बोलने वाली माँद – कक्षा 3 हिंदी Unit 5: हमारा देश (Bolne Wali Maand Class 3 Hindi)
पाठ का सारांश
यह पंचतंत्र की एक प्रसिद्ध कहानी है, जो बुद्धि और चतुराई की शक्ति को दर्शाती है।
एक जंगल में खरनखर नाम का सिंह रहता था। एक दिन उसे बहुत भूख लगी। वह शिकार की तलाश में पूरे जंगल में घूमा, पर उसे कुछ नहीं मिला। शाम हो गई, अँधेरा होने लगा। तभी उसे एक माँद (गुफा/बिल) दिखाई दी। वह उसमें घुसकर छिप गया और सोचा कि जब कोई पशु इसमें आएगा, तो मैं उसे दबोच लूँगा।
उस माँद में दिधपुच्छ नाम का एक सियार रहता था। वह माँद की ओर आ रहा था। माँद के द्वार पर उसने सिंह के पैरों के चिह्न देखे – चिह्न तो अंदर जाने के थे, पर बाहर आने के नहीं थे। उसे समझ में आ गया कि अंदर कोई सिंह छिपा है।
सियार ने बुद्धि का सहारा लिया। उसने माँद के द्वार पर जाकर पुकारा – “ऐ मेरी माँद, ऐ मेरी माँद!” फिर कहा – “आज तू बोलती क्यों नहीं? पहले तो तू मेरी पुकार का जवाब देती थी। अगर आज भी न बोली तो मैं किसी और माँद में चला जाऊँगा।”
सिंह ने सोचा – “यह माँद सचमुच बोलती है। डर के मारे आज यह बोल नहीं रही। मैं ही उत्तर दे दूँ, नहीं तो शिकार हाथ से निकल जाएगा।” सिंह ने दहाड़ मारकर उत्तर दिया। उसकी दहाड़ से माँद गूँज उठी।
सियार तुरंत समझ गया और वहाँ से चंपत हो गया (भाग गया)। उसने सोचा – “इस जंगल में रहते-रहते मैं बूढ़ा हो गया, पर आज तक कभी किसी माँद को बोलते नहीं सुना!”
यह कहानी हमें सिखाती है कि बुद्धि और सतर्कता से बड़ी से बड़ी मुश्किल से बचा जा सकता है। सियार ने अपनी चतुराई से जान बचाई, जबकि सिंह ने अपनी मूर्खता (बिना सोचे उत्तर देने) से अपना शिकार खो दिया।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- कहानी को सही उच्चारण, भाव और गति के साथ पढ़ पाएँगे
- बुद्धि और चतुराई की शक्ति को समझ पाएँगे
- सतर्कता और परिस्थिति-जागरूकता (situational awareness) का महत्व समझ पाएँगे
- माँद, गुफा, बिल (जानवरों के घर) के बारे में जान पाएँगे
- चंद्रबिंदु (ँ) वाले शब्दों को पहचान पाएँगे
- समानार्थी शब्दों (पर्यायवाची) की पहचान कर पाएँगे
- ‘यदि…तो’ वाक्य संरचना का प्रयोग कर पाएँगे
- मुहावरों (“जान पर आ बनना”, “चंपत होना”) का अर्थ समझ पाएँगे
- रचनात्मक कला (सिंह/सियार का मुखौटा) बना पाएँगे
- पदचिह्नों (Footprints) के बारे में जान पाएँगे
दिन 1 – कहानी का परिचय एवं वाचन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “क्या आपको भूख लगती है? जब बहुत भूख लगती है, तो आप क्या करते हैं?”
