मुगल साम्राज्य की स्थापना कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान (इतिहास)

मुगल साम्राज्य की स्थापना (बाबर से अकबर तक, सन् 1526 से 1605)

याद रखने योग्य बातें

  • सल्तनत शासन का अंतिम सुल्तान इब्राहीम लोदी था। वह अफगान का रहने वाला था।
मुगल साम्राज्य की स्थापना
इब्राहीम लोदी
  • बाबर भारत में मुगल साम्राज्य के संस्थापक थे। उसे राज्य उत्तराधिकार में मिला था।
  • बाबर ने 1526 में पानीपत के मैदान में सुल्तान इब्राहीम लोदी को परास्त किया। इस युद्ध में लोदी मारा गया। यह युद्ध इतिहास का अत्यधिक महत्वपूर्ण युद्ध माना जाता है।
  • राणा सांगा मेवाड़ का राजपूत राजा था।
  • सन् 1527 खानवा के मैदान में बाबर और राणा सांगा के बीच भीषण युद्ध हुआ, जिसमें राणा सांगा की हार हुई।
  • बाबर ने ‘तुजुक ए बाबरी’ नामक आत्मकथा में अपने जीवन के अनुभवों को लिखा, जिसे बाबरनामा भी कहते हैं। उनकी मृत्यु सन् 1530 में हुई।
  • बाबर की मृत्यु के बाद उसका बड़ा बेटा हुमायूँ बादशाह बना लेकिन वह अधिक दिन जीवित न रहा, 1556 में उनकी मृत्यु हो गई। सन् 1539 में अफगान सरदार शेरशाह ने हुमायूँ को परास्त कर उसे दिल्ली की गद्दी छोड़कर ईरान जाने के लिए मजबूर कर दिया।
  • शेरशाह ने नए सिक्कों का चलन प्रारंभ किया, जिसे दाम व रुपया कहते थे।
  • शेरशाह के बचपन का नाम फरीद था। उसने निहत्थे होकर एक शेर का शिकार किया था तब से उसे शेर खाँ की उपाधि मिली और फरीद से शेरशाह हो गया।
  • सन् 1498 में पुर्तगाली नाविक वास्कोडिगामा के नेतृत्व में पुर्तगाली जहाज भारत के कालीकट बंदरगाह में पहुँचा। हुमायूँ के बाद अकबर दिल्ली का शासक बना। इन्होंने पूरे उत्तर भारत में शीघ्र ही अपना साम्राज्य विस्तार कर लिया।
  • सन् 1576 में मुगल सेना और राणा प्रताप की सेना के बीच हल्दी घाटी में युद्ध हुआ, जिसमें मुगल सेना विजयी हुई।
  • सन् 1548 में राजा दलपत के मृत्यु के बाद मुगल सेना और रानी दुर्गावती (गोडवाना साम्राज्ञी) की सेना के मध्य युद्ध हुआ, जिसमें दुर्गावती वीरगति को प्राप्त हुई और गोडवाना राज्य मुगल साम्राज्य में मिला लिया गया।
  • अबुल फजल अकबर का विशेष सहयोगी था। उसने ही ‘अकबर नामा‘ लिखा जिसमें अकबर राज्यकाल का विस्तारपूर्वक वर्णन है।
  • अकबर ने लगभग 50 वर्षों तक राज्य किया। उसके बाद उसका पुत्र जहाँगीर शासक बना।
  • शेरशाह सन् 1540 में दिल्ली की गद्दी पर बैठा।

प्रश्न 1.  रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

(1)मुगल साम्राज्य के सभी अधिकारियों को मनसबदार कहा जाता था ।

( 2 ) अकबरनामा के लेखक अबुलफजल हैं।

( 3 ) प्रत्येक मनसबदार को घुड़सवारों की एक टुकड़ी रखनी पड़ती थी ।

(4) मनसबदारों को वेतन जागीर के रूप में मिलता था ।

( 5 ) ताँबे के बने सिक्के को दाम कहते हैं व चांदी के बने सिक्के को रुपया कहते हैं ।

