रचना से पहले ध्यान देने योग्य 3 महत्वपूर्ण बातें (Pre-requisites)
- भुजाओं का योग नियम: किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी से बड़ा होना चाहिए (अन्यथा रचना संभव नहीं)।
- कोणों का योग: तीनों कोणों का योग 180° होना चाहिए। यदि दो कोण दिए हों, तो तीसरा निकाल लें।
- रेखाएँ न मिटाएँ: परीक्षा में रचना के चाप (Arcs) और किरणों (Rays) को न मिटाएँ, ये अंक दिलाते हैं।
1. तीन भुजाएँ दी हों (SSS – Side Side Side)
उदाहरण: त्रिभुज ABC बनाएँ, जिसमें AB = 5 सेमी, BC = 4 सेमी, और AC = 6 सेमी।
- चरण 1: सबसे बड़ी भुजा (AC = 6 सेमी) को आधार मानकर खींचें।
- चरण 2: बिंदु ‘A’ पर परकार खोलकर 5 सेमी (AB) का चाप (Arc) ऊपर की ओर लगाएँ।
- चरण 3: बिंदु ‘C’ पर परकार खोलकर 4 सेमी (BC) का चाप लगाएँ, जो पहले चाप को काटे।
- चरण 4: कटान बिंदु को ‘B’ नाम दें। AB और BC को मिला दें। यही अभीष्ट त्रिभुज है।
2. दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण दिया हो (SAS – Side Angle Side)
उदाहरण: त्रिभुज PQR बनाएँ, PQ = 4 सेमी, PR = 5 सेमी, और ∠QPR = 60°।
- चरण 1: आधार PQ = 4 सेमी खींचें।
- चरण 2: बिंदु ‘P’ पर चाँद (Protractor) या परकार से 60° का कोण बनाती हुई एक किरण (Ray) खींचें।
- चरण 3: इस किरण पर बिंदु ‘P’ से 5 सेमी (PR) की दूरी तय करके ‘R’ बिंदु अंकित करें।
- चरण 4: बिंदु ‘R’ को ‘Q’ से मिला दें। (ध्यान दें: यहाँ कोण, दोनों भुजाओं के बीच में होना चाहिए)।
3. दो कोण और उनके बीच की भुजा दी हो (ASA – Angle Side Angle)
उदाहरण: त्रिभुज DEF बनाएँ, DE = 5 सेमी, ∠D = 50°, और ∠E = 70°।
- चरण 1: आधार DE = 5 सेमी खींचें।
- चरण 2: बिंदु ‘D’ पर 50° का कोण बनाती हुई एक किरण खींचें।
- चरण 3: बिंदु ‘E’ पर 70° का कोण बनाती हुई दूसरी किरण खींचें।
- चरण 4: दोनों किरणें जहाँ आपस में कटें, वह बिंदु ‘F’ है।
टिप: यदि तीसरा कोण (180 – 50 – 70 = 60°) पहले से निकालकर भी रचना करें, तो भी वही त्रिभुज बनेगा।
4. समकोण त्रिभुज, कर्ण (Hypotenuse) और एक भुजा दी हो (RHS – Right angle-Hypotenuse-Side)
उदाहरण: समकोण त्रिभुज XYZ बनाएँ, जिसमें कर्ण XZ = 5 सेमी, और भुजा YZ = 3 सेमी। (Y पर समकोण है)
- चरण 1: आधार YZ = 3 सेमी खींचें।
- चरण 2: बिंदु ‘Y’ पर 90° (लम्ब) का कोण बनाती हुई एक रेखा (Vertical Line) खींचें।
- चरण 3: बिंदु ‘Z’ पर परकार खोलकर 5 सेमी (कर्ण) का चाप लगाएँ, जो 90° वाली लम्ब रेखा को काटे।
- चरण 4: कटान बिंदु को ‘X’ नाम दें और XZ को मिलाएँ।
उन्नत रचनाएँ
जब आधार, आधार का एक कोण, और शेष दो भुजाओं का योग (AB + AC) या अंतर (AB – AC) दिया हो:
(A) जब योग (AB + AC) दिया हो:
उदाहरण: आधार BC = 4 सेमी, ∠B = 60°, और AB + AC = 8 सेमी।
- BC खींचें। B पर 60° की किरण खींचें।
- किरण पर B से 8 सेमी (AB+AC) की दूरी पर बिंदु ‘D’ लें।
- D को C से मिलाएँ।
- रेखाखंड DC का लम्ब समद्विभाजक (Perpendicular Bisector) खींचें (परकार की सहायता से)।
- यह लम्ब समद्विभाजक जहाँ BD किरण को काटे, वह बिंदु ‘A’ है।
- A को C से मिलाएँ। (क्योंकि लम्ब समद्विभाजक पर कोई भी बिंदु, D और C से समान दूरी पर होता है, इसलिए AD = AC, और AB + AD = 8 सेमी से AB + AC प्राप्त हो जाता है)।
(B) जब अंतर (AB – AC) दिया हो:
यदि AB > AC है, तो किरण पर B से (AB – AC) दूरी पर D लें। फिर D और C को मिलाएँ, और DC का लम्ब समद्विभाजक खींचें, जो BD को A पर काटेगा।
💡 रचना करते समय 5 सुनहरे सुझाव (Tips)
- आधार हमेशा सबसे बड़ी भुजा को बनाएँ: इससे चाप (Arcs) आपस में ऊपर की ओर अच्छे से कटते हैं और रचना साफ दिखती है।
- परकार की सुई हिलने न दें: एक बार त्रिज्या सेट करने के बाद, सुई (Needle) को मजबूती से पकड़ें।
- चाँद का सही उपयोग: चाँद लगाते समय उसका शून्य (0°) आधार रेखा पर होना चाहिए, न कि ऊपर-नीचे।
- रचना लिखना न भूलें: प्रश्न-पत्र में “रचना के पद” (Steps of Construction) लिखना अनिवार्य होता है, भले ही आकृति सही हो।
- सत्यापन (Verification): बनाने के बाद पैमाने से भुजाएँ और चाँद से कोण मापकर चेक कर लें कि दी गई शर्तें पूरी हो रही हैं या नहीं।

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