1️⃣ अधिगम सिद्धान्तों का अर्थ
- अधिगम सिद्धान्त वे वैज्ञानिक व्याख्याएँ हैं जो यह बताती हैं कि सीखना कैसे होता है, किन परिस्थितियों में होता है और किन कारकों से प्रभावित होता है।
2️⃣ अधिगम सिद्धान्तों का प्रमुख वर्गीकरण
अधिगम सिद्धान्तों को सामान्यतः चार मुख्य वर्गों में बाँटा जाता है—
🔶 I. व्यवहारवादी अधिगम सिद्धान्त (Behavioristic Theories)
🔹 मूल आधार
- अधिगम को उद्दीपन–अनुक्रिया (S–R) के रूप में समझाते हैं।
- आंतरिक मानसिक प्रक्रियाओं पर कम बल।
🔹 प्रमुख सिद्धान्त एवं प्रतिपादक
- प्रयत्न–त्रुटि सिद्धान्त – एडवर्ड थॉर्नडाइक
- शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धान्त – इवान पावलॉव
- क्रिया-प्रसूत अनुबंधन सिद्धान्त – बी. एफ. स्किनर
🔹 मुख्य विशेषताएँ
- अभ्यास एवं पुनर्बलन पर बल
- बाह्य व्यवहार में परिवर्तन
- पशु प्रयोगों पर आधारित
🔶 II. संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्त (Cognitive Theories)
🔹 मूल आधार
- अधिगम एक मानसिक एवं बौद्धिक प्रक्रिया है।
- सोच, समझ, अंतर्दृष्टि, स्मृति पर बल।
🔹 प्रमुख सिद्धान्त एवं प्रतिपादक
- अंतर्दृष्टि (सूझ) सिद्धान्त – वोल्फगैंग कोहलर
- संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त – जीन पियाजे
🔹 मुख्य विशेषताएँ
- समस्या-समाधान पर बल
- संपूर्ण परिस्थिति का बोध
- अर्थपूर्ण अधिगम
🔶 III. सामाजिक अधिगम सिद्धान्त (Social Learning Theory)
🔹 मूल आधार
- अधिगम सामाजिक वातावरण में होता है।
- अनुकरण, मॉडलिंग एवं प्रेक्षण द्वारा सीखना।
🔹 प्रमुख प्रतिपादक
- सामाजिक अधिगम सिद्धान्त – अल्बर्ट बैंडुरा
🔹 मुख्य विशेषताएँ
- अवलोकन द्वारा अधिगम
- प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष पुनर्बलन
- आत्म-प्रभाविता (Self-efficacy)
🔶 IV. रचनावादी अधिगम सिद्धान्त (Constructivist Theories)
🔹 मूल आधार
- शिक्षार्थी स्वयं ज्ञान का निर्माण करता है।
- अधिगम सक्रिय, खोजपूर्ण एवं अनुभव आधारित।
🔹 प्रमुख विचारक
- जीन पियाजे
- जेरोम ब्रूनर
- लेव वाइगोत्स्की
🔹 मुख्य विशेषताएँ
- खोज अधिगम
- सामाजिक अंतःक्रिया
- पूर्व ज्ञान का उपयोग
3️⃣ अधिगम सिद्धान्तों का तुलनात्मक सार
| आधार | व्यवहारवादी | संज्ञानात्मक | सामाजिक | रचनावादी |
|---|---|---|---|---|
| केंद्र | बाह्य व्यवहार | मानसिक प्रक्रिया | समाज | शिक्षार्थी |
| विधि | अभ्यास, पुनर्बलन | अंतर्दृष्टि | अनुकरण | खोज |
| भूमिका | शिक्षक प्रमुख | शिक्षार्थी सक्रिय | मॉडल महत्त्वपूर्ण | शिक्षार्थी निर्माता |
4️⃣ CTET / TET में पूछे जाने योग्य बिंदु
- व्यवहारवादी सिद्धान्त S–R पर आधारित होते हैं।
- संज्ञानात्मक सिद्धान्त अंतर्दृष्टि एवं सोच पर बल देते हैं।
- बैंडुरा ने सामाजिक अधिगम में अनुकरण पर बल दिया।
- रचनावाद में शिक्षार्थी सक्रिय भूमिका निभाता है।
