर दें:
- मीडिया: “कवि-सम्मेलन में पुरस्कार पाकर आपको कैसा लग रहा है?”
- मदन: “मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी कविता इतनी काम आएगी।”
- मीडिया: “आप इस उपलब्धि का श्रेय किसे देना चाहेंगे?”
- मदन: “मैं इसका श्रेय अपनी माँ को देना चाहूँगा, जिन्होंने मुझे घर से निकाला और काम की तलाश में भेजा।”
- मीडिया: “आपको राजदरबार में कविता सुनाकर कैसा लगा?”
- मदन: “पहले तो बहुत डर लगा, पर बाद में अच्छा लगा।”
- मीडिया: “आगे आपकी क्या योजनाएँ हैं?”
- मदन: “मैं और अच्छी कविताएँ लिखूँगा और अपनी माँ की सेवा करूँगा।”
- मीडिया: “बहुत-बहुत धन्यवाद मदन जी।”
- मदन: “मुझे भी धन्यवाद।”
- विद्यार्थी स्वयं को मदन मानकर मीडिया के प्रश्नों के उत्तर दें:
- ‘आपकी कविता’ (पृष्ठ 152):
- विद्यार्थी रजनी की कविता को आगे बढ़ाएँ:
- “डाल-डाल क्यों कूद रहा? खों-खों-खों क्यों बोल रहा? बंदर जी, भाई बंदर जी!”
- “हुआँ-हुआँ क्यों चिल्ला रहा? धूप से क्यों बचता जा रहा? सियार जी, भाई सियार जी!”
- विद्यार्थी रजनी की कविता को आगे बढ़ाएँ:
- मुहावरे (पृष्ठ 152):
- (क) मन में लड्डू फूटना – बहुत खुश होना
- वाक्य: “जब मदन ने पुरस्कार जीता, तो उसके मन में लड्डू फूटने लगे।”
- (ख) मुँह ताकना – आश्चर्य/हैरानी से देखना
- वाक्य: “राजदरबार में सब लोग मदन की कविता सुनकर मुँह ताकने लगे।”
- (क) मन में लड्डू फूटना – बहुत खुश होना
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभ्यास कार्यों की जाँच।
- गृहकार्य: पृष्ठ 153 – विराम चिह्न अभ्यास पूरा करें।
दिन 4 – रचनात्मक गतिविधि, अभिनय एवं पहेली
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (विराम चिह्न) की चर्चा।
- कहानी का संक्षिप्त पुनर्वाचन।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- विराम चिह्न (पृष्ठ 153):
- (क) “क्या ताक-झाँक कर रहे हो?” (प्रश्नवाचक)
- (ख) “अरे वाह! क्या चौका मारा है!” (विस्मयादिबोधक)
- (ग) “आइए, राजा से मिलवाता हूँ।” (पूर्ण विराम)
- (घ) “दादी देखते ही बोली – कहाँ जा रहे हो?” (प्रश्नवाचक)
- कलाकारी – ढोल/नगाड़ा बजाना (पृष्ठ 153):
- विद्यार्थी ढोल, नगाड़ा या अन्य वाद्ययंत्र बजाते हुए बोलें:
- “सुनी, सुनी, सुनी! राजदरबार में कवि-सम्मेलन हो रहा है। सबसे अच्छी कविता सुनाने वाले को सौ अशर्फ़ियाँ इनाम में मिलेंगी।”
- विद्यार्थी इस संवाद को अपनी मातृभाषा में हाव-भाव के साथ बोलें (बहुभाषिकता)।
- विद्यार्थी ढोल, नगाड़ा या अन्य वाद्ययंत्र बजाते हुए बोलें:
- अभिनय/रोल-प्ले:
- विद्यार्थी 6 समूहों में बँटकर कहानी का अभिनय करें:
- समूह 1 – मदन और माँ
- समूह 2 – कुत्ता, भैंस, चिड़िया, साँप
- समूह 3 – मदन (रास्ता पूछते हुए) और धन्नू शाह
- समूह 4 – राजदरबार – कवि-सम्मेलन
- समूह 5 – राजा (छज्जे पर) और चोर
- समूह 6 – राजा और मदन (पुरस्कार)
- प्रत्येक समूह को अपने भाग का अभिनय करने का अवसर दें।
- विद्यार्थी 6 समूहों में बँटकर कहानी का अभिनय करें:
- पहेली (पृष्ठ 153):
- “एक व्यक्ति के घर के बाहर दस मीटर ऊँचा खजूर का पेड़ था। एक बंदर उस पर चढ़ने लगा। दिन में 5 मीटर चढ़ता, रात में 4 मीटर फिसलता।”
- हल: 5 मीटर चढ़ता – 4 मीटर फिसलता = 1 मीटर प्रतिदिन।
- 5वें दिन: सुबह से पहले 4 मीटर (4 दिन में 4 मीटर) + 5वें दिन 5 मीटर चढ़ा = 9 मीटर → 5वें दिन वह चोटी पर पहुँच जाएगा (रात में नहीं फिसलेगा क्योंकि पहुँच गया)।
- उत्तर: 5 दिन में
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभिनय और पहेली हल करने की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: “मदन की कविता” को याद करें और उसे अपनी मातृभाषा में कहने का प्रयास करें।
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- कहानी का सामूहिक वाचन (सब मिलकर, मदन की कविता को एक साथ बोलें)।
- विद्यार्थियों ने जो कविता अपनी मातृभाषा में कही, उसे 3-4 विद्यार्थी सुनाएँ।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- मदन ने घर से क्यों निकला? (पैसे कमाने के लिए)
- मदन ने रास्ते में कौन-कौन से जानवर देखे? (कुत्ता, भैंस, चिड़िया, साँप)
- मदन की कविता में कितनी पंक्तियाँ थीं? (8)
- राजा क्यों छज्जे पर खड़े थे? (कविता की पहेली सुलझाने के लिए)
- चोरों ने क्या सोचा? (कि राजा उन्हें देख रहा है)
- राजा ने मदन को क्या पुरस्कार दिया? (सोने-चाँदी की अशर्फ़ियाँ/धन)
- ‘खुदुर-खुदुर’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ? (कुत्ते के खोदने के लिए)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘कविता का कमाल’ कहानी के मुख्य पात्रों के नाम लिखिए।
- (ख) मदन की कविता की कोई चार पंक्तियाँ लिखिए।
- (ग) राजा का खजाना कैसे बचा? (मदन की कविता के कारण – राजा ने वही कविता दोहराई, जिससे चोर डर गए)
- (घ) ‘मन में लड्डू फूटना’ मुहावरे का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए।
- (ङ) नीचे दिए गए वाक्यों में विराम चिह्न लगाइए:
- “अरे वाह क्या बात है” → “अरे वाह! क्या बात है!”
