कैसे बनीं ये वस्तुएँ? – कक्षा 3 EVS Unit 4: आस-पास है क्या-क्या? (Kaise Banin Ye Vastuen? Class 3 EVS)
पाठ का सारांश
यह अध्याय बच्चों को वस्तुओं के निर्माण की प्रक्रिया से परिचित कराता है। मिनी और उसके दादाजी (कुम्हार) की कहानी के माध्यम से बच्चे मिट्टी के बर्तन बनाने की विधि सीखते हैं – मिट्टी गीली करना, चाक पर घुमाना, आकार देना, धूप में सुखाना, भट्टी में पकाना और नमूने बनाना। पाठ में ईंटें बनाने (साँचों में, भट्टी में पकाना), घर बनाने (ईंट, मिट्टी, लकड़ी, पत्थर), प्रकृति में नमूने (पैटर्न – पत्तियों, पशु-पक्षियों पर), मिट्टी के बर्तनों पर नमूने, सुरक्षा (हेलमेट, सुरक्षा जैकेट) के बारे में भी बताया गया है। यह अध्याय बच्चों में रचनात्मकता, अवलोकन क्षमता और सुरक्षा जागरूकता विकसित करता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रक्रिया को समझ पाएँगे (मिट्टी → चाक → सुखाना → भट्टी → नमूने)
- ईंटें बनाने और घर बनाने की प्रक्रिया को समझ पाएँगे
- प्रकृति में नमूनों (पैटर्न) को पहचान पाएँगे
- मिट्टी के बर्तनों पर नमूने बना पाएँगे
- सुरक्षा (हेलमेट, जैकेट) के महत्व को समझ पाएँगे
- भट्टी और कुम्हार के चाक के बारे में जान पाएँगे
- विभिन्न प्रकार के घरों (मिट्टी, पक्का, लकड़ी) को पहचान पाएँगे
- कलाकारों की प्रेरणा के स्रोतों (प्रकृति) को समझ पाएँगे
दिन 1 – पाठ का परिचय, कुम्हार का परिवार एवं मिट्टी के बर्तन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “आपके घर में कौन-कौन से मिट्टी के बर्तन हैं? उनके नाम बताएँ।”
- प्रश्न: “क्या आपको पता है कि मिट्टी के बर्तन कैसे बनते हैं?”
- प्रश्न: “कुम्हार कौन होता है? वह क्या बनाता है?”
- प्रश्न: “क्या आपने कभी किसी को मिट्टी से बर्तन बनाते देखा है?”
- पृष्ठ 153-155 के चित्र दिखाएँ – कुम्हार, मिट्टी, चाक, बर्तन, भट्टी।
- परिचय: “आज हम ‘कैसे बनीं ये वस्तुएँ?’ पाठ पढ़ेंगे, जिसमें हम सीखेंगे कि मिट्टी के बर्तन कैसे बनते हैं, ईंटें कैसे बनती हैं, और घर कैसे बनते हैं।”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का वाचन – कुम्हार का परिवार (पृष्ठ 153-155):
- शिक्षक पाठ को रोचक, जीवंत स्वर में पढ़कर सुनाएँ।
- विद्यार्थी बारी-बारी से पैराग्राफ पढ़ें।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- कुम्हार – मिट्टी के बर्तन बनाने वाला (Potter)
- चाक – बर्तन बनाने का घूमने वाला पहिया (Potter’s wheel)
- भट्टी – बर्तन/ईंट पकाने का तंदूर/आग (Kiln)
- गुल्लक – पैसे बचाने का मिट्टी का बर्तन (Piggy bank)
- मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रक्रिया (पृष्ठ 154-155):
- (1) मिट्टी में पानी डालकर गीला करें
- (2) मिट्टी को अच्छी तरह मिलाएँ
- (3) चाक पर रखें और घुमाएँ – बर्तन का आकार दें
- (4) धूप में सुखाएँ
- (5) भट्टी में तेज़ आग पर पकाएँ
- (6) बर्तनों पर सुंदर नमूने बनाएँ
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 155):
- (क) “मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किसलिए किया जाता है?” (पानी रखना, खाना पकाना, खाना रखना, पैसे बचाना)
- (ख) “कुम्हार और कौन-कौन सी वस्तुएँ बनाते हैं?” (गमले, सुराही, घड़े, गुल्लक, मूर्तियाँ, खिलौने)
- (ग) “बर्तनों को भट्टी में क्यों पकाया जाता है?” (मजबूत/पक्का बनाने के लिए)
- गतिविधि – चित्र बनाएँ (पृष्ठ 155):
- विद्यार्थी कुम्हार के यहाँ देखी गई कुछ वस्तुओं के चित्र बनाएँ (घड़ा, सुराही, गुल्लक, कटोरी, गमला)।
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रक्रिया में क्या-क्या कदम हैं?” (मिट्टी गीली करना → चाक पर घुमाना → धूप में सुखाना → भट्टी में पकाना)
- गृहकार्य: “अपने घर के किसी मिट्टी के बर्तन का चित्र बनाएँ और रंग भरें।”
दिन 2 – मिट्टी तैयार करना, बर्तन बनाना एवं प्रकृति में नमूने
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रक्रिया क्या है?”
