कक्षा 7 संस्कृत शिक्षक डायरी (2026-27)
माहवार विभाजन एवं कार्य दिवस सारणी
📅 माहवार विभाजन एवं कार्य दिवस सारणी
| माह | कार्य दिवस | संचयी दिवस | पाठ / विषय वस्तु |
| जून | 11 | 1–11 | पाठ 1: वन्दे भारतमातरम् |
| जुलाई | 26 | 12–37 | पाठ 2: नित्यं पिबामः सुभाषितरसम्; पाठ 3: मित्राय नमः |
| अगस्त | 21 | 38–58 | पाठ 4: न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम्; पाठ 5: सेवा हि परमो धर्मः |
| सितम्बर | 22 | 59–80 | पाठ 6: क्रीडाम वयं श्लोकान्त्याक्षरीम्; त्रैमासिक आकलन |
| अक्टूबर | 17 | 81–97 | पाठ 7: ईशावास्यम् इदं सर्वम्; पाठ 8: हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः |
| नवम्बर | 24 | 98–121 | पाठ 9: अन्नाद् भवन्ति भूतानि; पाठ 10: दशमः कः? |
| दिसम्बर | 20 | 122–141 | पाठ 11: द्वीपेषु रम्यः द्वीपोऽण्डमानः; अर्धवार्षिक आकलन |
| जनवरी | 25 | 142–166 | पाठ 12: वीराङ्गना पन्नाधाया |
| फरवरी | 24 | 167–190 | पाठ 13: सिंहावाशैलजा |
| मार्च | 23 | 191–200+ | संपूर्ण पुनरावलोकन एवं वार्षिक आकलन |
| अप्रैल | 24 | — | उपचारात्मक शिक्षा एवं परीक्षा परिणाम |
प्रत्येक पाठ हेतु 10-स्तरीय शिक्षण सोपान
📌 प्रत्येक पाठ हेतु 10-स्तरीय शिक्षण सोपान
कक्षा में संस्कृत भाषा के स्वाभाविक एवं प्रभावी अधिगम हेतु प्रत्येक पाठ को निम्नलिखित 10 सोपानों में विभाजित करके पढ़ाया जाएगा:
- पूर्व ज्ञान परीक्षण: छात्रों के पूर्व अनुभव एवं ज्ञान से पाठ को जोड़ना।
- आदर्श वाचन: शिक्षक द्वारा शुद्ध उच्चारण, सही गति, आरोह-अवरोह एवं लय के साथ वाचन।
- अनुकरण वाचन: छात्रों द्वारा व्यक्तिगत एवं सामूहिक रूप से शिक्षक का अनुसरण।
- शब्दार्थ स्पष्टीकरण: कठिन शब्दों के अर्थ को शब्दकोश, संदर्भ एवं चित्रों के माध्यम से समझना।
- अनुवाद एवं व्याख्या: संस्कृत वाक्यों का हिन्दी भाषा में सरल रूपांतरण।
- भावार्थ एवं सार: पाठ के मूल संदेश, नैतिक शिक्षा एवं व्यावहारिक महत्व की चर्चा।
- व्याकरण अभ्यास: विभक्ति, कारक, धातु रूप, संधि, अव्यय एवं प्रत्यय का व्यावहारिक ज्ञान।
- प्रश्नोत्तर अभ्यास: अभ्यास प्रश्नों का मौखिक एवं लिखित समाधान।
- पुनरावृत्ति (Revision): पढ़ाए गए अंशों का त्वरित दोहराव।
- मूल्यांकन एवं गृहकार्य: लघुरूप परीक्षा, प्रोजेक्ट कार्य एवं स्वाध्याय।
📖 विस्तृत 200 दिवसीय दैनिक शिक्षण योजना
🔹 जून माह (दिन 1–11) — पाठ 1: वन्दे भारतमातरम्
- लक्ष्य: देशभक्ति गीत का शुद्ध वाचन, भावार्थ एवं तृतीया/चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग सीखना।
| दिन | पाठ | शिक्षण बिंदु | शिक्षण विधि | गृहकार्य |
| 1 | पाठ 1 | पूर्व ज्ञान परीक्षण: भारतमाता, राष्ट्रगीत, देशभक्ति | प्रश्नोत्तर, चर्चा, चित्र प्रदर्शन | ‘वन्दे मातरम्’ गीत सुनें, भारत का नक्शा देखें |
| 2 | पाठ 1 | आदर्श वाचन: सम्पूर्ण पाठ का शुद्ध उच्चारण | शिक्षक द्वारा वाचन, छात्र अनुसरण | पाठ 1 का प्रथम अनुच्छेद पढ़ें |
| 3 | पाठ 1 | अनुकरण/अभ्यास: छात्रों द्वारा सामूहिक वाचन | समूह वाचन, व्यक्तिगत वाचन | पाठ 1 द्वितीय अनुच्छेद पढ़ें |
| 4 | पाठ 1 | शब्दार्थ: वन्दे, वत्सला, माहात्म्य, मुकुटरूपेण | शब्दकोश, चित्र सहित | 10 कठिन शब्द अर्थ सहित लिखें |
| 5 | पाठ 1 | अनुवाद/व्याख्या: संस्कृत → हिन्दी | वाक्य-वाक्य अनुवाद | पाठ का हिन्दी अनुवाद लिखें |
| 6 | पाठ 1 | भावार्थ/सार: भारतमाता की महिमा | चर्चा, प्रश्नोत्तर | भावार्थ याद करें |
| 7 | पाठ 1 | प्रश्नोत्तर: मौखिक एवं लिखित | प्रश्न-उत्तर सत्र | पाठ 1 के प्रश्न 1–5 लिखें |
| 8 | पाठ 1 | व्याकरण: तृतीया विभक्ति, ‘नमः’ योगे चतुर्थी | सूत्र, उदाहरण | तृतीया विभक्ति के 5 वाक्य बनाएँ |
| 9 | पाठ 1 | पुनरावृत्ति: सम्पूर्ण पाठ | पुनः वाचन, प्रश्नोत्तर | पाठ 1 पूर्ण याद करें |
| 10 | पाठ 1 | मूल्यांकन: लघु परीक्षा (20 अंक) | लिखित परीक्षा | त्रुटि सुधार |
| 11 | पाठ 1 | पाठ 2 का पूर्व ज्ञान: सुभाषित क्या हैं? | चर्चा, उदाहरण | 2 नीतिपरक सुभाषित एकत्र करें |
🔹 जुलाई माह (दिन 12–37) — पाठ 2 एवं पाठ 3
- लक्ष्य: नीति श्लोकों का कंठस्थीकरण, पञ्च वकार, षड् दोष, योग एवं सूर्यनमस्कार का महत्त्व।
| दिन | पाठ | शिक्षण बिंदु | शिक्षण विधि | गृहकार्य |
| 12 | पाठ 2 | पूर्व ज्ञान: सुभाषित परिचय | चर्चा, उदाहरण | 5 सुभाषित लिखें |
| 13 | पाठ 2 | आदर्श वाचन: श्लोक 1–2 | शिक्षक वाचन | श्लोक 1–2 पढ़ें |
| 14 | पाठ 2 | अनुकरण: छात्र वाचन | समूह वाचन | श्लोक याद करें |
| 15 | पाठ 2 | शब्दार्थ: वकाराः, पूजितः, हातव्याः | शब्दकोश | 10 शब्द अर्थ सहित लिखें |
