ऐसा वर दो – कक्षा 4 हिंदी (Aisa Var Do Class 4 Hindi)
पाठ का सारांश
यह एक प्रार्थना (Prayer) कविता है, जिसमें कवि ईश्वर से अच्छे गुणों, ज्ञान, साहस और सेवा की भावना की प्रार्थना करता है। कविता में कहा गया है कि हमें फूलों की तरह मुस्कुराना चाहिए, दीपक की तरह अंधेरे से लड़ना चाहिए, सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए और सबको सन्मार्ग दिखाना चाहिए। कविता सद्गुणों, साहस, ज्ञान, सत्यनिष्ठा और सामूहिकता की शिक्षा देती है। यह पाठ बच्चों में आध्यात्मिक, नैतिक और सामाजिक मूल्यों का विकास करता है और उन्हें सच्चे इंसान बनने की प्रेरणा देता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- कविता को सही लय, भाव और उच्चारण के साथ पढ़/गा पाएँगे
- प्रार्थना के महत्व को समझ पाएँगे
- सद्गुणों (सत्य, साहस, सेवा, करुणा, ज्ञान) की पहचान कर पाएँगे
- ‘वर’ शब्द का अर्थ (आशीर्वाद/दान) समझ पाएँगे
- उपसर्ग (सु-, परि-) से बने शब्दों को पहचान पाएँगे
- समानार्थी/पर्यायवाची शब्दों का ज्ञान प्राप्त कर पाएँगे
- प्रार्थना पर अपने विचार व्यक्त कर पाएँगे
- रचनात्मक लेखन (अपनी प्रार्थना/इच्छाएँ) कर पाएँगे
दिन 1 – कविता का परिचय एवं वाचन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “आप सुबह उठकर क्या करते हैं? क्या आप कोई प्रार्थना करते हैं?”
- प्रश्न: “आप ईश्वर से क्या-क्या माँगना चाहेंगे?” (अच्छे अंक, खुशी, परिवार, आदि)
- “क्या आप जानते हैं कि ‘वर’ का क्या अर्थ होता है?” (वर = आशीर्वाद/दान/उपहार – कोई अच्छी चीज़ जो ईश्वर से माँगी जाए)
- “आज हम एक ऐसी प्रार्थना पढ़ेंगे, जिसमें ईश्वर से ‘ऐसा वर’ माँगा गया है – यानी ऐसा आशीर्वाद, जो हमें अच्छा इंसान बनाए।”
- पृष्ठ 24 का चित्र दिखाएँ – दीपक, फूल, सूरज, लोग।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- कविता का सस्वर वाचन – शिक्षक कविता को शांत, नम्र एवं आत्मीय स्वर में पढ़कर सुनाएँ।
- सामूहिक वाचन – विद्यार्थी मिलकर (हाथ जोड़कर) कविता पढ़ें।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- वर = आशीर्वाद/दान (Blessing/Boon)
- सद्गुण = अच्छे गुण (Good qualities)
- सुगंध = अच्छी महक (Fragrance)
- परिहित = दूसरों के लिए अच्छा (Welfare of others)
- तम = अंधकार (Darkness)
- ज्योतिर्मय = प्रकाश से भरा हुआ (Full of light)
- गम = दुःख (Sorrow)
- सबल = ताकतवर (Strong)
- सन्मार्ग = सही रास्ता/अच्छा मार्ग (Right path)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “कविता में ईश्वर से क्या-क्या माँगा गया है?” (सद्गुण, खुशी, साहस, ज्ञान, सत्य-मार्ग)
- गृहकार्य: कविता को दो बार पढ़ना और ‘वर’ शब्द का अर्थ घर पर किसी से पूछना।
दिन 2 – कविता की गहन समझ एवं चर्चा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – कविता का सामूहिक वाचन (हाथ जोड़कर)।