प्रश्न 2. सही / गलत बताएँ

( 1 ) अकबर की व्यवस्था में किसानों को लगान अनाज के रूप में देना पड़ता था ।(गलत)

( 2 ) अधिकारी किसान के बोए गए जमीन नापकर लगान तय करते थे । (सही)

( 3 ) किसान को अपनी उपज का एक चौथाई भाग लगान के रूप में देना पड़ता था ।( गलत)

( 4 ) लगान इकट्ठा करने में अधिकारियों की मदद जमींदार करते थे । ( सही)

प्रश्न 3. प्रश्नों के उत्तर लिखिए–

( 1 ) बाबर के जीवन के बारे में हमें किस स्रोत से पता चलता है ?

उत्तर – बाबर के जीवन के बारे में हमें उसके द्वारा लिखित आत्मकथा ‘ तुजुक – ए – बाबरी ‘ से पता चलता है । इसे बाबरनामा भी कहते हैं । 

( 2 ) हुमायूँ को भारत छोड़कर क्यों जाना पड़ा ? 

उत्तर – हुमायूँ , शेरशाह से युद्ध में हार गया और उसे सन् 1540 में भारत छोड़कर ईरान भागना पड़ा ।

( 3 ) क्या छत्तीसगढ़ अकबर के राज्य के अंदर था ?

उत्तर – छत्तीसगढ़ अकबर के राज्य के अंदर नहीं था । छत्तीसगढ़ उस समय रतनपुर राज्य कहलाता था । यहाँ पर कल्चुरी राजवंश का प्रशासन प्रभावशील था ।

( 4 ) बाबर ने भारत में कौन – सी कला को विकसित करने की पहल की ?

उत्तर — बाबर सुंदर बगीचों का शौकीन था । उसने भारत में मुगल शैली के कई बाग बनवाए ।

( 5 ) राणा प्रताप ने अकबर की अधीनता क्यों नहीं स्वीकार की ?

उत्तर – राणा प्रताप को मुगल दासता ( गुलामी ) स्वीकार नहीं होने के कारण उसने अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और पुनः आक्रमण कर अपने राज्य को प्राप्त करने में सफलता भी अर्जित किया । 

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( 6 ) प्रायः लोग अकबर की किन नीतियों से ज्यादा प्रभावित हुए होंगे ?

उत्तर – अकबर द्वारा लागू दो नीतियों से सर्वाधिक लोग प्रभावित हुए तथा उसे सबका समर्थन मिला । 

1. सब के प्रति शांति ( सुलह कुल )

 2. सर्वधर्म समभाव ( दीन – ए – इलाही ) ।

( 7 ) मनसबदारों की नियुक्ति कौन करता था ?

 उत्तर – मनसबदारों की नियुक्ति खुद बादशाह करता था । 

( 8 ) मनसबदारों का तबादला क्यों होता था ? 

उत्तर – मनसबदारों का समय – समय पर तबादला कर दिया जाता था ताकि वे स्थानीय लोगों से मिलकर विद्रोह न करें ।

( 9 ) अकबर की धार्मिक नीति का वर्णन कीजिए । 

उत्तर – अकबर ने हिन्दू मुस्लिम एकता स्थापित करने के लिए ‘ दीन ए इलाही ‘ धर्म की स्थापना की । इसके लिए उसने कई धर्मों के गुरुओं से उनके धर्म की चर्चा के , फलस्वरूप उसके मन में यह धारणा बनी की सभी धर्मों में सच्चाई व अच्छाई है । दुनिया में विविधता , अलग – अलग संस्कृति व धर्म , ईश्वर की ईच्छा से बने हैं । इसी नीति के अनुकूल अकबर ने हिन्दुओं पर लागू जजिया व तीर्थ यात्रा कर हटा दिया । मंदिर बनाने की अनुमति दी और हिन्दू व जैन मंदिरों व मठों को दान दिया । उसने रामायण , महाभारत जैसे ग्रंथों का फारसी में अनुवाद करवाया । अकबर ने अपने निजी जीवन में भी कई धर्मों की बातों का समावेश किया । वह रोज सूर्य की पूजा करता था , मांस – मदिरा आदि का उपयोग कम करने लगा और दीवाली , नौरोज जैसे त्यौहारों को मानता था । उसकी इस नीति को मुगल साम्राज्य के सभी लोगों का समर्थन मिला ।