- “क्या आपने कभी सिंह देखा है? सिंह कहाँ रहते हैं?” (जंगल में, गुफा/माँद में)
- “क्या आपने किसी जानवर के पैरों के निशान (पदचिह्न) देखे हैं?” (गाय, कुत्ता, बिल्ली, पक्षी)
- पृष्ठ 158 का चित्र दिखाएँ – सिंह, माँद और सियार। पूछें: “चित्र में क्या हो रहा है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- कहानी का सस्वर वाचन – शिक्षक पृष्ठ 158-160 तक की कहानी को रोचक और नाटकीय अंदाज़ में पढ़कर सुनाएँ (सिंह – गरजती आवाज़, सियार – चालाक/सतर्क आवाज़)।
- सामूहिक वाचन – विद्यार्थी बारी-बारी से अनुच्छेद पढ़ें।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- माँद = जानवरों का बिल/गुफा (Den/Cave)
- खरनखर = सिंह का नाम (इसका अर्थ है – ‘खर’ = गधा? वास्तव में यह काल्पनिक नाम है, ‘खर’ = अजीब/बड़ा? शिक्षक बताएँ कि यह कहानी का काल्पनिक पात्र है)
- दिधपुच्छ = सियार का नाम (‘दीर्घपुच्छ’ = लंबी पूँछ वाला – यहाँ ‘दिधपुच्छ’ संस्कृत/हिंदी का शब्द है, ‘दीर्घ’ = लंबा, ‘पुच्छ’ = पूँछ)
- आहार = भोजन (Food)
- दबोचना = पकड़ना/झपटना (Catch hold of)
- चिह्न = निशान (Mark/Footprint)
- उपाय = समाधान/तरकीब (Solution/Trick)
- पुकारना = बुलाना (Call)
- चंपत होना = भाग जाना / गायब हो जाना (Run away)
- गूँजना = प्रतिध्वनि होना (Echo)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “कहानी के मुख्य पात्र कौन हैं?” (सिंह – खरनखर, सियार – दिधपुच्छ)
- गृहकार्य: कहानी को एक बार और पढ़ें और बताएँ – “सियार को कैसे पता चला कि माँद में सिंह है?”
दिन 2 – कहानी की गहन समझ एवं चर्चा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – कहानी का सामूहिक वाचन।
- “सियार को सिंह के बारे में कैसे पता चला?” (पैरों के चिह्न देखकर)
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 161):
- आपको भूख लगती है तो आप क्या-क्या खाने की कामना करते हैं? (मिठाई, फल, सब्जी, दाल-चावल, आदि)
- क्या आपने किसी पशु के पैर के चिह्न देखे हैं? किस-किस पशु के? (गाय, कुत्ता, बिल्ली, चिड़िया, हाथी, आदि)
- सिंह माँद (गुफा) में रहता है। माँद में कौन-कौन से जानवर रहते हैं? (सिंह, भालू, लोमड़ी, सियार, खरगोश, साँप – बिल में)
- कठिन समय में बुद्धि अधिक काम आती है या शक्ति? (बुद्धि – क्योंकि शक्ति से तो सिंह के पास भी थी, पर वह हार गया)
- ‘सोचिए और लिखिए’ (पृष्ठ 161):
- “दिधपुच्छ ने कैसे जाना कि माँद में खरनखर बैठा है?” (माँद के द्वार पर सिंह के पैरों के चिह्न देखे – चिह्न अंदर जाने के थे, पर लौटने के नहीं थे)
- “इस कहानी में सिंह का नाम खरनखर है और सियार का नाम दिधपुच्छ, आप इनके क्या नाम रखेंगे?” (सिंह – बलराज, गजराज, महासिंह; सियार – चतुर, बुद्धिराज, चालाक – रचनात्मक उत्तर)
- “यदि आप सिंह के स्थान पर होते तो क्या करते?” (चुप रहते, उत्तर न देते, या पहले देखते कि कौन आ रहा है – रचनात्मक उत्तर)
- “जब सियार ने पुकारा ‘ऐ मेरी माँद, ऐ मेरी माँद’, तब सिंह ने उत्तर में क्या कहा होगा?” (सिंह ने दहाड़ मारी – “गर्र्र्र्र” – सियार की तरह बात करने की कोशिश नहीं की, सीधा दहाड़ा)
- चर्चा – “बुद्धि बलवान”:
- “सियार ने कौन-सी चतुराई दिखाई?” (उसने माँद को बुलाने का नाटक किया और सिंह को उत्तर देने के लिए उकसाया)
- “सिंह ने क्या गलती की?” (बिना सोचे-समझे दहाड़कर उत्तर दे दिया – उसे चुप रहना चाहिए था)
- “कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?” (बुद्धि से काम लेना चाहिए, किसी की बातों में आकर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, सतर्क रहना चाहिए)
समापन (5 मिनट)
- “सियार क्यों भाग गया?” (उसे पता चल गया कि माँद में सिंह है और वह उसे खा सकता है)
- गृहकार्य: “सियार के स्थान पर आप होते तो क्या करते?” – 3-4 वाक्य लिखिए।
दिन 3 – अभ्यास एवं भाषा कौशल (व्याकरण)
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (सियार के स्थान पर) साझा करें – 3-4 विद्यार्थी अपना उत्तर पढ़ें।
- कहानी का संक्षिप्त पुनर्वाचन।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘माँद’ शब्द का खेल (पृष्ठ 161):
- विद्यार्थी गिनें – “‘माँद’ शब्द कहानी में कितनी बार आया है?”