- “आप किसी से प्रार्थना/आशीर्वाद क्यों माँगते हैं?” (शक्ति/साहस/मार्गदर्शन पाने के लिए)
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पंक्तियों की व्याख्या – शिक्षक प्रमुख पंक्तियों का अर्थ समझाएँ:
| पंक्ति | अर्थ/व्याख्या |
|---|---|
| “भगवन हमको ऐसा वर दो, जग के सारे सद्गुण भर दो।” | हे ईश्वर! हमें ऐसा आशीर्वाद दो कि हमारे अंदर सभी अच्छे गुण आ जाएँ। |
| “हम फूलों जैसे मुस्काएँ, सब पर प्रेम-सुगंध लुटाएँ।” | हम फूलों की तरह सबको खुशी और प्यार बाँटें। |
| “हम परिहित कर खुशी मनाएँ, ऐसे भाव हृदय में भर दो।” | हम दूसरों की भलाई करके खुशी मनाएँ – यानी परोपकार में आनंद लें। |
| “दीपक बनें, लड़ें हम तम से, ज्योतिर्मय हो यह जग हमसे।” | हम दीपक की तरह अंधेरे (बुराई/अज्ञानता) से लड़ें और दुनिया को रोशन करें। |
| “कभी न हम घबराएँ गम से, तन, मन सबल हमारे कर दो।” | हम कभी भी दुःख से घबराएँ नहीं – हमारा शरीर और मन ताकतवर हो। |
| “सत्य-मार्ग पर बढ़ते जाएँ, सबको ही सन्मार्ग दिखाएँ।” | हम हमेशा सत्य के रास्ते पर चलें और दूसरों को भी सही रास्ता दिखाएँ। |
| “सब मिलकर जीवन फल पाएँ, ऐसे ज्ञान, बुद्धि से भर दो।” | हम सब मिल-जुलकर जीवन का सही फल (सफलता/मोक्ष) पाएँ – हमें ज्ञान और बुद्धि दो। |
- बातचीत के लिए प्रश्न:
- “फूलों जैसे मुस्कुराने का क्या अर्थ है?” (खुश रहना, दूसरों को खुश करना)
- “दीपक बनकर तम से लड़ने का क्या मतलब है?” (अज्ञानता/बुराई का विरोध करना)
- “सत्य-मार्ग पर चलना क्यों महत्वपूर्ण है?” (ईमानदारी, सही काम, विश्वास)
- “क्या आपने कभी किसी की मदद की है और खुशी मिली है?” – अनुभव साझा करें।
समापन (5 मिनट)
- “इस प्रार्थना से हमें क्या सीख मिलती है?” (अच्छे इंसान बनना, सत्य बोलना, दूसरों की मदद करना)
- गृहकार्य: “फूल” और “दीपक” – इन दोनों से क्या सीख मिलती है? – 3-4 वाक्य लिखें।
दिन 3 – अभ्यास एवं भाषा कौशल (व्याकरण)
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- कविता का सस्वर वाचन (विद्यार्थी स्वयं पढ़ें)।
- पिछले दिन के गृहकार्य (फूल और दीपक से सीख) साझा करें – 3-4 विद्यार्थी पढ़ें।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘सु’ उपसर्ग वाले शब्द – शिक्षक समझाएँ कि ‘सु’ (अच्छा) उपसर्ग है:
- सद्गुण = अच्छे गुण
- सुगंध = अच्छी महक
- सबल = अच्छी ताकत (सु+बल = अच्छा बल)
- सन्मार्ग = अच्छा मार्ग (सत्+मार्ग)
- सुस्वाद = अच्छा स्वाद
- सुंदर = अच्छा रूप वाला
- सुख (अच्छी खुशी), सुयश (अच्छी ख्याति), सुविचार (अच्छा विचार), सुमन (अच्छा मन/फूल), आदि।
- ‘परि’ उपसर्ग वाले शब्द – ‘परि’ का अर्थ है ‘चारों ओर/पूरी तरह’:
- परिहित = दूसरों की भलाई (परि+हित = चारों ओर हित)
- परिवार = सबका साथ
- परिचय = जान-पहचान
- परिवर्तन = बदलाव
- समानार्थी/पर्यायवाची शब्द – कविता से समान अर्थ वाले शब्द ढूँढ़ें:
- वर = आशीर्वाद / उपहार
