सेवा हि परमो धर्मः कक्षा 7 संस्कृत पाठ 5
इस पाठ का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को सेवा, परोपकार और कर्तव्यनिष्ठा का महत्व सिखाना है। पाठ में महान रसायनशास्त्रज्ञ और चिकित्सक नागार्जुन की कथा के माध्यम से बताया गया है कि विद्या और धन से बढ़कर सेवा भावना है। जिसमें सेवा का भाव नहीं, वह चिकित्सक भी सच्चा चिकित्सक नहीं हो सकता। साथ ही यह पाठ क्तवतु प्रत्यय (भूतकाल) का भी परिचय कराता है।
📖 पाठ का सारांश
नागार्जुन एक प्रसिद्ध रसायनशास्त्रज्ञ और चिकित्सक थे। वे दिन-रात अपनी प्रयोगशाला में काम करते थे। एक दिन उन्होंने महाराज से कहा — “महाराज! मेरे चिकित्सा कार्य के लिए एक सहायक की आवश्यकता है।” राजा ने स्वीकार किया और कहा — “कल कुछ योग्य युवक आएंगे। आप परीक्षा लेकर उनमें से किसी योग्य को चुन लें।”
अगले दिन दो युवक आए। नागार्जुन ने दोनों से उनकी विद्या के बारे में पूछा। दोनों की विद्या समान थी। तब नागार्जुन ने उन्हें एक विशिष्ट रसायन बनाकर लाने को कहा और दो दिन का समय दिया। साथ ही कहा — “जाते समय राजमार्ग से जाना।”
दो दिन बाद पहला युवक आया। नागार्जुन ने पूछा — “औषधि बनाने में कोई कष्ट तो नहीं हुआ?” युवक ने अपनी निष्ठा दिखाने के लिए अपने घर की समस्याएँ बताईं — “पिता को पेट दर्द, माता को बुखार था। फिर भी मैंने वह सब छोड़कर औषधि बनाई।” और उसने नागार्जुन को रसायन दे दिया।
इसके बाद दूसरा युवक भी आया। वह दुःखी था। नागार्जुन ने पूछा तो उसने कहा — “मैं औषधि नहीं बना सका।” नागार्जुन ने पूछा — “क्यों नहीं बना सका?” युवक ने कहा — “राजमार्ग में मैंने एक रोगी को देखा। उसकी हालत दयनीय थी। मैं उसे अपने घर ले गया। दो दिन उसकी सेवा में लगा रहा। आज सुबह वह स्वस्थ हो गया। वह स्वयं यहाँ आ गया। इसलिए मैं रसायन बनाने का समय ही नहीं पा सका।”
तब नागार्जुन ने दूसरे युवक को सहायक के रूप में स्वीकार किया। राजा ने यह सुनकर आश्चर्य प्रकट किया और पूछा — “पहला युवक औषधि बनाकर लाया, दूसरे ने नहीं बनाई। फिर भी आपने दूसरे को क्यों चुना?”
