हमारा आकाश – कक्षा 4 EVS Unit 5: हमारा पर्यावरण (Hamara Aakaash Class 4 EVS)
पाठ का सारांश
यह अध्याय बच्चों को आकाश की अद्भुत दुनिया से परिचित कराता है। इसमें सुबह, दोपहर और रात के आकाश में होने वाले परिवर्तनों, सूर्य की यात्रा (पूर्व से पश्चिम), छायाओं के बनने की प्रक्रिया, सूर्यघड़ी (जंतर-मंतर), चंद्रमा के आकार (बढ़ना-घटना – अमावस्या, पूर्णिमा), तारों के पैटर्न, और त्योहारों (दीपावली, रक्षाबंधन, ईद, गुरु पूर्णिमा) का चंद्रमा से संबंध के बारे में बताया गया है। पाठ में छाया-कठपुतली और छाया-निर्माण की गतिविधियाँ भी शामिल हैं। चंद्रयान मिशन (23 अगस्त 2023 – चंद्रमा पर विक्रम लैंडर की सफल लैंडिंग) का उल्लेख भी है। यह अध्याय बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, अवलोकन क्षमता और प्राकृतिक घटनाओं के प्रति रुचि विकसित करता है।
शिक्षण-अधिगम परिणाम
इस पाठ को पढ़ाने के बाद विद्यार्थी:
- सुबह, दोपहर और रात के आकाश में अंतर कर पाएँगे
- सूर्य की गति (पूर्व से पश्चिम) और उसके प्रभाव (छाया) को समझ पाएँगे
- छायाएँ कैसे बनती हैं, इसकी समझ विकसित कर पाएँगे
- छायाओं की लंबाई (सुबह-लंबी, दोपहर-छोटी, शाम-लंबी) में परिवर्तन को समझ पाएँगे
- सूर्यघड़ी और जंतर-मंतर (सम्राट-यंत्र) के बारे में जान पाएँगे
- चंद्रमा के आकार में परिवर्तन (अमावस्या, पूर्णिमा) को समझ पाएँगे
- चंद्रमा से जुड़े त्योहारों (ईद, रक्षाबंधन, दीपावली, गुरु पूर्णिमा) को पहचान पाएँगे
- चंद्रयान मिशन (23 अगस्त 2023) के बारे में जान पाएँगे
- छाया-कठपुतली बना पाएँगे
- आकाश पर एक कविता या पहेली बना पाएँगे
दिन 1 – पाठ का परिचय, सुबह/दोपहर/रात का आकाश
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- प्रश्न: “आप सुबह आकाश में क्या देखते हैं? दोपहर में क्या दिखता है? रात में क्या दिखता है?”
- प्रश्न: “सूर्य कब उगता है? कब डूबता है?”
- प्रश्न: “क्या आपने कभी चाँद को देखा है? वह हर रात एक जैसा दिखता है?”