- तम = अंधकार
- गम = दुःख
- ज्योतिर्मय = प्रकाशमय
- सबल = मजबूत / ताकतवर
- विपरीतार्थक शब्द – विद्यार्थी कविता से विपरीत शब्द ढूँढ़ें:
- तम (अंधकार) ↔ ज्योति/प्रकाश (प्रकाश)
- गम (दुःख) ↔ खुशी (सुख)
- अज्ञान ↔ ज्ञान (कविता में सीधे नहीं, पर भाव से)
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभ्यास कार्यों की जाँच।
- गृहकार्य: ‘सु’ उपसर्ग से पाँच नए शब्द लिखें और उनका अर्थ लिखें।
दिन 4 – रचनात्मक गतिविधि एवं विस्तार
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (‘सु’ से बने शब्द) साझा करें।
- कविता का सामूहिक वाचन (हाथ जोड़कर, शांति से)।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- “मेरी प्रार्थना” – रचनात्मक लेखन:
- विद्यार्थी सोचें – “अगर आप ईश्वर से कुछ माँग सकते हैं, तो क्या माँगेंगे?”
- वे 6-8 पंक्तियों में अपनी प्रार्थना लिखें:
- उदाहरण: “हे ईश्वर! मुझे साहस दो, मैं कभी किसी से न डरूँ। मुझे ज्ञान दो, मैं अच्छे अंक लाऊँ। मुझे प्यार दो, मैं सबसे प्यार करूँ। हे ईश्वर! मुझे ऐसा वर दो कि मैं सबका भला करूँ।”
- चित्रकला – दीपक/फूल:
- विद्यार्थी दीपक या फूल का चित्र बनाएँ और रंग भरें।
- चित्र के नीचे 2-3 वाक्य लिखें:
- उदाहरण: “यह दीपक है। दीपक अंधेरा हटाता है। मैं भी दीपक की तरह बुराई हटाना चाहता हूँ।”
- समूह चर्चा (पृष्ठ 24 के चित्र पर):
- “चित्र में क्या-क्या दिख रहा है?” (दीपक, फूल, सूरज, लोग)
- “फूल और दीपक दोनों ही प्रार्थना में क्यों आए हैं?” (फूल – सुंदरता, सुगंध, प्रेम; दीपक – प्रकाश, साहस, सत्य)
- “आपके घर में सुबह-शाम क्या प्रार्थना होती है?” – अनुभव साझा करें।
- प्रार्थना गीत/श्लोक – यदि समय हो तो कोई प्रसिद्ध प्रार्थना (जैसे – “हमको मन की शक्ति देना” या “सरस्वती वंदना”) सुनाएँ/गाएँ।
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों की प्रार्थना और चित्रों की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: अपनी लिखी हुई प्रार्थना को सुंदर अक्षरों में लिखकर लाएँ और उसे अपने परिवार को सुनाएँ।
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- विद्यार्थियों ने जो प्रार्थना लिखी, उसे 3-4 विद्यार्थी पढ़कर सुनाएँ।
- कविता का सामूहिक वाचन (हाथ जोड़कर, शांति से)।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- ‘ऐसा वर दो’ कविता में किससे प्रार्थना की गई है? (ईश्वर/भगवान से)
- ‘वर’ शब्द का क्या अर्थ है? (आशीर्वाद/उपहार)
- कविता में हमें किसकी तरह मुस्कुराने को कहा गया है? (फूलों की तरह)
- हमें किससे लड़ना चाहिए? (तम/अंधकार से)
- हमें किस मार्ग पर चलना चाहिए? (सत्य-मार्ग पर)
- ‘सन्मार्ग’ शब्द में कौन-सा उपसर्ग है? (‘सत्’ – अच्छा)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘ऐसा वर दो’ कविता की कोई चार पंक्तियाँ लिखिए।