- प्रश्न: “क्या आप मिट्टी से अपने हाथों से कुछ बना सकते हैं?”
- प्रश्न: “क्या आपने कभी प्रकृति में नमूने (पैटर्न) देखे हैं?” (पत्तों पर, तितली के पंखों पर, साँप के शरीर पर)
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- गतिविधि 2 – बर्तन बनाने के लिए मिट्टी तैयार करना (पृष्ठ 156):
- सामग्री: चिकनी मिट्टी, पानी, छलनी, परात/बर्तन
- विधि:
- (1) मिट्टी में कंकड़/पत्थर/सूखी पत्तियाँ हो सकती हैं – छलनी से अलग करें
- (2) परात में पानी डालकर मिट्टी भिगोएँ
- (3) कुछ दिन बाद अतिरिक्त पानी फेंक दें
- (4) मिट्टी को मिलाएँ और गोला बनाएँ
- विद्यार्थी इस मिट्टी से अपनी पसंद की दो वस्तुएँ बनाएँ (बर्तन, गुल्लक, मूर्ति, खिलौना)
- वस्तुओं को धूप में सूखने के लिए रखें
- गतिविधि 3 – सही क्रम में व्यवस्थित करें (पृष्ठ 157):
- विद्यार्थी नीचे दी गई आकृतियों को 1 से 5 (मिट्टी से बर्तन बनाने) के सही क्रम में लगाएँ:
- (1) मिट्टी तैयार करना
- (2) चाक पर बर्तन बनाना
- (3) धूप में सुखाना
- (4) भट्टी में पकाना
- (5) नमूने/रंग करना
- विद्यार्थी नीचे दी गई आकृतियों को 1 से 5 (मिट्टी से बर्तन बनाने) के सही क्रम में लगाएँ:
- प्रकृति में नमूने (पैटर्न) (पृष्ठ 157-158):
- प्रकृति में नमूने:
- बाघ के शरीर पर धब्बे
- गिलहरी के शरीर पर धारियाँ
- नीम की पत्तियों पर शिराओं का नमूना
- तितली के पंखों पर रंग-बिरंगे नमूने
- मोर के पंखों पर आँख जैसे नमूने
- साँप के शरीर पर खाल के नमूने
- चर्चा: “कलाकार प्रकृति से नमूने क्यों सीखते हैं?” (प्रकृति सबसे बड़ी कलाकार है)
- प्रकृति में नमूने:
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “प्रकृति में कौन-कौन से नमूने देखे जा सकते हैं?” (पत्तियों पर, पशु-पक्षियों पर)
- गृहकार्य: “अपने आस-पास प्रकृति में मिलने वाले किसी नमूने (पत्ती/पशु-पक्षी) का चित्र बनाएँ।”
दिन 3 – ईंटें, घर बनाना एवं सुरक्षा
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “प्रकृति में नमूनों के उदाहरण बताएँ।”
- प्रश्न: “आपने ईंटें कहाँ देखी हैं? ईंटें कैसे बनती हैं?”
