पूर्णांक: 40 अंक
समय: 1:30 घंटे
पाठ: 2. नित्यं पिबामः सुभाषितरसम्, 3. मित्राय नमः
📝 खण्ड अ — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (10 अंक)
प्रश्न 1. ‘सुभाषित’ शब्द का क्या अर्थ है? (1 अंक)
(अ) सुंदर वचन (ब) कठोर वचन (स) मधुर गीत (द) दीर्घ कथा
प्रश्न 2. ‘मित्राय नमः’ में ‘नमः’ के योगे का विभक्तिः है? (1 अंक)
(अ) प्रथमा (ब) द्वितीया (स) तृतीया (द) चतुर्थी
प्रश्न 3. पुरुषेण कति दोषाः हातव्याः? (1 अंक)
(अ) पञ्च (ब) षड् (स) सप्त (द) अष्ट
प्रश्न 4. सूर्यनमस्कारः कतीनाम् आसनानां समाहारः अस्ति? (1 अंक)
(अ) दशानाम् (ब) एकादशानाम् (स) द्वादशानाम् (द) त्रयोदशानाम्
प्रश्न 5. ‘विद्या’ शब्द किस लिङ्ग का है? (1 अंक)
(अ) पुल्लिङ्ग (ब) स्त्रीलिङ्ग (स) नपुंसकलिङ्ग (द) उभयलिङ्ग
प्रश्न 6. नरः कतिभिः वकारैः पूजितः भवति? (1 अंक)
(अ) त्रिभिः (ब) चतुर्भिः (स) पञ्चभिः (द) षड्भिः
प्रश्न 7. ‘आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने’ — अत्र किं वर्धते? (1 अंक)
(अ) धनम् (ब) आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजः (स) रोगः (द) आलस्यम्
प्रश्न 8. सूर्यनमस्कारस्य प्रथमः मन्त्रः कः? (1 अंक)
(अ) ॐ रवये नमः (ब) ॐ मित्राय नमः (स) ॐ सूर्याय नमः (द) ॐ भास्कराय नमः
प्रश्न 9. ‘बुद्धिः’ केन शुध्यति? (1 अंक)
(अ) सत्येन (ब) ज्ञानेन (स) विद्यया (द) तपसा
प्रश्न 10. ‘वपुषा’ का अर्थ है? (1 अंक)
(अ) वस्त्र से (ब) वाणी से (स) शरीर से (द) विद्या से
📝 खण्ड आ — अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (10 अंक)
प्रश्न 11. ‘सुभाषितानि’ कानि उच्यन्ते? (2 अंक)
प्रश्न 12. पञ्च वकाराः के? (2 अंक)
प्रश्न 13. षड् दोषाः के? (2 अंक)
प्रश्न 14. ‘नमः’ शब्दस्य योगे का विभक्तिः भवति? उदाहरणं च लिखत। (2 अंक)
प्रश्न 15. सूर्यनमस्कारेण के लाभाः भवन्ति? (2 अंक)
📝 खण्ड इ — लघु उत्तरीय प्रश्न (10 अंक)
प्रश्न 16. ‘जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः’ — अस्य श्लोकस्य भावार्थं हिन्दी में लिखत। (3 अंक)
प्रश्न 17. सूर्यनमस्कारस्य द्वादश आसनानां नामानि मन्त्रैः सह लिखत। (3 अंक)
प्रश्न 18. ‘विद्या’ शब्दस्य रूपाणि प्रथमा विभक्तौ (तीनों वचनेषु) लिखत। (2 अंक)
प्रश्न 19. ‘लभते’ धातोः लट्-लकारस्य रूपाणि लिखत। (2 अंक)
📝 खण्ड ई — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (10 अंक)
प्रश्न 20. ‘नित्यं पिबामः सुभाषितरसम्’ पाठस्य आधारेण कञ्चित् श्लोकं लिखित्वा तस्य भावार्थं हिन्दी में लिखत। (5 अंक)
प्रश्न 21. सूर्यनमस्कारस्य महत्त्वं संस्कृतभाषया पञ्चवाक्येषु लिखत। (5 अंक)
✅ मॉडल उत्तर पत्र
खण्ड अ — वस्तुनिष्ठ प्रश्न
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| 1 | (अ) सुंदर वचन |
| 2 | (द) चतुर्थी |
| 3 | (ब) षड् |
| 4 | (स) द्वादशानाम् |
| 5 | (ब) स्त्रीलिङ्ग |
| 6 | (स) पञ्चभिः |
| 7 | (ब) आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजः |
| 8 | (ब) ॐ मित्राय नमः |
| 9 | (ब) ज्ञानेन |
| 10 | (स) शरीर से |
खण्ड आ — अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 11. सुभाषितानि कानि उच्यन्ते?