| 16 | पाठ 2 | अनुवाद: श्लोक 1–2 | वाक्य अनुवाद | अनुवाद लिखें |
| 17 | पाठ 2 | भावार्थ: पञ्च वकार, षड् दोष | चर्चा | भावार्थ लिखें |
| 18 | पाठ 2 | व्याकरण: तृतीया विभक्ति का प्रयोग | सूत्र, उदाहरण | 5 वाक्य लिखें |
| 19 | पाठ 2 | प्रश्नोत्तर: मौखिक | प्रश्न-उत्तर सत्र | प्रश्न 1–3 लिखें |
| 20 | पाठ 2 | श्लोक 3–4 वाचन | शिक्षक वाचन | श्लोक पढ़ें |
| 21 | पाठ 2 | शब्दार्थ: शुध्यति, भूतात्मा, बुद्धिः | शब्दकोश | 10 कठिन शब्द लिखें |
| 22 | पाठ 2 | अनुवाद: श्लोक 3–4 | अनुवाद अभ्यास | अनुवाद लिखें |
| 23 | पाठ 2 | भावार्थ: शुद्धि के साधन | चर्चा | भावार्थ लिखें |
| 24 | पाठ 2 | श्लोक 5–6 वाचन एवं अर्थ | वाचन, अनुवाद | श्लोक याद करें |
| 25 | पाठ 2 | श्लोक 7–8 वाचन एवं अर्थ | वाचन, अनुवाद | श्लोक याद करें |
| 26 | पाठ 2 | श्लोक 9–10 वाचन एवं अर्थ | वाचन, अनुवाद | श्लोक याद करें |
| 27 | पाठ 2 | पुनरावृत्ति: सम्पूर्ण पाठ | पुनः वाचन | पाठ पूर्ण याद करें |
| 28 | पाठ 2 | मूल्यांकन: लघु परीक्षा | लिखित | त्रुटि सुधार |
| 29 | पाठ 3 | पूर्व ज्ञान: सूर्यनमस्कार, योग | चर्चा, चित्र प्रदर्शन | सूर्यनमस्कार के चरण देखें |
| 30 | पाठ 3 | आदर्श वाचन: संवाद पाठ | शिक्षक वाचन | संवाद पढ़ें |
| 31 | पाठ 3 | अनुकरण: संवाद अभ्यास | भूमिका निर्वाह (Role Play) | संवाद याद करें |
| 32 | पाठ 3 | शब्दार्थ: योगिता, आचार्या, मन्त्र | शब्दकोश | 10 शब्द लिखें |
| 33 | पाठ 3 | अनुवाद: संवाद | अनुवाद अभ्यास | अनुवाद लिखें |
| 34 | पाठ 3 | भावार्थ: सूर्यनमस्कार के लाभ | चर्चा | भावार्थ लिखें |
| 35 | पाठ 3 | व्याकरण: चतुर्थी विभक्ति | सूत्र, उदाहरण | 5 वाक्य बनाएँ |
| 36 | पाठ 3 | प्रश्नोत्तर एवं पुनरावृत्ति | प्रश्न-उत्तर | अभ्यास प्रश्न लिखें |
| 37 | पाठ 3 | मूल्यांकन एवं मासिक आकलन (जुलाई) | लिखित परीक्षा | त्रुटि सुधार |
🔹 अगस्त माह (दिन 38–58) — पाठ 4 एवं पाठ 5
- लक्ष्य: पंचतंत्र की कथा, आत्मनेपद धातु, परोपकार एवं क्तवतु प्रत्यय का बोध।
| दिन | पाठ | शिक्षण बिंदु | शिक्षण विधि | गृहकार्य |
| 38 | पाठ 4 | पूर्व ज्ञान: पंचतंत्र कथा | चर्चा, कथा वाचन | पंचतंत्र की कोई कहानी सुनें |
| 39 | पाठ 4 | आदर्श वाचन: लोमश कथा | शिक्षक वाचन | पाठ पढ़ें |
| 40 | पाठ 4 | अनुकरण: छात्र वाचन | समूह वाचन | पाठ वाचन अभ्यास |
| 41 | पाठ 4 | शब्दार्थ: शृगालः, द्राक्षा, पिपासा | शब्दकोश | 10 शब्द लिखें |
| 42 | पाठ 4 | अनुवाद: कथा अनुवाद | अनुवाद अभ्यास | अनुवाद लिखें |
| 43 | पाठ 4 | भावार्थ: “अंगूर खट्टे हैं” की सीख | चर्चा | भावार्थ लिखें |
| 44 | पाठ 4 | व्याकरण: आत्मनेपद धातु (लट् लकार) | सूत्र, उदाहरण | धातु रूप लिखें |
| 45 | पाठ 4 | प्रश्नोत्तर हल | प्रश्न-उत्तर | अभ्यास प्रश्न लिखें |
| 46 | पाठ 4 | पुनरावृत्ति एवं मूल्यांकन | पुनः वाचन, परीक्षा | त्रुटि सुधार |
| 47 | पाठ 5 | पूर्व ज्ञान: सेवा, परोपकार | चर्चा | सेवा के उदाहरण लिखें |
| 48 | पाठ 5 | आदर्श वाचन: सेवा हि परमो धर्मः | शिक्षक वाचन | पाठ पढ़ें |
| 49 | पाठ 5 | अनुकरण: छात्र वाचन | समूह वाचन | वाचन अभ्यास |
| 50 | पाठ 5 | शब्दार्थ: रसायनशास्त्रज्ञः, चिकित्सकः | शब्दकोश | 10 कठिन शब्द लिखें |
| 51 | पाठ 5 | अनुवाद: गद्यांश अनुवाद | अनुवाद | अनुवाद लिखें |
| 52 | पाठ 5 | भावार्थ: निष्काम सेवा का महत्व | चर्चा | भावार्थ लिखें |
| 53 | पाठ 5 | व्याकरण: ‘क्तवतु’ प्रत्यय का प्रयोग | सूत्र, उदाहरण | प्रत्यय रूप लिखें |
| 54 | पाठ 5 | प्रश्नोत्तर हल | प्रश्न-उत्तर | अभ्यास प्रश्न लिखें |
| 55 | पाठ 5 | पुनरावृत्ति: सम्पूर्ण पाठ | पुनः वाचन | पाठ पूर्ण करें |
| 56 | पाठ 5 | मूल्यांकन: लघु परीक्षा | लिखित | त्रुटि सुधार |
| 57 | पाठ 6 | पूर्व ज्ञान: अन्त्याक्षरी क्रीडा | चर्चा | 2 श्लोक एकत्र करें |
| 58 | पाठ 6 | आदर्श वाचन: श्लोकान्त्याक्षरी | शिक्षक वाचन | श्लोक पढ़ें |
🔹 सितम्बर माह (दिन 59–80) — पाठ 6 एवं त्रैमासिक आकलन
- लक्ष्य: श्लोकान्त्याक्षरी, विद्या महिमा, ‘विद्या’ शब्द रूप एवं त्रैमासिक परीक्षा।
| दिन | पाठ | शिक्षण बिंदु | शिक्षण विधि | गृहकार्य |
| 59 | पाठ 6 | अनुकरण: श्लोक वाचन | समूह वाचन | श्लोक याद करें |
| 60 | पाठ 6 | शब्दार्थ: धीमताम्, व्यसनेन, मदाय | शब्दकोश | 10 शब्द अर्थ सहित |
| 61 | पाठ 6 | अनुवाद: श्लोकों का अर्थ | अनुवाद अभ्यास | अनुवाद लिखें |
| 62 | पाठ 6 | भावार्थ: विद्या की महिमा | चर्चा | भावार्थ लिखें |
