कक्षा 7 संस्कृत — त्रैमासिक आकलन (सत्र 2026-27)
📝 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (प्रश्न 01–06) — 12 अंक
निर्देश: कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से उपयुक्त शब्द चुनकर रिक्त स्थान भरिए।
शब्द-बैंक: (प्रयत्नं, नदी, भस्मान, वीरा, ललाटे, भारतमातु)
प्रश्न 01 – समुद्रः भारतमातुः चरणौ प्रक्षालयति।
(नोट: शब्द-बैंक में ‘भारतमातु’ है, परन्तु व्याकरणानुसार षष्ठी विभक्ति में ‘भारतमातुः’ होगा।)
प्रश्न 02 – जनाः तीर्थक्षेत्राणां धूलिं ललाटे स्थापयन्ति।
प्रश्न 03 – वीराः भारतमातुः सर्वदा सेवां कृतवन्तः।
(शब्द-बैंक में ‘वीरा’ है, परन्तु बहुवचन में ‘वीराः’ होगा।)
प्रश्न 04 – जयतु कृषकः इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति।
(नोट: शब्द-बैंक में ‘अस्मान्’ नहीं है, यह पाठ के आधार पर सही उत्तर है।)
प्रश्न 05 – नदी कष्टानि सहमाना प्रवहति।
प्रश्न 06 – वयं गौरववर्धनार्थं प्रबल प्रयत्नं कुर्मः।
(नोट: शब्द-बैंक में ‘प्रयत्नं’ है, परन्तु वाक्य में ‘प्रबल’ शब्द अधिक उपयुक्त है।)
📝 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 07–11) — 20 अंक
प्रश्न 07 – पूजितः, जन्तवः, नलिनीदलम्, हिमाद्रेः का अर्थ हिन्दी में लिखिए। (4 अंक)
| शब्द | हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| पूजितः | पूजा किया हुआ / सम्मानित |
| जन्तवः | प्राणी / जीव-जन्तु |
| नलिनीदलम् | कमल का पत्ता |
| हिमाद्रेः | हिमालय के |
प्रश्न 08 – निम्न पदों का सन्धि विच्छेद कीजिए। (4 अंक)
(अ) अ + अस्ति = आस्ति
सन्धि प्रकार: सवर्णदीर्घ सन्धि (अ + अ = आ)
(ब) मानव + उपकारी = मानवोपकारी
सन्धि प्रकार: गुण सन्धि (अ + उ = ओ)
प्रश्न 09 – ‘कृत्वा’ में कौन सी धातु है? (4 अंक)
उत्तर: ‘कृत्वा’ में कृ धातु है।
(कृत्वा ‘कृ’ धातु का क्त्वा प्रत्ययान्त रूप है, जिसका अर्थ है ‘करके’)
प्रश्न 10 – सूर्य नमस्कारेण किं वर्धते? (4 अंक)
उत्तर: सूर्यनमस्कारेण आयुः, प्रज्ञा, बलं, वीर्यं तेजः च वर्धते।
(सूर्य नमस्कार से आयु, बुद्धि, बल, वीर्य और तेज बढ़ते हैं।)
प्रश्न 11 – ‘गच्छति’ में कौन सा लकार है? (4 अंक)
उत्तर: ‘गच्छति’ में लट् लकार (वर्तमान काल) है।
(यह ‘गम्’ धातु का वर्तमानकालीन प्रथम पुरुष एकवचन रूप है।)
📝 लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 12–14) — 18 अंक
प्रश्न 12 – पवित्राः नद्यः काः? (6 अंक)
उत्तर:
पवित्राः नद्यः एताः सन्ति —
गङ्गा, यमुना, सरस्वती, सिन्धुः, ब्रह्मपुत्रः, गण्डकी, महानदी, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी इत्यादयः।
(ये सभी नदियाँ भारतभूमौ प्रवहन्ति और पवित्र मानी जाती हैं।)
प्रश्न 13 – धर्मचक्रं कं भावं बोधयति? (6 अंक)
उत्तर:
धर्मचक्रं (अशोक चक्र) चलनीयं कर्तव्यपथे वै, न विरम्, सततं चल इति भावं बोधयति।
अर्थात् — जीवन में कर्तव्य पथ पर निरन्तर चलते रहना चाहिए, कभी रुकना नहीं चाहिए।
सूर्यः विरामं विना नित्यं सञ्चरति, नदी कष्टानि सहमाना अपि ध्येयं प्रति नित्यं प्रवहति।
इदं चक्रं ‘जीवने श्रान्तेः, आलस्यस्य प्रमादस्य च स्थानं न भवतु’ इति सन्देशं प्रयच्छति।
प्रश्न 14 – नरः कथं पूजितः भवति? (6 अंक)
उत्तर:
नरः पञ्चभिः वकारैः युक्तः सन् पूजितः भवति —
- वस्त्रेण (उचित वस्त्र)
- वपुषा (स्वस्थ शरीर)
- वाचा (मधुर वाणी)
- विद्यया (विद्या)
- विनयेन (विनम्रता)
यः जनः समुचितानि वस्त्राणि धरति, शरीरेण स्वस्थः अस्ति, सदा मधुरं हितकरं च वचनं वदति, सर्वदा अध्ययने संलग्नः भवति, तथा च विनम्रतया व्यवहरति — तादृशः पञ्चभिः वकारैः युक्तः मनुष्यः लोके सम्मानं प्राप्नोति।
📝 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 15–17) — 30 अंक
प्रश्न 15 – निम्नलिखित का हिन्दी में अनुवाद कीजिए। (10 अंक)
विकल्प (क):
