छेरछेरा – कक्षा 3 हिंदी Unit 2: हमारे मित्र (Cherchera Class 3 Hindi)
पाठ का सारांश
यह पाठ छत्तीसगढ़ राज्य के लोकपर्व ‘छेरछेरा’ (जिसे ‘छेरछेरा पुन्नी’ भी कहा जाता है) के बारे में है【93†L5-L6】। मालती नाम की बच्ची अपने माता-पिता के साथ गाँव में दादा-दादी से मिलने आती है। वहाँ वह छेरछेरा त्योहार के बारे में जानती है – यह पौष माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है और नई फसल काटने की खुशी में अन्नदान किया जाता है【93†L14】【94†L8】। बच्चों, बूढ़ों और जवानों की टोलियाँ ‘छेरछेरा – माई कोठी के धान ला हेर-हेरा’ गीत गाते हुए घर-घर जाकर धान/अन्न माँगती हैं【94†L10】। दादी मालती को इस त्योहार से जुड़ी एक लोककथा सुनाती हैं – कैसे धरती माता ने क्रोधित होकर अकाल पैदा किया और किसानों को मजदूरों को अन्नदान करने का आदेश दिया【94†L14-L20】। अंत में मालती भी टोली में शामिल होकर घर-घर जाती है और सामूहिक भोज का आनंद लेती है【95†L7-L9】। यह त्योहार ‘मिलजुल कर रहने, मिल-बाँटकर खाने, ऊँच-नीच, जात-पात, धर्म और छोटे-बड़े के भेदभाव मिटाकर एकजुट रहने’ का संदेश देता है【95†L12-L13】।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- छेरछेरा त्योहार की परंपरा, उसके गीतों और महत्व को समझ पाएँगे
- अन्नदान, लोकपर्व, सामूहिक भोज जैसी अवधारणाओं से परिचित हो पाएँगे
- छत्तीसगढ़ की कृषि-संस्कृति और लोकगीतों के बारे में जान पाएँगे
- विराम चिह्नों (पूर्ण विराम, प्रश्नवाचक, अल्पविराम) का सही प्रयोग कर पाएँगे
- विभिन्न वाद्ययंत्रों (दफड़ा, डमरू, गुदम, मोहरी) के नाम जान पाएँगे
- त्योहारों और ऋतुओं के आधार पर अवकाशों का वर्गीकरण कर पाएँगे
- रचनात्मक कला (तोरण/झालर, वाद्ययंत्र, रंगोली) बनाने का कौशल विकसित कर पाएँगे
दिन 1 – पाठ का परिचय एवं वाचन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “त्योहार क्यों मनाए जाते हैं? आपका पसंदीदा त्योहार कौन-सा है?”【95†L18】
- “क्या आपने कभी किसी त्योहार पर टोली बनाकर घर-घर जाकर गाना गाया है?” (जैसे – दीपावली, होली, गणेश चतुर्थी)
- “छत्तीसगढ़ राज्य के बारे में आप क्या जानते हैं?” – मानचित्र पर दिखाएँ (यदि उपलब्ध हो)।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का सस्वर वाचन – शिक्षक पाठ को भावपूर्ण ढंग से पढ़कर सुनाएँ (पृष्ठ 93-95)।
- सामूहिक वाचन – विद्यार्थी बारी-बारी से अनुच्छेद पढ़ें।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- छेरछेरा = छत्तीसगढ़ का अन्नदान का लोकपर्व【93†L5-L6】
- कोठी = अन्नागार / अनाज रखने का भंडार【94†L10】
- पसर = मुट्ठीभर (धान नापने की इकाई)【94†L6】
- सूपा = अनाज साफ करने/छानने का बाँस का बर्तन【95†L5】
- चौपाल = गाँव में सभा/बैठक का स्थान【95†L7】
- दफड़ा, डमरू, गुदम, मोहरी = पारंपरिक वाद्ययंत्र【94†L25】
- पूर्णिमा = पूर्ण चाँद वाला दिन【93†L14】
