बालगीतम् कक्षा छठवीं विषय संस्कृत पाठ 10

बालगीतम् कक्षा छठवीं विषय संस्कृत पाठ 10

मा कुरु दर्पं मा कुरु गर्वम् । 
मा भव मानी, मानय सर्वम् । 
मा भज दैन्यं, मा भज शोकम् । 
मुदितमना भव मोदय लोकम् ॥

शब्दार्थाः मा = मत, दर्प = अहंकार, भव = बनो, मानी = अभिमानी, मानय = सम्मान करो, दैन्यं = दीनता को मुदितमना भव = प्रसन्न मन-वाले, मोदय आनन्दित करो।

अनुवाद – अहंकार मत करो। घमण्ड मत करो। अभिमानी मत बनो। सबका सम्मान करो। दीनता को मत ग्रहण करो। शोक मत करो। प्रसन्न मन वाले बनो। लोगों को आनन्दित करो।

मा वद मिथ्यां मा वद व्यर्थम्,
न चल कुमार्गे, न कुरु अनर्थम् 
पाहि अनाथं, पालय दीनम् 
लालय जननीजनक-विहीनम् ।।

शब्दार्थ:-मा= मत, वद =बोलो, मिथ्या = झूठ, व्यर्थम् = व्यर्थ (बेकार) कुमार्गे =बुरे रास्ते पर, पाहि =रक्षा करो, पालय = पालन करो, लालय = प्यार करो, विहीनम् = वंचित (रहित) | 

अनुवाद-झूठ मत बोलो। व्यर्थ (बेकार) मत बोलो। बुरे रास्ते पर मत चलो अनर्थ मत करो। अनाथ को रक्षा करो। गरीबों (दोनों) का पालन करो। माता-पिता से रहित (लोगों से) प्यार करो।

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