( 10 ) अकबर की लगान व्यवस्था की विशेषताएँ बताइये ।

उत्तर – अकबर की लगान व्यवस्था की विशेषताएँ निम्न हैं

1. किसान लगान रुपए में दें न कि अनाज के रूप में । इससे छोटे अधिकारी व जमींदारों की मनमानी जाती रही । 

2. किसान जितनी जमीन में खेती करता था , उसी हिसाब से लगान चुकाना था । आमतौर पर अपने उपज का एक तिहाई या आधा हिस्सा लगान के रूप में देना पड़ता था । 

3. किसानों से लगान इकट्ठा करने में स्थानीय जमींदार अधिकारियों की मदद करते थे । 

4. किसानों से प्राप्त लगान से ही राज्य का खर्च चलता था ।

 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. अकबर ने अपने विशाल साम्राज्य की व्यवस्था किस प्रकार की ? 

उत्तर – अकबर ने अपने विशाल साम्राज्य को पंद्रह सूबों में बाँटा । सूबे का क्षेत्र लगभग आज के प्रदेश जैसा ही था । प्रत्येक सूबा ( प्रांत ) , सरकारों ( जिलों ) में बँटा हुआ था और प्रत्येक सरकार बहुत से परगनों ( तहसीलों ) में विभक्त था । कई गाँवों के समूह को एक परगना कहा जाता था । अकबर ने केन्द्र से लेकर परगना तक जिम्मेदार अधिकारियों को नियुक्त किया । मुगल शासन के इन अधिकारियों को मनसबदार कहा जाता था । इन मनसबदारों के क्षेत्र को जागीर तथा उन्हें जागीरदार भी कहा जाता था ।

प्रश्न 2. शेरशाह ने अपने राज्य को सुदृढ़ बनाने के लिए क्या – क्या सुधार किए ?

उत्तर- शेरशाह ने अपने राज्य को सुदृढ़ बनाने के लिए कई सुधार कार्य किए । उसके शासन में सड़कें , सरायें और जल व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया ताकि आम जनता को सुविधाएँ प्राप्त हों । जिन्हें अकबर ने भी आगे चलकर अपनाया और आगे बढ़ाया । उसने नये सिक्कों का चलन शुरू किया । पहला था ताँबे का सिक्का , जिसे ‘ दाम ‘ कहते थे तथा दूसरा चाँदी का सिक्का था , जिसे रूपया ‘ कहते थे । उसने सासाराम में अपने लिए मकबरा भी बनवाया । इनके शासन काल में सड़क निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया । 

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प्रश्न 3. अकबर की राजपूत नीति का संक्षेप में वर्णन कीजिए ।

 उत्तर – वैसे तो अकबर एक निरंकुश एवं स्वेच्छाचारी शासक था परन्तु अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए उसने उदारवादी नीति अपनायी जिसके अंतर्गत राजपूत नीति भी आती है ।

( 1 ) राजपूतों से वैवाहिक संबंध कायम करना – उसने जयपुर के राजा भारमल की पुत्री मणिबाई के साथ विवाह करके राजपूतों को अपनी ओर मिला लिया ।

( 2 ) राजपूतों को उच्च पद पर नियुक्त किया – उसने भारमल के पुत्र तथा उसके नाती मानसिंह , बीकानेर के रावसिंह , जैसेलमेर के भीमसेन तथा जोधपुर के उदयसिंह को उच्च पदों पर नियुक्त किया तथा उन्हें संतुष्ट किया । 