- परिचय: “आज हम ‘हमारा आकाश’ पाठ पढ़ेंगे, जिसमें हम सीखेंगे कि दिन और रात में आकाश कैसे बदलता है, छायाएँ कैसे बनती हैं, और चाँद का आकार क्यों बदलता है।”
- पृष्ठ 168-169 के चित्र दिखाएँ – सुबह, दोपहर, रात का आकाश, छायाएँ।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- पाठ का वाचन – आकाश के छायाचित्र (पृष्ठ 168-169):
- शिक्षक पाठ पढ़कर सुनाएँ।
- नए शब्दों/अवधारणाओं की व्याख्या:
- आकाश – ऊपर का नीला गगन (Sky)
- सूर्योदय – सूर्य का उगना (Sunrise)
- सूर्यास्त – सूर्य का डूबना (Sunset)
- छाया – प्रकाश के सामने आने पर बनने वाला काला चित्र (Shadow)
- गतिविधि – चित्र बनाएँ (पृष्ठ 168):
- विद्यार्थी सुबह, दोपहर और रात के आकाश के चित्र बनाएँ:
- सुबह का आकाश – नारंगी/लाल रंग, सूर्य उगता हुआ, पक्षी उड़ते हुए
- दोपहर का आकाश – चमकीला नीला, तेज़ धूप
- रात का आकाश – काला/गहरा नीला, चाँद, तारे
- विद्यार्थी सुबह, दोपहर और रात के आकाश के चित्र बनाएँ:
- तालिका पूर्ति (पृष्ठ 169):सुबह का आकाशदोपहर का आकाशरात का आकाशनारंगी/लाल रंगतेज धूपचाँद और तारेसूर्य उगता हैसूर्य सिर के ऊपरअंधेरापक्षी चहचहाते हैंगर्मीठंडक(अन्य)(अन्य)(अन्य)
- चर्चा (पृष्ठ 169-170):
- सूर्योदय के समय – आकाश कैसा दिखता है? (नारंगी), पक्षी क्या करते हैं? (चहचहाना, उड़ना), घर पर क्या-क्या परिवर्तन होते हैं? (दीपक बुझाना, उठना, खाना)
- सूर्यास्त के समय – आकाश कैसा दिखता है? (नारंगी/लाल), पक्षी क्या करते हैं? (घोंसले में लौटना), घर पर क्या-क्या परिवर्तन होते हैं? (दीपक जलाना, रात का भोजन)
- चर्चा (पृष्ठ 170):
- “क्या आपने दिन के अलग-अलग समय पर जंतुओं और पौधों की गतिविधियों में परिवर्तन देखा है?” (सुबह – पक्षी चहचहाते, फूल खिलते; रात – उल्लू जागता, रात्रिचर जीव सक्रिय)
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “दिन और रात में आकाश कैसे बदलता है?”
- गृहकार्य: “सुबह, दोपहर और रात के आकाश का चित्र बनाएँ और रंग भरें।”
दिन 2 – सूर्य की यात्रा एवं छायाएँ
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “सुबह, दोपहर और रात के आकाश में क्या अंतर है?”
- प्रश्न: “क्या आपने कभी अपनी छाया देखी है? वह कब बड़ी होती है और कब छोटी?”
- प्रश्न: “सूर्य आकाश में कहाँ से कहाँ तक जाता है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- सूर्य की यात्रा (पृष्ठ 170):
- सूर्योदय – सुबह पूर्व दिशा में उगता है
- दोपहर – सिर के ऊपर आ जाता है
- सूर्यास्त – शाम को पश्चिम दिशा में डूबता है
- सूर्य – आकाश में सबसे चमकीला तारा
- छायाएँ (पृष्ठ 171-174):
- चित्र अवलोकन (पृष्ठ 171):
- सुबह – छाया लंबी (पश्चिम दिशा में)
- दोपहर – छाया छोटी (सीधे नीचे)
- शाम – छाया लंबी (पूर्व दिशा में – सुबह के विपरीत)
- कारण: सूर्य की स्थिति बदलने से छाया की दिशा और लंबाई बदलती है।
- चित्र अवलोकन (पृष्ठ 171):
- गतिविधि – छाया प्रयोग (पृष्ठ 172):
- सामग्री: टॉर्च, छड़ी/पेंसिल
- विधि:
- कमरे में अंधेरा करें, टॉर्च जलाएँ और छड़ी पर प्रकाश डालें।
- छड़ी को आगे-पीछे करें – छाया बड़ी/छोटी होती है।
- टॉर्च की दिशा बदलें – छाया की दिशा बदलती है।
- निष्कर्ष: यदि वस्तु प्रकाश के स्रोत के समीप है तो छाया बड़ी होती है, दूर होने पर छोटी। प्रकाश की दिशा बदलने से छाया की दिशा बदलती है।
- क्या आप जानते हैं? (पृष्ठ 174):
- सूर्यघड़ी – सूर्य की छाया से समय बताने का उपकरण
- जंतर-मंतर – जयपुर, दिल्ली, उज्जैन, वाराणसी, मथुरा में – राजा सवाई जयसिंह ने बनवाया
- सम्राट-यंत्र – सूर्यघड़ी (छाया से सटीक समय बताती है)
- गतिविधि – चित्र बनाएँ (पृष्ठ 173):
- विद्यार्थी प्रातः, दोपहर और सायं के समय सूर्य की स्थिति और छाया को चित्रित करें:
- प्रातः – पूर्व में सूर्य, पश्चिम में लंबी छाया
- दोपहर – सिर के ऊपर सूर्य, छोटी छाया
- सायं – पश्चिम में सूर्य, पूर्व में लंबी छाया
- विद्यार्थी प्रातः, दोपहर और सायं के समय सूर्य की स्थिति और छाया को चित्रित करें:
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “सुबह और शाम की छाया में क्या अंतर है?” (सुबह – पश्चिम में, शाम – पूर्व में, दोनों लंबी)
- गृहकार्य: “अपनी छाया को सुबह और दोपहर में देखें – क्या अंतर है?”