नागार्जुन ने कहा — “दूसरा भी औषधि बनाने में कुशल है, लेकिन उसे समय नहीं मिला क्योंकि वह सेवा में लीन था। मैंने उस रोगी को पहले राजमार्ग पर देखा था। इसलिए मैंने कहा था — ‘राजमार्ग से जाना।’ पहले युवक ने रोगी को देखकर भी नहीं देखा। दूसरे ने सेवा भाव से उसकी सेवा की। सेवा भावना के बिना चिकित्सक कैसे हो सकता है? इसलिए मैंने दूसरे युवक को चुना।”
शिक्षा: विद्या और धन से बढ़कर सेवा भावना है। सच्चा चिकित्सक वही है जो रोगी की सेवा करे। सेवा ही परम धर्म है।
📝 शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सेवा | सेवा |
| परमः | सर्वश्रेष्ठ |
| धर्मः | धर्म |
| उपाधिम् | उपाधि |
| पदवीम् | पदवी |
| मानवीयाः | मानवोचित |
| रसायनशास्त्रज्ञः | रसायन शास्त्र का विशेषज्ञ |
| चिकित्सकः | वैद्य |
| प्रयोगशालायाम् | प्रयोगशाला में |
| अङ्गीकृतवान् | स्वीकार किया |
| व्यवस्थाम् | व्यवस्था |
| अन्यस्मिन् दिने | अगले दिन |
| राजमार्गः | राजमार्ग |
| खिन्नः | दुःखी |
| शक्तवान् | कर सका |
| रोगिणम् | रोगी को |
| शोचनीया | दुःखदायी |
| निरतः | लीन |
| वृत्तान्तम् | प्रसंग |
| चितवान् | चुना |
| यन्त्रवत् | यंत्र की भाँति |
| कषायम् | काढ़ा |
| सेवा | सेवा |
| भावना | भावना |
| चिकित्सकः | डॉक्टर |
| रोगी | रोगी |
| औषधम् | दवा |
| निर्माणम् | निर्माण |
| सहायकः | सहायक |
| परीक्षा | परीक्षा |
| योग्यः | योग्य |
| विद्याभ्यासः | विद्या का अभ्यास |
| रसायनम् | रसायन |
| दिनद्वयम् | दो दिन |
| अवसरम् | अवसर |
| सूचितवान् | सूचित किया |
| गमनसमये | जाने के समय |
| राजमागेण | राजमार्ग से |
| औषधनिर्माणे | दवा बनाने में |
| कष्टम् | कष्ट |
| स्वनिष्ठाम् | अपनी निष्ठा |
| दर्शयितुम् | दिखाने के लिए |
| समस्याः | समस्याएँ |
| उदरवेदना | पेट दर्द |
| ज्वरः | बुखार |
| परित्यज्य | त्यागकर |
| दृष्ट्वा | देखकर |
| स्वगृहम् | अपने घर |
| नीतवान् | ले गया |
| सेवायाम् | सेवा में |
| स्वस्थः | स्वस्थ |
| सहायकत्वेन | सहायक के रूप में |
| आश्चर्यम् | आश्चर्य |
| प्रकटितवान् | प्रकट किया |
| चितवान् | चुना |
📝 व्याकरण: क्तवतु प्रत्यय (भूतकाल)
क्तवतु प्रत्यय का प्रयोग भूतकाल के अर्थ में होता है।
नियम: धातु + क्तवतु = भूतकालवाचक पद
पुल्लिङ्ग:
- पठ् + क्तवतु = पठितवान् (एकवचन), पठितवन्तौ (द्विवचन), पठितवन्तः (बहुवचन)
स्त्रीलिङ्ग:
- पठ् + क्तवतु = पठितवती (एकवचन), पठितवत्यौ (द्विवचन), पठितवत्यः (बहुवचन)
उदाहरण:
- सः पठितवान्। (वह पढ़ चुका)
- सा पठितवती। (वह पढ़ चुकी)
- छात्राः पठितवन्तः। (छात्र पढ़ चुके)
- बालिकाः पठितवत्यः। (बालिकाएँ पढ़ चुकी)
📝 पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्नोत्तर
1. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन पदद्वयेन वा उत्तराणि लिखन्तु
(क) कः प्रसिद्धः चिकित्सकः आसीत्?
उत्तर: नागार्जुनः
(ख) अन्यस्मिन् दिवसे कौ आगतौ?
उत्तर: द्वौ युवकौ
(ग) कः खिन्नः आसीत्?
उत्तर: द्वितीयः युवकः
(घ) रुग्णस्य परिस्थितिः कथम् आसीत्?
उत्तर: शोचनीया
(ङ) नागार्जुनः सहायकरूपेण कं चितवान्?
उत्तर: द्वितीयम् युवकम्
(च) कां विना चिकित्सकः न भवति?
उत्तर: सेवाभावनाम्
(छ) नागार्जुनः युवकौ केन मार्गेण गन्तुं सूचितवान्?
