शिक्षण उद्देश्य:
- छात्र समाज के वंचित और उपेक्षित वर्ग के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर सकें।
- छात्र महादेवी वर्मा के रेखाचित्र विधा (जिसमें चरित्र का सजीव चित्रण होता है) से परिचित हो सकें।
- छात्र ‘गुरु-शिष्य’ के निस्वार्थ प्रेम और समर्पण भाव को समझ सकें।
- छात्र पाठ में प्रयुक्त विशेषणों और वाक्य-संरचना को पहचान सकें।
Day 1: लेखिका परिचय, पाठ का प्रारंभ और गाँव का चित्रण
- प्रवेश (5 मिनट): कक्षा में पूछें: “क्या आपने कभी किसी ऐसे बच्चे को देखा है जो बेहद गरीब और उपेक्षित हो, लेकिन उसका मन बहुत अच्छा हो? क्या आपको लगता है कि गरीबी किसी के अच्छे इंसान होने में बाधा बनती है?” विद्यार्थियों से चर्चा करें।
- लेखिका परिचय (10 मिनट): महादेवी वर्मा का परिचय दें। बताएं कि वे छायावादी युग की प्रमुख कवियत्री और सशक्त गद्य लेखिका हैं। उनके रेखाचित्र और संस्मरण (अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ) समाज के वंचित, अनाथ और पशु-पक्षियों के जीवन को गहराई से चित्रित करते हैं। उनकी रचनाओं (नीहार, रश्मि, यामा, दीपशिखा) का उल्लेख करें।
- सस्वर वाचन (5 मिनट): शिक्षक द्वारा पाठ का पहला भाग (गंगा पार झूँसी का खंडहर और गंगा किनारे पानी भरती महिलाओं का वर्णन) पढ़ें।
- व्याख्या (20 मिनट):
- “गंगा पार झूँसी के खंडहर… भागीरथी के तट पर” – लेखिका का प्राकृतिक स्थलों के प्रति आकर्षण।
- महिलाओं का चित्रण: पानी भरने आई महिलाओं के कपड़ों, गहनों (चूड़ियाँ, सिंदूर, कान की तरकी) और उनके हाव-भाव का अत्यंत सूक्ष्म और सजीव वर्णन।
- मुस्कान का सेतु: “अपने – मेरे बीच का अंतर उन्हें ज्ञात है, तभी कदाचित् वे इस मुस्कान के सेतु से उसका वार-पार जोड़ना नहीं भूलतीं।” – लेखिका और स्थानीय महिलाओं के बीच का सौहार्द।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 7 और 8 लिखिए (महादेवी वर्मा अक्सर अपनी छुट्टियाँ कैसे बिताया करती थीं? भक्तिन कौन थी? उन्हें क्यों लगता था कि वे उनकी अभिभाविका मानने लगी थी?)
Day 2: घीसा का पहला दर्शन, उसका नाम और उपेक्षा
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): पिछले दिन के प्रश्नों की जांच करें।
- व्याख्या (25 मिनट): पाठ का मुख्य भाग (घीसा का प्रवेश) पढ़ें और समझाएं:
- घीसा का शारीरिक वर्णन: “पका रंग, पर गठन में विशेष सुडौल, मलिन मुख जिसमें दो पीली, पर श्वेत आँखें जड़ी सी जान पड़ती थीं। पतले होंठ… उभरी हड्डियों वाली गर्दन… टेढ़े-मेढ़े कटे हुए नाखूनों वाली पतली बाँहें…” – लेखिका ने उसकी अत्यंत सूक्ष्म तस्वीर खींची है।
- उसका नाम ‘घीसा’ क्यों पड़ा? “बाप तो जन्म से पहले ही नहीं रहा… माँ उसे बैंदिरया के बच्चे के समान चिपकाए फिरती थी। पेट के बल घिसट-घिसटकर बालक संसार के प्रथम अनुभव के साथ-साथ इस नाम की योग्यता को भी सार्थक करता जाता था।” – गरीबी और उपेक्षा ने उसे अपाहिज जैसा बना दिया था, जो घिसटकर चलता था।
- समाज का भेदभाव: “लड़के उससे कुछ खिंचे-खिंचे से रहते थे… किसी की माँ, किसी की नानी… ने घीसा से दूर रहने की नितांत आवश्यकता उन्हें कान पकड़-पकड़ कर समझा दी थी।”
- शब्दार्थ: मलिन (गंदा), सुडौल (आकर्षक), निरंतर (लगातार), जिज्ञासा (जानने की इच्छा)।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 1 लिखिए: “पहली बार जब घीसा कक्षा में आया तब वह कैसा दिखाई पड़ता था? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।”
Day 3: घीसा की भक्ति, कक्षा की सफाई और साफ-सफाई का पाठ
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): घीसा के नाम की कहानी दोहराएं।
- व्याख्या (25 मिनट):
- घीसा का समर्पण: “पीपल के पेड़ के नीचे घनी छाया में मेरे विद्यार्थी बैठे रहते… घीसा उनमें अकेला रहा है और आज भी मेरी स्मृति में अकेला ही आता है।” – वह सबसे अलग बैठकर भी गुरु के प्रति समर्पित था।
- कक्षा की सफाई: घीसा रोज सुबह पेड़ के नीचे की जगह साफ करता, झाड़ता और लीपता था। “घीसा को अपने को साफ सुथरा रखना उसका परम कर्तव्य लगता था।” – घीसा गुरु के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करने में विश्वास रखता था।
- जलेबियों का प्रसंग: लेखिका जलेबियाँ लेकर आईं। बंटवारे में घीसा ने अपने हिस्से की जलेबियाँ अपनी माँ और बिना माँ के कुत्ते के पिल्ले को खिला दीं।
- घीसा की दयालुता: “पता चला कि पिल्ले को उससे कम मिली है। दें तो गुरु साहब पिल्ले को ही एक और दे दें।” – घीसा की असीम करुणा और त्याग की भावना को उजागर करें।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 3 और 4 लिखिए: “घीसा कक्षा लगने के पूर्व क्या तैयारी करता था?” और “बच्चे साफ-सफाई का पाठ पढ़ने के बाद अगली कक्षा में किस-प्रकार तैयार होकर आए थे?”