दिन 3 – रात का आकाश, तारे, चंद्रमा एवं त्योहार
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “छायाएँ क्यों बनती हैं? सुबह-शाम छाया कैसी होती है?”
- प्रश्न: “रात के आकाश में क्या-क्या दिखाई देता है?” (चाँद, तारे)
- प्रश्न: “क्या चाँद हर रात एक जैसा दिखता है? क्या आपने कभी अमावस्या या पूर्णिमा देखी है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- रात का आकाश – तारे और चंद्रमा (पृष्ठ 175-176):
- तारे – आकाश में हजारों टिमटिमाते तारे
- तारों के पैटर्न (तारामंडल) – विद्यार्थी अपने देखे गए तारों के पैटर्न का चित्र बनाएँ (पृष्ठ 175)
- चंद्रमा – रात में सबसे बड़ा दिखने वाला तारा
- चंद्रमा के आकार में परिवर्तन (पृष्ठ 176-177):
- पूर्णिमा (पूर्ण चंद्रमा) – 15वीं रात, पूरा गोल
- अमावस्या – चाँद बिल्कुल दिखाई नहीं देता
- अर्धचंद्र – ‘C’ के आकार जैसा
- चाँद का आकार – हर रात बदलता है, 15 दिनों में पूर्णिमा से अमावस्या तक
- गतिविधि – चंद्रमा के चित्र (पृष्ठ 176):
- विद्यार्थी अलग-अलग रातों में देखे गए चंद्रमा की आकृतियों के चित्र बनाएँ:
- अमावस्या – कोई चाँद नहीं
- अर्धचंद्र – स्लाइस के आकार
- पूर्णिमा – पूरा गोल चाँद
- विद्यार्थी अलग-अलग रातों में देखे गए चंद्रमा की आकृतियों के चित्र बनाएँ:
- चर्चा (पृष्ठ 176):
- “क्या चंद्रमा के आकार में परिवर्तन का कोई पैटर्न है?” (हाँ – हर 15 दिन में बदलता है)
- “क्या कभी ऐसा भी होता है कि चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता?” (हाँ – अमावस्या)
- चंद्रमा से जुड़े त्योहार (पृष्ठ 177-178):
- दीपावली – अमावस्या (चाँद नहीं दिखता)
- रक्षाबंधन – पूर्णिमा
- गुरु पूर्णिमा – पूर्णिमा
- बुद्ध पूर्णिमा – पूर्णिमा
- ईद – नए चाँद के बाद पहली रात (अर्धचंद्र)
- ‘लिखिए’ (पृष्ठ 178):
- “क्या आप अपने परिवार या समुदाय में सूर्य या चंद्रमा से संबंधित कोई पर्व मनाते हैं?” (छठ पूजा – सूर्य; ईद, रक्षाबंधन – चाँद)
- क्या आप जानते हैं? (पृष्ठ 178):
- चंद्रयान मिशन – 23 अगस्त 2023 – विक्रम लैंडर चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतरा – भारत की बड़ी उपलब्धि
समापन (5 मिनट)
- प्रश्न: “पूर्णिमा और अमावस्या में क्या अंतर है?”