| 63 | पाठ 6 | व्याकरण: ‘विद्या’ आकारान्त स्त्रीलिंग शब्द रूप | सूत्र, सारणी | शब्द रूप याद करके लिखें |
| 64 | पाठ 6 | प्रश्नोत्तर हल | प्रश्न-उत्तर | अभ्यास प्रश्न लिखें |
| 65 | पाठ 6 | पुनरावृत्ति: श्लोक अभ्यास | खेल विधि (अन्त्याक्षरी) | श्लोक कंठस्थ करें |
| 66 | पाठ 6 | मूल्यांकन एवं मासिक आकलन | लिखित | त्रुटि सुधार |
| 67–70 | पुनरावृत्ति | पाठ 1 से 6 का संपूर्ण पुनरावलोकन | प्रश्नोत्तर, अभ्यास | पुनरावृत्ति कार्य |
| 71–74 | तैयारी | त्रैमासिक परीक्षा हेतु मॉडल प्रश्नपत्र हल | अभ्यास पत्र हल | मॉडल पेपर हल करें |
| 75–76 | आकलन | त्रैमासिक आकलन (लिखित परीक्षा) | मूल्यांकन | — |
| 77–78 | समीक्षा | उत्तरपुस्तिका प्रदर्शन एवं त्रुटि सुधार | चर्चा, पृष्ठपोषण | उत्तरपुस्तिका में सुधार करें |
| 79–80 | पूर्व तैयारी | पाठ 7: ईशावास्यम् परिचय एवं पृष्ठभूमि | चर्चा | पाठ 7 का वाचन करें |
🔹 अक्टूबर माह (दिन 81–97) — पाठ 7 एवं पाठ 8
- लक्ष्य: ईश्वर की सर्वव्यापकता, उपनिषद विचार, सूक्तियाँ एवं नीतियाँ।
| दिन | पाठ | शिक्षण बिंदु | शिक्षण विधि | गृहकार्य |
| 81 | पाठ 7 | पूर्व ज्ञान: ईश्वर, सर्वव्यापी सत्ता | चर्चा, चित्र | चित्र देखें एवं विचार करें |
| 82 | पाठ 7 | आदर्श वाचन: नाट्यांश वाचन | शिक्षक वाचन | पाठ पढ़ें |
| 83 | पाठ 7 | अनुकरण: नाट्य वाचन अभ्यास | भूमिका निर्वाह | संवाद याद करें |
| 84 | पाठ 7 | शब्दार्थ: ईशावास्यम्, यक्ष, गन्धर्व | शब्दकोश | 10 शब्द लिखें |
| 85 | पाठ 7 | अनुवाद: गद्यांश अनुवाद | अनुवाद | अनुवाद लिखें |
| 86 | पाठ 7 | भावार्थ: ईश्वर की सर्वव्यापकता | चर्चा | भावार्थ लिखें |
| 87 | पाठ 7 | व्याकरण: तृतीया विभक्ति का विशिष्ट प्रयोग | सूत्र, उदाहरण | 5 वाक्य बनाएँ |
| 88 | पाठ 7 | प्रश्नोत्तर हल | प्रश्न-उत्तर | अभ्यास प्रश्न लिखें |
| 89 | पाठ 7 | पुनरावृत्ति एवं मूल्यांकन | पुनः वाचन, परीक्षा | त्रुटि सुधार |
| 90 | पाठ 8 | पूर्व ज्ञान: सूक्ति एवं नीति विचार | चर्चा | 2 नीति सूक्तियाँ खोजें |
| 91 | पाठ 8 | आदर्श वाचन: पाठ वाचन | शिक्षक वाचन | पाठ पढ़ें |
| 92 | पाठ 8 | अनुकरण: छात्र वाचन | समूह वाचन | वाचन अभ्यास |
| 93 | पाठ 8 | शब्दार्थ: अन्विष्यति, मृग्यते, शीलम् | शब्दकोश | 10 शब्द लिखें |
| 94 | पाठ 8 | अनुवाद एवं भावार्थ | अनुवाद, चर्चा | अनुवाद लिखें |
| 95 | पाठ 8 | व्याकरण: अव्यय पद एवं उनका प्रयोग | सूत्र, उदाहरण | 5 अव्यय वाक्य लिखें |
| 96 | पाठ 8 | प्रश्नोत्तर एवं पुनरावृत्ति | प्रश्न-उत्तर | प्रश्नोत्तर लिखें |
| 97 | पाठ 8 | मूल्यांकन एवं मासिक आकलन (अक्टूबर) | लिखित | त्रुटि सुधार |
🔹 नवम्बर माह (दिन 98–121) — पाठ 9 एवं पाठ 10
- लक्ष्य: अन्न का महत्व, पञ्चमी विभक्ति, गणना कथा एवं 1–20 तक संस्कृत संख्या ज्ञान।
| दिन | पाठ | शिक्षण बिंदु | शिक्षण विधि | गृहकार्य |
| 98 | पाठ 9 | पूर्व ज्ञान: सृष्टि की उत्पत्ति एवं अन्न | चर्चा, चित्र | चित्र देखें |
| 99 | पाठ 9 | आदर्श वाचन: संवाद वाचन | शिक्षक वाचन | पाठ पढ़ें |
| 100 | पाठ 9 | अनुकरण: संवाद अभ्यास | भूमिका निर्वाह | संवाद याद करें |
| 101 | पाठ 9 | शब्दार्थ: भूतानि, ब्रह्म, आकाश | शब्दकोश | 10 कठिन शब्द लिखें |
| 102 | पाठ 9 | अनुवाद: संवाद अनुवाद | अनुवाद अभ्यास | अनुवाद लिखें |
| 103 | पाठ 9 | भावार्थ: अन्न से सृष्टि का विकास | चर्चा | भावार्थ लिखें |
| 104 | पाठ 9 | व्याकरण: पञ्चमी विभक्ति (अपादान कारक) | सूत्र, उदाहरण | 5 वाक्य बनाएँ |
| 105 | पाठ 9 | प्रश्नोत्तर हल | प्रश्न-उत्तर | अभ्यास प्रश्न लिखें |
| 106 | पाठ 9 | पुनरावृत्ति एवं मूल्यांकन | पुनः वाचन, परीक्षा | त्रुटि सुधार |
| 107 | पाठ 10 | पूर्व ज्ञान: संख्या एवं गणना का महत्व | चर्चा | 1 से 10 तक संख्या लिखें |
| 108 | पाठ 10 | आदर्श वाचन: ‘दशमः कः?’ कथा | शिक्षक वाचन | कथा पढ़ें |
| 109 | पाठ 10 | अनुकरण: छात्र वाचन | समूह वाचन | वाचन अभ्यास |
| 110 | पाठ 10 | शब्दार्थ: तीर्त्वा, स्नानाय, विषण्णाः | शब्दकोश | 10 शब्द लिखें |
| 111 | पाठ 10 | अनुवाद: कथा का सरल अनुवाद | अनुवाद अभ्यास | अनुवाद लिखें |
| 112 | पाठ 10 | भावार्थ: “स्वयं की भूल पहचानना” | चर्चा | भावार्थ लिखें |
| 113 | पाठ 10 | व्याकरण: संख्यावाचक शब्द (1 से 20) | सूत्र, सारणी | संख्यावाचक शब्द याद करें |
| 114 | पाठ 10 | प्रश्नोत्तर हल | प्रश्न-उत्तर | अभ्यास प्रश्न लिखें |
| 115 | पाठ 10 | पुनरावृत्ति: कथा एवं संख्या | पुनः वाचन | पाठ पूर्ण याद करें |
