क्या और कैसे करें इसका? – कक्षा 3 EVS Unit 4: आस-पास है क्या-क्या? (Kya Aur Kaise Karen Iska? Class 3 EVS)
पाठ का सारांश
यह अध्याय बच्चों को कचरा प्रबंधन, स्वच्छता, पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और पर्यावरण संरक्षण के महत्व से परिचित कराता है। पाठ में राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस (30 जनवरी), स्वच्छ भारत मिशन, कचरा कैसे इकट्ठा होता है, कचरे का प्रबंधन (हरा/नीला कूड़ेदान), कचरा कम करना, पुनः उपयोग (पुरानी साड़ियों से रजाई, कपड़े के थैले, अखबारों से उपहार लपेटना), कागज का थैला बनाना, सिल्लुक (अरुणाचल प्रदेश का कचरा मुक्त गाँव), छोटा नरेना (देश का पहला कचरा मुक्त गाँव), इंदौर, मैसूर (स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध शहर) के बारे में बताया गया है। यह अध्याय बच्चों में पर्यावरण-चेतना, स्वच्छता, जिम्मेदारी और रचनात्मकता की भावना विकसित करता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- कचरा कैसे इकट्ठा होता है – यह समझ पाएँगे
- कचरे का प्रबंधन (हरा/नीला कूड़ेदान) करना सीख पाएँगे
- कचरा कम करने, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण के तरीकों को समझ पाएँगे
- राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस (30 जनवरी) और स्वच्छ भारत मिशन के बारे में जान पाएँगे
- कागज का थैला बना पाएँगे
- बेकार चीजों से उपहार बना पाएँगे
- सिल्लुक, छोटा नरेना, इंदौर, मैसूर जैसे स्वच्छ स्थानों के बारे में जान पाएँगे
- प्लास्टिक के दुष्प्रभावों को समझ पाएँगे
दिन 1 – पाठ का परिचय, राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस एवं कचरा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “आप अपने घर/विद्यालय का कचरा कहाँ डालते हैं?”
- प्रश्न: “क्या आपने कभी कचरे के ढेर देखे हैं? वे कहाँ होते हैं?”
- प्रश्न: “क्या आपको पता है कि कचरा हमारे स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?”
- प्रश्न: “क्या आप ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के बारे में जानते हैं?”
- पृष्ठ 167-169 के चित्र दिखाएँ – राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस, कचरे के ढेर, सफाई।
- परिचय: “आज हम ‘क्या और कैसे करें इसका?’ पाठ पढ़ेंगे, जिसमें हम सीखेंगे कि कचरे का प्रबंधन कैसे करें, स्वच्छता क्यों महत्वपूर्ण है, और हम अपने पर्यावरण को कैसे साफ रख सकते हैं।”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का वाचन – राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस (पृष्ठ 167-169):
- शिक्षक पाठ को जागरूकता और प्रेरणा के भाव के साथ पढ़कर सुनाएँ।
- विद्यार्थी बारी-बारी से पैराग्राफ पढ़ें।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस – 30 जनवरी (Cleanliness Day)
- स्वच्छ भारत मिशन – देश को स्वच्छ बनाने का अभियान (Swachh Bharat Mission)
- कचरा – बेकार/अनुपयोगी वस्तुएँ (Waste/Garbage)
- कचरा प्रबंधन – कचरे को सही तरीके से निपटाना (Waste Management)
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 168):
- (क) “चित्र में बच्चे और शिक्षक क्या कर रहे हैं?” (सफाई कर रहे हैं)
- (ख) “वे पार्क की सफाई क्यों कर रहे हैं?” (स्वच्छता के लिए, स्वास्थ्य के लिए, पर्यावरण के लिए)
- (ग) “क्या आपने अपने घर/विद्यालय के आस-पास कचरे के ढेर देखे हैं?” (अनुभव साझा करें)
- (घ) “क्या आपने सोचा है कि कचरा कहाँ से आता है?” (घरों, दुकानों, कारखानों से)
- गतिविधि 1 – कचरा कैसे इकट्ठा होता है? (पृष्ठ 168-169):
- विद्यार्थी पूरे दिन में किए जाने वाले कार्यों से पैदा होने वाले कचरे की सूची बनाएँ:
- रसोई घर – सब्जियों/फलों के छिलके, अंडे के छिलके
- खाना – बचा हुआ भोजन, रैपर, पैकेट
- घर – पुराने कपड़े, डिब्बे, बोतलें, कागज, प्लास्टिक
- विद्यालय – पेंसिल की छीलन, रबड़ के टुकड़े, कागज़, टूटी पेंसिल
- अन्य – पुरानी बैटरी, टूटे खिलौने, प्लास्टिक की थैलियाँ
- विद्यार्थी पूरे दिन में किए जाने वाले कार्यों से पैदा होने वाले कचरे की सूची बनाएँ:
- चर्चा (पृष्ठ 169):
- “क्या आपको लगता है कि आप कचरे के बारे में कुछ कर सकते हैं?” (हाँ – कचरा कम करना, पुनः उपयोग, सही जगह डालना)
- “हमें कचरे का प्रबंधन क्यों सीखना चाहिए?” (स्वास्थ्य, पर्यावरण, स्वच्छता के लिए)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस कब मनाया जाता है?” (30 जनवरी)
- गृहकार्य: “अपने घर में एक दिन में पैदा होने वाले कचरे की सूची बनाएँ।”
दिन 2 – कचरे का प्रबंधन, हरा/नीला कूड़ेदान एवं वर्गीकरण
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “कचरा कहाँ से आता है?”
