प्राकृतिक वनस्पति एवं वनाश्रित समुदाय (कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान)

प्राकृतिक वनस्पति एवं वनाश्रित समुदाय (कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान)

1. प्राकृतिक वनस्पति का अर्थ (Meaning of Natural Vegetation)

  • प्राकृतिक वनस्पति: वह वनस्पति जो मनुष्य की सहायता के बिना अपने आप उगती है और लंबे समय तक उस पर मानवीय प्रभाव नहीं पड़ता है। इसे अक्षत वनस्पति (Virgin Vegetation) भी कहते हैं।
  • देशज (Endemic): वे पौधे जो पूरी तरह से भारतीय मूल के हैं।
  • विदेशी (Exotic): वे पौधे जो भारत के बाहर से लाए गए हैं।

2. वनस्पति को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Vegetation)

(A) धरातल (Relief)

  1. भू-भाग (Land): भूमि का प्रकार वनस्पति को प्रभावित करता है। उपजाऊ भूमि पर कृषि की जाती है, जबकि ऊबड़-खाबड़ और असमतल भूमि पर घास के मैदान और वन विकसित होते हैं।
  2. मृदा (Soil): विभिन्न प्रकार की मिट्टी विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों को सहारा देती है। जैसे:
    • रेगिस्तानी मिट्टी – कँटीली झाड़ियाँ।
    • डेल्टा प्रदेश की दलदली मिट्टी – मैंग्रोव वन।
    • पहाड़ों की ढलानों वाली मिट्टी – शंकुधारी वृक्ष।

(B) जलवायु (Climate)

  1. तापमान (Temperature): वनस्पति की प्रकृति और विकास को प्रभावित करता है। हिमालय पर 900 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर तापमान गिरने से वनस्पति बदल जाती है।
  2. सूर्य का प्रकाश (Sunlight): अधिक सूर्य प्रकाश वाले क्षेत्रों में पेड़ तेज़ी से बढ़ते हैं।
  3. वर्षा (Precipitation): भारत में लगभग सारी वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है। भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में सघन वन और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में कँटीली झाड़ियाँ पाई जाती हैं।

3. वनस्पति के प्रकार (Types of Vegetation)

भारत में वर्षा और तापमान की भिन्नता के आधार पर पाँच मुख्य प्रकार की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं:

3.1. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन (Tropical Evergreen Forests)

  • क्षेत्र: पश्चिमी घाट, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, असम के ऊपरी भाग और तमिलनाडु तट।
  • वर्षा: 200 cm से अधिक वर्षा।
  • विशेषता: ये वन वर्षभर हरे-भरे रहते हैं (चूंकि वृक्षों के पत्ते झड़ने का कोई निश्चित समय नहीं होता)। ये अत्यंत सघन होते हैं।
  • महत्वपूर्ण वृक्ष: आबनूस (Ebony), महोगनी (Mahogany), रोज़वुड (Rosewood) और रबर।

3.2. उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन (Tropical Deciduous Forests)

  • प्रकृति: इन्हें मानसूनी वन भी कहते हैं।
  • क्षेत्र: भारत में सबसे विस्तृत क्षेत्र पर पाए जाते हैं।
  • वर्षा: 70 cm से 200 cm के बीच वर्षा।
  • विशेषता: ये वृक्ष शुष्क ग्रीष्म ऋतु में (लगभग 6-8 सप्ताह के लिए) अपने पत्ते गिरा देते हैं।
  • महत्वपूर्ण वृक्ष: सागौन (Teak) सबसे प्रमुख है, इसके अलावा साल, चंदन, शीशम, महुआ।

3.3. कँटीले वन तथा झाड़ियाँ (Thorn Forests and Scrubs)

  • क्षेत्र: 70 cm से कम वर्षा वाले क्षेत्र (जैसे राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के शुष्क भाग)।
  • विशेषता: इन वृक्षों की जड़ें लंबी होती हैं और पत्तियाँ छोटी, ताकि नमी संरक्षित रहे। पत्तियाँ अक्सर काँटों में बदल जाती हैं।
  • महत्वपूर्ण वृक्ष: खजूर, बबूल (Acacia), खेजड़ी और नागफनी (Cacti)।