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “छेरछेरा किस राज्य का त्योहार है?” (छत्तीसगढ़)
- गृहकार्य: ‘छेरछेरा’ गीत की पंक्तियाँ एक बार पढ़ें – “छेरछेरा – माई कोठी के धान ला हेर-हेरा”【94†L10】।
दिन 2 – पाठ की गहन समझ एवं चर्चा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “छेरछेरा किस मौसम/महीने में मनाया जाता है?” (पौष माह की पूर्णिमा)
- विद्यार्थी ‘छेरछेरा’ गीत को मिलकर गाएँ।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 95):
- “त्योहार क्यों मनाए जाते हैं?”【95†L18】 (खुशी, फसल, परंपरा, एकता)
- “‘छेरछेरा’ त्योहार को आप कैसे मनाते हैं?”【95†L19】 (विद्यार्थी अपने अनुभव साझा करें)
- “आप अपने माता और पिता की माता को क्या कहकर पुकारते हैं?”【95†L21】 (नानी/दादी)
- “आप और कौन-कौन से त्योहार टोलियों में घर-घर जाकर मनाते हैं?”【95†L22】 (जैसे – होली, भैया दूज, नवरात्रि में गरबा)
- “कृषि से जुड़े हुए और कौन-कौन से त्योहार हैं?”【96†L6】 (मकर संक्रांति, पोंगल, बैसाखी, नवान्न)
- ‘सोचिए और लिखिए’ (पृष्ठ 96):
- “‘छेरछेरा’ पर्व को अन्नदान का पर्व क्यों कहा जाता है?”【96†L9】 (क्योंकि इस दिन किसान अपनी उपज का दान करते हैं)
- “‘छेरछेरा’ पर्व कब और क्यों मनाया जाता है?”【96†L10】 (पौष पूर्णिमा को, नई फसल काटने की खुशी में)
- “पाठ में आए वाद्ययंत्रों के अलावा आप और कौन-कौन से वाद्ययंत्रों के नाम जानते हैं?”【96†L11】 (ढोलक, हारमोनियम, तबला, बाँसुरी, शहनाई)
- “‘छेरछेरा’ पर्व को और कौन-कौन से नाम से जाना जाता है?”【96†L12】 (छेरछेरा पुन्नी)
- लोककथा का पुनर्कथन (पृष्ठ 94):
- “धरती माता ने अकाल क्यों पैदा किया?” (क्योंकि संपन्न किसान मजदूरों को अन्न नहीं देते थे)
- “अकाल कैसे समाप्त हुआ?” (किसानों ने मजदूरों को अन्नदान किया)
समापन (5 मिनट)
- “इस त्योहार से हमें क्या संदेश मिलता है?”【95†L12-L13】 (मिल-बाँटकर खाना, भेदभाव मिटाना, एकजुट रहना)
- गृहकार्य: अपने किसी पसंदीदा त्योहार के बारे में 4-5 वाक्य लिखिए।
दिन 3 – अभ्यास, भाषा कौशल एवं विराम चिह्न
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (पसंदीदा त्योहार) साझा करें।
- ‘छेरछेरा’ गीत का सामूहिक गायन – “अरन बरन कोदो दरन, जभे देबे तभे टरन”【95†L2-L3】
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- विराम चिह्न अभ्यास (पृष्ठ 96):
- विद्यार्थी बॉक्स में दिए गए विराम चिह्नों (। , ?) का सही प्रयोग करें:
- वाक्य: “गरिमा को फल खाना बहुत पसंद है । वह अपने मित्र गौरव , दीपक , ममता और नवजोत को भी फल खाने की सलाह देती है । क्या आपको भी फल खाना पसंद है ?“
- (शिक्षक बोर्ड पर लिखकर समझाएँ – पूर्ण विराम (।) – वाक्य समाप्त; प्रश्नवाचक (?) – प्रश्न; अल्पविराम (,) – सूची/रुकावट)
- त्योहारों की चर्चा:
- “आपके त्योहारों पर घर में क्या-क्या बनता/सजता है?”