- उत्तर: कहानी में ‘माँद’ शब्द कई बार आया है – लगभग 15+ बार (शिक्षक बच्चों को गिनने को कहें)।
- चंद्रबिंदु (ँ) वाले शब्द (पृष्ठ 161):
- विद्यार्थी कहानी से चंद्रबिंदु वाले शब्द छाँटकर लिखें:
- क्यों, नहीं, जाऊँगा, आऊँगा, पुकारा, दिखाई, आई, कहाँ, आँखें, गूँज, पूँछ (कहानी में ‘पूँछ’ नहीं आया, लेकिन कुछ शब्दों में चंद्रबिंदु है)
- (शिक्षक बच्चों को बताएँ कि चंद्रबिंदु (ँ) का प्रयोग अनुनासिक (nasal) ध्वनि के लिए होता है – जैसे ‘हँसना’, ‘गीत’ में नहीं, ‘गाँव’ में ‘ँ’ – यह नाक से बोलने का संकेत है)
- विद्यार्थी कहानी से चंद्रबिंदु वाले शब्द छाँटकर लिखें:
- समानार्थी शब्द (पर्यायवाची) (पृष्ठ 162):
- विद्यार्थी समान अर्थ वाले शब्दों की जोड़ी बनाएँ:
- शेर ↔ सिंह
- गुफा ↔ माँद
- जंगल ↔ वन
- द्वार ↔ दरवाजा
- (शिक्षक अतिरिक्त उदाहरण भी दे सकते हैं – ‘पेड़’ = ‘तरु/वृक्ष’, ‘फूल’ = ‘पुष्प’, ‘आकाश’ = ‘गगन/अंबर’)
- विद्यार्थी समान अर्थ वाले शब्दों की जोड़ी बनाएँ:
- ‘यदि…तो’ वाक्य संरचना (पृष्ठ 163):
- उदाहरण: “यदि चुप रहा तो हाथ आया शिकार भी चला जाएगा।”
- विद्यार्थी अपने मन से वाक्य बनाएँ:
- (क) यदि बोला तो → “यदि बोला तो सियार भाग जाएगा।”
- (ख) यदि अधिक वर्षा हुई तो → “यदि अधिक वर्षा हुई तो नदियाँ उफान पर आ जाएँगी।”
- (ग) यदि कड़ी धूप हुई तो → “यदि कड़ी धूप हुई तो हम घर के अंदर रहेंगे।”
- (घ) यदि अँधेरा हुआ तो → “यदि अँधेरा हुआ तो हम दीपक जलाएँगे।”
- मुहावरे (पृष्ठ 162-163):
- (क) एक चूहा तक हाथ नहीं लगा:
- अर्थ: कुछ भी शिकार/भोजन नहीं मिला
- वाक्य: “सिंह को पूरे जंगल में एक चूहा तक हाथ नहीं लगा।”
- (ख) जान पर आ बनना:
- अर्थ: बहुत बड़ा संकट आना / जान खतरे में पड़ना
- वाक्य: “सियार समझ गया कि आज तो उसकी जान पर आ बनी है।”
- (ग) चंपत होना:
- अर्थ: भाग जाना / गायब हो जाना
- वाक्य: “सियार वहाँ से चंपत हो गया।”
- (क) एक चूहा तक हाथ नहीं लगा:
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभ्यास कार्यों की जाँच।
- गृहकार्य: ‘शब्दों की सहायता से वाक्य पूरा करें’ (पृष्ठ 162) – ‘माँद! क्या तू भूल गई?’ के अनुसार अन्य शब्दों (नदी, पहाड़, आदि) के साथ वाक्य बनाएँ।
- नदी! क्या तू भूल गई? (स्त्रीलिंग – ‘गई’)
- पहाड़! क्या तू भूल गया? (पुल्लिंग – ‘गया’)
दिन 4 – रचनात्मक लेखन, कला एवं विस्तार
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (वाक्य पूर्ति) साझा करें।
- “क्या आपने कभी किसी जानवर के पदचिह्न (पैर के निशान) देखे हैं?” (हाँ/नहीं)
- कुछ जानवरों के पदचिह्नों के चित्र दिखाएँ (सिंह, हाथी, गाय, बिल्ली, चिड़िया)।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- सही शब्द चुनकर रिक्त स्थान भरें (पृष्ठ 163):
- (क) सिंह इस समय भी माँद के भीतर है या बाहर निकल गया।
- (ख) आज बोलती क्यों नहीं? चुप क्यों है?