- प्रश्न: “क्या सभी घर एक जैसे होते हैं? किस-किस चीज़ से घर बनते हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ईंटें बनाना (पृष्ठ 159-160):
- ईंट – मिट्टी से बनती है (जैसे – बर्तन)
- साँचों (moulds) में तैयार की जाती है (जैसे – इडली, केक, ढोकला, कुल्फी के साँचे)
- भट्टी में पकाकर मजबूत/कठोर बनाई जाती है
- उपयोग: घर, विद्यालय, अस्पताल, दीवारें, भवन
- घर बनाना (पृष्ठ 161-163):
- रोहन और उसके पिता – जयपुर में रहते हैं
- ईंट पर ईंट रखकर दीवार बनती है → फिर इमारत
- विभिन्न प्रकार के घर:
- पक्का घर – ईंट, सीमेंट, पत्थर, लोहा (शहरों में)
- मिट्टी का घर – मिट्टी, घास, लकड़ी (गाँवों/गर्म स्थानों में)
- लकड़ी का घर – लकड़ी (पहाड़ी क्षेत्रों में)
- फर्श/दीवारें – गोबर का लेप (ठंडक, कीटों से बचाव)
- चर्चा (पृष्ठ 162):
- (क) “क्या सभी घर ईंटों से बनते हैं?” (नहीं – मिट्टी, लकड़ी, पत्थर, बाँस से भी बनते हैं)
- (ख) “आपके विचार में मिट्टी से बने घर पर्यावरण के लिए बेहतर क्यों होते हैं?” (प्राकृतिक सामग्री, ठंडक, पर्यावरण-अनुकूल)
- (ग) “अपने आस-पड़ोस के घर किस प्रकार की सामग्री से बने हैं?” – विद्यार्थी अवलोकन करें
- गतिविधि 5 – घरों के चित्र (पृष्ठ 163):
- विद्यार्थी चित्र देखकर घरों के प्रकार और उनकी सामग्री लिखें:घर का चित्रइस तरह के घर को क्या कहते हैं?यह घर किन वस्तुओं से बना है?(मिट्टी का घर)मिट्टी का घर / कच्चा घरमिट्टी, घास, लकड़ी, गोबर(पक्का घर)पक्का घरईंट, सीमेंट, पत्थर, लोहा(लकड़ी का घर)लकड़ी का घरलकड़ी
- सुरक्षा (पृष्ठ 164):
- रोहन के पिता – निर्माण स्थल पर हेलमेट, सुरक्षा जैकेट, उपयुक्त जूते पहनते हैं
- चर्चा: “क्या आपके घर/विद्यालय में सुरक्षा नियम बनाए गए हैं?” (सीढ़ियों पर सावधानी, बिजली, रसोई, आदि)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “ईंटें कैसे बनती हैं? घर बनाने में किन-किन चीज़ों का उपयोग होता है?”
- गृहकार्य: “अपने आस-पास के तीन प्रकार के घरों के चित्र बनाएँ।”
दिन 4 – रचनात्मक गतिविधि, दीवार बनाना एवं साक्षात्कार
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “ईंटें कैसे बनती हैं? घर बनाने में क्या-क्या लगता है?”
- प्रश्न: “क्या आप माचिस की डिब्बियों या गत्ते के डिब्बों से दीवार बना सकते हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- गतिविधि – दीवार बनाएँ (पृष्ठ 164):
- सामग्री: माचिस की डिब्बियाँ, गत्ते के डिब्बे, गूंधी हुई मिट्टी या आटा
- विधि:
- माचिस/गत्ते की डिब्बियों से ‘ईंटें’ बनाएँ
- इन्हें आपस में जमाएँ (दीवार की तरह)
- अवलोकन:
- “कौन-सी दीवार अधिक मजबूत है?”
- “धकेले जाने पर कौन-सी दीवार आसानी से गिर सकती है?”
- चर्चा: “दीवार को मजबूत बनाने के लिए क्या करना चाहिए?” (ईंटों को सीमेंट/गारे से जोड़ना, सही क्रम में रखना)
- गतिविधि – मिट्टी के बर्तनों पर नमूने (पृष्ठ 159):
- विद्यार्थी मिट्टी के बर्तनों (कागज़ पर चित्र) पर प्राकृतिक नमूने बनाएँ:
- फूल, पत्तियाँ, लहरें, ज्यामितीय आकृतियाँ, पशु-पक्षी के नमूने
- चर्चा: “हमारे देश में विभिन्न स्थानों पर मिट्टी से अनेक प्रकार के सुंदर बर्तन बनाए जाते हैं।”
- विद्यार्थी मिट्टी के बर्तनों (कागज़ पर चित्र) पर प्राकृतिक नमूने बनाएँ:
- गतिविधि – साक्षात्कार (पृष्ठ 165):
- (क) “अपने आस-पास में किसी ऐसे व्यक्ति से बात करें जो शिल्प या खिलौने बनाते हैं।”
- प्रश्न: “आप क्या बनाते हैं? किन सामग्रियों का उपयोग करते हैं? कहाँ से सीखा?”
