वस्तुओं की दुनिया – कक्षा 3 EVS Unit 4: आस-पास है क्या-क्या? (Vastuon Ki Duniya Class 3 EVS)
पाठ का सारांश
यह अध्याय बच्चों को आस-पास की वस्तुओं से परिचित कराता है – वे किस चीज़ से बनी हैं, कहाँ से आती हैं, और उनके गुण क्या हैं। खुशी की कहानी के माध्यम से बच्चे प्राकृतिक और कृतिम वस्तुओं, पारदर्शी, पारभासी, अपारदर्शी पदार्थों, ठोस, द्रव, गैस की अवधारणाओं, और वस्तुओं की ध्वनि (आकॅस्ट्रा) के बारे में सीखते हैं। वे कक्षा, घर और आस-पास की वस्तुओं का अवलोकन करते हैं और उन्हें वर्गीकृत करते हैं। यह अध्याय बच्चों में अवलोकन, वर्गीकरण और वैज्ञानिक सोच की क्षमता विकसित करता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- प्राकृतिक और कृतिम वस्तुओं में अंतर कर पाएँगे
- पारदर्शी, पारभासी, अपारदर्शी पदार्थों को पहचान पाएँगे
- ठोस, द्रव, गैस की अवधारणा को समझ पाएँगे
- विभिन्न पदार्थों (लकड़ी, धातु, काँच, प्लास्टिक, कपड़ा) से बनी वस्तुओं को पहचान पाएँगे
- वस्तुओं की ध्वनि (टिंग-टिंग, ठक-ठक) में अंतर कर पाएँगे
- वस्तुओं के गुणों (चिकना, खुरदरा, चमकदार, बहने वाला) को पहचान पाएँगे
- ‘बे-मेल जोड़ियाँ’ बनाकर किसी वस्तु के लिए अनुपयुक्त पदार्थ को पहचान पाएँगे
दिन 1 – पाठ का परिचय, कक्षा अवलोकन एवं प्राकृतिक/कृतिम वस्तुएँ
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “आपके आस-पास कौन-कौन सी वस्तुएँ हैं? उनके नाम बताएँ।”
- प्रश्न: “ये वस्तुएँ किस चीज़ से बनी हैं?” (लकड़ी, धातु, प्लास्टिक, काँच, कपड़ा)
- प्रश्न: “क्या आपको पता है कि ये वस्तुएँ कहाँ से आती हैं?”
- प्रश्न: “क्या सभी वस्तुएँ मनुष्यों द्वारा बनाई जाती हैं?”
- पृष्ठ 141-142 के चित्र दिखाएँ – खुशी की कक्षा, मेज, कुर्सी, किताबें, खिड़की, आदि।
- परिचय: “आज हम ‘वस्तुओं की दुनिया’ पाठ पढ़ेंगे, जिसमें हम सीखेंगे कि हमारी वस्तुएँ किस चीज़ से बनी हैं और उनके क्या गुण हैं।”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का वाचन – खुशी की कक्षा (पृष्ठ 141-143):
- शिक्षक पाठ को जिज्ञासा और उत्साह के भाव के साथ पढ़कर सुनाएँ।
- विद्यार्थी बारी-बारी से पैराग्राफ पढ़ें।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- कृतिम (Man-made) – मनुष्यों द्वारा बनाई गई (जैसे – कुर्सी, किताब, पेंसिल)
- प्राकृतिक (Natural) – प्रकृति में पाई जाने वाली (जैसे – पेड़, पशु-पक्षी, पानी, चट्टानें)
- धातु – लोहा, ताँबा, एल्युमीनियम, सोना, चाँदी (Metal)
- लकड़ी – पेड़ों से मिलती है (Wood)
- कब्जा – दरवाजे/खिड़की का जोड़ (Hinge)
- कील – लोहे/धातु की कील (Nail)
- गतिविधि – कक्षा का चित्र (पृष्ठ 142):
- विद्यार्थी अपनी कॉपी में कक्षा का चित्र बनाएँ और वस्तुओं के नाम लिखें।
- वस्तुएँ: मेज, कुर्सी, ब्लैकबोर्ड, किताबें, खिड़की, दरवाजा, पंखा, बल्ब, पेंसिल, रबड़, आदि।
- धातुओं को पहचानिए (पृष्ठ 143):
- विद्यार्थी धातुओं से बनी वस्तुओं की सूची बनाएँ:
- चम्मच, काँटा, कील, कब्जा, पेंसिल शार्पनर, बर्तन, सिक्के, तार, चेन, आभूषण (सोना/चाँदी)
- चर्चा: “आपके आस-पास किन धातुओं को पहचानते हैं? यदि नाम नहीं जानते, तो बड़ों से पूछें।”
- विद्यार्थी धातुओं से बनी वस्तुओं की सूची बनाएँ:
- प्राकृतिक – कृतिम (पृष्ठ 151):
- प्राकृतिक वस्तुएँ – पेड़, नदी, पहाड़, फूल, पशु-पक्षी, पानी, चट्टानें (जीवित और निर्जीव)
- कृतिम वस्तुएँ – कपड़े, जूते, मेज, कुर्सी, किताब, पेंसिल, घर, सड़क
- विद्यार्थी प्रत्येक समूह में 5 वस्तुओं की सूची बनाएँ:
- प्राकृतिक: ________, ________, ________, ________, ________
- कृतिम: ________, ________, ________, ________, ________
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “प्राकृतिक और कृतिम वस्तुओं में क्या अंतर है?”