- विद्यार्थी साझा करें – मिठाई, पकवान, नए कपड़े, सफाई, रंगोली, दीपक, तोरण आदि।
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के अभ्यास कार्यों की जाँच।
- गृहकार्य: ‘हमारे अवकाश’ (पृष्ठ 97) – ग्रीष्मकालीन, शरदकालीन, शीतकालीन अवकाश की तालिका भरें (अपने विद्यालय के अनुसार)।
दिन 4 – रचनात्मक गतिविधि, कला एवं विस्तार
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन के गृहकार्य (अवकाश तालिका) की चर्चा।
- प्रश्न: “त्योहारों के दिन घरों को कैसे सजाया जाता है?”【98†L8】
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- तोरण/झालर बनाना (पृष्ठ 96):
- विद्यार्थी फूल, आम के पत्ते, धान की बाली, धागा, रंगीन कागज़ आदि का उपयोग करके तोरण/झालर बनाएँ।
- (शिक्षक पहले स्वयं बनाकर दिखाएँ और फिर बच्चों को प्रोत्साहित करें)
- वाद्ययंत्र बनाना – ‘कबाड़ से जुगाड़’ (पृष्ठ 97):
- सामग्री – पुराना नॉर्दी (बड़ा दीया) या खाली टीन का डब्बा, पुराने समाचार पत्र, गोंद, कैंची, बाँस की दो पतली तीलियाँ।
- विद्यार्थी अपना वाद्ययंत्र (ढोलक/डमरू) बनाएँ।
- रंगोली बनाना (पृष्ठ 98):
- विद्यार्थी अपनी मनपसंद रंगोली की आकृति बनाएँ और रंग भरें।
- चर्चा करें: “त्योहारों पर घर की देहली को गोबर-मिट्टी से क्यों लीपा जाता है?”【98†L8】 (स्वच्छता, शुभता, परंपरा)
- अतिरिक्त पठन – ‘बाल-पर्व’ (फूलदेई) (पृष्ठ 99):
- “छेरछेरा की तरह उत्तराखंड का ‘फूलदेई’ त्योहार भी है, जिसे बालपर्व कहते हैं।”【99†L1-L3】
- बच्चों को पढ़कर सुनाएँ और चर्चा करें – “यह त्योहार कब मनाया जाता है?” (वसंत ऋतु, चैत्र माह की संक्रांति)【99†L4-L5】
- “‘फुलारी’ किसे कहते हैं?” (फूल इकट्ठा करने वाले बच्चों की टोली)【99†L8-L9】
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों की कलाकृतियों (तोरण, वाद्ययंत्र, रंगोली) का प्रदर्शन।
- गृहकार्य: अपने घर को किसी आने वाले त्योहार के लिए सजाने में मदद करें और उसका चित्र बनाकर लाएँ।
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए तोरण/वाद्ययंत्र/रंगोली का प्रदर्शन।
- ‘छेरछेरा’ गीत का सामूहिक गायन (ताली और डमरू/ढोलक की थाप के साथ)।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- छेरछेरा किस राज्य का लोकपर्व है? (छत्तीसगढ़)
- यह किस माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है? (पौष)
- टोलियाँ घर-घर जाकर क्या माँगती हैं? (धान/अन्न)【94†L6】
- धरती माता ने क्या संदेश दिया? (किसान मजदूरों को अन्नदान करें)【94†L18-L20】
- छेरछेरा हमें क्या सिखाता है? (मिल-बाँटकर खाना, भेदभाव मिटाना, एकजुट रहना)【95†L12-L13】
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘छेरछेरा’ त्योहार कब और क्यों मनाया जाता है? (पौष माह की पूर्णिमा को; नई फसल काटने की खुशी और अन्नदान के लिए)
- (ख) लोककथा के अनुसार धरती माता ने अकाल क्यों पैदा किया? (क्योंकि संपन्न किसान मजदूरों को अन्न नहीं देते थे)
- (ग) पाठ में आए किन्हीं दो वाद्ययंत्रों के नाम लिखिए। (दफड़ा, डमरू, गुदम, मोहरी – कोई दो)
- (घ) नीचे दिए गए वाक्य में विराम चिह्न लगाइए:
- “राम श्याम और मोहन बाजार गए वहाँ उन्होंने फल सब्जी और दूध खरीदा क्या आप भी आना चाहेंगे”
- उत्तर: “राम, श्याम और मोहन बाजार गए। वहाँ उन्होंने फल, सब्जी और दूध खरीदा। क्या आप भी आना चाहेंगे?”
