संकेतों की दुनिया ( कक्षा – 3 पर्यावरण अध्याय – 22 )

सीखने के प्रतिफल

  1. अपने घर / शाला / आस-पास की वस्तुओं, संकेतों (पात्र, स्टोव, यातायात, संप्रेषण के साधन साइनबोर्ड) स्थान (विभिन्न प्रकार के घर / आश्रय, बस गतिविधियाँ (लोगों के कार्यों, खाना बनाने की प्रक्रिया आदि) को पहचानता है।
  2. दिशाओं, वस्तुओं की स्थिति, सामान्य नक्शे में जगहों / घर/ कक्षा / शाला को संकेतों/चिन्हों अथवा मौखिक रूप से पहचान पाता है।
  3. दैनिक जीवन की गतिविधियों में वस्तुओं के गुणों तथा मात्राओं का अनुमान लगाता है तथा उन्हें संकेतों एवं अमानक इकाईयों (बित्ता / चम्मच/मग) आदि द्वारा जाँच करता है।
  4. भ्रमण के दौरान विभिन्न तरीकों से एकत्रित की गई वस्तुओं/गतिविधियों/जगहों का अवलोकन, अनुभव, जानकारियाँ दर्ज करना तथा पैटर्न विकसित करते हैं उदाहरण चन्द्रमा का आकार, मौसम आदि ।
  5. चित्र, ड्राईंग तथा आकृतियाँ बनाता है, किसी A वस्तु का ऊपर सामने, पार्श्व दृश्य बनाता है, कक्षा-कक्ष, घर, शाला के हिस्से आदि का नक्शा बनाता है। स्लोगन तथा कविता आदि बनाता है।

सोचकर बताओ –

1. संकेतों का हमारे लिए क्या महत्व है?

2. कक्षा में बच्चे कौन-कौन से संकेतो का उपयोग करते हैं?

3. एक ऐसी परिस्थिति बताओ जहाँ हम इशारों से ही बात कर सकते हैं। इसी तरह तुम निम्न संकेतों के लिये चिन्ह बनाओ

संकेतचिन्ह
घर का
पेड का
सूरज का
तारों का
नदी का

खोजो आस-पास

1. इनके लिए संकेतों को पता करो बाँया मोड़, गति अवरोध, पुलिया, रेलवे लाईन, हार्न न बजाएं, आगे अस्पताल है।

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