- गृहकार्य: “अपने घर से 5 प्राकृतिक और 5 कृतिम वस्तुओं की सूची बनाएँ।”
दिन 2 – पारदर्शी, पारभासी, अपारदर्शी पदार्थ
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “प्राकृतिक और कृतिम वस्तुओं के उदाहरण बताएँ।”
- प्रश्न: “क्या आप काँच से आर-पार देख सकते हैं? क्या आप लकड़ी से आर-पार देख सकते हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पारदर्शी, पारभासी, अपारदर्शी (पृष्ठ 143-145):
- पारदर्शी (Transparent) – आर-पार साफ दिखता है (जैसे – काँच, साफ पानी, साफ प्लास्टिक)
- पारभासी (Translucent) – आर-पार धुंधला दिखता है (जैसे – तेल लगा कागज, पतला कपड़ा, रंगीन काँच, बादल)
- अपारदर्शी (Opaque) – आर-पार कुछ भी नहीं दिखता (जैसे – लकड़ी, धातु, पत्थर, किताब, दीवार)
- गतिविधि 3 – वस्तुओं के आर-पार देखना (पृष्ठ 144):
- सामग्री: बोतलें, कागज, कपड़े, बर्तन, काँच, प्लास्टिक
- विद्यार्थी वस्तुओं के आर-पार देखें और तालिका भरें:जिनके आर-पार साफ दिखता हैजिनके आर-पार धुंधला दिखता हैजिनके आर-पार कुछ नहीं दिखताकाँच, साफ प्लास्टिक, पानीतेल लगा कागज, पतला कपड़ालकड़ी, धातु, पत्थर
- गतिविधि 4 – आइए भरें, इस दुनिया में रंग! (पृष्ठ 145):
- विद्यार्थी रंगीन पारदर्शी थैलियों/बोतलों से सफेद कागज़ को देखें:
- नीले रंग से देखने पर कागज़ नीला दिखेगा
- पीले रंग से देखने पर कागज़ पीला दिखेगा
- चर्चा: “विभिन्न रंगों की पारदर्शी वस्तुओं से देखने पर रंग क्यों बदलता है?”
- विद्यार्थी रंगीन पारदर्शी थैलियों/बोतलों से सफेद कागज़ को देखें:
- ‘बातचीत के लिए’ प्रश्न (पृष्ठ 146-147):
- (क) “क्या आपकी खिड़की में काँच है? क्या आप काँच से बाहर देख सकते हैं?”
- (ख) “क्या आप कपड़े/लकड़ी से आर-पार देख सकते हैं?”
- ‘बे-मेल जोड़ियाँ’ (पृष्ठ 148-149):
- छाता – कागज (कागज़ बारिश में गीला होकर फट जाएगा)
- दीवार – पानी (पानी से दीवार नहीं बन सकती, क्योंकि वह गिर जाएगी)
- कुर्सी – कपड़ा (कपड़ा नरम है, कुर्सी नहीं बन सकती)
- जूते – कागज़ (कागज़ फट जाएगा, जूते नहीं बन सकते)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “पारदर्शी, पारभासी और अपारदर्शी में क्या अंतर है?”