- गृहकार्य: “अगले 15 दिनों तक रात में चाँद को देखें और उसके आकार का चित्र बनाएँ।”
दिन 4 – छाया-कठपुतली, रचनात्मक गतिविधि एवं कविता
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पिछले दिन की पुनरावृत्ति – “पूर्णिमा और अमावस्या क्या हैं?”
- प्रश्न: “क्या आप छायाओं से आकृतियाँ बना सकते हैं? क्या आपने कभी छाया-कठपुतली देखी है?”
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- छाया-कठपुतली (पृष्ठ 174-175):
- शिक्षक प्रदर्शन – अपने हाथों से छाया-कठपुतली (हाथ की छाया) बनाएँ:
- हाथी, कुत्ता, खरगोश, मोर, आदि
- गतिविधि – विद्यार्थी अपनी हाथों की छाया से अलग-अलग आकृतियाँ बनाने का प्रयास करें (टॉर्च/प्रकाश के सामने)।
- छाया-कठपुतली प्रदर्शन – विद्यार्थी छोटे-छोटे समूहों में छाया-कठपुतली का प्रदर्शन करें।
- शिक्षक प्रदर्शन – अपने हाथों से छाया-कठपुतली (हाथ की छाया) बनाएँ:
- गतिविधि (पृष्ठ 174):
- “छायाओं से अलग-अलग आकृतियाँ बनाएँ और अपने मित्रों को दिखाएँ।”
- भारत में छाया-कठपुतली – लंबे समय से प्रचलित एक कला
- गतिविधि (पृष्ठ 179):
- (क) आकाश पर कविता – “आकाश की सुंदरता से प्रेरित होकर एक कविता लिखिए।”
- उदाहरण:
“नीला आकाश, सूरज चमके,
चाँद-तारे रात में दमके।
छायाएँ बनतीं, सुबह-शाम,
हमारा आकाश है अनमोल।”
- उदाहरण:
- (ख) पहेली – “रंग में एक, आकार अनेक, उजाले में दिखे जैसे, रहस्य कोई विशेष।” → उत्तर: छाया
- (क) आकाश पर कविता – “आकाश की सुंदरता से प्रेरित होकर एक कविता लिखिए।”
- ‘आइए विचार करें’ (पृष्ठ 178-179):
- (क) “दिन और रात में दो अंतर बताइए।” (दिन – सूर्य, रोशनी, गरमी; रात – चाँद, अंधेरा, ठंडक)
- (ख) “प्रातःकालीन आकाश और सायंकालीन आकाश में अंतर।” (प्रातः – पूर्व में नारंगी, पक्षी चहचहाते; सायं – पश्चिम में लाल, पक्षी वापस लौटते)
- (ग) “दिन और रात के समय हमारी गतिविधियों में अंतर।” (दिन – पढ़ना, खेलना, काम; रात – आराम, सोना)
- (घ) “दिन और रात के समय जंतुओं की गतिविधियों में अंतर।” (दिन – पक्षी, तितलियाँ सक्रिय; रात – उल्लू, चमगादड़ सक्रिय)
- गतिविधि (पृष्ठ 179):
- (क) “दिन के समय सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर चलता हुआ प्रतीत होता है – इस बारे में मीरा क्या प्रश्न पूछ सकती है?” (जैसे – “सूर्य क्यों चलता हुआ दिखता है? क्या सूर्य सच में चलता है?”)