- प्रश्न: “क्या आपने दो अलग-अलग रंग के कूड़ेदान देखे हैं? वे क्यों होते हैं?”
- प्रश्न: “हरा कूड़ेदान और नीला कूड़ेदान – इनमें क्या-क्या डाला जाता है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- कचरे का प्रबंधन (पृष्ठ 169-176):
- कचरा प्रबंधन – कचरे को सही तरीके से अलग करना और निपटाना
- गंदे पानी के कारण मच्छर पैदा होते हैं → बीमारियाँ
- प्लास्टिक जलाने से हानिकारक गैसें निकलती हैं
- जानवर प्लास्टिक खाकर मर सकते हैं
- हरा और नीला कूड़ेदान (पृष्ठ 176):
- हरा कूड़ेदान (हरी डस्टबिन) – गीला कचरा (Wet waste)
- सूखी पत्तियाँ, टहनियाँ, फल-सब्जियों के छिलके, अंडे के छिलके
- सड़कर खाद बन जाता है → मिट्टी में मिल जाता है
- नीला कूड़ेदान (नीली डस्टबिन) – सूखा कचरा (Dry waste)
- धातु, काँच, प्लास्टिक, कागज
- पुनर्चक्रण (Recycling) – इनसे नई वस्तुएँ बनाई जाती हैं
- हरा कूड़ेदान (हरी डस्टबिन) – गीला कचरा (Wet waste)
- गतिविधि – कचरे को अलग-अलग करें (पृष्ठ 177):
- विद्यार्थी नीचे दी गई वस्तुओं को हरे और नीले कूड़ेदान में डालें:
- हरा कूड़ेदान (गीला कचरा): पत्तियाँ, प्याज के छिलके, सड़े हुए फल, अंडे के छिलके
- नीला कूड़ेदान (सूखा कचरा): प्लास्टिक की बोतलें, बिजली के बल्ब, कागज, दूध के प्लास्टिक पैकेट, कपड़े
- चर्चा: “धारदार/नुकीली चीज़ें (टूटी काँच, सुई) को कपड़े/कागज में लपेटकर फेंकना चाहिए – सफाई कर्मचारियों को चोट न लगे।”
- विद्यार्थी नीचे दी गई वस्तुओं को हरे और नीले कूड़ेदान में डालें:
- कचरा कम करना (पृष्ठ 171-173):
- प्लास्टिक की थैलियों की जगह कपड़े के थैले का उपयोग करें
- पुराने खिलौने/पुस्तकें – ज़रूरतमंद लोगों को दें
- पुरानी साड़ियाँ – रजाइयाँ बनाएँ
- पुराने कपड़े – थैले बनाएँ
- पुराने अखबार/कपड़े – उपहार लपेटने में उपयोग करें (पर्यावरण-अनुकूल)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “हरे कूड़ेदान में क्या डाला जाता है? नीले कूड़ेदान में क्या?”