- (ग) मैं बूढ़ा हो गया हूँ। पहले तो मैं जवान था।
- (घ) यह माँद झूठ-मूठ ही जवाब देती है या फिर सचमुच बोलती है।
- कला गतिविधि – सिंह और सियार का मुखौटा (पृष्ठ 164-165):
- सिंह का मुखौटा – विद्यार्थी कागज़ पर सिंह का चेहरा (अयाल/बाल, मुँह, आँखें) बनाएँ, रंग भरें, कैंची से काटें, और किनारों पर छेद कर धागा बाँधें।
- सियार का मुखौटा – विद्यार्थी कागज़ पर सियार का चेहरा (नुकीला मुँह, बड़े कान, तीखी आँखें) बनाएँ, रंग भरें, काटें और धागा बाँधें।
- (शिक्षक पहले एक नमूना बनाकर दिखाएँ और स्टेप-बाय-स्टेप समझाएँ)
- पदचिह्न (Footprints) गतिविधि (पृष्ठ 166):
- “क्या आपने किसी पशु के पदचिह्न देखे हैं?”
- विद्यार्थी अपने आस-पास (घर/विद्यालय) किसी पशु (कुत्ता, बिल्ली, गाय, चिड़िया) के पदचिह्न खोजें और उनका चित्र बनाएँ।
- चित्र के नीचे पशु का नाम लिखें।
- (यदि संभव हो तो शिक्षक किसी पशु (कुत्ते/बिल्ली) के पैर को गीली मिट्टी पर रखकर पदचिह्न दिखा सकते हैं)
- कहानी का नाट्य रूपांतरण (Role Play):
- कुछ विद्यार्थी सिंह, कुछ सियार और एक विद्यार्थी कथाकार (वर्णनकर्ता) की भूमिका निभाएँ।
- सभी को अपनी-अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करें (मुखौटे पहनकर)।
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के मुखौटों और पदचिह्नों के चित्रों की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: “सिंह और सियार के बीच हुई बातचीत को अपने शब्दों में लिखिए – संवाद के रूप में” (8-10 पंक्तियाँ)।
दिन 5 – पुनरावृत्ति, अभिनय एवं मूल्यांकन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए मुखौटे पहनें और कहानी का अभिनय (नाटक) प्रस्तुत करें।
- पिछले दिन के गृहकार्य (संवाद लेखन) साझा करें – 3-4 विद्यार्थी पढ़ें।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- सिंह को भूख क्यों लगी थी? (उसे पूरे दिन कुछ शिकार/खाना नहीं मिला)
- सियार को सिंह के बारे में कैसे पता चला? (उसने माँद के द्वार पर सिंह के पैरों के चिह्न देखे)
- सियार ने माँद को क्यों पुकारा? (यह जानने के लिए कि अंदर सिंह है या नहीं)
- सिंह ने क्या गलती की? (बिना सोचे दहाड़कर उत्तर दे दिया)
- ‘चंपत होना’ का क्या अर्थ है? (भाग जाना/गायब हो जाना)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘बोलने वाली माँद’ कहानी के मुख्य पात्रों के नाम लिखिए। (सिंह – खरनखर, सियार – दिधपुच्छ)
- (ख) सियार ने अपनी बुद्धि से अपनी जान कैसे बचाई? (उसने माँद को पुकारने का नाटक किया और सिंह को उत्तर देने के लिए उकसाया। सिंह की दहाड़ सुनकर उसे पता चल गया कि माँद में सिंह है और वह भाग गया।)
- (ग) ‘जान पर आ बनना’ मुहावरे का वाक्य में प्रयोग कीजिए। (“सियार को लगा कि आज उसकी जान पर आ बनी है।”)
- (घ) नीचे दिए गए शब्दों के समानार्थी (पर्यायवाची) शब्द लिखिए:
- सिंह → ______ (शेर)
- जंगल → ______ (वन)
- माँद → ______ (गुफा/बिल)