उत्तर: राजमार्गेण
2. अधोलिखितानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु
(क) अहोरात्रं नागार्जुनः कुत्र कार्य करोति स्म?
उत्तर: अहोरात्रं नागार्जुनः प्रयोगशालायां कार्य करोति स्म।
(ख) नागार्जुनः महाराजं किं निवेदितवान्?
उत्तर: नागार्जुनः महाराजं निवेदितवान् — “महाराज! मम चिकित्साकार्याय एकः सहायकः आवश्यकः” इति।
(ग) प्रथमः युवकः कथं कार्य कृतवान्?
उत्तर: प्रथमः युवकः स्वनिष्ठां दर्शयितुं स्वगृहस्य समस्याः वर्णितवान् — “पितुः उदरवेदना, मातुः ज्वरः च आसीत्। तथापि अहं तत्सर्वं परित्यज्य औषधं निर्मितवान्” इति।
(घ) द्वितीयः युवकः राजमार्गे रोगिणं दृष्ट्वा किं कृतवान्?
उत्तर: द्वितीयः युवकः राजमार्गे रोगिणं दृष्ट्वा तं स्वगृहं नीतवान्। दिनद्वयं तस्य सेवायां निरतः आसीत्। तेन तस्य औषधनिर्माणाय समयः एव न प्राप्तः।
(ङ) सेवायाः भावनां विना किं न भवेत्?
उत्तर: सेवायाः भावनां विना चिकित्सकः न भवेत्।
3. उदाहरणानुसारम् अधोलिखितानां पदानां स्त्रीलिङ्गरूपाणि लिखन्तु
(क) पठितवान् — पठितवती — पठितवत्यः
(ख) गतवान् — गतवती — गतवत्यः
(ग) लिखितवान् — लिखितवती — लिखितवत्यः
(घ) खादितवान् — खादितवती — खादितवत्यः
(ङ) क्रीडितवान् — क्रीडितवती — क्रीडितवत्यः
(च) हसितवान् — हसितवती — हसितवत्यः
(छ) निवेदितवान् — निवेदितवती — निवेदितवत्यः
(ज) सूचितवान् — सूचितवती — सूचितवत्यः
4. उदाहरणानुसारम् अधोलिखितानां पदानां पुल्लिङ्गरूपाणि लिखन्तु
(क) पठितवती — पठितवान् — पठितवन्तः
(ख) कृतवती — कृतवान् — कृतवन्तः
(ग) दृष्टवती — दृष्टवान् — दृष्टवन्तः
(घ) दत्तवती — दत्तवान् — दत्तवन्तः
(ङ) प्रक्षालितवती — प्रक्षालितवान् — प्रक्षालितवन्तः
(च) धावितवती — धावितवान् — धावितवन्तः
5. उदाहरणानुसारं वाक्यानि परिवर्तयन्तु
यथा — पिता कषायं पिबति। अहं पुस्तकं नयामि।
(क) युवकः आपणं गच्छति। — युवकः आपणं गतवान्।
(ख) सः रोटिकां खादित। — सः रोटिकां खादितवान्।
(ग) महिला वस्त्रं ददाति। — महिला वस्त्रं दत्तवती।
(घ) बालकः दोलिकातः पतित। — बालकः दोलिकातः पतितवान्।
(ङ) पितामही चलचित्रं पश्यति। — पितामही चलचित्रं दृष्टवती।
(च) अहं गृहपाठं लिखामि। — अहं गृहपाठं लिखितवान्।
(छ) त्वं कुत्र गच्छसि? — त्वं कुत्र गतवान्?