- (ख) “पता लगाएँ कि प्रतिदिन प्रयोग में लाई जाने वाली वस्तुएँ – पेंसिल, रबड़, कॉपी – कैसे बनती हैं।” – बड़ों से पूछें
- (क) “अपने आस-पास में किसी ऐसे व्यक्ति से बात करें जो शिल्प या खिलौने बनाते हैं।”
- गतिविधि – ‘क्या आप जानते हैं?’ (पृष्ठ 166):
- मूर्तियाँ – भी चिकनी मिट्टी से बनाई जाती हैं (बर्तन/ईंट जैसी मिट्टी से)
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों की दीवार निर्माण गतिविधि और बर्तनों पर नमूनों की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: “अपने आस-पास किसी कलाकार/शिल्पकार से बात करें और उनके बारे में 3-4 वाक्य लिखें।”
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पाठ का सामूहिक वाचन (मुख्य बिंदु)।
- विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई दीवारों और बर्तनों पर नमूनों का प्रदर्शन।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- कुम्हार क्या बनाता है? (मिट्टी के बर्तन)
- बर्तनों को भट्टी में क्यों पकाया जाता है? (मजबूत/पक्का बनाने के लिए)
- ईंटें कैसे बनती हैं? (मिट्टी → साँचे → भट्टी)
- घर बनाने में किन-किन सामग्रियों का उपयोग होता है? (ईंट, सीमेंट, लकड़ी, पत्थर, मिट्टी)
- प्रकृति में नमूनों के दो उदाहरण बताएँ। (बाघ के धब्बे, तितली के पंख, पत्तियों की शिराएँ)
- निर्माण स्थल पर सुरक्षा के लिए क्या पहनना चाहिए? (हेलमेट, सुरक्षा जैकेट, जूते)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘कैसे बनीं ये वस्तुएँ?’ पाठ से आपने क्या सीखा? (कोई दो बातें)
- (ख) मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रक्रिया लिखिए (कोई चार चरण)।
- (ग) ईंटें कैसे बनती हैं? (संक्षेप में लिखिए)
- (घ) घर बनाने में किन-किन सामग्रियों का उपयोग होता है? (कोई चार)
- (ङ) प्रकृति में नमूनों (पैटर्न) के तीन उदाहरण लिखिए।
- समूह चर्चा:
- “कलाकार अपनी कला के लिए कहाँ-कहाँ से प्रेरणा लेते हैं?” (प्रकृति से – पत्तियाँ, फूल, पशु-पक्षी, रंग-रूप)
- “यदि प्रकृति में किसी भी तरह के नमूने न होते, तो क्या होता?” (कलाकारों को प्रेरणा न मिलती, दुनिया कम सुंदर होती)
- “सुरक्षा के लिए निर्माण स्थल पर हेलमेट क्यों पहनना चाहिए?” (सिर की सुरक्षा, गिरने/चोट से बचाव)
- गतिविधि (पृष्ठ 165):
- विद्यार्थी तीन प्रकार के घरों के चित्र बनाएँ और रंग भरें:
- मिट्टी का घर – गाँवों में
- पक्का घर – शहरों में
- लकड़ी का घर – पहाड़ों में
- विद्यार्थी तीन प्रकार के घरों के चित्र बनाएँ और रंग भरें:
- गतिविधि (पृष्ठ 166):
- विद्यार्थी मूर्ति या शिल्प से जुड़ी कोई जानकारी साझा करें (साक्षात्कार से)।