- (ङ) ‘यदि…तो’ वाक्य संरचना का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए – “यदि सिंह चुप रहता तो…” (रचनात्मक उत्तर – “यदि सिंह चुप रहता तो सियार अंदर आ जाता और सिंह उसे खा लेता।” / “यदि सिंह चुप रहता तो उसका शिकार हाथ से नहीं निकलता।”)
- समूह चर्चा:
- “क्या आपको लगता है कि सिंह ने सही किया या गलत?” (गलत – उसे सोच-समझकर काम लेना चाहिए था)
- “हमें किन परिस्थितियों में सतर्क रहना चाहिए?” (जब कोई अनजान व्यक्ति बात करे, जब कोई हमें किसी काम के लिए मनाए, जब हमें किसी पर शक हो)
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘बोलने वाली माँद’ कहानी हमें सिखाती है कि बुद्धि और सतर्कता बड़ी से बड़ी मुश्किल से बचा सकते हैं। सियार ने अपनी चतुराई से जान बचाई, जबकि सिंह ने अपनी मूर्खता से शिकार खो दिया। हमें भी दूसरों की बातों में आकर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और हर परिस्थिति में सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए। ‘बुद्धि बलवान’ इस कहानी का मुख्य संदेश है।”
- अगले पाठ ‘हम अनेक किंतु एक’ का संक्षिप्त परिचय – “अब हम एक कविता पढ़ेंगे, जो बताती है कि हम सब अलग-अलग भाषाएँ, रूप-रंग और परंपराएँ रखने के बावजूद एक हैं – हम अनेक हैं, किंतु एक हैं।”
शिक्षण सहायक सामग्री
- कहानी का चार्ट
- सिंह, सियार, माँद के चित्र
- विभिन्न पशुओं (सिंह, हाथी, गाय, कुत्ता, बिल्ली) के पदचिह्नों के चित्र
- चंद्रबिंदु (ँ) वाले शब्द कार्ड
- समानार्थी शब्द कार्ड
- मुहावरा कार्ड (“जान पर आ बनना”, “चंपत होना”)
- मुखौटा बनाने की सामग्री – कागज़, रंग, कैंची, गोंद, धागा/रबर बैंड
- भारत का मानचित्र (यदि जंगलों का उल्लेख हो – नहीं, इस कहानी में स्थान विशेष नहीं)
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | कहानी का सस्वर, भावपूर्ण एवं नाटकीय वाचन | अवलोकन/मौखिक प्रस्तुति |
| 2 | कहानी की समझ (पात्र, घटनाएँ, सियार की चतुराई) | मौखिक/लिखित प्रश्न |
| 3 | बुद्धि बनाम शक्ति – नैतिक संदेश की समझ | समूह चर्चा/लिखित |
| 4 | चंद्रबिंदु (ँ) वाले शब्द, समानार्थी शब्द, मुहावरे | लिखित अभ्यास |
| 5 | ‘यदि…तो’ वाक्य संरचना का प्रयोग | लिखित/मौखिक |
| 6 | कला गतिविधि (मुखौटा, पदचिह्न) | कला/रचनात्मक गतिविधि |
| 7 | अभिनय/रोल-प्ले कौशल | समूह गतिविधि |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘सिंह’, ‘सियार’, ‘माँद/गुफा’, ‘पदचिह्न’ को क्या कहते हैं। पंचतंत्र की कहानियों से बच्चों का परिचय कराएँ और बताएँ कि ये कहानियाँ नीति और बुद्धि की शिक्षा देती हैं। ‘बुद्धि बलवान’ की सीख पर विशेष ज़ोर दें – बच्चों को समझाएँ कि शारीरिक शक्ति से ज़्यादा महत्वपूर्ण मानसिक शक्ति (बुद्धि) है। मुखौटा बनाने और अभिनय की गतिविधि बच्चों को सीखने में सक्रिय भागीदारी का अवसर देती है और उनकी कल्पना, रचनात्मकता और आत्मविश्वास को बढ़ाती है। पदचिह्न गतिविधि बच्चों को आस-पास की प्रकृति का अवलोकन करने के लिए प्रेरित करती है।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
