(Identification and Selection of Gifted Children – CDP / CTET / TET / B.Ed / D.El.Ed हेतु बिंदुवार नोट्स)
1️⃣ प्रतिभाशाली बालकों की पहचान का अर्थ
- पहचान (Identification) का तात्पर्य उन बालकों को ढूँढना है
जिनमें बौद्धिक, रचनात्मक, शैक्षिक या विशेष योग्यता औसत से अधिक हो। - चयन (Selection) का अर्थ है पहचाने गए बालकों को
विशेष कार्यक्रमों, कक्षाओं या सुविधाओं के लिए चुनना।
👉 सरल शब्दों में –
प्रतिभा को पहचानना = पहचान |
प्रतिभा को अवसर देना = चयन
2️⃣ पहचान एवं चयन की आवश्यकता
- प्रतिभा का उचित विकास
- बौद्धिक क्षय (Talent Wastage) को रोकना
- समाज एवं राष्ट्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करना
- प्रतिभाशाली बालकों की शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति
3️⃣ प्रतिभाशाली बालकों की पहचान की विधियाँ
🔹 1. बुद्धि परीक्षण (Intelligence Tests)
- IQ का मापन
- सामान्यतः IQ 120 या उससे अधिक
- व्यक्तिगत एवं समूह परीक्षण
- जैसे – बिने, वेक्सलर आदि
🔹 2. शैक्षिक उपलब्धि परीक्षण
- विद्यालयी परीक्षाओं में उच्च प्रदर्शन
- विषय विशेष (गणित, विज्ञान, भाषा) में उत्कृष्टता
🔹 3. शिक्षक का अवलोकन
- कक्षा में तीव्र सीखने की क्षमता
- प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति
- रचनात्मक उत्तर
- नेतृत्व क्षमता
👉 शिक्षक का निरंतर अवलोकन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
🔹 4. अभिभावक की रिपोर्ट
- घर पर बालक की जिज्ञासा
- स्वतंत्र अध्ययन की रुचि
- असामान्य रुचियाँ (पुस्तकें, प्रयोग, कला आदि)
🔹 5. रचनात्मकता परीक्षण
- नवीन सोच
- मौलिकता
- कल्पनाशील उत्तर
- समस्या-समाधान की क्षमता
🔹 6. रुचि एवं अभिवृत्ति परीक्षण
- बालक की रुचि के क्षेत्र
- कला, संगीत, विज्ञान, खेल, नेतृत्व आदि
🔹 7. सहपाठी मूल्यांकन (Peer Rating)
- सहपाठी द्वारा प्रतिभा की पहचान
- समूह गतिविधियों में नेतृत्व व क्षमता
4️⃣ प्रतिभाशाली बालकों के चयन के आधार
- बुद्धि स्तर (IQ)
- शैक्षिक उपलब्धि
- रचनात्मकता
- विशेष योग्यता (Talent)
- सामाजिक–भावनात्मक परिपक्वता
5️⃣ चयन की प्रमुख विधियाँ
🔹 1. बहु-मापदंड विधि (Multiple Criteria Approach)
- केवल IQ पर निर्भर न होकर
- बुद्धि + उपलब्धि + रचनात्मकता + अवलोकन
👉 सबसे प्रभावी विधि
🔹 2. व्यक्तिगत अध्ययन (Case Study)
- बालक के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का अध्ययन
- शैक्षिक, सामाजिक, भावनात्मक पहलू
6️⃣ पहचान एवं चयन में आने वाली समस्याएँ
- केवल IQ पर अधिक निर्भरता
- ग्रामीण/वंचित वर्ग की प्रतिभा की उपेक्षा
- सांस्कृतिक एवं भाषाई पक्षपात
- शिक्षक प्रशिक्षण का अभाव
7️⃣ प्रभावी पहचान के लिए सुझाव
- बहुस्तरीय परीक्षणों का प्रयोग
- शिक्षक–अभिभावक–विशेषज्ञ का सहयोग
- निरंतर एवं गतिशील पहचान प्रक्रिया
- समान अवसर की नीति
8️⃣ निष्कर्ष
- प्रतिभाशाली बालकों की पहचान एवं चयन
निरंतर, वैज्ञानिक एवं बहुआयामी प्रक्रिया होनी चाहिए। - सही समय पर पहचान और उचित चयन से
बालक अपनी पूर्ण क्षमता का विकास कर सकता है।
📌 परीक्षा उपयोगी एक पंक्ति में
- पहचान = प्रतिभा को खोजने की प्रक्रिया
- चयन = विशेष सुविधाओं हेतु चयन
- सर्वोत्तम विधि = बहु-मापदंड विधि