- (ख) “सुबह और दोपहर में छाया की दिशा और लंबाई अलग-अलग क्यों होती है?” (सूर्य की स्थिति बदलने के कारण)
समापन (5 मिनट)
- विद्यार्थियों की कविताओं और छाया-कठपुतली की प्रशंसा करें।
- गृहकार्य: “घर पर छाया-कठपुतली बनाएँ और परिवार को दिखाएँ।”
दिन 5 – पुनरावृत्ति, मूल्यांकन एवं समापन
अवधि: 35-40 मिनट
प्रारंभिक गतिविधि (5-7 मिनट)
- पाठ का सामूहिक वाचन (मुख्य बिंदु)।
- विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई कविताओं और चंद्रमा के चित्रों का प्रदर्शन।
मुख्य गतिविधि (20-25 मिनट)
- मौखिक प्रश्नोत्तरी:
- सुबह, दोपहर और रात के आकाश में क्या अंतर है?
- सूर्य किस दिशा से उगता है? (पूर्व)
- सूर्य किस दिशा में डूबता है? (पश्चिम)
- सुबह छाया कैसी होती है? (लंबी, पश्चिम में)
- दोपहर में छाया कैसी होती है? (छोटी, सीधे नीचे)
- पूर्णिमा पर चाँद कैसा दिखता है? (पूरा गोल)
- अमावस्या पर चाँद कैसा दिखता है? (दिखाई नहीं देता)
- छाया-कठपुतली क्या है?
- चंद्रयान-3 कब चाँद पर उतरा? (23 अगस्त 2023)
- लिखित मूल्यांकन:
- (क) सुबह, दोपहर और रात के आकाश में कोई दो अंतर लिखिए।
- (ख) सुबह और दोपहर में छाया की लंबाई में क्या अंतर है? क्यों?
- (ग) चंद्रमा के दो रूपों (पूर्णिमा और अमावस्या) का चित्र बनाइए और नाम लिखिए।
- (घ) चंद्रमा से जुड़े किन्हीं दो त्योहारों के नाम लिखिए।
- (ङ) छाया के बारे में एक पहेली लिखिए।
- (च) चंद्रयान मिशन के बारे में आप क्या जानते हैं? (कोई दो बातें)
- समूह चर्चा:
- “क्या आपको लगता है कि प्राचीन लोग छाया से समय बता सकते थे?” (हाँ – सूर्यघड़ी से)
- “हमें आकाश और उसमें होने वाले परिवर्तनों का निरीक्षण क्यों करना चाहिए?” (प्रकृति को समझने, विज्ञान सीखने, त्योहारों की तिथि जानने)
- गतिविधि (पृष्ठ 179):
- विद्यार्थी “आकाश” पर अपनी कविता या पहेली साझा करें।
समापन (5 मिनट)
- पाठ का सारांश – “‘हमारा आकाश’ पाठ ने हमें आकाश की अद्भुत दुनिया से परिचित कराया। हमने सीखा कि सूर्य पूर्व से उगता है और पश्चिम में डूबता है – इससे छायाएँ बनती हैं – सुबह लंबी, दोपहर छोटी, शाम लंबी। सूर्यघड़ी और जंतर-मंतर – छाया से समय बताने वाले प्राचीन उपकरण हैं। चंद्रमा का आकार हर रात बदलता है – पूर्णिमा (पूरा गोल) और अमावस्या (दिखाई नहीं देता) – दो मुख्य रूप। चंद्रयान-3 (23 अगस्त 2023) – भारत की बड़ी अंतरिक्ष उपलब्धि – चाँद पर विक्रम लैंडर की सफल लैंडिंग। छाया-कठपुतली – हाथों से बनाई जाने वाली एक पारंपरिक कला। आकाश – हमें हर दिन कुछ नया सिखाता है – हमें उसका निरीक्षण करना चाहिए और प्रश्न पूछने चाहिए। “आकाश देखो, सोचो, समझो – यही है विज्ञान का आधार!” “
- सत्र समाप्ति – विद्यार्थियों को पूरे वर्ष के EVS पाठ्यक्रम के लिए बधाई दें और उन्हें प्रकृति, समुदाय, स्वास्थ्य, वस्तुओं और पर्यावरण के बारे में सीखने के लिए प्रोत्साहित करें।
शिक्षण सहायक सामग्री
- सुबह, दोपहर, रात के आकाश के चित्र
