(Cognitive Theory of Intelligence – Piaget)
(B.Ed., D.El.Ed., CTET/TET, बाल विकास एवं मनोविज्ञान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण Notes)
1. सिद्धान्त का परिचय
बुद्धि का संज्ञानात्मक सिद्धान्त स्विस मनोवैज्ञानिक
जीन पियाजे
द्वारा प्रतिपादित किया गया।
👉 पियाजे के अनुसार बुद्धि कोई स्थिर गुण नहीं, बल्कि
👉 यह संज्ञानात्मक विकास की एक गतिशील प्रक्रिया है,
👉 जो बच्चे के पर्यावरण से अंतःक्रिया के माध्यम से विकसित होती है।
2. पियाजे के अनुसार बुद्धि का अर्थ
पियाजे के अनुसार—
“बुद्धि अनुकूलन (Adaptation) की क्षमता है।”
अर्थात्,
- बुद्धि वह शक्ति है जिसके द्वारा व्यक्ति
- नई परिस्थितियों को समझता है
- अपने व्यवहार को वातावरण के अनुसार ढालता है
3. बुद्धि = अनुकूलन (Adaptation)
पियाजे ने बुद्धि को जैविक प्रक्रिया माना और कहा कि—
जैसे शरीर पर्यावरण के अनुसार अनुकूलित होता है,
वैसे ही मस्तिष्क भी संज्ञानात्मक रूप से अनुकूलन करता है।
यह अनुकूलन दो प्रक्रियाओं से होता है—
4. संज्ञानात्मक विकास की प्रमुख प्रक्रियाएँ
(1) आत्मसात (Assimilation)
- नई जानकारी को पूर्व विद्यमान ज्ञान में समाहित करना
- उदाहरण:
- बच्चा सभी चार पैरों वाले जानवर को “कुत्ता” कहना
(2) समायोजन (Accommodation)
- नई जानकारी के अनुसार पुरानी संज्ञानात्मक संरचना में परिवर्तन
- उदाहरण:
- बच्चा कुत्ता और बिल्ली में अंतर सीखता है
(3) संतुलन (Equilibration)
- आत्मसात और समायोजन के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रक्रिया
- यही प्रक्रिया संज्ञानात्मक विकास को आगे बढ़ाती है
👉 Equilibration = विकास की प्रेरक शक्ति
5. स्कीमा (Schema) की अवधारणा
- स्कीमा = ज्ञान की मानसिक संरचना
- यह अनुभवों के आधार पर बनती और बदलती है
उदाहरण:
- वस्तु को पकड़ना, देखना, पहचानना—सब स्कीमा हैं।
6. संज्ञानात्मक विकास की अवस्थाएँ (Stages of Cognitive Development)
पियाजे के अनुसार बुद्धि का विकास चार निश्चित अवस्थाओं में होता है—
🟢 1️⃣ संवेदी-गतिक अवस्था (Sensorimotor Stage)
आयु – जन्म से 2 वर्ष
- इन्द्रियों और शारीरिक क्रियाओं द्वारा सीखना
- वस्तु स्थायित्व (Object Permanence) का विकास
🟡 2️⃣ पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage)
आयु – 2 से 7 वर्ष
- भाषा का विकास
- अहंकेन्द्रित सोच (Egocentrism)
- तर्क की कमी
🔵 3️⃣ ठोस संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage)
आयु – 7 से 11 वर्ष
- तार्किक चिंतन (ठोस वस्तुओं पर)
- संरक्षण (Conservation) की समझ
🔴 4️⃣ औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage)
आयु – 11 वर्ष से ऊपर
- अमूर्त चिंतन
- परिकल्पनात्मक एवं तर्कसंगत सोच
7. पियाजे के सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ
- बुद्धि विकासात्मक है, जन्मजात नहीं
- संज्ञानात्मक विकास अवस्था-क्रमबद्ध है
- प्रत्येक अवस्था गुणात्मक रूप से भिन्न
- बच्चा सीखने में सक्रिय भूमिका निभाता है
8. शैक्षिक महत्व
- पाठ्यक्रम निर्माण आयु के अनुसार
- सीखने में अनुभव और क्रियात्मकता पर बल
- शिक्षक = मार्गदर्शक
- बाल-केंद्रित शिक्षा की नींव
9. सीमाएँ
- सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभावों की उपेक्षा
- अवस्थाएँ कठोर मानी गईं
- वयस्कों के संज्ञानात्मक विकास की कम व्याख्या
10. निष्कर्ष
पियाजे के अनुसार—
बुद्धि संज्ञानात्मक संरचनाओं का निरंतर विकास है,
जो आत्मसात, समायोजन और संतुलन के माध्यम से होता है।
👉 यह सिद्धान्त बाल विकास और शिक्षा को समझने की आधारशिला है।
11. परीक्षा-उपयोगी एक पंक्ति में
✔ पियाजे = संज्ञानात्मक सिद्धान्त
✔ बुद्धि = अनुकूलन
✔ 4 संज्ञानात्मक अवस्थाएँ
✔ Equilibration = विकास की कुंजी