( 3 ) उदार व्यवहार तथा धार्मिक भावनाओं का आदर अकबर ने अपने अधीन राजपूत राजाओं तथा अधिकारियों के साथ उदार व्यवहार किया । उसने राजपूतों की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचायी । उसने उनके मंदिर तथा मूर्तियाँ नहीं तोड़ी । अकबर ने हिंदू धर्म के आचरण एवं व्यवहार को भी अपनाया । 

प्रश्न 4.अकबर को महान क्यों कहा जाता है ? 

अथवा 

अकबर एक महान राष्ट्रीय सम्राट था , समझाइए । 

उत्तर – अकबर एक महान् राष्ट्रीय सम्राट था , वह 7 बातों से स्पष्ट होता है 

( 1 ) राजनीतिक एकता – अकबर ने भारत के दिल्ली आग में ग्वालियर , अजमेर , जौनपुर , मालवा के प्रदेशों , रणथम्भौर , दिती = के किलों , गुजरात , अहमदनगर , बंगाल तथा बिहार आदि विजय करके विशाल मुगल साम्राज्य की स्थापना की । 

( 2 ) कुशल शासन प्रबंध – अकबर एक कुशल शासकट प्रशासक था । उसने सुव्यवस्थित शासन प्रणाली की स्थापना की थी । देश के सभी प्रांतों में समान कानून लागू किया । मनसबदारी प्रथा भूमि सुधार संबंधी कानून बनाए ।

( 3 ) धार्मिक नीति– अकबर सभी धर्मों का आदर करता था । उसने दीन – ए – इलाही धर्म चलाया । उन्होंने हिन्दुओं को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की । उसने गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाया

( 4 ) हिन्दुओं पर लगने वाले जजिया कर एवं यात्री कर समाप्त कर उदारता का परिचय दिया ।

( 5 ) उसने हिन्दुओं के मंदिर एवं मूर्तियों को नहीं तोड़ा ।

( 6 ) राजपूत नीति – उसने राजपूत राजा की कन्या से विवाह कर हिन्दू – मुस्लिम एकता को सुदृढ़ करने का प्रयास किया तथा अनेक राजपूतों को अपने प्रशासन में उच्च पदों पर नियुक्त किया । 

( 7 ) उसने हिन्दू – मुस्लिम दोनों के लिए एकही न्याय व्यवस्था लागू कर समानता का सिद्धान्त अपनाया । उपर्युक्त कारणों से अकबर को एक महान राष्ट्रीय सम्राट माना जाता है ।

प्रश्न 5. अकबर के दरबार के नौ रत्नों के नाम लिखिए ।

उत्तर – अकबर के दरबार के नौ – रत्न निम्न थे –

( 1 ) अबुल फजल – विद्वान पंडित , सलाहकार और मित्र था ।

( 2 ) फैजी – बड़ा कवि और दार्शनिक था , जिसने भगवट गीता का फारसी में अनुवाद किया था । 

( 3 ) मानसिंह – अनुभवी सेनापति ।

( 4 ) राजा टोडरमल – भूमि का माप करके मालगुजारी निश्चित करने वाला । 

( 5 ) बीरबल – चतुर विद्वान , बुद्धिमान व हाजिर जवाब 

( 6 ) तानसेन– प्रसिद्ध संगीतज , गायक ।

( 7 ) अब्दुर्रहीम– कवि । 

( 8 ) हकीम हुकाम – राजवैद्य । 

( 9 ) मुल्लादोप्याजा – विनोदशील , मसखरा । 

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नौ – रत्नों के अलावा अकबर के शासनकाल में सूरदास तुलसीदास , रसखान , केशवदास , अबुल फजल बदायूँ आदि प्रसिद्ध कवि , लेखक एवं साहित्यकार थे ।

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