- गृहकार्य: “अपने घर के कचरे को हरा/नीला – अलग-अलग करें और कल कक्षा में बताएँ।”
दिन 3 – पुनः उपयोग, कागज का थैला एवं रचनात्मकता
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “हरा और नीला कूड़ेदान में क्या-क्या डाला जाता है?”
- प्रश्न: “क्या आप पुरानी चीज़ों से नई चीज़ें बना सकते हैं?”
- प्रश्न: “क्या आपने कभी पुराने अखबार से कागज का थैला बनाया है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- गतिविधि – कागज का थैला बनाना (पृष्ठ 173):
- सामग्री: पुराने अखबार (कैंची/गोंद नहीं – केवल अखबार)
- चरण:
- (1) अखबार को आधा मोड़ें
- (2) नीचे के हिस्से को मोड़कर चिपकाएँ (बिना गोंद के – मोड़कर)
- (3) किनारों को अंदर मोड़ें
- (4) थैले का आकार दें और ऊपर को मोड़ें
- विद्यार्थी कागज का थैला बनाएँ और उसे सजाएँ।
- गतिविधि 5 – बेकार चीजों से उपहार (पृष्ठ 174):
- विद्यार्थी घर में पड़ी बेकार चीजों (पुराने अखबार, कैलेंडर, बोतलें, डिब्बे, रंगीन कागज़) का उपयोग करके कोई उपहार (सजावट की वस्तु, कार्ड, मुखौटा, गुल्लक) बनाएँ।
- उपहार किसी ऐसे व्यक्ति को दें जो आस-पड़ोस/घर को साफ रखने में मदद करता हो (सफाई कर्मचारी, माली, पड़ोसी)।
- धन्यवाद कहना न भूलें।
- गतिविधि – पुरानी चीज़ों का उपयोग (पृष्ठ 173-174):
- विद्यार्थी बताएँ – “कचरा कम करने के लिए आप चीजों का पुनः उपयोग कैसे कर सकते हैं?”
- रफ कार्य के लिए एक तरफ इस्तेमाल किए गए कागज़ का उपयोग करें
- स्टील/ताँबे की बोतल – बार-बार पानी भरकर उपयोग करें (प्लास्टिक की बोतल की जगह)
- पुराने अखबार, कैलेंडर – खिलौने/सजावट बनाएँ
- विद्यार्थी बताएँ – “कचरा कम करने के लिए आप चीजों का पुनः उपयोग कैसे कर सकते हैं?”
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के बनाए कागज के थैलों और उपहारों की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: “घर में पड़ी बेकार चीज़ों से कोई एक सजावटी वस्तु बनाएँ और कक्षा में लाएँ।”
दिन 4 – स्वच्छ स्थान, सिल्लुक गाँव एवं स्वच्छता अभियान
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “पुरानी चीज़ों से क्या-क्या बनाया जा सकता है?”
- प्रश्न: “क्या आप कोई ऐसा गाँव/शहर जानते हैं जो बहुत साफ हो?”
- प्रश्न: “स्वच्छ भारत अभियान के बारे में आप क्या जानते हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- गौरव करने लायक स्थान (पृष्ठ 174-175):
- सिल्लुक (अरुणाचल प्रदेश) – “कचरा मुक्त गाँव”
- सड़कें एकदम साफ
- कोई कूड़ा नहीं
- बहुत से पेड़ लगे
- पुरस्कार – सबसे अच्छे कचरा प्रबंधन के लिए
- छोटा नरेना – देश का पहला कचरा मुक्त गाँव
- इंदौर, मैसूर – स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध शहर
- सिल्लुक (अरुणाचल प्रदेश) – “कचरा मुक्त गाँव”
- चर्चा (पृष्ठ 175):
- (क) “अपने बड़ों से पता करें – क्या वे किसी ऐसे गाँव/शहर को जानते हैं जो स्वच्छता के लिए जाना जाता है?”
- (ख) “अपने माता-पिता और शिक्षक से ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के बारे में और जानकारी प्राप्त करें।”
- गतिविधि – चित्र बनाएँ (पृष्ठ 178-179):
- विद्यार्थी सफाई के उपकरणों के चित्र बनाएँ:
- झाड़ू, कूड़ेदान, पोछा, बाल्टी, कागज़ की थैली, सफाई का घोल
- विद्यार्थी स्वच्छता अभियान पर एक पोस्टर बनाएँ:
- नारा: “स्वच्छ रहो, स्वस्थ रहो”
- नारा: “स्वच्छता है अनमोल”
- नारा: “कूड़ा न फैलाओ, स्वच्छता अपनाओ”
- विद्यार्थी सफाई के उपकरणों के चित्र बनाएँ:
- ‘आइए, मंथन करें!’ (पृष्ठ 179):
- (क) चर्चा: “कचरा कैसे इकट्ठा होता है? हमें कचरे का प्रबंधन कैसे करना चाहिए?”
