वस्तुनिष्ठ प्रश्न (6×2=12)
प्रश्न 1. ‘वर्षा-बहार’ कविता के कवि कौन हैं?
उत्तर: (अ) मुकुटधर पांडेय
प्रश्न 2. ‘पानी रे पानी’ पाठ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: (अ) अनुपम मिश्र
प्रश्न 3. ‘नहीं होना बीमार’ कहानी के लेखक कौन हैं?
उत्तर: (अ) स्वयं प्रकाश
प्रश्न 4. ‘फूल और काँटा’ कविता में काँटे के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: (ब) काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ता है
प्रश्न 5. ‘बिरजू महाराज से साक्षात्कार’ में बिरजू महाराज ने किस नृत्य की बात की है?
उत्तर: (ब) कथक
प्रश्न 6. ‘चिड़िया’ कविता के कवि कौन हैं?
उत्तर: (अ) आरसी प्रसाद सिंह
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 7. पर्यायवाची शब्द लिखिए – (4 अंक)
(अ) नदी – सरिता, तटिनी, तरंगिणी, प्रवाहिनी
(ब) आकाश – नभ, गगन, अंबर, व्योम
(स) धरती – पृथ्वी, भूमि, धरा, वसुधा
(द) विजय – जय, जीत, फतेह
प्रश्न 8. संधि विच्छेद कर प्रकार लिखिए – (4 अंक)
(अ) स्वागत = सु + आगत — स्वर संधि (यण संधि)
(ब) मनोकानना = मनः + कानना — विसर्ग संधि
(स) जगन्नाथ = जगत् + नाथ — व्यंजन संधि
(द) वारीश = वारि + ईश — दीर्घ संधि
प्रश्न 9. इन शब्दों को छत्तीसगढ़ी बोली में लिखिए – (4 अंक)
(अ) काम – काम
(ब) नजदीक – लगे / नजीक
(स) पुराना – पुराना
(द) गाने वाला – गावैया
प्रश्न 10. समानार्थी शब्द लिखिए – (4 अंक)
(अ) साहस – हिम्मत, वीरता
(ब) परिणाम – फल, नतीजा
(स) श्वेत – सफेद, धवल
(द) दीन – दुखी, दरिद्र, निर्धन
प्रश्न 11. विलोम शब्द लिखिए – (4 अंक)
(अ) जीवन × मरण / मृत्यु
(ब) सुख × दुख
(स) स्वार्थ × परमार्थ
(द) प्रकाश × अंधकार
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. ‘पानी रे पानी’ पाठ के आधार पर बताइए कि लेखक ने धरती को ‘गुल्लक’ क्यों कहा है? (6 अंक)
उत्तर: लेखक ने धरती को विशाल गुल्लक कहा है क्योंकि जैसे गुल्लक में पैसे जमा होते हैं, वैसे ही धरती वर्षा के जल को तालाबों, झीलों, नदियों और जमीन के नीचे भूजल के रूप में संचित करती है। यह जल भंडार भविष्य में सूखे के समय काम आता है। इसलिए धरती को जल संचयन की बड़ी गुल्लक कहा गया है।
प्रश्न 13. ‘नहीं होना बीमार’ कहानी के आधार पर बताइए कि बच्चे ने बीमार होने का नाटक क्यों किया? (6 अंक)
उत्तर: बच्चे ने बीमार होने का नाटक किया क्योंकि—
- उसका स्कूल जाने का मन नहीं था।
- उसने होमवर्क नहीं किया था, इसलिए सजा मिलने का डर था।
- उसे लगा कि बीमार होने पर आराम मिलेगा और साबूदाने की खीर खाने को मिलेगी।
- वह अस्पताल में सुधाकर काका को देखकर बीमारी को आरामदायक समझ बैठा था।
प्रश्न 14. ‘फूल और काँटा’ कविता के आधार पर बताइए कि कवि ने फूल और काँटे के माध्यम से क्या संदेश दिया है? (6 अंक)
उत्तर: कवि ने फूल और काँटे के माध्यम से यह संदेश दिया है कि एक ही पौधे पर जन्म लेने, समान चाँदनी, हवा और वर्षा पाने पर भी फूल और काँटे के स्वभाव अलग होते हैं। फूल सुगंध, प्रेम और प्रसन्नता फैलाता है, जबकि काँटा पीड़ा देता है। इसी प्रकार मनुष्य का बड़प्पन कुल या वंश से नहीं, बल्कि उसके गुण, कर्म और व्यवहार से होता है। हमें फूल जैसे गुण अपनाने चाहिए।
प्रश्न 15. निम्नलिखित पद्यांश का सप्रसंग व्याख्या कीजिए – (10 अंक)
“बरसे बदरिया सावन की, सावन की मन भावन की।
सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की।।”
उत्तर:
संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश मीरा के पदों से लिया गया है। इसमें सावन ऋतु और श्रीकृष्ण के आगमन की सूचना से उत्पन्न आनंद का वर्णन है।
व्याख्या: सावन के महीने में बादल बरस रहे हैं। यह सावन का मौसम मन को बहुत भाने वाला है। सावन में मीरा का मन उमंगों से भर गया है, क्योंकि उसे श्रीकृष्ण के आने की भनक लग गई है।
भाव: इसमें भक्ति, प्रेम, मिलन की आकुलता और आनंद की भावना व्यक्त हुई है। मीरा श्रीकृष्ण के आगमन की प्रतीक्षा में आनंदित हैं।
प्रश्न 16. ‘बिरजू महाराज से साक्षात्कार’ के आधार पर बताइए कि बिरजू महाराज ने कथक की परंपरा में क्या-क्या बदलाव किए? (10 अंक)
उत्तर: बिरजू महाराज ने कथक की पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए प्रस्तुतीकरण में बदलाव किए—
- गंडा बाँधने की परंपरा में बदलाव किया। पहले भेंट देने पर गंडा बाँधा जाता था, पर उन्होंने शिष्य में सच्ची लगन देखकर गंडा बाँधना शुरू किया।
- पहले कथा के दृश्यों का बहुत विस्तृत वर्णन होता था, अब संकेतों में प्रस्तुत किया जाने लगा।
- उन्होंने टैगोर, त्यागराज आदि कवियों की रचनाओं को कथक में शामिल किया।
- पुरानी भाव-भंगिमाओं को नए रूप में प्रस्तुत किया।
- कथक में नई रचनाएँ और प्रयोग जोड़े।
प्रश्न 17. ‘चिड़िया’ कविता के आधार पर बताइए कि कवि ने पक्षियों के जीवन से मनुष्य को क्या-क्या सीखने की प्रेरणा दी है? (10 अंक)
उत्तर: ‘चिड़िया’ कविता में कवि ने पक्षियों के जीवन से मनुष्य को ये प्रेरणाएँ दी हैं—
- पक्षी प्रेम-प्रीति और मिल-जुलकर रहना सिखाते हैं।
- वे अपने श्रम से जितना मिलता है, उतना ही संचय करते हैं; लोभ नहीं करते।
- वे निर्भय और स्वच्छंद होकर आकाश में विचरण करते हैं।
- वे दूसरों का हक नहीं छीनते और बचा हुआ दूसरों के हित में छोड़ देते हैं।
- मनुष्य को चाहिए कि वह लोभ, पाप, स्वार्थ और हिंसा छोड़कर प्रेम, एकता, संतोष, स्वतंत्रता और मानवता को अपनाए।
- पक्षी बंधन में न रहकर स्वतंत्र जीवन का संदेश देते हैं।