| 116 | पाठ 10 | मूल्यांकन: लघु परीक्षा | लिखित | त्रुटि सुधार |
| 117 | पाठ 11 | पूर्व ज्ञान: द्वीप, भारत के राज्य/द्विप समूह | चर्चा, मानचित्र | मानचित्र में अण्डमान देखें |
| 118 | पाठ 11 | आदर्श वाचन: अण्डमान विवरण | शिक्षक वाचन | पाठ पढ़ें |
| 119 | पाठ 11 | अनुकरण: छात्र वाचन | समूह वाचन | वाचन अभ्यास |
| 120 | पाठ 11 | शब्दार्थ: द्वीपः, कारागारम्, जनजातिः | शब्दकोश | 10 शब्द लिखें |
| 121 | पाठ 11 | अनुवाद: प्रथम भाग | अनुवाद अभ्यास | अनुवाद लिखें |
🔹 दिसम्बर माह (दिन 122–141) — पाठ 11 एवं अर्धवार्षिक आकलन
- लक्ष्य: अण्डमान द्वीप का सौंदर्य, षष्ठी विभक्ति एवं अर्धवार्षिक परीक्षा।
| दिन | पाठ | शिक्षण बिंदु | शिक्षण विधि | गृहकार्य |
| 122 | पाठ 11 | भावार्थ एवं द्वितीय भाग का अनुवाद | चर्चा, अनुवाद | भावार्थ लिखें |
| 123 | पाठ 11 | व्याकरण: षष्ठी विभक्ति (सम्बन्ध कारक) | सूत्र, उदाहरण | 5 वाक्य बनाएँ |
| 124 | पाठ 11 | प्रश्नोत्तर हल | प्रश्न-उत्तर | अभ्यास प्रश्न लिखें |
| 125 | पाठ 11 | पुनरावृत्ति एवं मूल्यांकन | पुनः वाचन, परीक्षा | त्रुटि सुधार |
| 126–130 | पुनरावृत्ति | पाठ 1 से 11 का संपूर्ण पुनरावलोकन | प्रश्नोत्तर, अभ्यास | पुनरावृत्ति कार्य |
| 131–134 | तैयारी | अर्धवार्षिक परीक्षा हेतु मॉडल प्रश्नपत्र | अभ्यास पत्र हल | मॉडल पेपर हल करें |
| 135–136 | आकलन | अर्धवार्षिक आकलन (लिखित परीक्षा) | मूल्यांकन | — |
| 137–138 | समीक्षा | उत्तरपुस्तिका प्रदर्शन एवं त्रुटि सुधार | चर्चा, पृष्ठपोषण | उत्तरपुस्तिका में सुधार करें |
| 139–141 | पूर्व तैयारी | पाठ 12: वीराङ्गना पन्नाधाया परिचय | चर्चा, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि | पाठ 12 पढ़ें |
🔹 जनवरी माह (दिन 142–166) — पाठ 12
- लक्ष्य: पन्नाधाया का अद्वितीय त्याग, लङ् लकार (भूतकाल) एवं ऐतिहासिक चेतना।
| दिन | पाठ | शिक्षण बिंदु | शिक्षण विधि | गृहकार्य |
| 142 | पाठ 12 | पूर्व ज्ञान: देशभक्ति, त्याग एवं बलिदान | चर्चा, चित्र | वीरांगनाओं के नाम लिखें |
| 143 | पाठ 12 | आदर्श वाचन: पन्नाधाया चरित्र | शिक्षक वाचन | पाठ पढ़ें |
| 144 | पाठ 12 | अनुकरण: छात्र वाचन | समूह वाचन | वाचन अभ्यास |
| 145 | पाठ 12 | शब्दार्थ: त्यागधनानाम्, सर्वस्वम्, कुतन्त्रम् | शब्दकोश | 10 शब्द लिखें |
| 146 | पाठ 12 | अनुवाद: कथा का अनुवाद | अनुवाद अभ्यास | अनुवाद लिखें |
| 147 | पाठ 12 | भावार्थ: राष्ट्र हेतु सर्वस्व समर्पण | चर्चा | भावार्थ लिखें |
| 148 | पाठ 12 | व्याकरण: लङ् लकार (भूतकाल) धातु रूप | सूत्र, उदाहरण | लङ् लकार रूप लिखें |
| 149 | पाठ 12 | प्रश्नोत्तर हल | प्रश्न-उत्तर | अभ्यास प्रश्न लिखें |
| 150 | पाठ 12 | पुनरावृत्ति: कथा एवं व्याकरण | पुनः वाचन | पाठ पूर्ण करें |
| 151 | पाठ 12 | मूल्यांकन: लघु परीक्षा | लिखित | त्रुटि सुधार |
| 152–155 | पाठ 12 विस्तार | भारतीय इतिहास की प्रमुख वीरांगनाएँ | चर्चा, चित्र प्रदर्शनी | संक्षेप में निबंध लिखें |
| 156–160 | व्याकरण अभ्यास | संधि, कारक एवं लकार का व्यावहारिक अभ्यास | अभ्यास पत्र | व्याकरण अभ्यास पत्र हल करें |
| 161–166 | पूर्व तैयारी | पाठ 13: सिंहावा शैलजा एवं महानदी परिचय | चर्चा, मानचित्र | छत्तीसगढ़ का मानचित्र देखें |
🔹 फरवरी माह (दिन 167–190) — पाठ 13 एवं वार्षिक परीक्षा पूर्व तैयारी
- लक्ष्य: महानदी उद्गम स्थल, छत्तीसगढ़ की नदियाँ, अव्यय पद एवं व्यापक पुनरावृत्ति।
| दिन | पाठ | शिक्षण बिंदु | शिक्षण विधि | गृहकार्य |
| 167 | पाठ 13 | पूर्व ज्ञान: महानदी, सिहावा पर्वत | चर्चा, मानचित्र | महानदी का उद्गम देखें |
| 168 | पाठ 13 | आदर्श वाचन: पाठ वाचन | शिक्षक वाचन | पाठ पढ़ें |
| 169 | पाठ 13 | अनुकरण: छात्र वाचन | समूह वाचन | वाचन अभ्यास |
| 170 | पाठ 13 | शब्दार्थ: सिहावाशैलजा, उद्गम, बन्धः | शब्दकोश | 10 शब्द लिखें |
| 171 | पाठ 13 | अनुवाद: पाठ अनुवाद | अनुवाद अभ्यास | अनुवाद लिखें |
| 172 | पाठ 13 | भावार्थ: नदियों का जल संरक्षण एवं महत्व | चर्चा | भावार्थ लिखें |
| 173 | पाठ 13 | व्याकरण: अव्यय पदों का गहन अभ्यास | सूत्र, वाक्य प्रयोग | 5 अव्यय वाक्य बनाएँ |
| 174 | पाठ 13 | प्रश्नोत्तर हल | प्रश्न-उत्तर | अभ्यास प्रश्न लिखें |
| 175 | पाठ 13 | पुनरावृत्ति: सम्पूर्ण पाठ | पुनः वाचन | पाठ याद करें |
| 176 | पाठ 13 | मूल्यांकन एवं मासिक आकलन (फरवरी) | लिखित | त्रुटि सुधार |
| 177–185 | पुनरावलोकन | पाठ 1 से 13 का संपूर्ण दोहराव | प्रश्नोत्तर, अभ्यास | नियमित पुनरावृत्ति करें |