- (ख) “दीपक बनें, लड़ें हम तम से” – इस पंक्ति का अर्थ लिखिए। (हमें दीपक की तरह अंधकार/बुराई से लड़ना चाहिए और दुनिया में रोशनी फैलानी चाहिए)
- (ग) ‘सु’ उपसर्ग से बने दो शब्द लिखिए और उनका अर्थ बताइए। (सद्गुण = अच्छे गुण; सुगंध = अच्छी महक)
- (घ) विपरीतार्थक शब्द लिखिए:
- तम × _____ (प्रकाश/ज्योति)
- गम × _____ (सुख/खुशी)
- (ङ) आप इस प्रार्थना से क्या सीखना चाहेंगे? (कोई भी एक बात – “सच बोलना”, “दूसरों की मदद करना”, “साहसी बनना”)
- समूह गायन – सभी विद्यार्थी मिलकर कविता को गाएँ (हाथ जोड़कर) और समाप्ति पर “ॐ शांति” कहें।
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘ऐसा वर दो’ एक सुंदर प्रार्थना कविता है, जो हमें सद्गुण, साहस, ज्ञान और सत्य का पाठ पढ़ाती है। हमें फूलों की तरह खुश रहना और दूसरों को खुश करना चाहिए, दीपक की तरह अंधकार/बुराई से लड़ना चाहिए, और सत्य के मार्ग पर चलते हुए दूसरों को भी सही रास्ता दिखाना चाहिए। प्रार्थना हमें शांति, प्रेम और सेवा की भावना देती है। आइए, हम सब मिलकर अच्छे इंसान बनने का संकल्प लें।”
- अगले पाठ ‘चिड़िया का गीत’ का संक्षिप्त परिचय – “अब हम एक चिड़िया के बारे में पढ़ेंगे, जो बड़े होकर दुनिया को नए नज़रिए से देखती है।”
शिक्षण सहायक सामग्री
- प्रार्थना कविता का चार्ट (बड़े अक्षरों में)
- फूल, दीपक, सूर्य, प्रार्थना करते लोगों के चित्र
- शब्दार्थ कार्ड (वर, सद्गुण, तम, ज्योतिर्मय, सन्मार्ग)
- ‘सु’ उपसर्ग से बने शब्द कार्ड
- विपरीतार्थक शब्द कार्ड
- रंग, कागज़, पेंसिल (चित्रकला के लिए)
- प्रार्थना गीत (वैकल्पिक – ऑडियो/वीडियो)
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | कविता का सस्वर, शांत एवं भावपूर्ण वाचन | अवलोकन/मौखिक प्रस्तुति |
| 2 | कविता की समझ (प्रार्थना, सद्गुण, सत्य-मार्ग) | मौखिक/लिखित प्रश्न |
| 3 | शब्दार्थ (वर, तम, ज्योतिर्मय) एवं विपरीतार्थक शब्द | लिखित अभ्यास |
| 4 | ‘सु’ उपसर्ग से बने शब्दों की पहचान | लिखित/मौखिक |
| 5 | नैतिक मूल्यों (साहस, सत्य, सेवा, प्रेम) की समझ | समूह चर्चा/लिखित |
| 6 | रचनात्मक अभिव्यक्ति (अपनी प्रार्थना लिखना) | लिखित कार्य |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘प्रार्थना’, ‘वर’, ‘आशीर्वाद’ को क्या कहते हैं। प्रार्थना के महत्व को बच्चों के दैनिक जीवन से जोड़ें – सुबह स्कूल जाने से पहले, परीक्षा से पहले, खाने से पहले, आदि। कविता में आए प्रतीकों (फूल – प्रेम, दीपक – ज्ञान, सत्य – मार्ग) को स्पष्ट रूप से समझाएँ ताकि बच्चे गहराई से समझ सकें। बच्चों को ‘अच्छे इंसान’ बनने के लिए प्रेरित करें और उनसे पूछें कि वे किन-किन अच्छे कामों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। कविता को सुबह की प्रार्थना के रूप में नियमित करने को कहें ताकि इसका भाव बच्चों के मन में स्थायी हो सके।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