- गृहकार्य: “अपने घर से 3 पारदर्शी, 3 पारभासी और 3 अपारदर्शी वस्तुओं की सूची बनाएँ।”
दिन 3 – ठोस, द्रव, गैस एवं ध्वनि
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “पारदर्शी, पारभासी, अपारदर्शी वस्तुओं के उदाहरण बताएँ।”
- प्रश्न: “पानी का कोई आकार होता है? हवा का कोई आकार होता है? पत्थर का कोई आकार होता है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ठोस, द्रव, गैस (पृष्ठ 149):
- ठोस (Solid) – जिनका एक निश्चित आकार होता है (जैसे – पत्थर, लकड़ी, चम्मच, किताब, मेज)
- द्रव (Liquid) – जो बहते हैं, कोई निश्चित आकार नहीं (जैसे – पानी, दूध, तेल, शहद, स्याही)
- गैस (Gas) – जो बहती हैं, किसी भी बर्तन में नहीं रुकती (जैसे – हवा, धुआँ, भाप, ऑक्सीजन)
- गतिविधि – समूह बनाएँ (पृष्ठ 150):
- वस्तुएँ: स्याही, पत्थर, धुआँ, बर्फ, भाप, चम्मच, शहद, बोतल, बैग, पानी
- ठोस – पत्थर, बर्फ, चम्मच, बोतल, बैग
- द्रव – स्याही, शहद, पानी
- गैस – धुआँ, भाप
- विद्यार्थी अपने मन से प्रत्येक श्रेणी में 3-3 वस्तुएँ और जोड़ें:
- ठोस: ________, ________, ________
- द्रव: ________, ________, ________
- गैस: ________, ________, ________
- गतिविधि 5 – ध्वनि (आकॅस्ट्रा) (पृष्ठ 148):
- विद्यार्थी धातु की चम्मच से अलग-अलग पदार्थों (लकड़ी, धातु, प्लास्टिक, कपड़ा, काँच) पर धीरे से मारें।
- ध्वनियाँ सुनें और शब्दों में व्यक्त करें:
- टिंग-टिंग (धातु)
- ठक-ठक (लकड़ी)
- डब-डब (प्लास्टिक)
- झन-झन (काँच)
- विद्यार्थी ताल बनाएँ: “टिंग-टिंग, ठक-ठक टिंग-ठक, टिंग-ठक!”
- चर्चा – क्या यह मुड़ गई? (पृष्ठ 148):
- “क्या कपड़े या रबड़ से मेज बनाई जा सकती है?” (नहीं – कपड़ा नरम/लचीला, मेज के लिए कठोर चाहिए)
- लचीला (Flexible) – जो मुड़ सकता है (जैसे – कपड़ा, रबड़, कागज़)
- कठोर (Rigid) – जो नहीं मुड़ सकता (जैसे – लकड़ी, धातु, पत्थर)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “ठोस, द्रव और गैस में क्या अंतर है?”
- गृहकार्य: “अपने घर से 5 ठोस, 5 द्रव और 2 गैस के नाम लिखें।”
दिन 4 – रचनात्मक गतिविधि, चित्र, मिलान एवं विस्तार
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “ठोस, द्रव, गैस के उदाहरण बताएँ।”
- प्रश्न: “क्या आप बंद आँखों से किसी पदार्थ को पहचान सकते हैं?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- ‘आइए, मंथन करें!’ (पृष्ठ 152):
- (क) लिखिए: “हमारे आस-पास के परिवेश में उपलब्ध वस्तुएँ विभिन्न पदार्थों से बनी होती हैं। ऐसे तीन पदार्थों के नाम लिखिए।”
- लकड़ी, धातु, काँच, प्लास्टिक, कपड़ा, रबड़ (कोई तीन)
- (ख) चर्चा: “आपको एक चमकीली चम्मच मिली है – आप नहीं जानते कि यह धातु की है या पेंट की हुई है। आप कैसे पता लगाएँगे?” (चुम्बक से जाँच, खरोंच कर देखना, गर्म करना, जौहरी से पूछना)
- (ग) चित्र बनाएँ: तीन प्राकृतिक और तीन कृतिम चीज़ों के चित्र बनाएँ।
- (क) लिखिए: “हमारे आस-पास के परिवेश में उपलब्ध वस्तुएँ विभिन्न पदार्थों से बनी होती हैं। ऐसे तीन पदार्थों के नाम लिखिए।”
- गतिविधि – मिलान (पृष्ठ 152):
- विद्यार्थी सही मिलान करें:
- पारदर्शी – चश्मे में लगा काँच
- पारभासी – कागज से बना लैंप शेड
- अपारदर्शी – थाली
- विद्यार्थी सही मिलान करें:
- गतिविधि – ‘पता लगाएँ’ (पृष्ठ 146-147):
- (क) “अपने दादा-दादी/नाना-नानी से पूछें – जब वे छोटे थे, तब भी ये वस्तुएँ इन्हीं पदार्थों से बनी थीं?”