| 186–190 | परीक्षा तैयारी | वार्षिक परीक्षा पैटर्न एवं प्रश्न बैंक अभ्यास | मॉडल पेपर | प्रश्न बैंक हल करें |
🔹 मार्च माह (दिन 191–200+) — वार्षिक आकलन
- लक्ष्य: संपूर्ण पाठ्यक्रम का सुदृढ़ीकरण एवं वार्षिक आकलन।
| दिन | शिक्षण बिंदु | शिक्षण विधि | गृहकार्य |
| 191–193 | सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का द्रुत पुनरावलोकन (Fast Revision) | प्रश्नोत्तर, चर्चा | कठिन बिंदुओं का अभ्यास |
| 194–196 | वार्षिक परीक्षा हेतु मॉडल प्रश्नपत्र हल | मॉडल पेपर हल | मॉडल पेपर अभ्यास |
| 197–198 | वार्षिक आकलन (वार्षिक लिखित परीक्षा) | मूल्यांकन | — |
| 199–200 | परीक्षा उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन एवं त्रुटि विश्लेषण | चर्चा, पृष्ठपोषण | त्रुटियों का सुधार करें |
| अतिरिक्त | परीक्षा परिणाम एवं प्रगति पत्रक निर्माण | अभिलेख अद्यतन | — |
🔹 अप्रैल माह — उपचारात्मक शिक्षा (Remedial Teaching)
| दिन | कार्य / गतिविधि | शिक्षण विधि |
| 1–5 | कमजोर छात्रों की पहचान एवं सम्प्राप्ति स्तर परीक्षण | नैदानिक परीक्षा (Diagnostic Test) |
| 6–10 | उपचारात्मक शिक्षण (संस्कृत उच्चारण, शब्द रूप, व्याकरण) | व्यक्तिगत ध्यान एवं सरल अभ्यास |
| 11–15 | पुनः मूल्यांकन परीक्षा | लघुरूप लिखित एवं मौखिक परीक्षा |
| 16–20 | वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषणा एवं प्रगति पत्रक वितरण | अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) |
| 21–24 | नए शैक्षणिक सत्र 2027-28 की प्रारंभिक तैयारी | कार्ययोजना निर्माण |
📊 सत्र पर्यन्त आकलन सारणी (Assessment Schedule)
| आकलन का प्रकार | प्रस्तावित माह | दिन क्रमांक | पाठ / पाठ्यक्रम |
| मासिक आकलन 1 | जून | 11 | पाठ 1 |
| मासिक आकलन 2 | जुलाई | 37 | पाठ 2, 3 |
| मासिक आकलन 3 | अगस्त | 58 | पाठ 4, 5 |
| मासिक आकलन 4 | सितम्बर | 66 | पाठ 6 |
| त्रैमासिक आकलन | सितम्बर (अंतिम सप्ताह) | 75–76 | पाठ 1 से 6 तक |
| मासिक आकलन 5 | अक्टूबर | 97 | पाठ 7, 8 |
| मासिक आकलन 6 | नवम्बर | 116 | पाठ 9, 10 |
| मासिक आकलन 7 | दिसम्बर | 125 | पाठ 11 |
| अर्धवार्षिक आकलन | दिसम्बर (अंतिम सप्ताह) | 135–136 | पाठ 1 से 11 तक |
| मासिक आकलन 8 | जनवरी | 151 | पाठ 12 |
| मासिक आकलन 9 | फरवरी | 176 | पाठ 13 |
| वार्षिक आकलन | मार्च | 197–198 | पाठ 1 से 13 तक (संपूर्ण पाठ्यक्रम) |
🎯 शिक्षकों के लिए विशेष मार्गदर्शी निर्देश
- 10-स्तरीय सोपान का पालन: प्रत्येक पाठ को पढ़ाते समय अनिवार्य रूप से 10-स्तरीय शिक्षण पद्धतियों (पूर्व ज्ञान से लेकर मूल्यांकन तक) का व्यवस्थित क्रम अपनाएँ।
- बाल-केंद्रित विधियाँ: कक्षा में संस्कृत सम्भाषण, भूमिका निर्वाह (Role Play), श्लोक गायन प्रतियोगिता, अन्त्याक्षरी एवं दृश्य-श्रव्य सामग्री (TLM) का अधिकतम प्रयोग करें।
- व्यावहारिक भाषा प्रयोग: कक्षा में सामान्य निर्देशों (जैसे—उत्तिष्ठतु, उपविशतु, पुस्तिकां उद्घाटयतु, धन्यवादः) हेतु संस्कृत भाषा के छोटे वाक्यों का नियमित प्रयोग करें।
- अभिलेख संधारण: प्रतिदिन की शिक्षण गतिविधियों को शिक्षक डायरी में दर्ज करके साप्ताहिक रूप से संस्था प्रमुख (प्रधानाचार्य) से हस्ताक्षरित कराएँ।
कक्षा 7 संस्कृत (दीपकम्) – कालखंड-वार अध्यापन बिंदु( Teacher Diary Class 7 Sanskrit)
पाठ 1: वन्दे भारतमातरम् (Vande Bharatamataram)
अध्यापन बिंदु
कुल अवधि: 4 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अवधि):
- शिक्षण बिंदु: ‘वन्दे मातरम्’ गीत का परिचय, इसके रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय और ‘आनन्दमठ’ उपन्यास का ऐतिहासिक महत्व।
- छात्र अधिगम: छात्र ‘वन्दे मातरम्’ का शाब्दिक अर्थ (माँ को प्रणाम) और इसके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को समझेंगे।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: भारत का भौगोलिक स्वरूप – प्राचीन तीर्थ स्थल, नगर, हिमालय (पर्वतराज), समुद्र और पवित्र नदियाँ (गंगा, यमुना, आदि)।
- छात्र अधिगम: छात्र मानचित्र पर प्रमुख नदियों और पर्वतों की पहचान करेंगे तथा भारत की विविधता को समझेंगे।
- कालखंड 3 (तृतीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: तिरंगे (राष्ट्रध्वज) के तीन रंगों (केसरिया, श्वेत, हरित) और अशोक चक्र का गहन अर्थ (त्याग, शांति, समृद्धि, गति)।
- छात्र अधिगम: छात्र ध्वज के प्रत्येक रंग के महत्व को अपने शब्दों में समझा सकेंगे और ‘जयतु सैनिक/कृषक/वैज्ञानिक’ की भावना विकसित करेंगे।
