होलिकोत्सव: कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 18

होलिकोत्सव: कक्षा सातवीं विषय संस्कृत पाठ 18

छत्तीसगढ़ प्रदेशस्य प्रियः उत्सवः होलिकोत्सवः अस्ति। जनाः उत्सवं श्रुत्वैव आनंद अनुभन्ति। छत्तीसगढ़ प्रदेशस्य जनानां इमम् उत्सवं प्रति अतिनिष्ठा लक्ष्यते। अस्माकं प्रदेशे उत्सवाः समायोज्यन्ते । परं होलिकोत्सस्यः वैशिष्टयम् अनुपमेयं अस्ति ।

होलिकोत्सवः फाल्गुन मासस्य पूर्णिमायां सम्पद्यते । अस्योत्सवस्य आगमनं समशीतोष्ण ऋतुकाले भवति ।। वसन्तागमनेन सर्वासु दिशासु शस्यानि आच्छादितानि भवन्ति । उद्यानेषु नवपुष्पाणि विकसिन्त। मयूराः नृत्यन्ति, पिकाः गायन्ति च। अस्मिन समये सर्वेषां प्राणिनाम् हृदि प्रकुल्लता संचरित ।

शब्दार्थां: – होलिका = होली, श्रुत्वैव = सुनकर ही, लक्ष्यते = दिखायी देती है, समायोज्यन्ते = मनाये जाते हैं, सम्पद्यते= मनायी जाती है, विकसन्ति= खिल जाते हैं, पिका = कोयल, हृदि = हृदय में।

अनुवाद – छत्तीसगढ़ राज्य का प्रिय त्यौहार होली है। लोग इस त्यौहार को सुनकर ही आनन्द का अनुभव करते हैं। छत्तीसगढ़ के लोगों में इस त्यौहार के प्रति अति निष्ठा दिखाई देती है। हमारे राज्य में कई त्यौहार मनाएं जाते हैं। लेकिन होली विशिष्ट और उपमा रहित (अनुपमेय) है।

‘होली’ फागुन महीने के पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस त्यौहार का आगमन समशीतोष्ण ऋतु में होता है। बसंत के आगमन के साथ ही सभी दशाएँ (पूरी धरती) हरीतिमा से ढँक जाती हैं। उद्यानों में नये पुष्प खिलते जाते हैं, मयूर नाचते हैं और कोयल गाने लगती है। इस समय सभी प्राणियों के हृदय में खुशियों का संचार होता है।

छत्तीसगढ़ कृषि प्राधान्य प्रदेशः अस्ति। अधिकाधिक जनानां जीवनं कृर्षो एवं अवलम्बितम्। कृषकाः षष्मासपर्यन्तं कृषि कार्य बहु यत्नानि कुर्वन्ति । पश्चात् धनधान्यं सम्प्राप्य हर्षमनुभवन्ति । प्राचीन काले सर्वेगृहस्थाः यज्ञं विदधति स्य । ते यज्ञ सम्पादनार्थं यथेष्ट समिधानि नवान्नानि धृतानि दुग्धानि तथा अन्यानि द्रव्याणि च प्रयच्छन्ति स्म। अद्यपि सैव प्रथा भिन्नतया दृश्यते। यज्ञस्य प्राचीन रूपं विलुप्तमस्ति । अधुना बालकाः इतस्ततः काष्ठानि एकत्रीकुर्वन्ति – दहन्ति च । । अस्मिन्नवसरे जनाः बहुरड़्गरञ्ञितम जलं परस्पर क्षिपन्ति खेलन्ति च विविधैः रागैः । आबालवृद्धाः प्रसन्नाः परस्परं मिलन्ति । सर्वे गायन्ति नृत्यन्ति च । सर्वे स्नेहेन अन्येषां मुखेषु मदयन्ति ।

. शब्दार्था: – प्रदेश: = राज्य, कृषौ = कृषि पर, अवलम्बितम् = निर्भर है, षठमासपर्यन्तम् = छह महीने तक, सम्प्राप्य = प्राप्तकर, विदधति = करते हैं, समिधानि = हवन, धृतानि = घी, द्रव्याणि = पदार्थ, अद्यापि = आज भी, दहन्ति = जलाते हैं, क्षिपन्ति = फेंकते हैं, नृत्यन्ति = नाचते हैं, मदयन्ति = लगाते हैं।

अनुवाद – छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है। अधिकांश लोगों का जीवन कृषि पर निर्भर है। किसान छह महीने कृषि कार्य को बड़े परिश्रम से करते हैं। उसके बाद फसल (अनाज) प्राप्त कर हर्ष का अनुभव करते हैं।

प्राचीनकाल में सभी गृहस्थी (गृहस्थ धर्म का पालन करने वाले) यज्ञ करते थे। वे यज्ञ पूर्ण करने के लिए यथेष्ठ हवन सामग्री हेतु नव अन्न, घी, दूध तथा अन्य वस्तुएँ माँगा करते थे। आज भी शैवों में भिन्न प्रथा दिखाई देती है। यज्ञों का प्राचीन रूप विलुप्त हो गया है। आजकल लड़के आसपास की लकड़ियों को एकत्र करते हैं और जलाते हैं। इस अवसर पर लोग बहुरंगी पानी को एक दूसरे पर फेंकते हैं और खेलते हैं। बालक-वृद्ध सभी प्रसन्नतापूर्वक मिलते हैं, सभी गाते और नाचते हैं। सभी मित्रभाव से एक-दूसरे में मुख पर गुलाल लगाते हैं।

फागगानमाध्यमेन जनाः स्वसुखानि प्रदर्शयन्ति । यथा ते आनंदार्णवे निमग्नाः इति प्रतीयते। गृहेषु बहुनि मिष्ठान्नानि निर्मितानि भवन्ति। एका कथा प्रचलिता-होलिका प्रहलादस्य पितृस्वसा आसीत् । सा प्रहलादेन यह अग्नीप्रविष्टा । विष्णोः प्रसादेन प्रहलादः न दग्ध। होलिकैव दग्धा । अस्यां कथायां असत्योपरि सत्यस्यविजयः भवतीति संदेशः

उत्सवोऽयम् स्वस्थं पर्यावरणं सृजति। परस्परं साहार्द्रभावं संवर्धयति च एवं आनन्दस्य उल्लास्य च अयमुत्सवः सर्वेषा मनांसि रञ्जयनीति ।

शब्दार्था: – स्वसुखानि = अपने सुखों को, अर्णवे = सागर में, निमग्नाः= डुबकी लगा रहे हैं, पितृस्वसा = फूफी, प्रसादेन = कृपा से, दग्धः= जला, सृजति = निर्माण करता है, संवर्धयति = बढ़ाता है, मनांसि = मन को।

अनुबाद – फागगीत के द्वारा लोग अपनी खुशियों को प्रदर्शित करते हैं। ऐसा लगता है कि वे आनन्द के सागर में डुबकी लगा रहे हैं। घरों में अनेक प्रकार की मिठाइयाँ बनाई जाती हैं। एक कथा प्रचलित है-होलिका प्रहलाद की फूफी थी। वह प्रहलाद के साथ अग्नि में प्रवेश कर गई। विष्णु जी की कृपा से प्रहलाद न -जला, होलिका जल गई। यह कथा यह संदेश देती है कि असत्य पर सत्य की विजय होती है।

यह उत्सव स्वस्थ वातावरण निर्माण करता है और परस्पर मैत्रीभाव को बढ़ाता है। आनंद और उल्लास का यह पर्व सभी के मन को आनन्दित करने वाला है।

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