‘तार सप्तक’ और इसके कवि
‘तार सप्तक’ (1943) हिंदी साहित्य में प्रयोगवाद की नींव रखने वाला एक महत्वपूर्ण काव्य संकलन है। इसके संपादक अज्ञेय थे, जिन्होंने इस संग्रह के माध्यम से सात कवियों की रचनाएँ प्रस्तुत कीं। ये सात कवि हिंदी साहित्य में नई कविता आंदोलन के अग्रदूत माने जाते हैं।
‘तार सप्तक’ के सात कवि और उनका योगदान
- अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन)
- विशेषता: प्रयोगवाद और नई कविता के शलाका पुरुष।
- प्रमुख काव्य कृतियाँ:
- असाध्य वीणा
- कलगी बाज की
- साँप
- नदी के द्वीप
- योगदान: आधुनिक हिंदी कविता में प्रयोगशीलता, प्रतीकों और बिंबों की शक्ति को स्थापित किया।
- मुक्तिबोध (गजानन माधव मुक्तिबोध)
- विशेषता: तीव्र अनुभूति, यथार्थवाद और सामाजिक चेतना के कवि।
- प्रमुख काव्य कृतियाँ:
- चाँद का मुँह टेढ़ा है
- अँधेरे में
- ब्रह्मराक्षस
- योगदान: कविता में जटिलता, समाजवादी दृष्टिकोण और फैंटेसी का प्रभाव डाला।
- गिरिजाकुमार माथुर
- विशेषता: प्रयोगवाद से नई कविता की ओर संक्रमण के कवि।
- प्रमुख काव्य कृतियाँ:
- शिलालेख
- नाश और निर्माण
- योगदान: कविता को नई भाषा, आधुनिक संदर्भ और दर्शन से जोड़ा।
- प्रभाकर माचवे
- विशेषता: नई कविता और प्रयोगवाद के समर्थक।
- प्रमुख काव्य कृतियाँ:
- लावा
- अपनी कल्पना से बाहर
- योगदान: पारंपरिक काव्य शैलियों से अलग, भाषा और शैली में नवीन प्रयोग किए।
- भारत भूषण अग्रवाल
- विशेषता: सहज, सरल और जनवादी चेतना के कवि।
- प्रमुख काव्य कृतियाँ:
- सात सपनों का सागर
- कोलाहल की कविताएँ
- योगदान: कविता को सरलता और विचारधारा से जोड़ा।
- नेमिचंद्र जैन
- विशेषता: आलोचना और नाटक लेखन में भी विशेष योगदान।
- प्रमुख काव्य कृतियाँ:
- समय की दहलीज
- योगदान: कविता में नई भाषा और विचारधारा की स्थापना की।
- रामविलास शर्मा
- विशेषता: मार्क्सवादी आलोचक और कवि।
- प्रमुख काव्य कृतियाँ:
- अदब और राजनीति
- निराला की साहित्य साधना
- योगदान: साहित्य और समाज के बीच संबंध को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘तार सप्तक’ का महत्व
- यह संकलन हिंदी साहित्य में प्रयोगवाद की नींव माना जाता है।
- इसमें नए प्रतीकों, बिंबों और आधुनिक जीवन की जटिलताओं को जगह दी गई।
- यह कविता को पारंपरिक बंधनों से मुक्त करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था।
- इसके बाद हिंदी साहित्य में नई कविता आंदोलन को गति मिली।
‘तार सप्तक’ हिंदी कविता में आधुनिकता, विचारधारा और अभिव्यक्ति की नई दिशा देने वाला संकलन था, जिसने आगे चलकर हिंदी कविता के पूरे परिदृश्य को बदल दिया।