संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्त (Cognitive Learning Theories)
(CTET / CDP / TET हेतु विस्तृत, बिंदुवार एवं परीक्षा-उपयोगी नोट्स)
1️⃣ संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्त का अर्थ
- संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्त यह मानते हैं कि
👉 अधिगम केवल बाह्य उद्दीपन–अनुक्रिया (S–R) का परिणाम नहीं है,
बल्कि यह एक आंतरिक मानसिक प्रक्रिया है। - इस सिद्धान्त में सोच, समझ, स्मृति, अंतर्दृष्टि, समस्या-समाधान पर विशेष बल दिया जाता है।
- अधिगम को ज्ञान की संरचना (Cognitive Structure) के रूप में देखा जाता है।
👉 मुख्य विचार:
सीखना = समझना + अर्थ निर्माण + मानसिक संगठन
2️⃣ संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्त की मूल मान्यताएँ
- अधिगम एक मानसिक एवं बौद्धिक प्रक्रिया है।
- शिक्षार्थी सक्रिय रूप से ज्ञान ग्रहण करता है।
- अधिगम में पूर्व ज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
- समस्या-समाधान एवं अंतर्दृष्टि से अधिगम होता है।
- अधिगम उद्देश्यपूर्ण एवं अर्थपूर्ण होता है।
3️⃣ संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्त के प्रमुख प्रवर्तक
संज्ञानात्मक दृष्टिकोण के अंतर्गत निम्न प्रमुख सिद्धान्त आते हैं—
🔶 (A) अंतर्दृष्टि (सूझ) द्वारा अधिगम सिद्धान्त
– वोल्फगैंग कोहलर
🔹 सिद्धान्त का सार
- अधिगम अचानक सूझ (Insight) से होता है।
- समस्या का समाधान सम्पूर्ण परिस्थिति को समझने से होता है, न कि प्रयत्न–त्रुटि से।
🔹 प्रमुख प्रयोग
- चिंपैंज़ी और केले का प्रयोग
(डिब्बे जोड़कर केले तक पहुँचना)
🔹 मुख्य विशेषताएँ
- अधिगम अचानक होता है।
- संपूर्णता का सिद्धान्त (Whole > Parts)
- स्थानांतरण (Transfer) अधिक होता है।
🔹 शैक्षिक महत्व
- समस्या-समाधान पद्धति
- रटन्त अधिगम के स्थान पर समझ
- गणित, विज्ञान में उपयोगी
🔶 (B) संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त
– जीन पियाजे
🔹 सिद्धान्त का सार
- अधिगम बालक की बौद्धिक परिपक्वता पर निर्भर करता है।
- बालक ज्ञान को स्वयं निर्मित करता है।
🔹 प्रमुख संकल्पनाएँ
- स्कीमा (Schema)
- आत्मसात (Assimilation)
- समायोजन (Accommodation)
- संतुलन (Equilibration)
🔹 संज्ञानात्मक अवस्थाएँ
- संवेदी-प्रेरक (0–2 वर्ष)
- पूर्व-संक्रियात्मक (2–7 वर्ष)
- ठोस संक्रियात्मक (7–11 वर्ष)
- औपचारिक संक्रियात्मक (11+)
🔹 शैक्षिक महत्व
- आयु एवं परिपक्वता अनुसार शिक्षण
- गतिविधि आधारित शिक्षण
- बालक-केंद्रित शिक्षा
🔶 (C) खोज अधिगम / सर्पिल पाठ्यक्रम सिद्धान्त
– जेरोम ब्रूनर
🔹 सिद्धान्त का सार
- अधिगम तब श्रेष्ठ होता है जब शिक्षार्थी स्वयं खोज करता है।
- ज्ञान का निर्माण सक्रिय प्रक्रिया है।
🔹 प्रमुख अवधारणाएँ
- खोज अधिगम (Discovery Learning)
- सर्पिल पाठ्यक्रम (Spiral Curriculum)
- निरूपण की विधाएँ:
- क्रियात्मक
- चित्रात्मक
- प्रतीकात्मक
🔹 शैक्षिक महत्व
- जिज्ञासा एवं रचनात्मकता का विकास
- शिक्षक मार्गदर्शक की भूमिका में
- दीर्घकालिक अधिगम
4️⃣ संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ
- अधिगम मानसिक प्रक्रिया है
- शिक्षार्थी सक्रिय भूमिका में
- अंतर्दृष्टि एवं समझ पर बल
- अर्थपूर्ण अधिगम
- उच्च स्तरीय चिंतन का विकास
5️⃣ व्यवहारवादी बनाम संज्ञानात्मक अधिगम (संक्षिप्त तुलना)
| आधार | व्यवहारवादी | संज्ञानात्मक |
|---|---|---|
| केंद्र | बाह्य व्यवहार | मानसिक प्रक्रिया |
| अधिगम | S–R संबंध | समझ व सूझ |
| भूमिका | शिक्षक-केंद्रित | शिक्षार्थी-केंद्रित |
| बल | अभ्यास, पुनर्बलन | सोच, समस्या समाधान |
6️⃣ सीमाएँ (Limitations)
- प्रयोगात्मक प्रमाण सीमित
- सभी अधिगम परिस्थितियों की व्याख्या नहीं
- व्यक्तिगत भिन्नताओं पर कम बल
7️⃣ शैक्षिक निहितार्थ (Educational Implications)
- समस्या-समाधान आधारित शिक्षण
- खोज एवं गतिविधि पद्धति
- पूर्व ज्ञान से नवीन ज्ञान जोड़ना
- रटन्त अधिगम से बचाव
- बालक को सोचने के अवसर देना
8️⃣ परीक्षा हेतु 2–3 पंक्ति का उत्तर
संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्त के अनुसार अधिगम एक आंतरिक मानसिक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति सूझ, समझ और समस्या-समाधान के माध्यम से ज्ञान का निर्माण करता है।
9️⃣ निष्कर्ष
- संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्तों ने
शिक्षा को यांत्रिक से बौद्धिक बनाया। - आधुनिक शिक्षा प्रणाली
पियाजे, कोहलर और ब्रूनर के सिद्धान्तों पर आधारित है।
