(संज्ञानात्मक–प्रेरणात्मक सिद्धान्त : Cognitive–Motivational Theory of Learning)
CTET / CDP / TET हेतु सरल, बिंदुवार एवं परीक्षा-उपयोगी नोट्स
1️⃣ सिद्धान्त के प्रवर्तक
- अर्नेस्ट आर. हिलगार्ड
- गॉर्डन एच. बोवर
👉 दोनों मनोवैज्ञानिकों ने मिलकर
अधिगम को संज्ञान (Cognition) + प्रेरणा (Motivation) के संयुक्त परिणाम के रूप में समझाया।
2️⃣ हिलगार्ड–बोवर अधिगम सिद्धान्त का अर्थ
- अधिगम केवल उद्दीपक–अनुक्रिया (S–R) का परिणाम नहीं है।
- सीखने में मस्तिष्क की आंतरिक प्रक्रियाएँ (सोचना, समझना, स्मृति) अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- व्यक्ति पहले सीखता है, फिर व्यवहार में उसे प्रकट करता है।
👉 मुख्य विचार
Learning is a change in knowledge, not always immediately visible in behavior.
3️⃣ सिद्धान्त का मूल आधार
हिलगार्ड एवं बोवर के अनुसार अधिगम में तीन मुख्य तत्त्व होते हैं—
- प्रेरणा (Motivation)
- संकेत या उद्दीपन (Cues / Stimulus)
- संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ (Cognitive Processes)
4️⃣ अधिगम की प्रक्रिया (Learning Process)
हिलगार्ड–बोवर के अनुसार अधिगम की क्रमिक प्रक्रिया:
उद्दीपन (Stimulus)
⬇
संकेतों की पहचान (Cues)
⬇
संज्ञानात्मक प्रक्रिया
(सोचना, समझना, स्मृति)
⬇
अधिगम (Learning)
⬇
प्रदर्शन (Performance)
📌 सीखना (Learning) और प्रदर्शन (Performance) अलग-अलग हो सकते हैं।
5️⃣ प्रमुख अवधारणाएँ (Key Concepts)
🔹 1. संज्ञानात्मक मध्यस्थ (Cognitive Mediators)
- मस्तिष्क की आंतरिक प्रक्रियाएँ
- प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देतीं
🔹 2. प्रेरणा की भूमिका
- बिना प्रेरणा अधिगम प्रभावी नहीं
- प्रेरणा अधिगम को सक्रिय करती है
🔹 3. गुप्त अधिगम (Latent Learning)
- व्यक्ति सीखता है, पर तुरन्त व्यवहार में प्रकट नहीं करता
- अवसर मिलने पर प्रदर्शन करता है
🔹 4. सीखना ≠ प्रदर्शन
- सीखना आंतरिक परिवर्तन
- प्रदर्शन बाह्य व्यवहार
6️⃣ सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ
- अधिगम एक संज्ञानात्मक प्रक्रिया है
- S–R सिद्धान्त का विस्तार
- प्रेरणा को केन्द्रीय स्थान
- समझ एवं अर्थपूर्ण अधिगम पर बल
- व्यवहारवाद और संज्ञानवाद के बीच सेतु
7️⃣ शैक्षिक महत्व (Educational Implications)
शिक्षक के लिए—
- केवल रटन्त अधिगम पर बल न दें
- समझ आधारित शिक्षण कराएँ
- प्रेरणा उत्पन्न करें
- छात्रों को सोचने के अवसर दें
- सीखने और प्रदर्शन में अंतर समझें
कक्षा में—
- समस्या समाधान विधि
- चर्चा, गतिविधि, प्रयोग
- अर्थपूर्ण अधिगम
8️⃣ सीमाएँ (Limitations)
- संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं का मापन कठिन
- प्रयोगात्मक प्रमाण सीमित
- व्यवहार के बाह्य पहलू कम स्पष्ट
9️⃣ हिलगार्ड–बोवर बनाम व्यवहारवाद
| आधार | व्यवहारवाद | हिलगार्ड–बोवर |
|---|---|---|
| अधिगम | S–R संबंध | संज्ञान + प्रेरणा |
| मस्तिष्क | ब्लैक बॉक्स | सक्रिय प्रक्रिया |
| सीखना | प्रत्यक्ष व्यवहार | आंतरिक परिवर्तन |
🔟 परीक्षा हेतु 2–3 पंक्ति उत्तर
हिलगार्ड एवं बोवर के अनुसार अधिगम एक संज्ञानात्मक–प्रेरणात्मक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति पहले सीखता है और बाद में अवसर मिलने पर व्यवहार में उसे प्रकट करता है।
1️⃣1️⃣ CTET / TET में पूछे जाने वाले तथ्य
- Learning ≠ Performance
- Motivation is essential
- Cognitive mediation
- Latent learning
- Bridge between behaviorism & cognitivism
🔚 निष्कर्ष
- हिलगार्ड एवं बोवर का सिद्धान्त
आधुनिक संज्ञानात्मक अधिगम का मजबूत आधार है। - यह सिद्धान्त स्पष्ट करता है कि
सीखना केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि समझ की प्रक्रिया है।