- (ख) लिखिए: “प्लास्टिक की थैलियों/बोतलों का उपयोग रोकने के लिए आप क्या कर सकते हैं?”
- कपड़े के थैले का उपयोग करें
- स्टील/ताँबे की बोतल का उपयोग करें
- कागज़ के थैले बनाएँ
- प्लास्टिक की जगह प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करें
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के पोस्टरों की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: “अपने विद्यालय/घर के आस-पास एक स्वच्छता अभियान चलाने की योजना बनाएँ।”
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पाठ का सामूहिक वाचन (मुख्य बिंदु)।
- विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए पोस्टर और सजावटी वस्तुओं का प्रदर्शन।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस कब मनाया जाता है? (30 जनवरी)
- हरे कूड़ेदान में क्या डाला जाता है? (गीला कचरा – पत्तियाँ, छिलके, सड़े फल)
- नीले कूड़ेदान में क्या डाला जाता है? (सूखा कचरा – प्लास्टिक, कागज़, धातु, काँच)
- ‘सिल्लुक’ किस राज्य में है? (अरुणाचल प्रदेश)
- देश का पहला कचरा मुक्त गाँव कौन-सा है? (छोटा नरेना)
- स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध दो शहरों के नाम बताएँ। (इंदौर, मैसूर)
- पुरानी चीज़ों से नई चीज़ें बनाने को क्या कहते हैं? (पुनः उपयोग / पुनर्चक्रण)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘क्या और कैसे करें इसका?’ पाठ से आपने क्या सीखा? (कोई दो बातें)
- (ख) कचरा प्रबंधन के दो तरीके लिखिए।
- (ग) हरे और नीले कूड़ेदान में क्या-क्या डाला जाता है? (प्रत्येक में तीन वस्तुएँ)
- (घ) प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के तीन उपाय लिखिए।
- (ङ) ‘सिल्लुक’ गाँव के बारे में आपने क्या सीखा?
- समूह चर्चा:
- “आप अपने घर और विद्यालय को साफ रखने के लिए क्या कर सकते हैं?”
- “क्या आपने प्रकृति में भी कचरा देखा है? जंगल में जानवरों के अपशिष्ट, सूखी पत्तियों आदि का क्या होता है?” (वे प्राकृतिक रूप से सड़कर मिट्टी में मिल जाते हैं)
- गतिविधि – अभिनय (पृष्ठ 180):
- (घ) जोड़ी बनाकर अभिनय करें:
- एक विद्यार्थी – स्वच्छ शहर की भूमिका (साफ सड़कें, पेड़, खुश लोग)
- दूसरा विद्यार्थी – दृषित (गंदा) शहर की भूमिका (कचरा, बीमारी, दुर्गंध)
- चर्चा: “दोनों शहरों में क्या अंतर है? आप किस शहर में रहना चाहेंगे?”