- “तुम कहाँ जा रहे हो” → “तुम कहाँ जा रहे हो?”
- (च) पहेली का उत्तर बताइए – “बंदर 10 मीटर ऊँचे पेड़ पर कितने दिन में चढ़ेगा?” (5 दिन में)
- समूह चर्चा:
- “क्या आपको लगता है कि कविता/कला इतनी शक्तिशाली हो सकती है?” (हाँ – साहित्य, संगीत, चित्रकला सब बदलाव ला सकते हैं)
- “मदन की कविता क्यों काम आई?” (उसकी सरलता, तुकबंदी, और सही समय पर सही जगह)
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘कविता का कमाल’ एक प्रेरणादायक लोककथा है, जो हमें सिखाती है कि हर कला/प्रतिभा का अपना महत्व है। मदन ने अपनी सहज कविता से न केवल राजा का खजाना बचाया, बल्कि अपनी गरीबी भी दूर की। यह कहानी हमें सकारात्मक सोच, सृजनात्मकता और भाग्य का संदेश देती है – हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए, क्योंकि किसी भी क्षण हमारी कोई कला/प्रतिभा हमारे काम आ सकती है। ‘अवसर’ हर जगह है, बस उसे पहचानने की ज़रूरत है।“
- अगले पाठ ‘शतरंज में मात’ का संक्षिप्त परिचय – “अब हम तेनालीरामन की एक बुद्धिमानी भरी कहानी पढ़ेंगे, जो शतरंज के खेल में चतुराई दिखाते हैं।”
शिक्षण सहायक सामग्री
- कहानी का चार्ट (मुख्य घटनाओं के साथ)
- मदन की कविता का चार्ट (8 पंक्तियाँ)
- पात्रों के चित्र (मदन, माँ, कुत्ता, भैंस, चिड़िया, साँप, राजा, धन्नू शाह)
- शब्दार्थ कार्ड (लोककथा, ढिंढोरा, कवि-सम्मेलन, अशर्फ़ी, खजाना, सेंध)
- मुहावरा कार्ड (मन में लड्डू फूटना, मुँह ताकना)
- विराम चिह्न कार्ड (। , ? !)
- वाद्ययंत्र (ढोल/नगाड़ा) – वास्तविक या कागज़ का
- रंग, कागज़, पेंसिल (अभिनय/पुतलियों के लिए)
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | कहानी का सस्वर, भावपूर्ण एवं पात्र-निर्वहन सहित वाचन | अवलोकन/मौखिक प्रस्तुति |
| 2 | कहानी की समझ (पात्र, घटनाएँ, मदन की कविता, नैतिक संदेश) | मौखिक/लिखित प्रश्न |
| 3 | मुहावरों (मन में लड्डू फूटना, मुँह ताकना) का अर्थ एवं प्रयोग | लिखित अभ्यास/मौखिक |
| 4 | विराम चिह्नों (। , ? !) का सही प्रयोग | लिखित अभ्यास |
| 5 | रचनात्मक अभिव्यक्ति (साक्षात्कार, कविता को आगे बढ़ाना, अभिनय) | लिखित/कला/गतिविधि |
| 6 | पहेली-समाधान (तार्किक क्षमता) | समस्या-समाधान |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘कविता’, ‘राजदरबार’, ‘खजाना’, ‘अशर्फ़ी’ को क्या कहते हैं। मदन की कविता की भाषा (स्थानीय बोली – ‘खोदत’, ‘पीबत’, ‘जानत’) बच्चों को भाषा की विविधता का अनुभव कराएगी। ढिंढोरा – पुरानी सूचना प्रणाली की तुलना आज के मीडिया (टीवी, रेडियो, सोशल मीडिया) से करें। साक्षात्कार (मीडिया और आप) गतिविधि बच्चों को आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति का अवसर देगी। अभिनय गतिविधि बच्चों को कहानी से गहराई से जोड़ेगी और उनकी रचनात्मकता को बढ़ाएगी। पहेली (बंदर-खजूर) तार्किक सोच को विकसित करेगी। ‘अवसर की पहचान’ – मदन की कहानी बच्चों को सिखाती है कि हर कठिनाई में अवसर छिपा होता है – बस उसे पहचानने की ज़रूरत है।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