(ज) अश्वाः वने धावन्ति। — अश्वाः वने धावितवन्तः।
(झ) बालिकाः शीतम् आगच्छन्ति। — बालिकाः शीतम् आगतवत्यः।
(ञ) वयं समुद्रतीरं पयोहिमं खादामः। — वयं समुद्रतीरं पयोहिमं खादितवन्तः।
6. अनुच्छेदे कोष्ठकेषु केचन धातवः दत्ताः सन्ति। उपरि दत्तम् अवधेयांशं पठित्वा ‘स्म’ इति अव्ययपदम् उपयुज्य अनुच्छेदं पुनः लिखन्तु।
मूल अनुच्छेद:
कृषकः प्रतिदिनं कृषिक्षेत्रं (गच्छ्)। जलसैचनं (कृ)। कीटानां निवारणार्थं जैवौषधं (स्थापय्)। सः कृषिकार्यं सम्यक् (ज्ञा)। अतः अन्ये कृषकाः संशयेन (पृच्छ्)। सः स्वाभिमानेन (जीव्)। अतः ‘अहं कृषकः भूमिपुत्रः’ इति साभिमानं (वद्)। सः क्षेत्रे गोमयं (योजय्), न तु कृतकान् पदार्थान्। अतः त्रीहेः गुणवत्ता अधिका (भव्)। जनाः जालपुटमाध्यमेन तस्य तण्डुलं (क्रीण्)। एवं तस्य परिवारस्य सर्वे जनाः कृषिकार्येण ससुखं (जीव्)। सः सर्वान् (वद्) “कृषकः न दीनः न च दरिद्रः, परं सर्वेषां पोषकः” इति।
उत्तर (स्म प्रयोग सहित):
कृषकः प्रतिदिनं कृषिक्षेत्रं गच्छति स्म। जलसैचनं करोति स्म। कीटानां निवारणार्थं जैवौषधं स्थापयति स्म। सः कृषिकार्यं सम्यक् जानाति स्म। अतः अन्ये कृषकाः संशयेन पृच्छन्ति स्म। सः स्वाभिमानेन जीवति स्म। अतः ‘अहं कृषकः भूमिपुत्रः’ इति साभिमानं वदति स्म। सः क्षेत्रे गोमयं योजयति स्म, न तु कृतकान् पदार्थान्। अतः त्रीहेः गुणवत्ता अधिका भवति स्म। जनाः जालपुटमाध्यमेन तस्य तण्डुलं क्रीणन्ति स्म। एवं तस्य परिवारस्य सर्वे जनाः कृषिकार्येण ससुखं जीवन्ति स्म। सः सर्वान् अवदत् “कृषकः न दीनः न च दरिद्रः, परं सर्वेषां पोषकः” इति।
🎯 अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न
नागार्जुन कौन थे?
प्रसिद्ध रसायनशास्त्रज्ञ और चिकित्सक
नागार्जुन को क्या आवश्यकता थी?
चिकित्सा कार्य के लिए एक सहायक की
राजा ने क्या कहा?
“कल कुछ योग्य युवक आएंगे। आप परीक्षा लेकर किसी योग्य को चुन लें।”
दोनों युवकों को क्या कार्य दिया गया?
एक विशिष्ट रसायन बनाकर लाने का
कितने दिन का समय दिया गया?
दो दिन
नागार्जुन ने कौन सा मार्ग सूचित किया?
राजमार्ग
पहले युवक ने क्या किया?
औषधि बनाकर लाया, लेकिन रोगी को नहीं देखा
दूसरे युवक ने क्या किया?
रोगी की सेवा की, औषधि नहीं बना सका
नागार्जुन ने किसे चुना?
दूसरे युवक को
क्यों?
क्योंकि उसमें सेवा भावना थी
सेवा भावना के बिना कौन नहीं हो सकता?
चिकित्सक
इस पाठ की शिक्षा क्या है?
सेवा ही परम धर्म है। विद्या और धन से बढ़कर सेवा भावना है।
क्तवतु प्रत्यय का प्रयोग किस काल में होता है?
भूतकाल में
‘पठितवान्’ का अर्थ क्या है?
पढ़ चुका
‘पठितवती’ का अर्थ क्या है?
पढ़ चुकी
‘स्म’ अव्यय का प्रयोग किस काल में होता है?
भूतकाल में
‘गच्छति स्म’ का अर्थ क्या है?
जाता था
‘अपठत्’ का अर्थ क्या है?
पढ़ा