- (घ) जोड़ी बनाकर अभिनय करें:
- शपथ (पृष्ठ 178):
- विद्यार्थी स्वच्छता की प्रतिज्ञा लें:
- “मैं कचरा नहीं फैलाऊँगा।”
- “मैं कचरे का सही तरीके से प्रबंधन करूँगा।”
- “मैं प्लास्टिक का कम उपयोग करूँगा।”
- “मैं अपने घर, विद्यालय और आस-पास को स्वच्छ रखूँगा।”
- “मैं ‘स्वच्छ भारत’ अभियान में अपना योगदान दूँगा।”
- विद्यार्थी स्वच्छता की प्रतिज्ञा लें:
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘क्या और कैसे करें इसका?’ पाठ ने हमें कचरा प्रबंधन, स्वच्छता, पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और पर्यावरण संरक्षण का महत्व सिखाया। राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस (30 जनवरी) और स्वच्छ भारत मिशन हमें स्वच्छ रहने की प्रेरणा देते हैं। हरा कूड़ेदान – गीला कचरा (जो सड़कर खाद बनता है), नीला कूड़ेदान – सूखा कचरा (जिसे पुनर्चक्रित किया जाता है)। प्लास्टिक को जलाने या जानवरों के खाने से नुकसान होता है। पुरानी चीज़ों का पुनः उपयोग – कपड़े के थैले, कागज़ के थैले, सजावटी वस्तुएँ – हम कचरा कम कर सकते हैं। सिल्लुक, छोटा नरेना, इंदौर, मैसूर – स्वच्छता के प्रेरणादायक उदाहरण हैं। “स्वच्छ रहो, स्वस्थ रहो – यही हमारा कर्तव्य है!” “
- पूर्ण पाठ्यक्रम समाप्ति – विद्यार्थियों को पूरे वर्ष के EVS पाठ्यक्रम के लिए बधाई दें और उन्हें प्रकृति, समुदाय, स्वास्थ्य, वस्तुओं और पर्यावरण के बारे में सीखने के लिए प्रोत्साहित करें।
शिक्षण सहायक सामग्री
- राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस, स्वच्छ भारत मिशन के चित्र/पोस्टर
- हरे और नीले कूड़ेदान के चित्र
- गीला और सूखा कचरा (पत्तियाँ, छिलके, प्लास्टिक, कागज़, धातु) – वास्तविक नमूने
- पुराने अखबार (कागज का थैला बनाने के लिए)
- पुरानी साड़ियाँ, कपड़े (पुनः उपयोग के उदाहरण)
- सिल्लुक (अरुणाचल प्रदेश), छोटा नरेना, इंदौर, मैसूर के चित्र
- रंग, कागज़, पेंसिल (पोस्टर बनाने के लिए)
- बेकार चीज़ों से उपहार बनाने की सामग्री
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | कचरा कैसे इकट्ठा होता है – की समझ | मौखिक/लिखित |
| 2 | कचरे का प्रबंधन (हरा/नीला कूड़ेदान) की समझ | मौखिक/लिखित |
| 3 | कचरा कम करने, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण के तरीकों की समझ | मौखिक/लिखित |
| 4 | राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस (30 जनवरी) और स्वच्छ भारत मिशन की जानकारी | मौखिक |
| 5 | कागज का थैला और बेकार चीज़ों से उपहार बनाने का कौशल | कला/गतिविधि |
| 6 | स्वच्छ स्थानों (सिल्लुक, छोटा नरेना, इंदौर, मैसूर) की जानकारी | मौखिक/लिखित |
| 7 | प्लास्टिक के दुष्प्रभावों और समाधानों की समझ | समूह चर्चा/लिखित |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘कचरा’, ‘कूड़ेदान’, ‘स्वच्छता’, ‘पुनः उपयोग’, ‘पुनर्चक्रण’ को क्या कहते हैं। राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस – बच्चों को बताएँ कि 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर मनाया जाता है – वे स्वच्छता के बहुत बड़े समर्थक थे। स्वच्छ भारत मिशन – बच्चों को बताएँ कि यह भारत सरकार का एक बड़ा अभियान है – हर नागरिक की भागीदारी से ही यह सफल हो सकता है। हरा/नीला कूड़ेदान – बच्चों को व्यावहारिक रूप से कचरा अलग करना सिखाएँ – यह एक जीवन कौशल (life skill) है। पुनः उपयोग – बच्चों को रचनात्मकता का अवसर दें – पुरानी चीज़ों से नई चीज़ें बनाना बहुत मज़ेदार और शिक्षाप्रद है। कागज का थैला – बच्चों को पर्यावरण-अनुकूल विकल्प सिखाएँ – प्लास्टिक की जगह कागज़/कपड़े के थैले का उपयोग करें। सिल्लुक, छोटा नरेना – बच्चों को प्रेरणादायक उदाहरण दें – छोटे समुदाय भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं। “स्वच्छ रहो, स्वस्थ रहो” – इस संदेश को बार-बार दोहराएँ और बच्चों को स्वच्छता शपथ दिलाएँ। पूर्ण पाठ्यक्रम – बच्चों को पूरे वर्ष की सीख के लिए बधाई दें और उन्हें प्रकृति, समुदाय, स्वास्थ्य, वस्तुओं और पर्यावरण के बारे में सीखते रहने के लिए प्रोत्साहित करें।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