- कालखंड 4 (चौथी अवधि):
- शिक्षण बिंदु: देशभक्ति, कर्तव्य बोध और परियोजना कार्य (देशभक्तों के चित्र संकलन, कृषि कार्य का वर्णन)।
- छात्र अधिगम: छात्र अपने प्रदेश के नदी-पर्वतों के नाम संस्कृत में लिखेंगे तथा राष्ट्र-प्रेम का संदेश आत्मसात करेंगे।
पाठ 2: नित्यं पिबामः सुभाषितसुधाम् (Nityam Pibamah Subhashitasudham)
अध्यापन बिंदु
कुल अवधि: 4 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अवधि):
- शिक्षण बिंदु: सुभाषित का अर्थ (श्रेष्ठजनों द्वारा कहे गए सुंदर वचन) और विद्यालय में सुभाषितों का महत्व।
- छात्र अधिगम: छात्र सुभाषित और सामान्य वचनों में अंतर समझेंगे और उन्हें जीवन में उतारने की प्रेरणा लेंगे।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: श्लोक 1 (वस्त्र, वपु, वाक्, विद्या, विनय – पाँच ‘व’कार) और श्लोक 2-3 (षड्दोष – निद्रा, तंद्रा, भय, क्रोध, आलस्य, दीर्घसूत्रता तथा शुद्धि के उपाय)।
- छात्र अधिगम: छात्र 6 दोषों को त्यागने और 5 गुणों को धारण करने का संकल्प लेंगे।
- कालखंड 3 (तृतीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: श्लोक 4-7 (भारत का भौगोलिक वर्णन, जलबिन्दु-न्याय, विद्वानों का आश्रय, मधुर वाणी का प्रभाव)।
- छात्र अधिगम: छात्र निरंतर अभ्यास (जल-बिंदु सिद्धांत) और मधुर भाषण के लाभ को समझेंगे।
- कालखंड 4 (चौथी अवधि):
- शिक्षण बिंदु: श्लोक 8-9 (आलस्य-परिश्रम, परोपकार-परपीडन) तथा तृतीया विभक्ति (करण कारक) का परिचय।
- छात्र अधिगम: छात्र ‘परोपकारः पुण्याय’ का भाव समझेंगे तथा शब्द रूप (छात्रेण, शिक्षकैः) का प्रारंभिक ज्ञान प्राप्त करेंगे।
पाठ 3: मित्राय नमः (Mitraya Namah)
अध्यापन बिंदु
कुल अवधि: 3 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अवधि):
- शिक्षण बिंदु: योगासन और सूर्यनमस्कार का महत्व, तथा पाठ के प्रारंभिक संवाद का अभ्यास।
- छात्र अधिगम: छात्र दैनिक जीवन में योग के महत्व को समझेंगे।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: सूर्यनमस्कार के 12 मंत्रों का उच्चारण (ॐ मित्राय नमः से ॐ भास्कराय नमः तक) और उनके अर्थ।
- छात्र अधिगम: छात्र 12 मंत्रों को सस्वर गा सकेंगे और सूर्य के 12 नामों को याद करेंगे।
- कालखंड 3 (तृतीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: सूर्यनमस्कार के लाभ (आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य, तेज) और चतुर्थी विभक्ति (संप्रदान कारक) का नियम (‘नमः’ के साथ चतुर्थी)।
- छात्र अधिगम: छात्र ‘रामाय नमः’ जैसे वाक्य बना सकेंगे और स्वस्थ शरीर-मन का महत्व समझेंगे।
पाठ 4: न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम् (Na Labhyate Chet Amlam Drakshaphalam)
अध्यापन बिंदु
कुल अवधि: 3 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अवधि):
- शिक्षण बिंदु: लोमड़ी और अंगूर की कहानी का चित्र-परिचय तथा ‘खट्टे अंगूर’ कहावत का अर्थ।
- छात्र अधिगम: छात्र चित्र देखकर कहानी का अनुमान लगाएंगे।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: गीतात्मक कहानी का सस्वर पाठ और अभिनय (भूख-प्यास, प्रयास, असफलता)।
- छात्र अधिगम: छात्र ‘पिपासा’, ‘बुभुक्षा’, ‘उत्पतति’, ‘पलायते’ जैसे शब्दों का प्रयोग करना सीखेंगे।
- कालखंड 3 (तृतीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: असफलता पर निराश न होना तथा आत्मनेपदी धातुओं (लभते, जायते, दृश्यते) का परिचय।
- छात्र अधिगम: छात्र सीखेंगे कि हार मानने की बजाय आत्म-विश्वास बनाए रखें तथा आत्मनेपदी क्रियाओं का ज्ञान प्राप्त करें।
पाठ 5: सेवा हि परमो धर्मः (Seva Hi Paramo Dharmah)
अध्यापन बिंदु
कुल अवधि: 4 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अवधि):
- शिक्षण बिंदु: जीवन में मानवीय गुणों (सत्य, करुणा, सेवा, अक्रोध) का महत्व तथा संवाद-आधारित शुरुआत।
- छात्र अधिगम: छात्र केवल विद्या/धन नहीं, बल्कि गुणों को भी आवश्यक समझेंगे।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: नागार्जुन की कथा – प्रथम युवक (केवल यंत्रवत् कार्य) का परिचय और रसायन निर्माण।
- छात्र अधिगम: छात्र ‘अहोरात्रं’, ‘प्रयोगशाला’, ‘रसायनशास्त्रज्ञः’ शब्दों को समझेंगे।
- कालखंड 3 (तृतीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: द्वितीय युवक (बीमार की सेवा) का उदाहरण तथा नागार्जुन द्वारा सेवाभावी युवक का चयन।
- छात्र अधिगम: छात्र सीखेंगे कि योग्यता से बड़ा सेवा-भावना है; वे करुणा का व्यावहारिक पाठ समझेंगे।
- कालखंड 4 (चौथी अवधि):