- (ख) “क्या अब कुछ ऐसे नए पदार्थ आ गए हैं जो पहले नहीं थे?” (प्लास्टिक, फाइबर, सिलिकॉन)
- (ग) “क्या ऐसे पदार्थ हैं जो उनके बचपन में थे, पर अब प्रचलन में नहीं हैं?” (ताँबे/पीतल के बर्तन, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी के खिलौने)
- गतिविधि – ‘सोचिए और बताइए’ (पृष्ठ 147-148):
- “आपका चम्मच किससे बना है?” (धातु, प्लास्टिक, लकड़ी)
- विद्यार्थी चम्मच के लिए उपयुक्त शब्द चुनें:
- चिकना (Smooth) – धातु/प्लास्टिक
- खुरदरा (Rough) – लकड़ी
- चमकदार (Shiny) – धातु
- चमकहीन (Dull) – प्लास्टिक/लकड़ी
- छूने में ठंडा (Cold to touch) – धातु
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों के चित्रों और मिलान कार्य की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: “अपनी कॉपी में 5 प्राकृतिक और 5 कृतिम वस्तुओं के चित्र बनाएँ और रंग भरें।”
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पाठ का सामूहिक वाचन (मुख्य बिंदु)।
- विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए प्राकृतिक/कृतिम वस्तुओं के चित्रों का प्रदर्शन।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- प्राकृतिक और कृतिम में क्या अंतर है?
- पारदर्शी, पारभासी, अपारदर्शी – उदाहरण सहित बताएँ।
- ठोस, द्रव, गैस – उदाहरण सहित बताएँ।
- धातु की चम्मच से लकड़ी पर मारने पर कैसी ध्वनि होती है? (ठक-ठक)
- किस पदार्थ से दीवार नहीं बन सकती? (पानी – क्योंकि वह बहता है)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) ‘वस्तुओं की दुनिया’ पाठ से आपने क्या सीखा? (कोई दो बातें)
- (ख) प्राकृतिक और कृतिम वस्तुओं में अंतर लिखिए और दो-दो उदाहरण दीजिए।
- (ग) पारदर्शी, पारभासी और अपारदर्शी पदार्थों की परिभाषा लिखिए और एक-एक उदाहरण दीजिए।
- (घ) ठोस, द्रव और गैस के दो-दो उदाहरण लिखिए।
- (ङ) ‘बे-मेल जोड़ी’ का एक उदाहरण लिखिए और बताइए कि वह क्यों अनुपयुक्त है।
- समूह चर्चा:
- “क्या आपको लगता है कि हमें प्लास्टिक का उपयोग कम करना चाहिए? क्यों?” (हाँ – पर्यावरण के लिए हानिकारक, सड़ता नहीं)
- “हम प्राकृतिक पदार्थों (लकड़ी, मिट्टी, कपास) का अधिक उपयोग क्यों करें?” (पर्यावरण-अनुकूल, सड़ने वाले)
- गतिविधि (पृष्ठ 152):
- विद्यार्थी तीन प्राकृतिक और तीन कृतिम वस्तुओं के चित्र बनाएँ (पुनरावृत्ति)।
- विद्यार्थी ‘बे-मेल जोड़ियाँ’ बनाएँ (जैसे – कुर्सी-पानी, छाता-कागज़)।
