1. शिक्षण की प्रचलित प्रथाएँ (Traditional/Traditional Practices)
इन्हें अक्सर “पारंपरिक शिक्षण विधियाँ” कहा जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करना और परीक्षा में अच्छे अंक लाना होता है।
- शिक्षक की भूमिका: शिक्षक कक्षा का केंद्र होता है। वह ज्ञान का “दाता” है जो ब्लैकबोर्ड पर सवाल हल करता है।
- छात्र की भूमिका: छात्र एक “श्रोता” या “कॉपी करने वाला” होता है। वह चुपचाप बैठकर नोट्स बनाता है।
- सीखने का तरीका: इसमें ‘व्याख्यान विधि’ (Lecture Method) का अधिक प्रयोग होता है। उदाहरण के लिए: शिक्षक ने वृत्त का क्षेत्रफल का सूत्र (A = πr² ) लिखवाया और बच्चों को 10 सवाल हल करने को दे दिए।
- नुकसान: इसमें बच्चा ‘कैसे’ तो सीख जाता है, पर ‘क्यों’ नहीं जान पाता। उसकी रचनात्मकता दब जाती है।
2. रचनावाद (Constructivism)
रचनावाद इस विचार पर आधारित है कि ज्ञान प्राप्त नहीं किया जाता, बल्कि उसका निर्माण किया जाता है। यह जीन पियाजे (Piaget) और लेव वायगोत्स्की (Vygotsky) के सिद्धांतों पर टिका है।
- मूल सिद्धांत: बच्चा अपने पिछले अनुभवों (Previous Knowledge) और नए अनुभवों के बीच संबंध बनाकर अपनी समझ खुद विकसित करता है।
- शिक्षक की भूमिका: यहाँ शिक्षक एक ‘सुविधादाता’ (Facilitator) होता है। वह निर्देश देने के बजाय ऐसी परिस्थितियाँ और गतिविधियाँ बनाता है जहाँ बच्चा खुद खोजबीन करे।
- सीखने का तरीका: इसमें ‘खोज विधि’ (Discovery Method) और ‘समूह चर्चा’ पर जोर दिया जाता है।
प्रचलित प्रथा बनाम रचनावाद: मुख्य अंतर (Table for Teaching)
| विशेषता | प्रचलित प्रथा (पारंपरिक) | रचनावाद (आधुनिक) |
| केंद्र बिंदु | शिक्षक और पाठ्यपुस्तक | बच्चा और उसके अनुभव |
| ज्ञान का स्वरूप | ज्ञान स्थिर है जिसे याद करना है। | ज्ञान गतिशील है जिसे बनाना है। |
| कक्षा का वातावरण | सख्त अनुशासन और शांति। | सक्रियता, बातचीत और गतिविधि। |
| सीखने की विधि | रटना और अभ्यास (Drilling) | प्रयोग, चर्चा और समस्या समाधान। |
| गलतियों का स्थान | गलतियों को ‘असफलता’ माना जाता है। | गलतियाँ सीखने का हिस्सा और ‘संसाधन’ हैं। |
3. गणित की कक्षा में रचनावाद कैसे लागू करें? (Practical Example)
यदि आप “त्रिभुज” पढ़ा रहे हैं:
- पारंपरिक तरीका: आप बोर्ड पर त्रिभुज बनाएंगे, उसकी परिभाषा लिखेंगे और बताएंगे कि इसके तीनों कोणों का योग 1800 होता है। बच्चे इसे याद कर लेंगे।
- रचनावादी तरीका: 1. आप बच्चों को कागज के अलग-अलग आकार के त्रिभुज काटने को कहेंगे।2. उनसे कहेंगे कि तीनों कोनों (कोणों) को फाड़कर एक साथ चिपकाएँ।3. बच्चे देखेंगे कि तीनों कोनों को मिलाने पर एक सीधी रेखा (Straight Line) बन रही है।4. बच्चा खुद निष्कर्ष निकालेगा कि “अरे! ये तो 1800 हो गया।”
4. रचनावाद में आकलन (Assessment in Constructivism)
रचनावाद में हम केवल परीक्षा के नंबर नहीं देखते, बल्कि यह देखते हैं कि बच्चा कैसे सोच रहा है।
- इसे ‘सतत और व्यापक मूल्यांकन’ (CCE) से जोड़ा जाता है।
- शिक्षक यह देखता है कि बच्चा किसी समस्या को सुलझाने के लिए कौन सा तर्क (Logic) लगा रहा है।
शिक्षक के लिए टिप (Important for Exam):
CG TET में अक्सर पूछा जाता है कि “एक अच्छी गणित कक्षा की विशेषता क्या है?”
उत्तर: जहाँ बच्चे अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र हों और वे वस्तुओं को जोड़-तोड़कर (Manipulatives) गणित सीख रहे हों।