- शिक्षण बिंदु: भूतकाल के लिए ‘क्तवतु’ प्रत्यय (पठितवान्, पठितवती) तथा ‘स्म’ अव्यय का प्रयोग (गच्छति स्म)।
- छात्र अधिगम: छात्र भूतकाल में वाक्य बनाने की दोनों विधियों का अभ्यास करेंगे।
पाठ 6: क्रीडाम वयं श्लोकान्त्याक्षरीम् (Kridama Vayam Shlokantyaksharim)
अध्यापन बिंदु
कुल अवधि: 4 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अधि):
- शिक्षण बिंदु: ‘अंत्याक्षरी’ क्रीड़ा के नियम (गण-विभाजन, अंतिम वर्ण से श्लोक बोलना)।
- छात्र अधिगम: छात्र नियमों को समझकर कक्षा में यह क्रीड़ा खेल सकेंगे।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: श्लोक 1-3 (रूप, यौवन, कुल से विद्या श्रेष्ठ; मूर्खों का दुर्व्यसन; सज्जन-दुर्जन का भेद)।
- छात्र अधिगम: छात्र भौतिक सुंदरता और कुलीनता से विद्या को श्रेष्ठ मानेंगे तथा सज्जन-दुर्जन के लक्षण पहचानेंगे।
- कालखंड 3 (तृतीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: श्लोक 4-7 (मनुष्य-रूपी पशु, विद्या का प्रभाव, शनैः-शनैः सिद्धांत)।
- छात्र अधिगम: छात्र ‘शनैः कार्य’ (धैर्य) का महत्व तथा विद्याविहीन जीवन की निरर्थकता समझेंगे।
- कालखंड 4 (चतुर्थी अवधि):
- शिक्षण बिंदु: श्लोक 8-10 (विद्या सौख्य, विद्या सर्वस्य भूषणम्, विद्या चोर-राज-भ्राता से सुरक्षित धन)।
- छात्र अधिगम: छात्र विद्या को सबसे बड़ा धन (सर्वधनप्रधानम्) मानेंगे और ‘विद्या’ शब्द के रूपों का अध्ययन करेंगे।
पाठ 7: ईशावास्यम् इदं सर्वम् (Ishavasyam Idam Sarvam)
अध्यापन बिंदु
कुल अवधि: 4 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अवधि):
- शिक्षण बिंदु: ईश्वर की सर्वव्यापकता (सिर्फ मंदिर में नहीं, बल्कि सर्वत्र) तथा ‘ईशावास्यम्’ का अर्थ।
- छात्र अधिगम: छात्र समझेंगे कि ईश्वर वृक्ष, कक्षा, प्रकृति में व्याप्त है।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: नाटक का परिचय – हिरण्यकशिपु की सभा, उसका अहंकार तथा प्रह्लाद का आगमन।
- छात्र अधिगम: छात्र नाट्य-पठन करेंगे और दैत्यराज के चरित्र का विश्लेषण करेंगे।
- कालखंड 3 (तृतीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: होलिका-प्रसंग, भक्त प्रह्लाद का विश्वास, नृसिंह अवतार (स्तंभ से प्रकट), और हिरण्यकशिपु का वध।
- छात्र अधिगम: छात्र भक्ति, विश्वास और अहंकार-विनाश का संदेश समझेंगे तथा होलिकोत्सव के ऐतिहासिक संदर्भ को जानेंगे।
- कालखंड 4 (चौथी अवधि):
- शिक्षण बिंदु: तृतीया विभक्ति (करण कारक – जैसे ‘खड्गेन’, ‘चमसेन’) और लृट् लकार (भविष्यत् काल – पठिष्यति) का परिचय।
- छात्र अधिगम: छात्र भविष्य काल के वाक्य बनाने का अभ्यास करेंगे।
पाठ 8: हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः (Hitam Manohari Cha Durlabham Vachah)
अध्यापन बिंदु
कुल अवधि: 3 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अवधि):
- शिक्षण बिंदु: सूक्तियों (सुवचनों) का परिचय – ये जीवन में मार्गदर्शन कैसे करती हैं।
- छात्र अधिगम: छात्र सूक्तियों को केवल पढ़ने नहीं, बल्कि आचरण में लाने का संकल्प लेंगे।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: सूक्ति 1-6 (माता भूमि, रत्न-अन्वेषण, शरीर-धर्मसाधन, क्षण-कण नियम, सुख-विद्या विरोध, गुण-पूजा)।
- छात्र अधिगम: छात्र प्रतिक्षण की कीमत, गुणों का आदर, और शरीर को धर्म का साधन समझेंगे।
- कालखंड 3 (तृतीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: सूक्ति 7-10 (दीन वचन न बोलें, क्रियावान ही विद्वान, शील-भूषण, हितकर-मनोहर वचन)।
- छात्र अधिगम: छात्र कर्मशीलता, शील और ऐसी वाणी का अभ्यास करेंगे जो मीठी भी हो और हितकर भी।
पाठ 9: अन्नाद् भवन्ति भूतानि (Annad Bhavanti Bhutani)
अध्यापन बिंदु
कुल अवधि: 3 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अवधि):
- शिक्षण बिंदु: भारतीय ज्ञान-परम्परा तथा पुत्री की जिज्ञासा (सृष्टि की उत्पत्ति)।
- छात्र अधिगम: छात्र प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक दृष्टि को समझेंगे।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: तैत्तिरीय उपनिषद् के अनुसार उत्पत्ति-क्रम: आकाश → वायु → अग्नि → जल → पृथ्वी → ओषधि → अन्न → पुरुष।
- छात्र अधिगम: छात्र इस क्रम को क्रमबद्ध रूप में याद करेंगे और आधुनिक विज्ञान से इसका संबंध जोड़ेंगे।
- कालखंड 3 (तृतीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: पञ्चमी विभक्ति (अपादान कारक – ‘कस्मात्’) का नियम, तथा पद-रचना (उदा: आकाशात् वायुः)।
- छात्र अधिगम: छात्र ‘बालकः वृक्षात् पतति’ जैसे वाक्य बना सकेंगे।
पाठ 10: दशमः कः? (Dashamah Kah?)
