प्रायद्वीपीय पठार (कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान)
1. परिचय एवं निर्माण
- स्वरूप: यह एक मेज की आकृति वाला (Tableland) भूभाग है। यह भारत का सबसे प्राचीन (Oldest) भू-भाग है।
- संरचना: यह पुराने क्रिस्टलीय (Crystalline), आग्नेय (Igneous) और रूपांतरित (Metamorphic) चट्टानों से बना है।
- उत्पत्ति: यह गोंडवाना भूमि (Gondwana land) के टूटने और अपवाह (Drifting) के कारण बना था, जो इसकी प्राचीनता का कारण है।
2. विशेषताएँ
- प्रायद्वीपीय पठार की ऊँचाई पश्चिम में अधिक है और इसका ढाल पूर्व की ओर है (जो महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियों के बहाव से सिद्ध होता है)।
- इसकी पश्चिमी सीमा पर पश्चिमी घाट और पूर्वी सीमा पर पूर्वी घाट स्थित हैं।
- इस क्षेत्र में काली मिट्टी (Black Soil) पाई जाती है, जिसे स्थानीय रूप से दक्कन ट्रैप (Deccan Trap) कहते हैं, जो ज्वालामुखी उद्गार से बनी बेसाल्ट चट्टानों से निर्मित है।
3. मुख्य विभाजन (The Main Divisions)
प्रायद्वीपीय पठार को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है:
3.1. मध्य उच्च भूमि (The Central Highlands)
- विस्तार: यह भाग नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित है और मालवा के पठार के एक बड़े हिस्से पर फैला है।
- ढाल: इसका ढाल दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है, जो यहाँ की नदियों (चंबल, सिंध, बेतवा और केन) के बहाव से स्पष्ट होता है।
- श्रेणियाँ: यह पश्चिम में अरावली पर्वत श्रृंखला से घिरा है।
- पूर्वी विस्तार: इसके पूर्वी विस्तार को स्थानीय रूप से बुंदेलखंड, बघेलखंड और छोटा नागपुर पठार के नाम से जाना जाता है (जो खनिजों का एक बड़ा भंडार है)।
3.2. दक्कन का पठार (The Deccan Plateau)
- विस्तार: यह नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित एक त्रिभुजाकार भूभाग है।
- सीमाएँ:
- उत्तर: इसके आधार पर सतपुड़ा की श्रृंखला है।
- पूर्व: पूर्वी घाट।
- पश्चिम: पश्चिमी घाट।
- मेघालय और कार्बी-एंगलोंग पठार: यह प्रायद्वीपीय पठार का ही एक विस्तार है, जो पूर्वोत्तर भारत में स्थित है और मुख्य पठार से एक भ्रंश (Fault) द्वारा अलग हो गया है।
4. पश्चिमी और पूर्वी घाट में अंतर
पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट प्रायद्वीपीय पठार के किनारे बनाते हैं, लेकिन उनकी विशेषताओं में बड़ा अंतर है:
| विशेषताएँ | पश्चिमी घाट (Western Ghats) | पूर्वी घाट (Eastern Ghats) |
| स्थिति | अरब सागर के समानांतर (पश्चिमी किनारा) | बंगाल की खाड़ी के समानांतर (पूर्वी किनारा) |
| सततता | सतत (Continuous) श्रृंखला। इसे केवल दर्रों (Passes) के माध्यम से ही पार किया जा सकता है। | असतत (Discontinuous) और अनियमित। नदियों द्वारा कटा हुआ। |
| ऊँचाई | अधिक ऊँचा (औसत 900 से 1600 मीटर)। यहाँ वर्षा अधिक होती है। | कम ऊँचा (औसत लगभग 600 मीटर)। |
| सबसे ऊँची चोटी | अनाई मुडी (2,695 मीटर) और डोडाबेटा (2,637 मीटर)। | महेंद्रगिरी (1,501 मीटर)। |
| नदियों का उद्गम | यहाँ से निकलने वाली मुख्य नदियाँ (जैसे गोदावरी, कृष्णा) पूर्व की ओर बहती हैं। | कोई बड़ी नदी यहाँ से उद्गमित नहीं होती। |
5. महत्व (Significance of the Plateau)
- खनिज भंडार: यह खनिज संसाधनों (जैसे लोहा, कोयला, बॉक्साइट) का सबसे बड़ा भंडार है, जो भारत के औद्योगिक विकास का आधार है।
- वन: यहाँ बहुमूल्य वनस्पति और वन्यजीव पाए जाते हैं, विशेष रूप से पश्चिमी घाट (जो एक जैव विविधता हॉटस्पॉट है)।
- ऊर्जा: यह जलविद्युत उत्पादन और पवन ऊर्जा संयंत्रों के लिए महत्वपूर्ण है।
- काली मिट्टी: दक्कन ट्रैप की काली मिट्टी कपास की खेती के लिए बहुत उपयोगी है।
