1. ऊतक क्या है? ऊतक (Tissue): कोशिकाओं का वह समूह, जो एक विशेष कार्य करने के लिए एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित होता है, ऊतक कहलाता है। इसमें कोशिकाएँ एवं उनके आस-पास का तरल (कोशिकांतर पदार्थ) दोनों सम्मिलित होते हैं।
ऊतक में एक या एक से अधिक प्रकार की कोशिकाएँ हो सकती हैं। समान कोशिकाएँ विभाजन एवं विभेदन द्वारा भिन्न-भिन्न ऊतकों का निर्माण करती हैं। बहुकोशकीय जीवों में श्रम विभाजन (Division of Labour) होता है — कोशिकाएँ → ऊतक → अंग → अंग तंत्र। 2. ऊतक की खोज का ऐतिहासिक संदर्भ वैज्ञानिक योगदान मैरी फ्रांस्वा जेवियर बिचाट (1799) मानव शरीर के ऊतकों का वर्णन किया; ‘ऊतक’ नाम दिया। तीन वर्ग: रेशेदार, जलीय, श्लेष्मल। नेहेमायाह ग्रू (1641–1712) पौधों में ‘पैरेन्काइमा’ शब्द का प्रयोग किया। कार्ल वॉन नागेली विभज्योतक (Meristem) एवं जाइलम, फ्लोएम की संकल्पना दी। श्लाइडेन एवं श्वान ऊतकों की तुलनात्मक अध्ययन; कोशिका सिद्धांत का आधार।
3. पादप ऊतकों का वर्गीकरण पादप ऊतकों को मुख्यतः विभाजन एवं विभेदन के आधार पर बाँटा जाता है:
3.1 विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) तेज़ी से विभाजित होने वाली कोशिकाएँ।कोशिकाएँ छोटी, केंद्रक बड़ा, कोशिकाद्रव्य कम, भित्ति पतली। स्थिति के आधार पर: शीर्षस्थ विभज्योतक: जड़ एवं तने के शीर्ष पर → लंबाई में वृद्धि।पार्श्व विभज्योतक: तने के किनारे → मोटाई में वृद्धि।अंतरापर्व विभज्योतक: गाँठ के बीच → शाखाओं की वृद्धि।3.2 स्थायी ऊतक (Permanent Tissue) जिन कोशिकाओं ने विभाजन की क्षमता खो दी है या धीमी कर दी है। संगठन के आधार पर: (अ) सरल स्थायी ऊतक ऊतक विशेषता कार्य पैरेन्काइमा पतली भित्ति, जीवित, कोशिकांतर स्थान प्रकाश संश्लेषण, भंडारण कॉलेन्काइमा कोनों पर मोटी भित्ति, जीवित लचीलापन एवं सहारा स्क्लेरेन्काइमा मोटी, लिग्निनयुक्त भित्ति, मृत कठोरता एवं सहारा (नारियल रेशा, बीज कवच)
(ब) जटिल स्थायी ऊतक ऊतक घटक कार्य जाइलम वाहिका, ट्रेकिड, जाइलम पैरेन्काइमा जल एवं खनिजों का संवहन (जड़ से पत्ती तक) फ्लोएम चालनी नलिका, साथी कोशिका, फ्लोएम पैरेन्काइमा भोजन का संवहन (पत्ती से अन्य भागों तक)
ध्यान दें: स्थायी ऊतकों में पैरेन्काइमा एवं कॉलेन्काइमा विभाजन कर सकते हैं, अतः यह वर्गीकरण पूर्ण नहीं है।
4. प्राणी ऊतकों का वर्गीकरण कार्य के आधार पर प्राणी ऊतक मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं:
4.1 उपकला ऊतक (Epithelial Tissue) शरीर की बाहरी एवं आंतरिक सतह का आवरण। कोशिकाएँ समतल, कसकर जुड़ी, कोशिकांतर स्थान नगण्य। कार्य: सुरक्षा, अवशोषण, स्राव, संवेदन ग्रहण। उदाहरण: त्वचा, मुँह की आंतरिक परत, फेफड़ों की परत। 4.2 संयोजी ऊतक (Connective Tissue) विभिन्न ऊतकों को जोड़ता एवं सहारा देता है। कोशिकाएँ बिखरी हुई, मैट्रिक्स अधिक। प्रकार विशेषता एरिओलर त्वचा के नीचे, अंगों के बीच वसा ऊतक (Adipose) ऊर्जा भंडारण, तापावरण अस्थि (Bone) कठोर, शरीर का ढाँचा उपास्थि (Cartilage) लचीला, जोड़ों में रक्त (Blood) तरल संयोजी ऊतक, परिवहन लसीका (Lymph) तरल, प्रतिरक्षा में सहायक
4.3 पेशी ऊतक (Muscular Tissue) संकुचन एवं शिथिलन द्वारा गति।तीन प्रकार: प्रकार स्थान नियंत्रण रेखित (Striated) हाथ, पैर, कंकाल पेशी ऐच्छिक (Voluntary) अरेखित (Unstriated) आहार नाल, रक्त वाहिका अनैच्छिक (Involuntary) हृदय पेशी (Cardiac) हृदय अनैच्छिक, आजीवन
4.4 तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue) न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) से बना।उद्दीपन ग्रहण करना एवं प्रतिक्रिया संचारित करना। मस्तिष्क, मेरुरज्जु, तंत्रिकाओं में पाया जाता है। 5. ऊतकों के कार्य संरचनात्मक सहारा: अस्थि, उपास्थि, स्क्लेरेन्काइमा।संवहन: जाइलम (जल), फ्लोएम (भोजन), रक्त (O₂, CO₂, पोषक)।गति: पेशी ऊतक।नियंत्रण एवं समन्वय: तंत्रिका ऊतक।सुरक्षा: उपकला ऊतक, त्वचा।भंडारण: पैरेन्काइमा, वसा ऊतक।वृद्धि एवं मरम्मत: विभज्योतक, स्टेम कोशिकाएँ।6. संरचना एवं कार्य का संबंध जल से स्थल पर आने पर पौधों में: जड़ों में शाखन → अधिक जल अवशोषण। लंबी नलिकाएँ → दूर तक संवहन। रंध्र → वाष्पोत्सर्जन नियंत्रण। प्राणियों में: फेफड़ों की आंतरिक परत मुड़ी हुई → अधिक गैस विनिमय। हृदय पेशी → निरंतर कार्य। 7. महत्वपूर्ण गतिविधियाँ तने के अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्ध्य काट का अवलोकन — जाइलम/फ्लोएम की पहचान।मूँग/चने के अंकुरण में जड़ की वृद्धि — शीर्षस्थ विभज्योतक।पत्ती की झिल्ली (Rheo) — उपकला ऊतक एवं रंध्र।केले का गूदा — पैरेन्काइमा।अमरूद का ऊतक — स्क्लेरेन्काइमा।मुँह की आंतरिक परत — उपकला ऊतक।हृदय पेशी की स्थायी स्लाइड — पेशी ऊतक।