Day 4: बुखार, दंगे की सूचना और तरबूज का उपहार
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): घीसा की दयालुता पर चर्चा करें।
- व्याख्या (25 मिनट): पाठ का अंतिम भाग (क्लाइमेक्स) पढ़ें और समझाएं:
- बीमार घीसा की चिंता: घीसा दो सप्ताह से बुखार से पीड़ित था।
- दंगे की सूचना: “मुल्लू के ककका ने पास से लौटकर दरवाजे से ही अंधी को बताया कि शहर में दंगा हो रहा है और तब उसे गुरु साहब का ध्यान आया।” – बीमार होने पर भी घीसा ने अपने गुरु की सुरक्षा के लिए रात में ही अपनी झोपड़ी से भागकर लेखिका को चेतावनी दी।
- तरबूज का उपहार: लेखिका के जाने से पहले घीसा ने अपना कुरता बेचकर एक तरबूज खरीदा।
- घीसा का बलिदान: “वह तरबूज कई दिन पहले देख आया था… खेतवाले का लड़का था, जिसकी उसके नए कुरते पर बहुत दिन से नज़र थी… पैसा नहीं है, तो कुरता दे जाओ।”
- गुरु का भाव: “उस तट पर किसी गुरु को किसी शिष्य से कभी ऐसी दक्षिणा मिली होगी, ऐसा मुझे विश्वास नहीं; परन्तु उस दक्षिणा के सामने संसार के अब तक सारे आदान-प्रदान फीके जान पड़े।” – घीसा का तरबूज उसके स्नेह की सबसे बड़ी दक्षिणा थी।
- गृहकार्य: पाठ से प्रश्न 9 लिखिए: “घीसा ने अंत में गुरु साहिबा को क्या भेंट दी? यह भेंट सामग्री उसने कैसे जुटाई?”
Day 5: अभ्यास, भाषा कार्य और मूल्यांकन
- पुनरावृत्ति (5 मिनट): कहानी के अंत (घीसा की मृत्यु) का मार्मिक सारांश सुनाएं।
- अभ्यास कार्य (20 मिनट): पाठ्यपुस्तक के “पाठ से” और “पाठ से आगे” के प्रश्नों का सामूहिक अभ्यास करें।
- प्रश्न 5: “घीसा को देखकर ‘आँखें ही नहीं मेरा रोम-रोम गीला हो गया’ लेखिका ने ऐसा क्यों कहा?”
- प्रश्न 10: “महादेवी वर्मा को अन्य विद्यार्थियों की अपेक्षा घीसा ही क्यों याद रहा?” (इसका उत्तर छात्रों को घीसा के त्याग और समर्पण के आधार पर लिखने को कहें)।
- भाषा कार्य (15 मिनट):
- विशेषण: पाठ से घीसा के शारीरिक वर्णन के विशेषण (पका रंग, मलिन मुख, पतली बाँहें, टेढ़े-मेढ़े नाखून) चुनकर लिखें।
- रूपक: “जीवन का खरा सोना छिपाने के लिए उस मलिन शरीर को बनाने वाला ईश्वर उस बूढ़े आदमी से भिन्न नहीं, जो अपनी सोने की मोहर को कच्ची मिट्टी की दीवार में रखकर निश्चित हो जाता है।” – इस पंक्ति का अर्थ समझाएं। (घीसा का शरीर कच्ची मिट्टी की दीवार है, और उसका आत्मा/स्नेह खरा सोना है)।
- मुहावरा: “भावातिरेक से निश्चल हो रही” (भावनाओं के आवेग में स्थिर हो जाना)।
- प्रायोजना कार्य (5 मिनट): छात्रों को “घीसा” की तरह महादेवी वर्मा द्वारा लिखित अन्य रेखाचित्र (जैसे – भक्तिन, गिल्लू, सोना) पुस्तकालय से लेकर पढ़ने की सलाह दें।
- मूल्यांकन (10 मिनट): रेखाचित्र विधा क्या है? घीसा की दयालुता और त्याग का वर्णन कीजिए। घीसा की मृत्यु पर लेखिका की प्रतिक्रिया कैसी थी? इन प्रश्नों के आधार पर एक लघु लिखित परीक्षण लें।
(नोट: यह पाठ योजना पाठ्यपुस्तक की सामग्री और उसके अभ्यास प्रश्नों के आधार पर तैयार की गई है। कक्षा की गति और छात्रों की संवेदनशीलता के अनुसार इसमें आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।)

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
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