- (ङ) ‘छेरछेरा’ त्योहार से आपने क्या सीखा? (कोई भी एक बात – जैसे ‘मिल-बाँटकर खाना’)
- समूह चर्चा (पृष्ठ 96):
- “कृषि से जुड़े हुए और कौन-कौन से त्योहार हैं?”【96†L6】 (मकर संक्रांति, पोंगल, बैसाखी, ओणम, लोहड़ी)
- विद्यार्थी अपने-अपने राज्य/क्षेत्र के कृषि त्योहारों के बारे में बताएँ (बहुभाषिकता/बहुसांस्कृतिकता को बढ़ावा)।
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “छेरछेरा हमें सिखाता है कि हमें अपनी फसल/अन्न दूसरों के साथ बाँटना चाहिए। त्योहार हमें एकजुट करते हैं और हमें अपनी संस्कृति, परंपराओं, लोकगीतों से जोड़ते हैं।”【95†L13】
- अगले पाठ (Unit 3) ‘सुनो भई गप्प’ / ‘रस्साकशी’ का संक्षिप्त परिचय।
शिक्षण सहायक सामग्री
- छत्तीसगढ़ का मानचित्र
- छेरछेरा गीत का चार्ट – “छेरछेरा – माई कोठी के धान ला हेर-हेरा”【94†L10】
- पारंपरिक वाद्ययंत्रों के चित्र – दफड़ा, डमरू, गुदम, मोहरी, ढोलक【94†L25】
- धान/अन्न के नमूने (यदि संभव हो)
- तोरण/झालर बनाने की सामग्री – फूल, आम के पत्ते, धान की बाली, धागा, रंगीन कागज़【96†L18】
- वाद्ययंत्र बनाने की सामग्री – पुराना टीन का डब्बा, समाचार पत्र, गोंद, कैंची, बाँस की तीलियाँ【97†L21】
- रंगोली बनाने के लिए रंग/चाक
- विराम चिह्न कार्ड (। , ?)
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | पाठ का सस्वर एवं सार्थक वाचन | अवलोकन/मौखिक प्रस्तुति |
| 2 | छेरछेरा त्योहार (तिथि, कारण, लोककथा, संदेश) की समझ | मौखिक/लिखित प्रश्न |
| 3 | विराम चिह्नों (। , ?) का सही प्रयोग | लिखित अभ्यास |
| 4 | वाद्ययंत्रों एवं कृषि त्योहारों की पहचान | मौखिक/लिखित |
| 5 | रचनात्मक कला (तोरण, वाद्ययंत्र, रंगोली) | गतिविधि/कला कार्य |
| 6 | त्योहारों, अवकाशों एवं ऋतुओं का संबंध | तालिका पूर्ति |
नोट: बहुभाषिकता एवं बहुसांस्कृतिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनके राज्य/क्षेत्र में फसल/अन्न से जुड़े कौन-से त्योहार मनाए जाते हैं और उन्हें क्या कहते हैं। छेरछेरा के गीतों को गाकर और वाद्ययंत्र बनाकर सीखने की प्रक्रिया को आनंदमय बनाएँ। विद्यार्थियों को सामूहिकता, दान, और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान विकसित करने हेतु प्रोत्साहित करें।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