अध्यापन बिंदु
कुल अवधि: 3 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अवधि):
- शिक्षण बिंदु: 10 लड़कों की कहानी – स्नान, गिनती और दशम लड़के के लापता होने का भ्रम।
- छात्र अधिगम: छात्र कहानी का सारांश समझेंगे।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: पथिक द्वारा नायक को ही दशम बताना तथा भ्रम का समाधान (‘मैं’ को भी गिनना)।
- छात्र अधिगम: छात्र ‘पूरण शब्द’ (क्रमवाचक संख्याएँ) का प्रयोग करना सीखेंगे – प्रथमः, द्वितीयः, दशमः।
- कालखंड 3 (तृतीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: संख्याएँ (1-20, 100 तक) और उनके पुल्लिंग/स्त्रीलिंग/नपुंसक रूप (एकः, एका, एकम्)।
- छात्र अधिगम: छात्र 1 से 20 तक गिनती और उनके लिंग-भेद को तालिका द्वारा समझेंगे।
पाठ 11: द्वीपेषु रम्यः द्वीपोऽण्डमानः (Dvepeshu Ramyah Dvepo Andamanah)
अध्यापन बिंदु
कुल अधि: 4 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अधि):
- शिक्षण बिंदु: अंडमान द्वीप का भौगोलिक परिचय, राजधानी ‘श्रीविजयपुरम्’ (पोर्ट ब्लेयर) और ऐतिहासिक नाम (हनुमान/अंगदेश)।
- छात्र अधिगम: छात्र मानचित्र में अंडमान की स्थिति देखेंगे।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: ‘सेल्यूलर जेल’ (कालापानी) और स्वातंत्र्यवीर सावरकर का संघर्ष, तथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल।
- छात्र अधिगम: छात्र स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को भावनात्मक रूप से समझेंगे।
- कालखंड 3 (तृतीय अधि):
- शिक्षण बिंदु: यहाँ की जनजातियाँ (अण्डमानी, ओंगी, जारवा), जीविका (मुक्तामाला, नारियल उत्पाद) और पर्यटन स्थल (राधानगर तट, स्वराज द्वीप)।
- छात्र अधिगम: छात्र वहाँ के जीवन-यापन और प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन करेंगे।
- कालखंड 4 (चौथी अवधि):
- शिक्षण बिंदु: प्राकृतिक-सांस्कृतिक विविधता, जलचरों (प्रवाल शैल) का परिचय, तथा ‘अव्यय’ (कुत्र, अत्र) का प्रारंभिक ज्ञान।
- छात्र अधिगम: छात्र अंडमान यात्रा के बारे में संस्कृत में 5-6 वाक्य लिख सकेंगे।
पाठ 12: वीराङ्गना पन्नाधाया (Veerangana Pannadhaya)
अध्यापन बिंदु
कुल अवधि: 4 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अवधि):
- शिक्षण बिंदु: भारतीय वीरांगनाओं का परिचय, पन्नाधाया का ऐतिहासिक संदर्भ (मेवाड़, 16वीं शताब्दी)।
- छात्र अधिगम: छात्र त्याग और वीरता की परिभाषा समझेंगे।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: बनवीर की दुष्टता, विक्रमादित्य की हत्या और उदयसिंह को मारने की साजिश।
- छात्र अधिगम: छात्र षड्यंत्र की कहानी को नाटकीय रूप में समझेंगे।
- कालखंड 3 (तृतीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: पन्नाधाया का अपने पुत्र चंदन को उदयसिंह के बिस्तर पर सुलाना (बलिदान) तथा राज्य की रक्षा।
- छात्र अधिगम: छात्र ‘व्यक्तिहित’ से ‘राष्ट्रहित’ को श्रेष्ठ मानने की भावना विकसित करेंगे।
- कालखंड 4 (चौथी अवधि):
- शिक्षण बिंदु: बलिदान का परिणाम (उदयसिंह का राजा बनना, महाराणा प्रताप का आना) तथा लङ्-लकार (भूतकाल – अपठत्, अलिखत्) का अभ्यास।
- छात्र अधिगम: छात्र नैतिक शिक्षा (आचन्द्रार्कं स्थित रहना) ग्रहण करेंगे तथा भूतकालिक क्रियाओं का प्रयोग करेंगे।
पाठ 13: सिहावाशैलजा (Sihavashailaja) – [महानदी]
अध्यापन बिंदु
कुल अवधि: 3 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अवधि):
- शिक्षण बिंदु: छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदी ‘महानदी’ का परिचय, सिहावा पर्वत से उद्गम, और ‘चित्रोत्पला’ आदि नाम।
- छात्र अधिगम: छात्र स्थानीय भूगोल से जुड़ाव महसूस करेंगे और उद्गम स्थल को पहचानेंगे।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: गंगरेल बांध (रविशंकर जलाशय), सिरपुर (श्रीपुर) का ऐतिहासिक-धार्मिक महत्व (लक्ष्मण मंदिर, बौद्ध विहार)।
- छात्र अधिगम: छात्र नदियों के जल-प्रबंधन और ऐतिहासिक स्थलों (सिरपुर) के बारे में जानेंगे।
- कालखंड 3 (तृतीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: महानदी का मार्ग (चन्द्रपुर, हीराकुंड बांध, बंगाल की खाड़ी) तथा ‘कुत्र’ (कहाँ) अव्यय का प्रयोग।
- छात्र अधिगम: छात्र संस्कृत में प्रश्न ‘कुत्र’ का प्रयोग करके स्थानों का वर्णन करेंगे तथा जल-संरक्षण का संदेश ग्रहण करेंगे।
अतिरिक्तम् अध्ययनम् – वर्णमात्रा-परिचयः (Varna Matra Parichay)
अध्यापन बिंदु
कुल अवधि: 2 कालखंड
- कालखंड 1 (प्रथम अवधि):
- शिक्षण बिंदु: ह्रस्व (1 मात्रा), दीर्घ (2 मात्रा), प्लुत (3 मात्रा) स्वरों का परिचय तथा व्यंजनों की अर्ध-मात्रा।
- छात्र अधिगम: छात्र स्वरों के उच्चारण-काल को समझेंगे।
- कालखंड 2 (द्वितीय अवधि):
- शिक्षण बिंदु: शब्दों की मात्रा गणना (रामः, सीता, हनुमान्) और पशु-पक्षियों की ध्वनियों से मात्रा का संबंध (मयूर – 3 मात्रा, काक – 2 मात्रा)।
- छात्र अधिगम: छात्र संस्कृत शब्दों को मात्राओं में तोड़ सकेंगे, जिससे उनका शुद्ध उच्चारण सुधरेगा।