- सूर्योदय, सूर्यास्त के चित्र
- छायाओं (सुबह, दोपहर, शाम) के चित्र
- टॉर्च, छड़ी/पेंसिल (छाया प्रयोग के लिए)
- सूर्यघड़ी/जंतर-मंतर के चित्र
- चंद्रमा के विभिन्न आकारों (अमावस्या, अर्धचंद्र, पूर्णिमा) के चित्र
- चंद्रयान-3 (विक्रम लैंडर) के चित्र
- रंग, कागज़, पेंसिल (चित्रकला के लिए)
- छाया-कठपुतली के लिए टॉर्च (या प्राकृतिक प्रकाश)
मूल्यांकन के सूचक
| क्रम | मूल्यांकन बिंदु | साधन |
|---|---|---|
| 1 | सुबह, दोपहर, रात के आकाश में अंतर की समझ | मौखिक/लिखित |
| 2 | सूर्य की गति (पूर्व-पश्चिम) और छाया पर प्रभाव की समझ | मौखिक/प्रयोग |
| 3 | छायाओं की लंबाई में परिवर्तन (सुबह-छोटी/लंबी) की समझ | मौखिक/लिखित |
| 4 | पूर्णिमा, अमावस्या और चंद्रमा के अन्य रूपों की पहचान | चित्र/मौखिक |
| 5 | चंद्रमा से जुड़े त्योहारों की पहचान | मौखिक/लिखित |
| 6 | चंद्रयान मिशन (23 अगस्त 2023) की समझ | मौखिक/लिखित |
| 7 | रचनात्मक अभिव्यक्ति (कविता, पहेली, छाया-कठपुतली) | कला/लिखित/गतिविधि |
नोट: बहुभाषिकता को बढ़ावा दें – विद्यार्थियों से पूछें कि उनकी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा में ‘आकाश’, ‘सूर्य’, ‘चंद्रमा’, ‘तारे’, ‘छाया’ को क्या कहते हैं। छाया प्रयोग – बच्चों को वैज्ञानिक सोच का अनुभव दें – वे पूर्वानुमान (prediction) लगाएँ, प्रयोग करें और निष्कर्ष निकालें। सूर्यघड़ी – बच्चों को प्राचीन भारतीय विज्ञान से जोड़ें – बताएँ कि जंतर-मंतर (जयपुर, दिल्ली) अभी भी खड़ा है और छाया से समय बताता है। चंद्रयान-3 – बच्चों में राष्ट्रीय गौरव का भाव जगाएँ – 23 अगस्त 2023 भारत के लिए एक ऐतिहासिक दिन था। छाया-कठपुतली – बच्चों को पारंपरिक कला से परिचित कराएँ – यह एक प्राचीन भारतीय मनोरंजन कला है। तारामंडल – बच्चों को बताएँ कि तारों के पैटर्न (नक्षत्र) को देखकर प्राचीन लोग दिशा और समय का पता लगाते थे। त्योहार और खगोल – बच्चों को समझाएँ कि कई त्योहार सूर्य/चंद्रमा की स्थिति पर आधारित हैं – यह संस्कृति और विज्ञान का अद्भुत मेल है। “आकाश देखो, सोचो, समझो – यही है विज्ञान का आधार!” – इस नारे को बार-बार दोहराएँ।

Mani Sir एक अनुभवी शिक्षक, शिक्षा मार्गदर्शक और डिजिटल शिक्षा सामग्री निर्माता हैं। वे प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालयी शिक्षा के लिए सरल, तथ्यपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। उनका उद्देश्य कठिन विषयों को आसान भाषा में समझाकर विद्यार्थियों की सफलता सुनिश्चित करना है।
वे विशेष रूप से Prayas आवासीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVST), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), SCERT, CG Board, CTET, तथा अन्य शैक्षिक परीक्षाओं के लिए नोट्स, मॉडल प्रश्नपत्र, MCQ, माइंड मैप, चार्ट, अध्ययन सामग्री और वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं।