3.4. पर्वतीय वन (Montane Forests)

  • क्षेत्र: हिमालय क्षेत्र और प्रायद्वीपीय भारत की ऊँची पहाड़ियाँ।
  • विशेषता: ऊँचाई के साथ तापमान में गिरावट के कारण वनस्पति का स्वरूप बदलता जाता है।
    • 1000 से 2000 मीटर: सदाबहार चौड़ी पत्ती वाले वन (ओक, चेस्टनट)।
    • 1500 से 3000 मीटर: शंकुधारी वन (चीड़, देवदार, सिल्वर फर, स्प्रूस)।
    • 3600 मीटर से ऊपर: अल्पाइन वनस्पति और टुंड्रा वनस्पति (घास के मैदान और लाइकेन)।

3.5. मैंग्रोव वन (Mangrove Forests)

  • क्षेत्र: समुद्र तटीय और नदी डेल्टा वाले क्षेत्र (जैसे गंगा, महानदी, कृष्णा, गोदावरी और कावेरी का डेल्टा)।
  • विशेषता: ये वन ज्वार-भाटे के पानी वाले क्षेत्रों में उगते हैं और इनकी जड़ें पानी में डूबी रहती हैं।
  • महत्वपूर्ण वृक्ष: सुंदरी वृक्ष (जिसके नाम पर सुंदरबन डेल्टा का नाम पड़ा)।

4. वनाश्रित समुदाय (Forest Dependent Communities)

  • आजीविका: भारत में कई जनजातीय समुदाय (Tribal Communities) हैं जिनकी आजीविका पूरी तरह से वनों पर निर्भर करती है।
  • वन उत्पादों का उपयोग: ये समुदाय ईंधन की लकड़ी, चारा, पत्ते (तेंदू पत्ता), फल, औषधीय पौधे और अन्य लघु वन उत्पाद (Minor Forest Produce – MFP) एकत्र करते हैं।
  • परंपरागत खेती: कुछ समुदाय झूम खेती (घुमंतू खेती) करते हैं, जहाँ जंगल के एक छोटे हिस्से को साफ करके खेती की जाती है।
  • औपनिवेशिक प्रभाव: ब्रिटिश काल में वन कानूनों के कारण इन समुदायों की आजीविका गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी।

5. वन्यजीव (Wildlife)

  • जैव विविधता: भारत में पौधों की लगभग 47,000 प्रजातियाँ और जानवरों की 90,000 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • महत्वपूर्ण वन्यजीव:
    • एशियाई शेर: गुजरात में गिर के जंगलों तक सीमित।
    • एक सींग वाला गैंडा: असम और पश्चिम बंगाल के दलदली क्षेत्रों में।
    • हाथी: असम, कर्नाटक और केरल के उष्ण तथा आर्द्र वनों में।
    • ऊँट और जंगली गधे: कच्छ का रन और थार मरुस्थल।

6. वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Conservation)

  • अति दोहन के कारण: लालची शिकारियों द्वारा जानवरों का अति दोहन और वनस्पति का विनाश वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा है।
  • सरकारी प्रयास:
    1. वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम (Wildlife Protection Act): 1972 में लागू किया गया, जिसका उद्देश्य शिकार पर प्रतिबंध लगाना है।
    2. प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट राइनो: विशिष्ट जानवरों को बचाने के लिए परियोजनाएँ शुरू की गईं।
    3. जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserves): 18 जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र स्थापित किए गए हैं (जैसे सुंदरबन, नंदा देवी, मन्नार की खाड़ी)।
    4. राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य: देश में 103 राष्ट्रीय उद्यान और 535 वन्यजीव अभयारण्य स्थापित किए गए हैं।
    5. वन महोत्सव: प्रतिवर्ष जुलाई के महीने में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाता है, जिसे वन महोत्सव कहते हैं।