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘वस्तुओं की दुनिया’ पाठ ने हमें सिखाया कि हमारे आस-पास की वस्तुएँ विभिन्न पदार्थों से बनी हैं – लकड़ी, धातु, काँच, प्लास्टिक, कपड़ा, रबड़। प्राकृतिक वस्तुएँ प्रकृति में पाई जाती हैं (पेड़, पानी, पत्थर), जबकि कृतिम वस्तुएँ मनुष्यों द्वारा बनाई जाती हैं (कुर्सी, किताब, पेंसिल)। पारदर्शी (काँच) – आर-पार साफ दिखता है; पारभासी (पतला कपड़ा) – धुंधला दिखता है; अपारदर्शी (लकड़ी) – कुछ नहीं दिखता। ठोस (पत्थर) – निश्चित आकार; द्रव (पानी) – बहता है; गैस (हवा) – किसी बर्तन में नहीं रुकती। विभिन्न पदार्थों से अलग-अलग ध्वनियाँ निकलती हैं – धातु से टिंग-टिंग, लकड़ी से ठक-ठक। ‘बे-मेल जोड़ियाँ’ – हमें यह समझाती हैं कि किसी वस्तु के लिए सही पदार्थ का चुनाव क्यों ज़रूरी है। “हर वस्तु अपने पदार्थ से बनी है – हमें उनके गुणों को समझना चाहिए!” “
- अगले पाठ ‘कैसे बनीं ये वस्तुएँ?’ का संक्षिप्त परिचय – “अब हम सीखेंगे कि कुम्हार मिट्टी से बर्तन कैसे बनाता है, ईंटें कैसे बनती हैं, और घर कैसे बनते हैं।”
शिक्षण सहायक सामग्री
- प्राकृतिक और कृतिम वस्तुओं के चित्र
- पारदर्शी, पारभासी, अपारदर्शी वस्तुओं के नमूने (काँच, कपड़ा, लकड़ी, प्लास्टिक)
- धातु (चम्मच, कील), लकड़ी (डंडा), कपड़ा, काँच, प्लास्टिक (ध्वनि गतिविधि के लिए)
- ठोस, द्रव, गैस के चित्र/उदाहरण
- रंगीन पारदर्शी थैलियाँ/बोतलें (गतिविधि 4 के लिए)
- रंग, कागज़, पेंसिल (चित्रकला के लिए)
- ‘बे-मेल जोड़ियाँ’ कार्ड
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | प्राकृतिक और कृतिम वस्तुओं में अंतर की समझ | मौखिक/लिखित |
| 2 | पारदर्शी, पारभासी, अपारदर्शी पदार्थों की पहचान | गतिविधि/मौखिक/लिखित |
| 3 | ठोस, द्रव, गैस की अवधारणा की समझ | मौखिक/लिखित |
| 4 | विभिन्न पदार्थों (लकड़ी, धातु, काँच, प्लास्टिक) से बनी वस्तुओं की पहचान | मौखिक/लिखित |
| 5 | वस्तुओं की ध्वनि में अंतर करने की क्षमता | गतिविधि/मौखिक |
| 6 | ‘बे-मेल जोड़ियाँ’ बनाने और उनका कारण बताने की क्षमता | लिखित/मौखिक |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘कृतिम’, ‘प्राकृतिक’, ‘पारदर्शी’, ‘ठोस’, ‘द्रव’, ‘गैस’ को क्या कहते हैं। प्राकृतिक बनाम कृतिम – बच्चों को समझाएँ कि प्राकृतिक वस्तुएँ प्रकृति में पाई जाती हैं (चाहे जीवित हों या निर्जीव), जबकि कृतिम वस्तुएँ मनुष्यों द्वारा बनाई जाती हैं। पारदर्शी, पारभासी, अपारदर्शी – बच्चों को व्यावहारिक अनुभव दें – वे वस्तुओं के आर-पार देखें और अनुभव करें। ठोस, द्रव, गैस – बच्चों को समझाएँ कि ठोस का आकार निश्चित होता है, द्रव बहता है, और गैस किसी भी बर्तन में नहीं रुकती। ध्वनि – बच्चों को अलग-अलग पदार्थों से अलग-अलग ध्वनियाँ निकलने का अनुभव दें – यह उनके श्रवण कौशल (listening skills) को विकसित करेगा। ‘बे-मेल जोड़ियाँ’ – बच्चों को तार्किक सोच (logical thinking) विकसित करने में सहायक है – वे सोचेंगे कि कौन-सा पदार्थ किस वस्तु के लिए उपयुक्त है और क्यों। “हर वस्तु अपने पदार्थ से बनी है – हमें उनके गुणों को समझना चाहिए!” – इस संदेश को बार-बार दोहराएँ।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