भारतमातुः हस्ते विलसति त्रिवर्णयुतः राष्ट्रध्वजः। अहो अस्य शोभा! अस्मिन् राष्ट्रध्वजे केशरः, श्वेतः, हरितः च वर्णाः विराजन्ते। ध्वजस्य मध्ये सुन्दरं नीलवर्णं चक्रमपि शोभते। ध्वजे विराजमानाः वर्णाः चक्रं च विशिष्टं सन्देशं प्रयच्छन्ति।
हिन्दी अनुवाद:
भारतमाता के हाथ में तिरंगा राष्ट्रध्वज सुशोभित होता है। अहो! इसकी शोभा! इस राष्ट्रध्वज में केसरिया, सफेद और हरा रंग विराजमान हैं। ध्वज के मध्य में सुन्दर नीले रंग का चक्र भी सुशोभित है। ध्वज में विराजमान रंग और चक्र विशिष्ट संदेश देते हैं।
विकल्प (ख):
जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः। स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च॥
हिन्दी अनुवाद:
जल की बूँदों के गिरने से घड़ा धीरे-धीरे भर जाता है। वही (निरन्तर अभ्यास) सम्पूर्ण विद्याओं, धर्म और धन का कारण है।
प्रश्न 16 – ‘सुभाषितरसम्’ से कोई दो श्लोक लिखिए जो इस प्रश्न पत्र में न आया हो। (10 अंक)
श्लोक 1:
वस्त्रेण वपुषा वाचा विद्यया विनयेन च।
वकारैः पञ्चभिर्युक्तो नरो भवति पूजितः॥
श्लोक 2:
जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः।
स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च॥
विकल्प (ख): ‘न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम्’ पाठ का हिन्दी में सारांश लिखिए।
सारांश:
एक बार एक भूखा-प्यासा शृगाल (लोमड़ी) भोजन की खोज में वन में घूम रहा था। बहुत भटकने पर भी उसे कुछ नहीं मिला, वह थक गया और निराश हो गया। तभी उसने एक द्राक्षालता (अंगूर की बेल) देखी, जिस पर ऊँचाई पर मीठे-मीठे अंगूर लटक रहे थे।
अंगूरों को देखकर शृगाल के मुँह में पानी आ गया। वह बार-बार उछल-उछल कर अंगूरों को पकड़ने का प्रयास करने लगा — एक बार, दो बार, तीन बार, बार-बार। लेकिन अंगूर बहुत ऊँचे थे, वह उन्हें प्राप्त न कर सका। उछलने से उसे पसीना आ गया और श्रम हो गया।
अन्त में, जब वह अंगूर प्राप्त न कर सका, तो वह कहने लगा — “ये अंगूर तो खट्टे हैं!” और वह वहाँ से भाग गया।
शिक्षा: यह कथा बताती है कि जब हमें कोई वस्तु प्राप्त नहीं होती, तो हम उसे बुरा कहकर अपनी असफलता को छिपाने का प्रयास करते हैं। यह मनोवृत्ति “अंगूर खट्टे हैं” कहलाती है। हमें परिश्रम करना चाहिए और असफल होने पर भी सत्य को स्वीकार करना चाहिए।
प्रश्न 17 – निम्नलिखित संस्कृत शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए। (10 अंक)
| शब्द | वाक्य प्रयोग | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| अग्नि | अग्निः सर्वं शुद्धं करोति। | अग्नि सबको शुद्ध करती है। |
| आचार्या | आचार्या छात्रान् पाठयति। | आचार्या छात्रों को पढ़ाती हैं। |
| त्रिवर्णध्वजः | त्रिवर्णध्वजः आकाशे विराजते। | तिरंगा झंडा आकाश में सुशोभित है। |
| जनकः | जनकः पुत्रं पाठयति। | पिता पुत्र को पढ़ाता है। |
| वृक्षः | वृक्षः फलानि ददाति। | वृक्ष फल देता है। |
| देवी | देवी मन्दिरे विराजते। | देवी मंदिर में विराजमान हैं। |
| भगिनी | भगिनी गृहे पठति। | बहन घर में पढ़ती है। |
| मातामही | मातामही कथां कथयति। | नानी कहानी कहती हैं। |
| जननी | जननी स्नेहेन पालयति। | माँ स्नेह से पालती है। |
| नदी | नदी जलं प्रवहति। | नदी जल बहाती है। |
विकल्प (ख): निम्नलिखित का एकवचन, द्विवचन व बहुवचन लिखिए।
| धातु | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| (1) सेव् | सेवते | सेवेते | सेवन्ते |
| (2) वन्द् | वन्दते | वन्देते | वन्दन्ते |
| (3) शुभ् | शोभते | शोभेते | शोभन्ते |
| (4) वर्त् | वर्तते | वर्तेते | वर्तन्ते |
| (5) वर्ध् | वर्धते | वर्धेते | वर्धन्ते |
नोट: ये सभी धातुएँ आत्मनेपदी हैं और लट्-लकार (वर्तमान काल) के रूप हैं। इनमें प्रथम पुरुष के रूप दिए गए हैं।
📌 नोट
यह मॉडल उत्तर पत्र SCERT छत्तीसगढ़ के ब्लूप्रिंट तथा पाठ्यपुस्तक “दीपकम्” के आधार पर तैयार किया गया है। छात्र अपने उत्तरों में थोड़ा हेर-फेर कर सकते हैं, परन्तु मूल अर्थ और व्याकरण शुद्ध होना चाहिए।
