शहरी क्षेत्रों में स्थानीय सरकार (Urban Local Bodies) – नोट्स

🏙️ शहरी क्षेत्रों में स्थानीय सरकार (Urban Local Bodies) – नोट्स

1. शहरी शासन का परिचय

  • उद्देश्य: लोकतंत्र में, सुशासन का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना है ताकि वे देश के कामकाज में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
  • भागीदारी लोकतंत्र (Participatory Democracy): शासन की वह प्रणाली जहाँ नागरिक विभिन्न स्तरों (ग्रामीण, शहरी, राज्य या राष्ट्रीय) पर निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।1
  • शहरी क्षेत्रों की प्रकृति: शहरी क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक जटिल और विविध होते हैं, इसलिए शहरी शासन प्रणाली भी अधिक जटिल होती है।
  • भारतीय शासन के स्तर:
    1. केंद्रीय (Union) सरकार
    2. राज्य (State) सरकार
    3. स्थानीय (Local) सरकार (शहरी और ग्रामीण में उप-विभाजित)

2. शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Bodies)

  • परिभाषा: शहरी क्षेत्रों में स्थानीय सरकारी संरचनाओं को ‘शहरी स्थानीय निकाय’ कहा जाता है।
  • विकेंद्रीकरण (Decentralised): ये निकाय विकेंद्रीकृत होते हैं।2 इसका अर्थ है कि वे किसी केंद्रीय प्राधिकरण के तहत काम करने के बजाय, स्थानीय समुदायों को अपने क्षेत्रों के प्रबंधन और समस्याओं के समाधान में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर देते हैं।
  • वार्ड (Wards): शहरों और कस्बों को प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए छोटे इकाइयों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें ‘वार्ड’ कहा जाता है।3

वार्ड समितियाँ (Ward Committees) के कार्य

वार्ड समितियाँ निम्नलिखित गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने में मदद करती हैं:

  • स्वास्थ्य शिविर आयोजित करना।
  • सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध अभियान जैसे कार्यक्रम आयोजित करना।
  • पानी का रिसाव, जाम हुई नालियाँ या क्षतिग्रस्त सड़कें जैसी समस्याओं की पहचान करना और अधिकारियों को रिपोर्ट करना।

3. शहरी स्थानीय निकायों की ज़िम्मेदारियाँ

शहरी स्थानीय निकाय नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले विभिन्न कार्यों के लिए ज़िम्मेदार होते हैं:

  • बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) का रखरखाव करना।
  • कचरा संग्रहण और निपटान का प्रबंधन करना।
  • शमशान/कब्रिस्तान (burial grounds) का रखरखाव करना।
  • सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करना।
  • स्थानीय करों और ज़ुर्माने को एकत्र करना।
  • क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए योजना बनाने में योगदान देना।

4. विभिन्न प्रकार के शहरी स्थानीय निकाय

शहरी निकायों का वर्गीकरण शहर की आबादी के अनुसार किया जाता है:

निकाय का नामहिंदी नामजनसंख्या
Municipal Corporationमहानगर निगम (Mahanagar Nigam)10 लाख से अधिक
Municipal Councilनगर पालिका (Nagar Palika)1 लाख से 10 लाख के बीच
Nagar Panchayatनगर पंचायतछोटी आबादी वाले शहरों और कस्बों में
  • उदाहरण:
    • ग्रेटर मुंबई नगर निगम: 1865 में स्थापित, यह 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर का उदाहरण है।
    • मद्रास नगर निगम (अब ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन): 1688 में स्थापित, यह भारत का सबसे पुराना नगर निगम है। इसे 1792 के संसदीय अधिनियम द्वारा स्थानीय कर लगाने की शक्ति मिली।

5. नागरिकों की ज़िम्मेदारियाँ (Participatory Governance)

भागीदारी लोकतंत्र में, नागरिकों को भी अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए ताकि स्थानीय निकाय कुशलतापूर्वक कार्य कर सकें:

  • अपशिष्ट पृथक्करण (Waste Segregation) के निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन करना।
  • समस्याओं को तुरंत रिपोर्ट करना (जैसे पानी का रिसाव)।
  • अपने क्षेत्र के प्रति देखभाल और चिंता दिखाना।
  • सफलता का उदाहरण: इंदौर लगातार सात वर्षों से स्वच्छ सर्वेक्षण योजना के तहत भारत का सबसे स्वच्छ शहर रहा है, जो मुख्य रूप से निवासियों की सक्रिय भागीदारी के कारण संभव हुआ है।

6. प्रमुख परिभाषाएँ

  • भागीदारी लोकतंत्र (Participatory Democracy): शासन की एक प्रणाली जहाँ नागरिक विभिन्न स्तरों पर निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।4
  • शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Bodies): शहरी क्षेत्रों में विकेंद्रीकृत स्थानीय सरकार की संरचनाएँ।
  • वार्ड (Wards): प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए शहरों और कस्बों की छोटी इकाइयाँ
  • विकेंद्रीकृत (Decentralised): एक ऐसी प्रणाली जहाँ शक्ति किसी केंद्रीय प्राधिकरण के बजाय स्थानीय समुदायों के बीच वितरित होती है।
  • भागीदारी शासन (Participatory Governance): एक प्रणाली जहाँ नागरिकों को निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल किया जाता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनकी ज़रूरतें और चिंताएँ दूर हों।
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