उत्तर: श्रेष्ठजनैः उक्तानि मानवानां विविधमूल्यानां विकासाय सुवचनानि एव सुभाषितानि उच्यन्ते।
प्रश्न 12. पञ्च वकाराः के?
उत्तर: वस्त्रम्, वपुः, वाक्, विद्या, विनयः — एते पञ्च वकाराः सन्ति।
प्रश्न 13. षड् दोषाः के?
उत्तर: निद्रा, तन्द्रा, भयम्, क्रोधः, आलस्यम्, दीर्घसूत्रता — एते षड् दोषाः सन्ति।
प्रश्न 14. ‘नमः’ शब्दस्य योगे का विभक्तिः भवति? उदाहरणं च लिखत।
उत्तर: ‘नमः’ शब्दस्य योगे चतुर्थी विभक्तिः भवति। यथा — मित्राय नमः, भास्कराय नमः।
प्रश्न 15. सूर्यनमस्कारेण के लाभाः भवन्ति?
उत्तर: सूर्यनमस्कारेण आयुः, प्रज्ञा, बलं, वीर्यं, तेजः च वर्धते। शरीरं मनः च स्वस्थं भवति।
खण्ड इ — लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. ‘जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः’ — भावार्थः
उत्तर: जैसे जल की बूँदों के निरन्तर गिरने से घड़ा धीरे-धीरे भर जाता है, वैसे ही निरन्तर अभ्यास से मनुष्य सम्पूर्ण विद्या, धर्म और धन प्राप्त करता है।
प्रश्न 17. सूर्यनमस्कारस्य द्वादश आसनानि मन्त्रैः सह
उत्तर:
- प्रणामासन — ॐ मित्राय नमः
- हस्तउत्तानासन — ॐ रवये नमः
- पादहस्तासन — ॐ सूर्याय नमः
- अश्वसंचालनासन — ॐ भानवे नमः
- दण्डासन — ॐ खगाय नमः
- अष्टाङ्गनमस्कारासन — ॐ पूष्णे नमः
- भुजंगासन — ॐ हिरण्यगर्भाय नमः
- पर्वतासन — ॐ मरीचये नमः
- अश्वसंचालनासन — ॐ आदित्याय नमः
- पादहस्तासन — ॐ सवित्रे नमः
- हस्तउत्तानासन — ॐ अर्काय नमः
- प्रणामासन — ॐ भास्कराय नमः
प्रश्न 18. ‘विद्या’ शब्दस्य रूपाणि (प्रथमा विभक्तिः)
उत्तर:
- एकवचनम् — विद्या
- द्विवचनम् — विद्ये
- बहुवचनम् — विद्याः
प्रश्न 19. ‘लभते’ धातोः लट्-लकारस्य रूपाणि
उत्तर:
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | लभते | लभेते | लभन्ते |
| मध्यम | लभसे | लभेथे | लभध्वे |
| उत्तम | लभे | लभावहे | लभामहे |
खण्ड ई — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 20. श्लोकः भावार्थः च
उत्तर:
श्लोक:
वस्त्रेण वपुषा वाचा विद्यया विनयेन च।
वकारैः पञ्चभिर्युक्तो नरो भवति पूजितः॥
भावार्थ: जो मनुष्य उचित वस्त्र, स्वस्थ शरीर, मधुर वाणी, विद्या और विनम्रता — इन पाँच “व” कारों से युक्त होता है, वह संसार में सदा पूजित (सम्मानित) होता है।
प्रश्न 21. सूर्यनमस्कारस्य महत्त्वम्
उत्तर:
सूर्यनमस्कारः द्वादशानाम् आसनानां समाहारः अस्ति। प्रत्येकस्मात् आसनात् पूर्वम् एकः मन्त्रः भवति। सूर्यनमस्कारेण शारीरिकं, मानसिकम्, आध्यात्मिकं च बलं वर्धते। आयुः, प्रज्ञा, बलं, वीर्यं, तेजः च वर्धते। शरीरं स्वस्थं मनः प्रसन्नं च भवति। अतः वयं प्रतिदिनं सूर्यनमस्कारं करवाम।