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘कैसे बनीं ये वस्तुएँ?’ पाठ ने हमें सिखाया कि वस्तुएँ कैसे बनती हैं – मिट्टी के बर्तन (मिट्टी → चाक → सुखाना → भट्टी → नमूने), ईंटें (मिट्टी → साँचे → भट्टी), घर (ईंट, सीमेंट, मिट्टी, लकड़ी, पत्थर)। कुम्हार (मिट्टी के बर्तन बनाने वाला) चाक पर घुमाकर बर्तन बनाता है और भट्टी में पकाकर मजबूत करता है। प्रकृति कलाकारों को नमूने (पैटर्न) देती है – पत्तियों पर शिराएँ, बाघ के धब्बे, तितली के पंख। सुरक्षा – निर्माण स्थल पर हेलमेट, जैकेट, जूते पहनना बहुत ज़रूरी है। “हर वस्तु के निर्माण में श्रम, कला और सुरक्षा शामिल है!” “
- अगले पाठ (Unit 4) ‘क्या और कैसे करें इसका?’ का संक्षिप्त परिचय – “अब हम सीखेंगे कि कचरे का प्रबंधन कैसे करें, पुनः उपयोग कैसे करें, और स्वच्छता क्यों महत्वपूर्ण है।”
शिक्षण सहायक सामग्री
- कुम्हार के बर्तन बनाने के चरणों के चित्र
- मिट्टी, पानी, छलनी (मिट्टी तैयार करने के लिए)
- माचिस की डिब्बियाँ, गत्ते के डिब्बे, आटा/मिट्टी (दीवार बनाने के लिए)
- प्रकृति में नमूनों (पत्ती, तितली, बाघ, गिलहरी, मोर) के चित्र
- विभिन्न प्रकार के घरों (मिट्टी, पक्का, लकड़ी) के चित्र
- सुरक्षा उपकरणों (हेलमेट, जैकेट, जूते) के चित्र
- रंग, कागज़, पेंसिल (चित्रकला के लिए)
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | मिट्टी के बर्तन बनाने की प्रक्रिया की समझ | मौखिक/लिखित |
| 2 | ईंटें बनाने और घर बनाने की प्रक्रिया की समझ | मौखिक/लिखित |
| 3 | प्रकृति में नमूनों (पैटर्न) की पहचान | मौखिक/लिखित |
| 4 | मिट्टी के बर्तनों पर नमूने बनाने का कौशल | कला/गतिविधि |
| 5 | सुरक्षा (हेलमेट, जैकेट) के महत्व की समझ | मौखिक/लिखित |
| 6 | रचनात्मक अभिव्यक्ति (दीवार बनाना, चित्रकला) | कला/गतिविधि |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘कुम्हार’, ‘चाक’, ‘भट्टी’, ‘ईंट’, ‘गुल्लक’, ‘नमूना’, ‘हेलमेट’ को क्या कहते हैं। कुम्हार – बच्चों को भारतीय शिल्प परंपरा से जोड़ें – कुम्हार का काम सदियों से चला आ रहा है। मिट्टी तैयार करने की गतिविधि – बच्चों को हाथों-हाथ काम करने का अनुभव दें – मिट्टी को गीला करना, छानना, गूंधना, आकार देना। प्रकृति में नमूने – बच्चों को प्रकृति को करीब से देखने का अवसर दें – वे पत्तियों, पशु-पक्षियों, फूलों पर बने नमूनों को खोजें। दीवार बनाना – बच्चों को ईंटों की जोड़ाई का अनुभव दें – वे समझेंगे कि दीवार को मजबूत बनाने के लिए क्या करना चाहिए। घर – बच्चों को विभिन्न प्रकार के घरों के बारे में बताएँ – मिट्टी, ईंट, लकड़ी – और बताएँ कि क्यों अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग घर बनते हैं (जलवायु, सामग्री की उपलब्धता)। सुरक्षा – बच्चों को सुरक्षा नियमों का महत्व समझाएँ – हेलमेट, सीट बेल्ट, यातायात नियम – ये सब जीवन-रक्षक हैं। साक्षात्कार – बच्चों को समुदाय के लोगों से बात करने और उनके काम के बारे में जानने का अवसर दें – यह सामाजिक कौशल (social skills) विकसित करेगा। “हर वस्तु के निर्माण में श्रम, कला और सुरक्षा शामिल है!” – इस संदेश को बार-बार दोहराएँ।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
